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Showing posts from December, 2019

भारत की विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि में वृद्धि

भारत की विदेशी मुद्रा आरक्षित निधि या फ़ॉरेक्स में उछाल आया है और अब 20 दिसम्बर 2019 को अभी तक की सबसे अधिक 455 अरब अमरीकी डॉलर हो गई है। ये मार्च 2019 में 412 अरब अमरीकी डॉलर से अधिक है। फॉरेक्स में हुई इस वृद्धि की वजह विदेशी मुद्रा संपत्ति में वृद्धि होना है। मार्च 2019 की तुलना में इसमें दस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विदेशी मुद्रा संपत्ति में अमरीकी डॉलर, यूरो, पाउंड स्टेर्लिंग, जापानी येन आदि जैसी प्रमुख मुद्राओं सहित बहु-मुद्राएं शामिल होती हैं और इनका मूल्य अमरीकी डॉलर में तय किया जाता है।  रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार विदेशी मुद्रा सम्पत्ति या एफ़सीए में बदलाव मुख्य रूप से केन्द्रीय बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा की ख़रीद-फ़रोख्त, विदशी मुद्रा आरक्षित निधि के वितरण से होने वाली आय, केन्द्र सरकार को मिलने वाली बाहरी मदद और सम्पत्तियों के पुनर्मूल्यांकन की वजह से हुए बदलावों के चलते होता है।  एफ़सीए के अतिरिक्त फॉरोक्स के तीन और हिस्से हैं। सोना, विशेष पावती अधिकार और आरटीपी यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में आरक्षित अंश। 20 दिसम्बर 2019 तक एफ़सीए में 93 प्रतिशत ...

‘मन की बात’ (कड़ी संख्या – 7)

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | 2019 की विदाई का पल हमारे सामने है | 3 दिन के भीतर-भीतर 2019 विदाई ले लेगा और हम, ना सिर्फ 2020 में प्रवेश करेंगे, नए साल में प्रवेश करेंगे, नये दशक में प्रवेश करेंगे, 21वीं सदी के तीसरे दशक में प्रवेश करेंगे | मैं, सभी देशवासियों को 2020 के लिए हार्दिक शुभकामनायें देता हूँ | इस दशक के बारे में एक बात तो निश्चित है, इसमें, देश के विकास को गति देने में वो लोग सक्रिय भूमिका निभायेंगे जिनका जन्म 21वीं सदी में हुआ है - जो इस सदी के महत्वपूर्ण मुद्दों को समझते हुये बड़े हो रहे हैं | ऐसे युवाओं के लिए, आज, बहुत सारे शब्दों से पहचाना जाता है | कोई उन्हें Millennials के रूप में जानता है, तो कुछ उन्हें, Generation Z या तो Gen Z ये भी कहते हैं | और व्यापक रूप से एक बात तो लोगों के दिमाग में फिट हो गई है कि ये Social Media Generation है | हम सब अनुभव करते हैं कि हमारी ये पीढ़ी बहुत ही प्रतिभाशाली है | कुछ नया करने का, अलग करने का, उसका ख्वाब रहता है | उसके अपने opinion भी होते हैं और सबसे बड़ी खुशी की बात ये है, और विशेष करके, मैं, भारत के बारे में कहना चाहूँगा, कि...

