किसानों के लिए सरकार की नई पहल
आलेख – डॉ. लेखा. एस. चक्रवर्ती, प्रोफेसर, एनआईपीएफपी
अनुवाद – डॉ. प्रवीन गौतम
नरेन्द्र मोदी सरकार की दूसरी पारी का शुभारंभ हो गया है। मंत्रीमंडल की पहली ही बैठक में सरकार ने कृषि क्षेत्र और किसानों के कल्याण पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया। सरकार ने इस दिशा में कई बड़े फैसले लिए, जिससे लाखों किसानों को फायदा पहुँचने की उम्मीद है। मंत्रीमंडल की बैठक में ‘प्रधानमंत्री किसान समृद्धि योजना’ का 145 मिलियन भारतीय किसानों तक विस्तार करने का फैसला लिया गया। इस योजना के तहत प्रत्येक किसान को 6000 रुपये सालाना अनुदान प्रदान किया जाएगा।
इसके अलावा, देशभर के एक करोड़ से अधिक किसानों को कम से कम 2000 रुपये की आय मुहैया कराने का निर्णय भी लिया गया। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि ‘छोटे और वंचित किसानों को निश्चित आय मुहैया कराने के लिए’, सरकार ‘प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान)’ की शुरुआत कर रही है। यह योजना, लोकसभा चुनाव 2019 से पहले उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में किसानों के लिए शुरू की गई योजना का विस्तार ही है। इस योजना पर सालाना 75 हज़ार करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है।
पीएम-किसान एक वित्तीय समावेशन कार्यक्रम है, क्योंकि इस योजना के तहत धन सीधा किसान के खाते में हस्तांतरित किया जाएगा। 2019-20 के अंतरिम बजट में इस योजना की घोषणा की गई थी। योजना के अंतर्गत 2 हेक्टेयर तक भूमि वाले करीब 120 मिलियन छोटे किसानों को सालाना 6000 रुपये की निश्चित आय मुहैया कराने का प्रावधान किया गया है। यह आय 2000 हज़ार रुपये की तीन किश्तों में सीधे किसान के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी। देश में मौजूद कृषि संकट से निपटने के लिए इस योजना को डिजाइन किया गया है।
छोटे और सीमांत किसान वर्तमान दौर में भी औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से काफी हद तक दूर हैं। यही वजह है कि किसानों की कर्ज़ माफी जैसी तमाम योजनाओं का लाभ किसानों को पर्याप्त संख्या में नहीं मिल पा पा रहा। भारत में किसानों की कर्ज़ माफी राज्य सरकारों की सार्वजनिक वित्त व्यवस्था को भी काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।
देश में खाद्यान्न, बागवानी, तेल बीज, कपास और गन्ने के भारी उत्पादन के बावजूद उनकी कम बिक्री की वजह से देश में कृषि क्षेत्र से जुड़ी तमाम समस्याएँ पैदा होती हैं। पीएम-किसान योजना कृषि संबंधी इन समस्याओं से निपटने में अहम भूमिका अदा करेगी।
हाल के कुछ वर्षों में योजनाओं के स्तर पर चर्चा का केन्द्र काफी हद तक बदल गया है। सरकारें अब निश्चित रोज़गार के बजाय निश्चित आय की बात कर रही हैं। निश्चित आय के ज़रिए छोटे और सीमांत किसानों सहित समाज के कमज़ोर वर्गों को सम्मान और सशक्तीकरण प्रदान किया जा सकता है। हालाँकि सच्चाई यह भी है कि कृषि क्षेत्र में ढांचागत स्तर पर मौजूद समस्याओं का समाधान निकालने की दिशा में यह कोई स्थायी समाधान नहीं है।
कृषि क्षेत्र में विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सकल पूंजी को बढ़ाने की आवश्यकता है। एक अनुमान के मुताबिक आगामी पाँच वर्षों में किसानों की आय को दोगुनी करने के लिए कृषि क्षेत्र को 14 से 15 फीसदी की दर से विकास करना होगा। सिंचाई प्रणाली में सुधार करना भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कृषि योग्य भूमि का एक बड़ा हिस्सा, अभी भी मानसून पर निर्भर है।
सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए मंत्रीमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय, और आवंटित बजट के बीच आने वाली बाधाओं और अंतर का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करे। कुछ देशों में, ऐसे कार्यक्रमों के लिए आवंटित बजट और वास्तविक खर्चों के बीच अंतर और बाधाओं का विश्लेषण करने के लिए मौद्रिक परिषद् जैसे संस्थान कार्यरत हैं।
अर्थशास्त्री इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि वर्तमान मौद्रिक स्थिति में पीएम-किसान योजना को सफलतापूर्वक लागू कर पाना कितना संभव है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट पेश करेंगी। इस बजट से पीएम-किसान योजना के लिए आवंटित वास्तविक बजट और इसके भविष्य का पता लग पाएगा। उम्मीद है कि आगामी बजट में कृषि क्षेत्र पर विशेष रूप से ज़ोर दिया जाएगा।
पीएम-किसान सम्मान योजना पूरी तरह से केन्द्र सरकार से वित्त पोषित है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस योजना को संघीय ढांचे के आधार पर डिजाइन किया जाएगा, जिसके अंतर्गत राज्य और केन्द्र सरकारें मिलकर इस योजना पर होने वाले खर्च को वहन करेंगे। मानव विकास को हासिल करने की दिशा में यह बड़ा कदम है, जिसने आर्थिक विकास के प्रतिमानों को बदल दिया है। कई अन्य राज्यों से भी उम्मीद है कि वे किसानों के कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को, अपने यहाँ लागू करें।
केवल आर्थिक विकास से मानव विकास सुनिश्चित नहीं किया जा सकता, इसलिए भारत के कमज़ोर किसानों की आजीविका संबंधी चिंताओं को दूर करने की दिशा में पीएम-किसान जैसी सार्वजनिक नीतियों ज़रूरी हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी के उस विचार को साकार करता है, जिसमें वह कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति छूट ना जाए। उनका यह विचार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के नारे में समाहित है। सरकार का यह कदम समाज के कमज़ोर वर्गों की गरिमा और सशक्तीकरण को सुनिश्चित करता है।
अनुवाद – डॉ. प्रवीन गौतम
नरेन्द्र मोदी सरकार की दूसरी पारी का शुभारंभ हो गया है। मंत्रीमंडल की पहली ही बैठक में सरकार ने कृषि क्षेत्र और किसानों के कल्याण पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया। सरकार ने इस दिशा में कई बड़े फैसले लिए, जिससे लाखों किसानों को फायदा पहुँचने की उम्मीद है। मंत्रीमंडल की बैठक में ‘प्रधानमंत्री किसान समृद्धि योजना’ का 145 मिलियन भारतीय किसानों तक विस्तार करने का फैसला लिया गया। इस योजना के तहत प्रत्येक किसान को 6000 रुपये सालाना अनुदान प्रदान किया जाएगा।
इसके अलावा, देशभर के एक करोड़ से अधिक किसानों को कम से कम 2000 रुपये की आय मुहैया कराने का निर्णय भी लिया गया। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि ‘छोटे और वंचित किसानों को निश्चित आय मुहैया कराने के लिए’, सरकार ‘प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान)’ की शुरुआत कर रही है। यह योजना, लोकसभा चुनाव 2019 से पहले उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में किसानों के लिए शुरू की गई योजना का विस्तार ही है। इस योजना पर सालाना 75 हज़ार करोड़ रुपये का खर्च आने का अनुमान है।
पीएम-किसान एक वित्तीय समावेशन कार्यक्रम है, क्योंकि इस योजना के तहत धन सीधा किसान के खाते में हस्तांतरित किया जाएगा। 2019-20 के अंतरिम बजट में इस योजना की घोषणा की गई थी। योजना के अंतर्गत 2 हेक्टेयर तक भूमि वाले करीब 120 मिलियन छोटे किसानों को सालाना 6000 रुपये की निश्चित आय मुहैया कराने का प्रावधान किया गया है। यह आय 2000 हज़ार रुपये की तीन किश्तों में सीधे किसान के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी। देश में मौजूद कृषि संकट से निपटने के लिए इस योजना को डिजाइन किया गया है।
