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Showing posts from November, 2019

जनरल बाजवा के सेवा विस्तार पर विवाद

एक असामान्य घटनाक्रम में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा 19 अगस्त को सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा को 3 साल के लिए एक और विस्तार देने के लिए जारी सारांश को निलंबित कर दिया। 59 वर्षीय जनरल अपने पहले कार्यकाल में 28 वें मध्यरात्रि को सेना के प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त होने वाले थे, लेकिन इस आशय के संसद के कानून को पारित करने के आश्वासन पर उन्हें सुप्रीम कोर्ट से 6 महीने की सशर्त छूट मिल गई। इस मुद्दे पर देश में एक अस्थिर बहस और सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई हुई। मुख्य न्यायाधीश आसिफ सईद खोसा की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की 3-जजों की बेंच ने कानूनी और प्रशासनिक आधार पर यह फैसला सुनाया। पीठ ने पूरी प्रक्रिया को "अपसाइड डाउन" पाया, जिससे प्रधानमंत्री इमरान खान और राष्ट्रपति आरिफ अल्वी दोनों को भारी शर्मिंदगी उठानी पड़ी। अदालत ने कहा कि प्रस्ताव को कैबिनेट से पहले मंजूरी मिलनी चाहिए थी। इसके बाद ही प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति इस पर कार्य कर सकते थे। जैसा कि मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि 25 में से केवल 11 मंत्रियों ने प्रस्ताव क...

अंतरिक्ष में भारत की 'तीव्रतम दृष्टि'

भारत ने बुधवार को पूर्वी तट पर स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 'अंतरिक्ष में सबसे तेज' आंख का प्रक्षेपण किया। अपनी 49 वीं उड़ान में इसरो के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी 47 पर सवारी करते हुए, भारत की तीसरी पीढ़ी के उन्नत पृथ्वी इमेजिंग और मैपिंग उपग्रह कार्टोसैट -3 को प्रक्षेपण के 17 मिनट बाद ही सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा में ले जाया गया। कार्टोसैट -3 इसरो द्वारा प्रयोग में लाया जाने वाला उच्चतम रिज़ॉल्यूशन असैनिक उपग्रह है। लॉन्च के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला PSLV-C47 पीएसएलवी श्रेणी का सबसे शक्तिशाली संस्करण था, जिसमें छह स्ट्रैप-ऑन बूस्टर का इस्तेमाल किया गया था। रॉकेट ने अंतरिक्ष के न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) के साथ भारत के अंतरिक्ष विभाग की व्यावसायिक व्यवस्था के हिस्से के रूप में दो अमेरिकी ग्राहकों के 13 नैनोसेटलाइट्स भी ले गए। कार्टोसैट -3 को 509 किलोमीटर की अपनी नियोजित कक्षा में सम्मिलित करने के बाद नैनोसैटेलाइट को क्रमिक रूप से छोड़ा गया। अब तक, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, इसरो ने मई 2005 से आठ कार्टोसैट छोड़े हैं - कार्टोसैट -2 श्र...

 ब्रिटेन में आकस्मिक चुनाव: एक समीक्षा

अपनी ब्रेक्ज़िट योजना को पूरी करने के लिए संसदीय बहुमत हासिल करने के उद्देश्य से ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने 12 दिसंबर को समय से पहले चुनावों की घोषणा की। पाँच वर्षों में चौथी बार चुनाव हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये फ़ैसला ब्रिटेन को उस राजनीतिक गतिरोध से निकालने का रास्ता था जिसका सामना ये 2016 में ब्रेक्ज़िट जनमत संग्रह के बाद से कर रहा था। पिछला आकस्मिक चुनाव 2017 में तत्कालीन प्रधानमंत्री थेरेसा मे द्वारा करवाया गया था। इसकी वजह से सत्ता में रहने के लिए डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी के सहयोग से ब्रितानी संसद में रहने के लिए कंज़र्वेटिव पार्टी को मिला बहुमत चला गया था। अब जब आम चुनाव प्रचार तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर गया है, मतों के रुझान दर्शाते हैं कि कंज़र्वेटिव सदस्यों को लेबर पार्टी से 19 अंक अधिक मिल रहे हैं। वर्तमान समय में कंज़र्वेटिव दल के सदस्यों को 47 प्रतिशत अंक मिल रहे हैं, लेबर को 28 प्रतिशत, लिबरल डेमोक्रेट्स को 12 प्रतिशत अंक मिलते लग रहे हैं और ब्रेक्ज़िट पार्टी तीन प्रतिशत पर सिमटती प्रतीत हो रही है। अगर प्रमुख दलों के चुनाव घोषणापत्रों के मुख्य ...