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति चुनाव

अफगानिस्तान में राष्ट्रपति चुनाव के प्रारंभिक परिणामों की घोषणा के साथ ही, इस युद्धग्रस्त देश ने दरकते लोकतांत्रिक संस्थानों को मजबूत करने की दिशा एक और मील का पत्थर स्थापित कर दिया है। अफगानिस्तान के स्वायत्त अर्थात स्वतंत्र चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि पदग्राही राष्ट्रपति अशरफ ग़नी ने 50.46 प्रतिशत मतों के साथ चुनाव जीत लिया है। पूर्व विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल्ला अब्दुल्ला, जो श्री गनी के निकटतम प्रतिद्वंद्वी थे, दो लाख से भी अधिक मतों के अंतर से चुनाव में पराजित हो गए हैं। तालिबान द्वारा छेड़ी गई एक अंधहिंसा के वातावरण में देश में लोकतंत्र की स्थापना के लिए संघर्षरत अफगानिस्तान के इस सजग चुनाव आयोग ने चुनाव में किसी भी प्रकार की अनियमितता को न होने देने के भरपूर प्रयास किए। परिणामस्वरूप, बायोमेट्रिक परीक्षणों में विफल होने के कारण कई हजार मतदाताओं को अयोग्य घोषित किया गया था। फिर भी, अनेक शिकायतें प्राप्त हुईं हैं, और स्वतंत्र चुनाव आयोग ने उनमें से प्रत्येक को निपटाने का वादा किया है। इस प्रक्रिया के स्वयं ही कई सप्ताह तक चलने की आशा है, लेकिन सम्भवतः यह कुछ महीनों का समय भी ले सकती ह...

माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई से जुड़े नियमों को सख्त करेगा नेपाल

दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत नेपाल में है, जिसे माउंट ऐवरेस्ट के नाम से जाना जाता है। 8848 मीटर ऊंचाई वाले इस माउंट ऐवरेस्ट पर्वत पर चढ़ाई करने वाले पर्वतारोहियों से नेपाल को प्रत्येक वर्ष अच्छा-खासा राजस्व मिलता है। मगर चिंता की बात यह है कि माउंट ऐवरेस्ट पर चढ़ाई करने के दौरान होने वाली मौतों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। इस वर्ष मई में इस पर्वत पर चढ़ाई करने के दौरान 11 पर्वतारोहियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। यह आँकड़ा अब तक का दूसरा सबसे बड़ा आँकड़ा है। इससे पहले साल 2015 में नेपाल में आए भूकंप के दौरान माउंट ऐवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाले 22 पर्वतारोहियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। 25 अप्रैल को नेपाल में आए तेज़ भूकंप के चलते माउंट ऐवरेस्ट पर भूस्खलन शुरू हो गया और यहाँ फंसने से इन पर्वतारोहियों की मौत हो गई। इस साल 800 से अधिक पर्वतारोहियों ने माउंट ऐवरेस्ट के शिखर तक पहुँचने की कोशिश की। इस दौरान बड़ी संख्या में पर्वतारोहियों को 8000 मीटर की ऊंचाई पर कई घंटों तक लाइनों में इंतज़ार करना पड़ा। 8000 मीटर की इस ऊंचाई को “death zone” के नाम से जाना जाता है। मौसम की अनुकूलता...

अमरीका की धार्मिक भेदभाव वाली सूची में पाकिस्तान का नाम कायम।

अमेरिका ने पाकिस्तान के नाम को, उन देशों की सूची में कायम रखा है, जो देश अपने यहाँ धार्मिक भेदभाव जैसी बुराई के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाते हैं। इस सूची में म्यांमार, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, सउदी अरब, तजीकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे कई देश शामिल हैं। इन देशों को “विशेषरूप से ध्यान देने वाले देश अर्थात् Countries of particular concern (CPC)” की श्रेणी में रखा गया है। अमेरिका के विदेश विभाग ने यह निर्णय अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता कानून 1998 के तहत लिया है। सीपीसी सूची में शामिल देशों को धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने या इसको सहने वाले देशों के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इन देशों में धार्मिक भेदभाव हो रहा है, और सरकार इस भेदभाव को खत्म करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही हैं। इस सूची में शामिल देशों को भविष्य में अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंध सहित सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। हालाँकि, पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को नकारते हुए कहा है कि यह अमेरिका की चुनिंदा देशों को निशाना बनाने की नीति है। पाकिस्तान एक बहुधर्मी और बहुलतावादी देश है। यहां हर धर...