छोटे और सीमांत किसान वर्तमान दौर में भी औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से काफी हद तक दूर हैं। यही वजह है कि किसानों की कर्ज़ माफी जैसी तमाम योजनाओं का लाभ किसानों को पर्याप्त संख्या में नहीं मिल पा पा रहा। भारत में किसानों की कर्ज़ माफी राज्य सरकारों की सार्वजनिक वित्त व्यवस्था को भी काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।
देश में खाद्यान्न, बागवानी, तेल बीज, कपास और गन्ने के भारी उत्पादन के बावजूद उनकी कम बिक्री की वजह से देश में कृषि क्षेत्र से जुड़ी तमाम समस्याएँ पैदा होती हैं। पीएम-किसान योजना कृषि संबंधी इन समस्याओं से निपटने में अहम भूमिका अदा करेगी।
हाल के कुछ वर्षों में योजनाओं के स्तर पर चर्चा का केन्द्र काफी हद तक बदल गया है। सरकारें अब निश्चित रोज़गार के बजाय निश्चित आय की बात कर रही हैं। निश्चित आय के ज़रिए छोटे और सीमांत किसानों सहित समाज के कमज़ोर वर्गों को सम्मान और सशक्तीकरण प्रदान किया जा सकता है। हालाँकि सच्चाई यह भी है कि कृषि क्षेत्र में ढांचागत स्तर पर मौजूद समस्याओं का समाधान निकालने की दिशा में यह कोई स्थायी समाधान नहीं है।
कृषि क्षेत्र में विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सकल पूंजी को बढ़ाने की आवश्यकता है। एक अनुमान के मुताबिक आगामी पाँच वर्षों में किसानों की आय को दोगुनी करने के लिए कृषि क्षेत्र को 14 से 15 फीसदी की दर से विकास करना होगा। सिंचाई प्रणाली में सुधार करना भी काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कृषि योग्य भूमि का एक बड़ा हिस्सा, अभी भी मानसून पर निर्भर है।
सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह कार्यक्रम को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए मंत्रीमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय, और आवंटित बजट के बीच आने वाली बाधाओं और अंतर का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करे। कुछ देशों में, ऐसे कार्यक्रमों के लिए आवंटित बजट और वास्तविक खर्चों के बीच अंतर और बाधाओं का विश्लेषण करने के लिए मौद्रिक परिषद् जैसे संस्थान कार्यरत हैं।
अर्थशास्त्री इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि वर्तमान मौद्रिक स्थिति में पीएम-किसान योजना को सफलतापूर्वक लागू कर पाना कितना संभव है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट पेश करेंगी। इस बजट से पीएम-किसान योजना के लिए आवंटित वास्तविक बजट और इसके भविष्य का पता लग पाएगा। उम्मीद है कि आगामी बजट में कृषि क्षेत्र पर विशेष रूप से ज़ोर दिया जाएगा।
पीएम-किसान सम्मान योजना पूरी तरह से केन्द्र सरकार से वित्त पोषित है। उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इस योजना को संघीय ढांचे के आधार पर डिजाइन किया जाएगा, जिसके अंतर्गत राज्य और केन्द्र सरकारें मिलकर इस योजना पर होने वाले खर्च को वहन करेंगे। मानव विकास को हासिल करने की दिशा में यह बड़ा कदम है, जिसने आर्थिक विकास के प्रतिमानों को बदल दिया है। कई अन्य राज्यों से भी उम्मीद है कि वे किसानों के कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को, अपने यहाँ लागू करें।
केवल आर्थिक विकास से मानव विकास सुनिश्चित नहीं किया जा सकता, इसलिए भारत के कमज़ोर किसानों की आजीविका संबंधी चिंताओं को दूर करने की दिशा में पीएम-किसान जैसी सार्वजनिक नीतियों ज़रूरी हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी के उस विचार को साकार करता है, जिसमें वह कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति छूट ना जाए। उनका यह विचार सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास के नारे में समाहित है। सरकार का यह कदम समाज के कमज़ोर वर्गों की गरिमा और सशक्तीकरण को सुनिश्चित करता है।
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