सीपीईसी पर अमरीका ने पाकिस्तान को आगाह किया

2013 में चीन की बेल्ट तथा रोड पहल (बीआरआई) की शुरुआत विशेष रुप से चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (सीपीईसी) ने भारत में चिन्ताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि यह गलियारा इस क्षेत्र में एक नियम आधारित व्यवस्था पर चिन्ताओं को बढ़ाने के अलावा भारत की सम्प्रभुता का उल्लंघन भी करता है। एक सिद्धान्तपरक तथा दृढ़ रवैया अपनाते हुए भारत ने सीपीईसी का विरोध किया है। सच्चाई यह है कि बीआरआई का विरोध करने वाला यह पहला और एकमात्र देश है। ग़ौरतलब है कि पूर्व में भारत ने चीन में आयोजित दो बेल्ट तथा रोड मंचों पर किसी प्रकार का कोई प्रतिनिधित्व नहीं भेजा है। 2013 से ही बीआरआई के मुद्दे पर भारत का रवैया एक ही तरह का रहा है। बीआरआई-फ़्लैगशिप कॉरिडोर-सीपीईसी के विरुद्ध यह अपना संदेह व्यक्त करता रहा है, क्योंकि यह पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) से होकर गुज़रता है। आधिकारिक रुप से भारत का कहना है कि “तथाकथित सीपीईसी का समावेशन सम्प्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के मुद्दे पर भारत की चिन्ताओं को दर्शाता है।” न केवल भारत बल्कि कई अन्य देश भी बीआरआई विशेषकर सीपीईसी को लेकर असहमति जता चुके हैं। वाशिंगटन डीसी आधारित शोधार्थियों के लि...

जी- 20 के विदेश मंत्रियों ने जापान में मुलाकात की

जी-20, समूह दुनिया की शीर्ष 20 विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का मंच है। 19 सदस्य देश और यूरोपीय संघ इसमें शामिल हैं। इस साल जून के अंत में ओसाका में 14 वीं शिखर बैठक आयोजित की गयी थी और उसी मुहिम को आगे बढाते हुए जापान ने विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी नागोया शहर में की। भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने किया। विदेश मंत्रियों की बैठक के सत्र के दौरान मंत्रियों ने वर्तमान अंतर्राष्ट्रीय स्थिति और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के रुझान पर विचार-विमर्श किया। बैठक के बाद, जापान के विदेश मंत्री और जी -20 समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक के अध्यक्ष तोशमित्सु मोतेगी ने बताया कि जी -20 के विदेश मंत्रियों ने कई मौजूदा मुद्दों के समाधान के लिए विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की थी। सदस्य देश यह भी चाहते हैं कि संगठन अपने विवाद निपटान तंत्र में सुधार करे और इसे लेकर ओसाका में राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन के दौरान भी विचार-विमर्श किया गया था। श्री मोतेगी ने यह भी कहा कि भारत सहित सभी 16 सदस्य देशों ने प्रस्तावित एशिया ...

‘मन की बात’ (कड़ी संख्या – 6)

मेरे प्यारे देशवासियो, ‘मन की बात’ में आप सबका स्वागत है | आज मन की बात की शुरुआत, युवा देश के, युवा, वो गर्म जोशी, वो देशभक्ति, वो सेवा के रंग में रंगे नौजवान, आप जानते हैं ना | नवम्बर महीने का चौथा रविवार हर साल NCC Day के रूप में मनाया जाता है | आमतौर पर हमारी युवा पीढ़ी को Friendship Day बराबर याद रहता है | लेकिन बहुत लोग हैं जिनको NCC Day भी उतना ही याद रहता है | तो चलिए आज NCC के बारे में बातें हो जाए | मुझे भी कुछ यादें ताजा करने का अवसर मिल जाएगा | सबसे पहले तो NCC के सभी पूर्व और मौजूदा Cadet को NCC Day की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ | क्योंकि मैं भी आप ही की तरह Cadet रहा हूँ और मन से भी, आज भी अपने आपको Cadet मानता हूँ | यह तो हम सबको पता ही है NCC यानी National Cadet Corps | दुनिया के सबसे बड़े uniformed youth organizations में भारत की NCC एक है | यह एक Tri-Services Organization है जिसमें सेना, नौ-सेना, वायुसेना तीनों ही शामिल हैं | Leadership, देशभक्ति, selfless service, discipline, hard-work इन सबको अपने character का हिस्सा बना लें, अपनी habits बनाने की एक रोमांचक यात्...