भारत का समग्र दृष्टिकोण जल प्रबंधन की ओर

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर जल प्रबंधन की महत्वाकांक्षी योजना अटल भु-जल योजना राष्ट्र को समर्पित करके भारत ने लाखों लोगों को पानी समस्या से छुटकारा दिलवाने के लिए अपनी दृढ़ता दिखायी है। वास्तव में, जल संकट से निपटने के लिए भारत का दृष्टिकोण दुनिया के सामने तब आया था जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र में दूसरी बार सरकार बनाने के बाद "जल शक्ति" मंत्रालय का गठन किया। इसने पानी के विषय को एक विभागीय पद्धति से आगे बढाकर और अधिक व्यापक और समग्र बनाने में मदद की है। न्यू इंडिया की परिकल्पना तब तक फलीभूत नहीं होगी जब तक देश की समस्याओं का समाधान लोगों की उम्मीदों और आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं होगा । अटल भु-जल योजना गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक के 78 जिलों में भू-जल स्तर में गिरावट की समस्या का समाधान तो करती ही है साथ ही किसानों में खेती के लिए वैकल्पिक फसलों की आवश्यकता को लेकर जागरूकता पैदा करने में भी मदद करती है। भारत में कृषि काफी हद तक भू-जल से की जाने वाली सिंचाई व्यवस्था पर आधारित है। बड़े पैम...

कूटनीतिक संबंध मज़बूत करते भारत और ओमान

अपने अधिक सम्पन्न और अधिक प्रभावशाली पड़ौसियों के मुक़ाबले ओमान पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान कम जाता है। लेकिन फारस की खाड़ी में भारत की अपना प्रभाव बढ़ाने की नीति को देखते हुए ओमान अपनी सामरिक स्थिति की वजह से एक बेहद महत्तवपूर्ण देश है। लंबे समय तक आर्थिक विकास की कमी और आतंरिक उथल-पुथल में फँसे देश ने सुलतान क़बूस के नेतृत्व में उल्लेखनीय बदलाव हासिल किया है। सुलतान ने 1970 से देश की बागडोर संभाली थी। तेल संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए जन कल्याण की नीतियों ने देश में आर्थिक प्रगति स्थापित की। सुलतान क़बूस के नेतृत्व में ओमान ने अपने पड़ौसियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे और बिखरे हुए खाड़ी क्षेत्र में अहम क्षेत्रीय भूमिका निभाई। क्षेत्रीय तनाव कम करने और टकराव वाले मुद्दे समाप्त करने के लिए कूटनीतिक माध्यमों के उपयोग को देखते हुए ओमान की भूमिका का महत्व समझा जा सकता है। भारत ओमान का महत्व समझता है और पिछले कुछ दशकों में इसने ओमान के साथ मज़बूत कूटनीतिक संबंध स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ओमान के साथ भारत के संबंध राजनीतिक, कूटनीतिक और वाणिज्यिक दायरों से ब...

भारत-ईरान संयुक्त आयोग की 19वीं बैठक

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दोनों देशों के बीच संयुक्त आयोग की बैठक के 19वें संस्करण में भाग लेने के लिए ईरान की यात्रा की। संयुक्त आयोग, जो भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों की सह-अध्यक्षता में कार्य कर रहा है, इन दो मित्र देशों के बीच गहरे संबंधों को आगे बढ़ाने का एक माध्यम है। अपनी यात्रा के दौरान, डॉ. जयशंकर ने ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी से भी भेंट की और उन्हें संयुक्त आयोग की बैठक की प्रगति के विषय में भी अवगत कराया। भारतीय विदेश मंत्री ने ईरानी प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव रियर एडमिरल अली शंखानी और ईरानी शहरी विकास मंत्री, मोहम्मद इस्लामी से भी मिले। भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से ये बैठकें ऐसे समय में की गईं हैं जब ईरान और संयुक्त राज्य के बीच निरंतर गतिरोध के कारण ईरान गम्भीर आर्थिक संकट में आ गया है। विशेष रूप से, इस गतिरोध के चलते ईरान पर उस अमरीका द्वारा कड़े आर्थिक और राजनैतिक प्रतिबंध लगा दिये गए हैं, जिसने ऐतिहासिक परमाणु संधि से एकतरफ़ा अलग कर लिया था। इस 'बहुत ही रचनात्मक' संयुक्त आयोग की बैठक में, दोनो...

