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Showing posts from September, 2019

पाकिस्तान को नफ़रत भरे भाषण पर भी नहीं मिला किसी का साथ

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र महासभा की 74वीं बैठक में अंतर्राष्ट्रीयकरण करने का कोई लाभ नहीं मिला है। उन्होंने भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर में लोगों के साथ बुरे बर्ताव को लेकर खूब प्रलाप किया। लेकिन आमसभा ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भाषण को ज़रा भी तवज्जो नहीं दी। उसके बाद इमरान खान ने युद्ध का मुद्दा उठा दिया। यहाँ तक कि उन्होंने परमाणु शब्द का भी इस्तेमाल अपने यूएन भाषण में किया। दुनिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए पाकिस्तानी नेतृत्व की अब यही रवायत बन गई है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को अमरीकी प्रशासन से भी कोई मदद नहीं मिली। यहाँ तक कि अमरीकी विदेश विभाग ने इमरान ख़ान की क्योंकि उन्होंने जिस तरह से कश्मीरी लोगों के हालात का ज़िक्र किया उस तरह वो ऊईघर मसले पर कुछ नहीं बोले। दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमरीकी सहायक सचिव एलिस वेल्स ने कहा कि कश्मीर पर श्री ख़ान की टिप्पणी से कोई मदद नहीं मिलने वाली। उन्होंने कहा कि अत्यधिक बयानबाजी ख़ासकर दो परमाणु शक्तियों के बीच में कमी का स्वागत किया जाएगा। सुश्री वेल्स ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ...

‘मन की बात’ (कड़ी – 4)

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | साथियो, आज की ‘मन की बात’ में, देश की उस महान शख्सियत, मैं, उनकी भी बात करूँगा | हम सभी हिन्दुस्तानवासियों के दिल में, उनके प्रति बहुत सम्मान है, बहुत लगाव है | शायद ही, हिन्दुस्तान का कोई नागरिक होगा, जो, उनके प्रति आदर ना रखता हो, सम्मान ना करता हो | वो उम्र में हम सभी से बहुत बड़ी हैं, और देश के अलग-अलग पड़ावों, अलग-अलग दौर की, वो साक्षी हैं | हम उन्हें दीदी कहते हैं – ‘लता दीदी’ | वो, इस 28 सितम्बर को 90 वर्ष की हो रही हैं | विदेश यात्रा पर निकलने से पहले, मुझे, दीदी से फ़ोन पर बात करने का सौभाग्य मिला था | ये बातचीत वैसे ही थी, जैसे, बहुत दुलार में, छोटा भाई, अपनी बड़ी बहन से बात करता है | मैं, इस तरह के व्यक्तिगत संवाद के बारे में, कभी बताता नहीं, लेकिन आज चाहता हूँ, कि, आप भी, लता दीदी की बातें सुनें, उस बातचीत को सुनें | सुनिये, कि कैसे, आयु के इस पड़ाव में भी लता दीदी, देश से जुड़ी तमाम बातों के लिये उत्सुक हैं, तत्पर हैं, और जीवन का संतोष भी, भारत की प्रगति में है, बदलते हुई भारत में है, नई ऊंचाईयों को छू रहे भारत में है | मोदी जी : लता दीदी, ...

74वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा को प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन

भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की आमसभा को 'गरीबी उन्मूलन, समावेश और जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध कार्रवाई के लिए प्रभावी अंतर्राष्ट्रीय सहयोग' विषय पर संबोधित किया। चार साल पहले, 25 सितंबर 2015 को, प्रधान मंत्री ने सतत विकास पर 'एजेंडा 2030' को अपनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा के विशेष शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं को संबोधित किया था।  अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत की सफलता को एजेंडा 2030 के सफल कार्यान्वयन में एक प्रमुख अस्त्र के रूप में पेश किया गया था, जिसमें गरीबी उन्मूलन के अपने अति-उत्साही लक्ष्य भी सम्मिलित किये थे।  प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन ने इस संबंध में पर्याप्त साक्ष्य पेश किए।  कई निर्वाहकों का विस्तार किया, जिनका गरीबी उन्मूलन और समावेशन दोनों पर प्रभाव रहा और उन्होंने दुनिया को "एक नई आशा" दी।  इनमें दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन योजना, जनधन योजना पहल शामिल है जिसने भारत की गरीब आबादी को सशक्त बनाने के लिए 5 वर्षों में 370 मिल...