संसद में इस सप्ताह

संसद का शीतकालीन सत्र ऊपरी सदन, राज्य सभा के 250वें सत्र के साथ सोमवार से शुरू हुआ। तीन सप्ताह तक चलने वाले सत्र का ये प्रमुख आकर्षण है। इस अवसर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नेरेन्द्र मोदी ने सांसदों से कहा कि उन्हें राष्ट्रीय मुद्दों और क्षेत्रीय हितों के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए और जन हित के बीच संतुलन बनाए रखना चाहिए और जनहित के मुद्दों के सामने आने वाली बाधाओं पर बात करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संतुलन और निगरानी के लिए ऊपरी सदन की मौजूदगी बहुत जरूरी है। लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि निगरानी और अवरोध के बीच का फ़र्क भी समझा जाना चाहिए। श्री मोदी ने याद दिलाया कि वरिष्ठों के सदन में भारत की अनेकता में एकता की भावना बहुत सुंदर तरीके से परिलक्षित होती है।  भारतीय राजनीति में सदन की भूमिका और सुधारों की ज़रूरत के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान के संस्थापकों ने द्विसदन विधायी संरचना की परिकल्पना की थी और इस ने देश के लोकतंत्र को संपन्न किया है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा ने उन लोगों को देश और इसके विकास में योगदान करने का अवसर प्रदान किया है जो चुना...

पाकिस्तान के ग़ैर जरूरी मुद्दे

पिछले एक माह से बहुत सी समस्याओं से घिरे पाकिस्तान में ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिन की वजह से राजनीति बहुत रूचिकर हो गई है। पूरे महीने पाकिस्तान का राजनीतिक सर्कस मौलाना फ़जलुर रहमान के आज़ादी मार्च और इस बहस के इर्द-गिर्द घूमता रहा कि तीन बार प्रधानमंत्री रहे बीमार नेता को उपचार के लिए विदेश भेजा जाए या नहीं। पाकिस्तान के भविष्य की चिंता करने की बजाय इसके टी वी चैनलों के प्रमुख घंटों और प्रिंट मीडिया के प्रमुख पृष्ठों पर इन्ही विषयों के बारे में अनुपयुक्त बहस होती रही। फ़जलुर के मार्च या रैली ने मीडिया का खूब ध्यान खींचा क्योंकि ये 27 अक्टूबर को सुक्कुर से शुरू होकर कुछ दिन बाद इस्लामाबाद पहुँची। मौलाना के अनुसार इस रैली का मुख्य उद्देश्य इमरान ख़ान की सरकार गिराना था जिस के बिना उनके आदमी इस्लामाबाद से नहीं जाने वाले थे। हाथों में छड़ी लिए उनके दल के सदस्यों के वीडियो वायरल हुए थे जिस की वजह से बहुत से समीक्षकों ने अनुमान लगाया था कि इसके हिंसक परिणाम सरकार को हिला सकते हैं। कुछ दिन बाद सरकार द्वारा एक तरफ़ अडियल रवैया और दूसरी तरफ़ घबराहट दर्शाने के बाद फ़जलुर और कुछ विपक्षी नेताओं के सा...

कालापानी मुद्दा

भारत के उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ जिले के हिमालयी क्षेत्र में भारत, नेपाल और चीन के त्रिकोणीय जंक्शन पर कालापानी क्षेत्र के नियंत्रण को लेकर विवाद ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है। इससे पहले, भारत ने जम्मू और कश्मीर राज्य के स्थान पर दो नए केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद एक संशोधित नक्शा जारी किया। नेपाल का दावा है कि नक्शे में भारतीय क्षेत्र के रूप में दिखाया गया कालापानी और उसके आस-पास के क्षेत्र का हिस्सा उसका है। कालापानी विवाद नेपाल के राजा और तत्कालीन ब्रिटिश भारत के बीच 1816 की ऐतिहासिक सगौली संधि से जुड़ा है। संधि के अनुसार महाकाली नदी को दोनों देशों के बीच की सीमा बताया गया है लेकिन उसमे इसकी उत्पत्ति के स्थान को इंगित नही किया गया और बिना ये बताये कि इसकी कौन सी सहायक नदी मुख्य रूप से महाकाली नदी थी। लेकिन बाद में ब्रिटिश भारत के सर्वेयर जनरल ने जो प्रादेशिक मानचित्रों जारी किए उनमें कालापानी, लिपु लेख और लिंपियाधुरा क्षेत्रों को भारतीय क्षेत्र के रूप में स्पष्ट रूप से दर्शाया गया जबकि नेपाल इन क्षेत्रों पर संप्रभुता का दावा करता रहा है जो महाकाली नदी के मूल को वि...