भारत-चीन की 22वीं विशेष प्रतिनिधिस्तर वार्ता प्रगति पर

सीमा मसले पर वार्ता के लिए चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने भारत दौरा किया। यहाँ उन्होंने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ बातचीत की। श्री वांग ने उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू से भी मुलाकात की। विशेष प्रतिनिधिस्तर की यह 22वीं यात्रा थी। यह वार्ता कुछ कारणों से महत्वपूर्ण थी। अक्टूबर 2019 में चेन्नई के पास मामल्लपुरम में भारतीय प्रधानमंत्री और चीनी राष्ट्रपति ने दूसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया था। शिखर सम्मेलन के आखिर में, दोनों नेता इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आपसी विश्वास निर्माण के उपायों (सीबीएम) पर काम किए जाने की आवश्यकता है ताकि सीमाओं पर शांति रहे। भारत का पक्ष रखते हुए, एनएसए अजीत डोभाल ने कहा कि दोनों पक्षों के नेतृत्व ने "द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर करने और सीमा से जुड़े मुद्दों के निपटारे के लिए एक नया दृष्टिकोण और रणनीतिक दिशा अपनाए जाने की आवश्यकता है। चीनी पक्ष ने कहा कि वार्ता के बाद भारत और चीन "प्रबंधन नियम बनाने" पर सहमत हुए हैं, और "सीमा पर खड़ी एक दूसरे की सेनाओं के बीच संचार और आदान-प्रदान को बेहतर करने पर भी राज़ी हुए हैं...

प्रधानमंत्री के अनुसार अर्थव्यवस्था प्रगति की राह पर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था प्रगति के रास्ते पर है। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के धीमा होने के संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार अगले पांच वर्षोँ में भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 खरब(ट्रिलियन) डॉलर तक ले जाने के लिए कृत संकल्प है। प्रधानमंत्री ने सरकार की आर्थिक नीति के एक स्पष्ट दृष्टिकोण के रूप में कहा कि बीते समय में कई सुधारात्मक उपाय किए गए हैं जो आने वाले वर्षों में सुखद परिणाम देने लगेंगे। 100 वर्ष पूरा कर चुके एसोचैम (भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल) को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने इस धारणा को दूर करते हुए एक सशक्त वक्तव्य दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में संकुचन की स्थिति आ गई है। दरअसल, पिछले कुछ तिमाहियों में जीडीपी विकास दर में कमी के विषय में बहुत कुछ कहा गया है। यह वैश्विक आर्थिक मंदी की पृष्ठभूमिके संदर्भ में भी है। संयुक्त राज्य अमरीका और चीन के बीच एक व्यापार युद्ध चल रहा है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को भी सुस्त बना रहा है। इस तथ्य से इनकार नहीं कर रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी को एक ऐसी अर्थव्यवस्था विरासत में मिली, जो खराब ऋणों...