आतंकवाद पर भारत ने फ़िनलैंड को अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया

भारत के विदेश मंत्री, डॉ. एस जयशंकर तीन दिवसीय फिनलैंड की यात्रा पर गए थे। पद संभालने के बाद नॉर्डिक देश की यह उनकी पहली यात्रा है; हालांकि 1950 के दशक के बाद से उच्च स्तर की यात्राएं पारंपरिक रूप से दोनों देशों के जीवंत संबंधों की एक विशेषता रही हैं। द्विपक्षीय संबंधों, जो पहले से ही गर्म और सौहार्दपूर्ण हैं, पर ध्यान केंद्रित करने से अधिक, यह यात्रा इस तथ्य से महत्व रखती है कि फिनलैंड यूरोपीय संघ का वर्तमान केंद्रबिंदु है और भारत आतंकवाद की निंदा करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समर्थन हासिल करना चाहता है जो कि लगातार बढ़ रहा है। डॉ. जयशंकर ने फिनलैंड के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीमा पार आतंकवाद पर विस्तृत चर्चा की। भारत द्वारा जम्मू और कश्मीर से संबंधित धारा 370 को निरस्त करने के बाद कश्मीर पर मनगढ़ंत कहानियां गढ़ने के पाकिस्तान के प्रयास पर भी चर्चा हुई। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक स्पेक्ट्रम पर हेलसिंकी में फिनलैंड के प्रधानमंत्री एंटनी रिनेने और अपने समकक्ष पेक्का हाविस्तो के साथ बातचीत की। हरित प्रौद्योगिकियों पर विशेष ध्यान देने के साथ साथ द्विपक्षीय संबंधों की भी समीक्षा ...

कैरिबियाई तथापैसिफिक देशों के साथ भारत के संबंधो का नवीनीकरण

कैरेबियाई देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक और मधुर संबंधों में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अवसर पर एक नया जोश दिखाई दिया जब देशों के कॅरिकोम समूह अर्थात कैरिबियाई समुदाय देशों के 14 नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले। श्री लुइस चेन्सेट, सेंट लूसिया के प्रधान मंत्री और CARICOM के वर्तमान अध्यक्ष ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक में एंटीगा और बारबुडा, बारबाडोस, डोमिनिका, जमैका, सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, त्रिनिदाद और टोबैगो के राष्ट्राध्यक्षों, सूरीनाम के उपराष्ट्रपति और बहामास, बेलीज, ग्रेनाडा, हैती और गुयाना के राष्ट्राध्यक्षों ने भी भाग लिया। यह क्षेत्रीय आधार पर CARICOM नेताओं के साथ प्रधान मंत्री मोदी की पहली बैठक थी और भारत तथा कैरेबियाई देशों के सहयोगी देशों के बीच लगातार गहराते गहन संबंधों का पता चलता है। भारत CARICOM के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। एक मिलियन से अधिक प्रवासी भारतीयों की उपस्थिति कैरेबियाई देशों के साथ दोस्ती का एक जीवंत और स्थायी प्रमाण है। राजनीतिक और संस्थागत ...

भारत-अमेरिका द्विपक्षीय बैठक

कूटनीति का बेहतर इस्तेमाल करने वालों की बात करें तो दुनिया भर में आज दूसरा कोई ऐसा नेता नहीं है जिसकी तुलना भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से की जा सकती हो। वे जहां भी जाते हैं, वहां के नेताओं, सांसदों और लोगों को प्रभावित कर देते है और उन्हें भारत का करीबी सहयोगी बना लेते हैं। पूरे विश्व ने हाल ही में संपन्न ह्यूस्टन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री की यह क्षमता देखी। श्री मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ओवल कार्यालय संभाल लेने के बाद उनसे छह बार मुलाकात कर चुके हैं और भारत-अमेरिका सम्बंधों के लिए यह अपने आप में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड है। श्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच ताजा बातचीत सोमवार को न्यूयॉर्क में हुई, जहां दोनों नेता संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक में भाग लेने के लिए गए थे। बहुपक्षीय कूटनीतिक मामलों की सबसे बड़ी जगह पर हुई भारत-अमेरिका द्विपक्षीय बैठक ने वैश्विक ध्यान अपनी ओर खींचा। यह दोनों नेताओं के बीच अपेक्षाकृत एक छोटी बैठक थी, लेकिन इसके कई प्रमुख मायने रहें। श्री मोदी और श्री ट्रम्प के बीच उल्लेखनीय तालमेल स्पष्ट रूप से देखने को मिला जबकि एक दिन पहल...

संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि जलवायु परिवर्तन वास्तविक चुनौती है

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता 16 वर्षीय ग्रेटा थनबर्ग की रोते हुए की गई अपील ने विश्व नेताओं के विवेक को हिला दिया। उन्होने दुनिया के नेताओं से चुनौती भरे अंदाज में कहा कि आने वाली सभी पीढ़ियों की नजर आप पर है, यदि आप हमारा साथ नहीं देंगे तो मैं कहती हूं कि हम आपको कभी माफ नहीं करेंगे। मानव अस्तित्व के लिए जलवायु परिवर्तन आज सबसे बड़ा खतरा है। जलवायु तंत्र में असंतुलित परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी होगा। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के नेताओं से कहा, " क्‍लाइमेट चेंज को लेकर दुनियाभर में अनेक प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन हमें ये बात स्‍वीकारनी होगी कि इस गम्‍भीर चुनौती का मुकाबला करने के लिए उतना नहीं किया जा रहा है जितना कि होना बहुत अनिवार्य है। उन्होंने कहा आज जरुरत है बिहेवियर चेंज के लिए एक विश्‍व व्‍यापी जन-आंदोलन खड़ा करने की। श्री मोदी ने शिखर सम्मेलन में कहा कि भारत का मार्गदर्शक सिद्धांत "आवश्यकता" है, "लालच" नहीं। उन्होंने कहा, भारत इस मुद्दे की गंभीरता को लेकर केवल बात...

हाउडी मोदी- एक अभूतपूर्व आयोजन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शानदार जोश के साथ अमरीका यात्रा आरम्भ की। ह्यूस्टन, टेक्सस में हाउडी मोदी का अत्यंत सफल आयोजन किया गया जहाँ उन्होंने राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के साथ मंच साझा करते हुए पचास हज़ार से अधिक भारतीय-अमरीकियों के जन-समूह को संबोधित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इससे पहले भी अमरीका में दो बार, 2014 में न्यूयॉर्क में मेडिसन चौक उद्यान में और 2015 में सेन जोस में भारतीय-अमरीकियों के जन-समूह को संबोधित किया था लेकिन राष्ट्रपति ट्रम्प की उपस्थिति से ह्यूस्टन आयोजन और भी शानदार हो गया। बहुत से अमरीकी सांसदों, वरिष्ठ डेमोक्रेट और सभासदों तथा सांसद स्टेनी होयेर की उपस्थिति से भारत-अमरीका साझेदारी के लिए द्विदलीय सहयोग उजागर हुआ। राष्ट्रपति ट्रम्प का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दो सबसे बड़े जीवंत लोकतंत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले आयोजन में उनकी उपस्थिति के लिए गर्मजोशी से उनका आभार भी व्यक्त किया। उन्हें अपना मित्र, भारत का मित्र और एक महान अमरीकी राष्ट्रपति कहते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति के नेतृत्व और अमरीका को फिर से महान बनाने के उनके संकल्प की सरा...

मंगोलिया के राष्ट्रपति के भारत दौरे से सम्बन्धों में आई मजबूती

मंगोलिया के राष्ट्रपति खाल्‍तमागिन बाटुलगा इस समय भारत की राजकीय यात्रा पर है। वह भारतीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद के निमंत्रण पर भारत आए हैं। यह बीते लगभग एक दशक बाद किसी मंगोलियाई राष्ट्रपति का भारत दौरा है। मंगोलिया के राष्ट्रपति के साथ एक शिष्टमंडल भी भारत आया है जिसमें सरकारी अधिकारियों के अलावा अग्रणी व्यवसायी शामिल हैं।  आगंतुक राष्ट्रपति बटुलगा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ मुलाकात में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। मंगोलियाई राष्ट्रपति के स्वागत में भारतीय राष्ट्रपति ने रात्रिभोज का आयोजन भी किया। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी मंगोलियाई राष्ट्रपति से मुलाकात की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति बाटुलगा के साथ शिष्टमंडल स्तर की बातचीत में दोनों शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। क्षमता निर्माण, सुरक्षा, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, आपदा प्रबंधन और सांस्कृतिक विनिमय भी बातचीत के केन्‍द्र में थे। यह एक पखवाड़े के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति के बीच दूसरी बार बातचीत ह...