भारतीय विदेश मंत्री ने सम्बंधो को मजबूत करने के लिए श्रीलंका का दौरा किया

भारतीय विदेश मामलों के मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने नवनियुक्त सातवें कार्यकारी श्रीलंकाई राष्ट्रपति, गोठाभय राजपक्ष के साथ मुलाकात करने के लिए कोलंबो गए थे। श्री जयशंकर उन्हें प्रधानमंत्री की ओर से भारत आने के निमंत्रण दिया। नव निर्वाचित राष्ट्रपति ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है और वें 29 नवंबर 2019 को भारत आयेंगे। यह उनकी पहली आधिकारिक विदेश यात्रा होगी। श्री राजपक्ष से मिलने के लिए विदेश मंत्री को भेजकर, भारत ने जल्द ही ये जता दिया है भारत वहां की नई सरकार के साथ काम करने और आपसी फायदे के लिए द्विपक्षीय सम्बंधों को मजबूत करना चाहता है। भारत के साथ ही अमेरिका, पाकिस्तान, ईरान और चीन ने भी श्री गोठाभय राजपक्ष को बधाई दी थी। चुनाव परिणामों के लेकर यूरोपीय संघ सतर्क था और उसने नव-निर्वाचित राष्ट्रपति से द्वीप-राष्ट्र की मानवाधिकार प्रतिबद्धताओं का सम्मान करने का आग्रह किया है। गोठबया राजपक्ष की निर्णायक जीत आने वालें समय में देश की संसद में भी श्रीलंका पोडुजना पेरुमुना (SLPP) की ताकत को बढायेगी। श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति और गोठाभय राजपक्ष के भाई महिंदा राजपक्ष प्रधानमंत्री पद की शपथ ...

राज्यसभा का 250वाँ सत्र

भारतीय संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा के 250वाँ सत्र के अवसर पर भारतीय लोकतांत्रिक राजनीति में इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका को याद किया जाना चाहिए। 1952 में इसकी अवधारणा से लेकर अब तक राष्ट्र हित में लगातार इस सदन का योगदान रहा है। 1952 में हिंदू विवाह और विवाह-विच्छेद विधेयक से लेकर 2019 में मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक, जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 तक राज्य सभा ने भारत के राजनीतिक इतिहास में एक लंबा, शालीन और प्रभावशाली प्रभाव छोड़ा है जो अमिट है।  उपराष्ट्रपति एम. वैंकेया नायडू और राज्यसभा के अध्यक्ष ने सही कहा कि ऊपरी सदन हमेशा समय-समय पर देश की ज़रूरतों को पूरी करता रहा है और इसने चुनौतियाँ का सामना भी किया है। उप-राष्ट्रपति ने कहा कि अभी भी हमें सदन की सक्रियता और अवसरों को ध्यान में रखते हुए बेकार होने वाले समय का सदुपयोग करते हुए अपनी पूरी संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए काफ़ी लंबा सफ़र तय करना है।  13 मई 1952 में इसकी पहली बैठक से लेकर 7 अगस्त 2019 में इसके 249वें सत्र तक ऊपरी सदन ने कुल पाँच हज़ार चार सौ छियासठ बैठकें कीं। इस अवधि के दौरान सदन ने ...