सऊदी-क़तर संबंध- विनम्र संकेतों का खेल

चालीसवीं खाड़ी सहयोग परिषद के सर्वोच्च परिषद सम्मेलन ने सऊदी अरब और क़तर के संबंधों में बदलाव का संकेत दिया। ग़ौरतलब है कि सऊदी-अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमारात और बहरीन ने क़तर पर ये आरोप लगाया था कि ये आतंकी गुटों की मदद करता है। इन चारों देशों ने क़तर से कूटनीतिक रिश्ते पूरी तरह समाप्त कर दिए थे। सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुलाज़ीज़ अल सौद ने क़तर के अमीर शेख़ तमीम बिन हमद अल थानी को रियाद में हो रहे 2019 जीसीसी सम्मेलन का व्यक्तिगत न्यौता भेजा था। बदले में क़तर ने अपने प्रधानमंत्री शेख़ अब्दुल्लाह बिन नास्सेर अल थानी को सम्मेलन में शामिल होने के लिए भेजा। 2017 के बाद से ये क़तर का सर्वोच्च प्रतिनिधित्व था। उस समय क़तर को सऊदी अरब बहुत नुक्सान पहुँचाना चाहता था और इसकी सीमा के साथ 61 किलोमीटर के क्षेत्र में एक 200 मीटर चौड़ी नहर सालवा खोदकर इसे एक द्वीप में बदल दिया था। दोनों पक्षों की ओर से मिलने वाले विनम्र संकेतों से लगता है कि क़तर और सऊदी अरब के आपसी संबंध सामान्य होने की ओर अग्रसर हैं। इस साल क़तर के प्रधानमंत्री सऊदी अरब में अरामको तेल संस्थान पर हुए हमलों के चलते आपात सुरक्ष...

भारत-अमरीका की दूसरी 2+2 मुलाकात

भारत और अमरीका के रक्षा और विदेश मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की दो जमा दो बैठक इस सप्ताह वाशिंगटन, डी सी में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। इस वार्तालाप के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद का सामना, अफ़्गानिस्तान स्थिरता और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांतिपूर्ण और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में काम करने आदि के बारे में विचार साझे करना मुख्य विषय-वस्तु रही। इस बैठक का सबसे अहम परिणाम रहा औद्योगिक सुरक्षा सहयोग के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किया जाना। इस समझौते की वजह से अब रक्षा शोध और विकास में द्वीपक्षीय सहयोग की प्रक्रिया सुगमता से आगे बढ़ सकेगी। पिछले साल नई दिल्ली में सितम्बर में दो जमा दो संवाद के पहले चक्र में सम्पर्क अनुकूलता और सुरक्षा समझौता किया जाना महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। दोनों देशों की सैन्य ताक़तों की परस्पर संचालनता बढ़ाने के लिए ये समझौता ज़रूरी था। इस प्रकार दो जमा दो के दूसरे चक्र ने दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंध और गहरे किए हैं। भारत और अमरीका के बीच इस गतिविधि की सफलता को लेकर कई संशय व्याप्त थे। वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा में सामंजस्य बनाए रखते हुए दोनों देश...

भारत-पुर्तगाल के मज़बूत होते संबंध

श्री एंटोनियो कोस्टा का पुर्तगाल के प्रधानमंत्री पद पर फिर से चुने के बाद यूरोप के बाहर सबसे पहले भारत दौरा किया है जो द्विपक्षीय रिश्तों के महत्व को दर्शाता है। श्री कोस्टा अब तक तीन बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल चुके हैं। इससे पहले उन्होंने जनवरी 2017 में भारत का दौरा किया था, जब भारत ने उन्हें "प्रवासी भारतीय सम्मान" पुरस्कार से सम्मानित किया। श्री कोस्टा ने गांधीनगर में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट’ को भी संबोधित किया था। बाद में उसी वर्ष भारतीय प्रधानमंत्री पुर्तगाल गए। अपनी इस यात्रा के दौरान श्री मोदी ने श्री कोस्टा से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की और सहयोग के विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान की। श्री मोदी ने पुर्तगाल में 65,000 भारतीयों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें भारत का "वास्तविक दूत" कहा। 2018 में, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने पुर्तगाल का दौरा किया था। पुर्तगाल दशकों बाद भारतीय विदेश नीति के रडार पर आया है। पुर्तगाल के साथ सम्बन्धों को मजबूत करने के लिए भारत के पास अनेक व्यावहारिक कारण हैं। जैसा प्रधानमंत्री कोस्टा ने कहा, पुर्तग...