भारतीय वायुसेना: बाजी पलटने को तैयार

भारतीय वायुसेना, फ्रांसीसी उड्डयन कंपनी डसॉल्ट से हवा में राज करने वाले लड़ाकू विमान राफेल की पहली खेप अगले महीने के दूसरे सप्ताह में हासिल करने वाली है। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पहला राफेल विमान प्राप्त करने के लिए फ़्रांस जाएंगे। भारतीय वायुसेना अगले साल मई तक राफेल विमान उड़ाने के लिए 24 पायलटों को तीन अलग-अलग बैचों में प्रशिक्षित करेगी। राफेल विमान को शीघ्रता से भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल करने का भारत सरकार का फैसला सुरक्षा रणनीति की दृष्टि से काफी तार्किक है क्योंकि वायुसेना के बेड़े को मजबूत करने की जहां समय से ज़रूरत थी वहीं पुरानी पीढ़ी के मिग-21, मिग-23 और मिग-27 जैसे लड़ाकू विमानों को धीरे-धीरे सेवा से हटाए जाने की तैयारी चल रही है। भारत के पड़ोसी देशों में जिस तरह के हालात पिछले दशकों में देखने को मिले हैं और भारत को जिस तरह सीमा पार से आतंकवाद का सामना करना पड़ रहा है उससे रक्षा खरीद की अपरिहार्य भारतीय नेतृत्व की प्राथमिकता बन गई थी। हाल के वर्षों में भारत की रक्षा नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब भारत न सिर्फ सैद्धांतिक तौर पर बल्कि व्यवहारतः इस...

अरामको पर हुए हमले ने अमरीका-ईरान तनाव को बढ़ाया

सउदी की तेल कंपनी अरामको द्वारा संचालित दम्माम के निकट स्थित अब्क़ैक़ तथा ख़ुरैस की विश्व के सबसे बड़े कच्चे तेल के संयंत्रों पर हुए हाल के ड्रोन हमलों ने खाड़ी में व्याप्त अमरीका-ईरान के तनावों को बढ़ा दिया है | इस कारण 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद विश्व स्तर पर तेल की क़ीमतों में बहुत अधिक बढ़ोतरी हुई है | यमन आधारित “अंसार अल्लाह” (हूती) बलों ने इन हमलों की ज़िम्मेदारी ली है, जिसमें किसी के घायल होने की ख़बर नहीं है तथा सउदी अरबिया को चेतावनी दी गई है कि इस किंग्डम में हूती हमलों में और बढ़ोतरी होगी | सउदी के तेल ठिकानों पर यह पहला हमला नहीं है, गत महीने, सउदी अरबिया के अन्य बड़े तेल ठिकाने शायबाह को भी हूती बलों ने एक ड्रोन हमले का निशाना बनाया था |  सउदी के शाहज़ादे मोहम्मद बिन सलमान (एमबीएस) ने इस हमले को आतंकवादी हमला बताया है तथा कहा है कि सउदी अरबिया हमले की इस कार्रवाई का जवाब देने में सक्षम है | उच्च असर वाले हमलों के परिदृश्य में, रियाद ने अपनी तेल पाइपलाइन को बंद कर दिया है, जिसके माध्यम से प्रतिदिन 0॰2 मिलियन बैरेल सउदी अरामको से अरब लाइट कच्चा तेल बहरीन पेट्रोलियम कंपनी तक पहु...

रणनीतिक साझेदारी के क्षेत्र में भारत-ईरान तलाश रहे नई संभावनाएं

भारत और ईरान के बीच तेहरान में इस सप्ताह विदेश विभागों के बीच 16 वें दौर की बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब पश्चिमी एशिया क्षेत्र में राजनीतिक स्थिति चिंताजनक हालत में है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश सचिव विजय गोखले ने किया जबकि ईरान की तरफ से वार्ताकार दल के प्रतिनिधि रहे उप विदेश मंत्री डॉ सैयद अब्बास आरागची। भारत के विदेश सचिव श्री गोखले ने ईरान के विदेश मंत्री डॉ जावेद जरीफ और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह खोमेनी के वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर वेलायती से भी मुलाकात की। दोनों देशो ने द्विपक्षीय सहयोग की चित्र में चाबहार बंदरगाह जैसी बुनियादी संपर्क विकास परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा की। साथ ही भारत-ईरान-अफगानिस्तान के त्रिपक्षीय ट्रांज़िट समझौते को भी पूरी तरह से क्रियान्वित करने पर बात हुई। दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि पारस्परिक लाभ के द्विपक्षीय सहयोग को इसी तरह से गति दी जाएगी और दोनों देशों के बीच विनिमय इसी तरह जारी रहेगा। इस बैठक में यह भी तय किया गया कि दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की संयुक्त बैठक जल्द ही ईरान में आयोजित की जाएगी। विदे...