भारत-भूटान के सम्बन्धों की विकास यात्रा निर्धारित

भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपों (डॉ॰) तंदी दोरजी की सप्ताह व्यापी भारत यात्रा द्विपक्षीय सम्बन्धों के लिए एक नया मानदंड तय करती है | इस यात्रा के दौरान, डॉ॰ दोरजी ने भारत के विदेश मंत्री डॉ॰ एस॰ जयशंकर के साथ द्विपक्षीय चर्चाएं कीं तथा भारत-भूटान के सम्बन्धों पर विस्तार से समीक्षा की | दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग, विकास साझेदारी तथा पनबिजली सहयोग समेत द्विपक्षीय सम्बन्धों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चाएं कीं | अपने भारतीय प्रतिपक्ष के साथ बैठक से पहले, डॉ॰ दोरजी ने भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले के साथ भी मुलाक़ात की | दिल्ली की यात्रा के बाद, भूटानी विदेश मंत्री बिहार के बौद्धगया तथा राजगीर का दौरा करेंगे | यहाँ की यात्रा के बाद पदाधिकारी कोलकाता जाएंगे, जहां उनकी पश्चिम बंगाल के गवर्नर तथा तथा मुख्यमंत्री के साथ बैठक होने की आशा की जा रही है | ल्योंपों तंदी दोरजी की यात्रा तथा दोनों देशों के बीच के उच्चतम स्तरीय के विचारों के आदान-प्रदान संबंधी नियमित यात्राओं की परंपरा के अनुरूप थी | प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग ने द्रुक न्यामरूप शोग्पा (डीएनटी) का नेतृत्व किया, इसी दौरान यह यात्रा हुई ...

गोटबाया राजपक्षे श्रीलंका के सातवें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए

शनिवार को श्रीलंका में राष्ट्रपति चुनावों का आयोजन किया गया था | 52॰25 प्रतिशत मत प्राप्त करने के पश्चात, श्री श्रीलंका पोदूजना पेरमुना (एसएसपीपी) के श्री गोटबाया राजपक्षे देश के सातवें कार्यकारी राष्ट्रपति के रूप में निर्वाचित हुए | उन्होंने घोषणा की थी कि वे श्रीलंका के अनुराधापुरा शहर में कार्यालय का शपथ ग्रहण करेंगे | उनकी जीत पर भारत के प्रधानमंत्री समेत विश्व के नेताओं ने गोटबाया राजपक्षे को बधाई दी है | श्री गोटबाया राजपक्षे को भेजे अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत तथा श्रीलंका के बीच के सम्बन्धों को गहरा बनाने के लिए श्रीलंका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति के साथ निकटता के साथ काम करने के प्रति अपनी वचनबद्धता व्यक्त की | भारत की जनता तथा अपनी ओर से शुभकामना व्यक्त करते हुए, प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री राजपक्षे के नेतृत्व में श्रीलंका की जनता शांति, समृद्धि और भाईचारे के साथ प्रगति करेगी | उन्होंने संदेश में आगे कहा कि भारत तथा श्रीलंका के बीच के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध और सशक्त होंगे | श्रीलंका की आगामी सरकार के साथ काम करने की भारत की वचनब...

संसद के शीत कालीन सत्र के मुद्दे

भारतीय संसद का शीतकालीन सत्र 18 नवंबर से शुरू होगा और 13 दिसंबर तक चलेगा। इस दौरान बहुत से विधेयक पेश किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त दो महत्वपूर्ण अध्यादेशों को सत्र के दौरान क़ानून का रूप भी दिया जाएगा। आगामी सत्र तीन प्रमुख कारणों की वजह से महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय हित के महत्वपूर्ण मुद्दों पर राजनीतिक आम सहमति उत्पादकता और नीति को आगे बढाने की वजह से ये सत्र अहम है।  संसद का शीतकालीन सत्र हलचल भरा रहेगा क्योंकि विपक्ष बहुत से सामाजिक – राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर केन्द्र को घेरने की तैयारी कर सकता है। पिछले दो सालों में शीतकालीन सत्र 21 नवंबर से शूरू होकर जनवरी के पहले सप्ताह में समाप्त हुआ।  इस वर्ष पिछला मानसून सत्र तीन तलाक, मोटर वाहन विधेयक और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी एक्ट में संशोधन के चलते चर्चित रहा वहीं अनुच्छेद 370 और जम्मू और कश्मीर पहचान एक्ट हटाया जाना सत्र की विशेषता रही। इसकी वजह से जम्मू और कश्मीर राष्ट्रीय मुख्यधारा से नहीं जुड़ पा रहा था। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के कार्याकाल में अपनी पहली पारी के दौरान 8 जनवरी, 2019 को नागरिकता संशोधन बिल पेश किया ...