भारत ने पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेंबली के प्रस्ताव को दृढ़ता से ख़ारिज़ किया

पाकिस्तान एक ऐसी स्थिति में है, जहां इसके विभिन्न संस्थान आपस में भिड़ते नज़र आ रहे हैं | पाकिस्तान की एक बुरी आदत यह भी है कि वह भारत के हर घरेलू मुद्दे पर चर्चा करता है | भारत की संसद ने जिस नागरिकता संशोधन विधेयक को पारित किया, वह अब भारत में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) बन चुका है, पाकिस्तान की नेशनल एसेम्बली ने इस मुद्दे पर बहस किया | इस्लामाबाद को छोड़कर अन्य किसी देश का इस मुद्दे से कोई सरोकार नहीं है, क्योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है | नागरिकता संशोधन अधिनियम का उद्देश्य अफ़गानिस्तान, पाकिस्तान तथा बांग्लादेश में सताये गए अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता प्रदान करना है | भारत के सीएए के कारण पाकिस्तान में तीव्र उत्तेजना है, क्योंकि इस्लामाबाद अब अपने यहाँ अल्पसंख्यकों से हो रहे बर्ताव को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदा है | डर के साये में जी रही अपनी अल्पसंख्यक जनसंख्या की देखरेख करने में इस देश का बहुत ही निराशाजनक रेकॉर्ड है, जबकि अपने नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करना इसका कर्तव्य है | जब इसने क्रिश्चयन महिला, आसिया बीबी को ईशनिन्दा के आरोप से मुक्त किया तो इस देश क...

भारत-प्रशांत ट्रैक 1.5 डायलॉग

ऐसे समय में जबकि एक मुक्त और खुले भारत-प्रशांत क्षेत्र को लेकर भू-राजनैतिक विचार-विमर्श ज़ोर पकड़ रहा है, भारत ने नई दिल्ली में दो वार्ताओं का आयोजन किया। पहली है ट्रैक 1.5 डायलॉग और दूसरी डैल्ही डायलॉग-11। पहली वार्ता में, छठी भारत महासागर वार्ता भी शामिल रही। उद्देश्य था जून-2019 में भारत-प्रशांत क्षेत्र को लेकर आसियान दृष्टिकोण की घोषणा के बाद एक खुले, मुक्त, समावेशी और नियम आधारित भारत-प्रशांत क्षेत्र के संबंध में रणनीतिक अवधारणा पर चर्चा करना। इससे पहले जून-2018 में शैंगरी-ला वार्ता में भी भारत, भारत-प्रशांत क्षेत्र को लेकर अपना दृष्टिकोण व्यक्त कर चुका था। यह पहला अवसर रहा जब एक के बाद एक दो ट्रैक 1.5 वार्ताओं का आयोजन हुआ।  भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कहा कि इस क्षेत्र के संबंध में भारत के नज़रिए से पश्चिमी प्रशांत महासागर, खाड़ी और अफ्रीकी देश भी पूर्वी हिंद महासागर के साथ शमिल हैं। भारत-प्रशांत को लेकर विभिन्न पक्षों की व्याख्या में तालमेल बैठाते हुए आपसी सहमति के तत्व चिन्हित करने पर चर्चा हुई। भारत ने नवंबर-2019 में भारत-प्रशांत क्षेत्र की पहल की। उद्देश्य...