राष्ट्रपति कोविंद की आइसलैंड, स्विट्जरलैंड तथा स्लोवेनिया यात्रा

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्विपक्षीय राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से आइसलैंड, स्विट्जरलैंड और स्लोवेनिया के नौ दिनों के दौरे पर गए। भारत और आइसलैंड ने मत्स्य पालन सहयोग, सांस्कृतिक सहयोग, अधिकारियों के लिए वीज़ा की सुविधा और आइसलैंड विश्वविद्यालय में एक हिंदी अध्यक्ष की नियुक्ति से जुड़े पर समझौतों और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। आइसलैंड नॉर्डिक देशों के समूह का हिस्सा है और भारतीय राष्ट्रपति ने सराहना करते हुए कहा कि रेक्जविक सतत मत्स्य पालन, समुद्री अर्थव्यवस्था, शिपिंग, हरित विकास, ऊर्जा, निर्माण और कृषि जैसे क्षेत्रों में योगदान दे सकता है। आइसलैंड आर्टिक परिषद का अध्यक्ष है, जो एक अंतरसरकारी संगठन है और आर्कटिक क्षेत्र में सतत विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्तरदायी है। आइसलैंड ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई उम्मीदवारी के लिए अपना समर्थन दिया है। राष्ट्रपति कोविंद ने आइसलैंड विश्वविद्यालय में छात्रों को भी संबोधित किया। संबोधन का विषय था 'एक हरी भरी पृथ्वी के लिए भारत-आइसलैंड का सहयोग' और उन्होंने आइसलैंड को अंतर्राष्ट्...

दोहरे मापदंड के लिए पाकिस्तान फिर से बेनक़ाब

भारतीय राज्य जम्मू तथा कश्मीर के मुद्दे पर अपने हठ के कारण पाकिस्तान एक अशांत चरण से गुज़र रहा है | पाकिस्तान को झिड़की लगाते हुए, लगभग प्रत्येक वैश्विक शक्ति ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के मुद्दे को भारत का आंतरिक मामला कहा है | पाकिस्तान अब समर्थन जुटाने के लिए पुरज़ोर कोशिश कर रहा है | बहरहाल, यह समर्थन भ्रांतिजनक प्रतीत होता है | एक निजी टेलीविज़न चैनेल को दिये हाल के साक्षात्कार में, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने स्वीकार किया कि इस्लामाबाद भारत के विरुद्ध एक परंपरागत युद्ध नहीं जीत सकता है | उन्होंने परमाणु ख़तरे की बात दुहराई तथा कश्मीर मुद्दे पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की | उन्होंने दुनिया को यह कहते हुए आगाह भी किया कि अगर दुनिया भारत के परमाणु शस्त्रागार पर ध्यान देने में असफल रहती है, तो इससे होने वाली “तबाही के बाद” की ज़िम्मेदारी दुनिया की होगी | उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने विश्व को सूचित कर दिया है कि पाकिस्तान जंग नहीं चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा और अखंडता को मिल रही चुनौतियों से यह अनभिज्ञ नहीं रह सकता है | उन्होंने स्वीका...

भू-अवक्रमण कम करने का राष्ट्रीय संकल्प

भूमि एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण संसाधन है। ये मानव जीवन का प्रधान आधार उपलब्ध करवाती है और साथ ही भोजन, शुद्ध जल, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़ी कई अन्य व्यवस्थाएँ उपलब्ध करवाती है। जलवायु व्यवस्था में भी भूमि एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।  दशकों से भूमि के बेजोड़ उपयोग और आबादी बढ़ने की वजह से शुद्ध जल के उपयोग के चलते भूमि का अवक्रमण होता रहा है। कृषि और पशु उत्पाद, शहरीकरण, वनों की कटाई और ख़राब मौसम की मार विशेषतौर से सूखे की मार की वजह से इस प्रक्रिया में वृद्धि हुई। मानव सत्तर प्रतिशत से अधिक बर्फ़ से मुक्त भूमि को प्रभावित करता है। भूमि अवक्रमण और मरुस्थलीकरण अधिकतर देशों की प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय समस्या है। मरुस्थलीकरण भूमि अवक्रमण का एक प्रकार है जिसमें उपजाऊ भूमि मरुभूमि बन जाती है।  इन परिवर्तनों का सामना करने और इन चुनौतियों से उबरने के रास्ते तलाशने के लिए 197 देशों के लगभग 9000 प्रतिनिधियों ने दिल्ली से जुड़े उपनगर में 2 सितम्बर से एक प्रमुख सम्मेलन में भाग लिया। भारत ने कॉन्फैंस ऑफ़ पार्टीज़ या कोप 14 के 14वें सम्मेलन में संय...