मैड्रिड सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन से निपटने की भारत की कार्यसूची

जलवायु परिवर्तन एक ऐसी सच्चाई है जिसे स्वीकार करना ही होगा। दुनिया में कोई भी देश इसके प्रभाव से अछूता नहीं है क्योंकि ये किसी एक देश के प्रयासों पर निर्भर नहीं करता। भारत जलवायु व्यवस्था में आए बदलावों के प्रभाव पहले से ही झेल रहा है। बिन मौसम बरसात, बहुत अधिक गर्म हवाएँ या लू, पूरी तरह उलट शीत लहर जलवायु परिवर्तन के परिणाम हैं। स्वास्थ्य तथा खाद्य उपज आदि पर भी इसका बहुत प्रभाव पड़ रहा है।  जलवायु परिवर्तन पर हाल ही में सम्पन्न हुए मैड्रिड सम्मेलन कोप 25 में इस संदर्भ में विचार किया गया कि 2020 से पेरिस समझौता 2015 लागू करने के लिए कार्ययोजना किस प्रकार पूरी की जाए।  दो सप्ताह तक चले सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव की वैज्ञानिक चुनौतियों की समीक्षा की गई और मानव जाति पर पड़ने वाले इसके विनाशकारी प्रभाव से दुनिया को बचाने के उपायों पर भी मंथन किया गया। जलवायु परिवर्तन पर अंत:सरकारी पैनल, संयुक्त राष्ट्र एजेंसी ने चेताया था कि जब तक देश अपने वर्तमान स्तर से आगे नहीं बढ़ेंगे तब तक हम प्रकृति को हो चुके नुक्सान की भरपाई करने के इच्छित स्तर तक नहीं पहुँच सकेंगे।...

भारत और मालदीव के बीच छठी संयुक्त आयोग बैठक

भारत और मालदीव के बीच छठी संयुक्त आयोग बैठक नई दिल्ली में हुई। भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने बैठक की अध्यक्षता की। संयुक्त आयोग बैठक से भारत और मालदीव के बीच द्विपक्षीय सहयोग के संपूर्ण विस्तृत परिदृश्य की समीक्षा करने का अवसर प्राप्त हुआ। पिछले एक साल में, सोलह सरकार के गठन के बाद मालदीव में सकारात्मक लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम होने से कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। विकास सहायता के माध्यम से मालदीव में सामाजिक क्षेत्र के विकास के अलावा, दोनों देश समुद्री, सुरक्षा और रक्षा सहयोग का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं। मालदीव में राष्ट्रपति चुनावों के बाद भारत ने उसे एक अरब 40 करोड अमरीकी डॉलर का आर्थिक सहायता पैकेज देने की घोषणा की है। इसके अलावा, भारत ने महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 80 करोड़ अमरीकी डॉलर की उधार क्षमता यानि लाइन ऑफ क्रेडिट और उच्च प्रभाव सामुदायिक विकास परियोजनाओं के लिए 56 लाख अमरीकी डॉलर अनुदान सहायता की भी घोषणा की। इन सहायता परियोजनाओं से मालदीव को विभिन्न 'एट...

संसद में इस सप्ताह

नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 का पारित होना संसद के शीतकालीन सत्र का प्रमुख आकर्षण रहा। दोनों सदनों ने बुधवार को विधेयक पारित कर दिया। बिल पेश करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पड़ौसी देश अफ़्ग़ानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में पीड़ा झेल रहे अल्पसंख्यकों की परेशानियाँ दूर करने के लिए ये ऐतिहासिक ज़रूरत का विधेयक है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आधार पर बँटवारा होने की वजह से इन देशों में अल्पसंख्यकों को लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। इस विधेयक के माध्यम से नागरिकता विधान1955 में बदलाव किया गया जो अफ़्ग़ानिस्तान,बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले 6मसुदायों के अवैध प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। ये हिंदु,सिक्ख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग हैं। इस विधेयक की संवैधानिकता के बारे में जवाब देते हुए श्री शाह ने कहा कि ये विधेयक श्रेणीगत सभी शर्तों को पूरी करता है। उन्होंने कहा कि पिछले पाँच सालों में भारत ने इन देशों से 566मुस्लिमों को नागरिकता प्रदान करने पर विचार किया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को ना तो जल्दबाज़ी में पेश किया गया है और न...