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Showing posts from September, 2020

हरित रणनीतिक साझेदारी के साथ भारत-डेनमार्क के सम्बन्धों को पुनः स्थापित करना

प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी तथा डेनमार्क के उनके प्रतिपक्ष, मेत्ते फ़्रेडराइकसन ने द्विपक्षीय सम्बन्धों का जायज़ा लेने के लिए एक वर्चुअल शिखर सम्मेलन किया| कोविड-19 महामारी तथा अर्थव्यवस्था पर पड़नेवाले इसके प्रभाव के कारण परिवर्तित होते अंतर्राष्ट्रीय गतिशीलताओं के परिदृश्य में, एक देश पर निर्भरता के परे जाकर दोनों नेताओं ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में विविधता लाने की आवश्यकता पर बल दिया| प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस प्रकार की एक विविधता के लिए भारत जापान तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर काम कर रहा है तथा भारत-चीन सीमा पर चल रहे वर्तमान गतिरोध के परिदृश्य में इस वक्तव्य की प्रासंगिकता है| भारत तथा डेनमार्क के पुराने संबंध हैं| डेनमार्क के पूर्व प्रधानमंत्री, एंडर्स फॉग रस्मुसेन ने 2008 तथा 2009 में भारत की यात्रा की| बहरहाल, पुरुलिया में शस्त्र गिराने के मामले में आरोपी डेनमार्क के नागरिक, किम डेवी के प्रत्यर्पण के कारण 2010 तथा 2016 में सम्बन्धों में गतिरोध उत्पन्न हुआ था| 2016 की समाप्ति पर दोनों पक्षों के बीच आधिकारिक संबंध फिर से बहाल हुए हैं| मंत्रिस्तरीय बैठकें करने के अलावा, प्रधानम...

प्रधानमंत्री ने एक विस्तारित संयुक्त राष्ट्र का आह्वान किया

यू॰एन॰ के 75वें वर्षगांठ शिखर सम्मेलन में अपने अवलोकन के बाद शांति, सुरक्षा तथा विकास के उद्देश्यों को एकीकृत करनेवाले यू॰एन॰ के भविष्य के लिए एक दृष्टिकोण की रूपरेखा देते हुए 26 सितंबर, 2020 को प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए कहा कि “संयुक्त राष्ट्र का मुख्य कार्य अधूरा है|” इस दृष्टिकोण को साकार करने के लिए परिवर्तन की आवश्यकता केंद्र में रही| प्रधानमंत्री ने कहा कि 1945 में जिस संदर्भ में यू॰एन॰ का गठन किया गया था, वह विगत 75 वर्षों में पूरी तरह से परिवर्तित हो चुका है| यू॰एन॰ के एक संस्थापक सदस्य के रूप में, “भारत इस महान संस्थान की प्रासंगिकता को बनाए रखने के प्रति” वचनबद्ध है| बहरहाल, 21वीं सदी की आवश्यकताएं तथा चुनौतियां विगत की तुलना में पूरी तरह से भिन्न हैं| उन्होंने रेखांकित किया कि “प्रतिक्रियाओं, प्रक्रियाओं तथा संयुक्त राष्ट्र के वास्तविक स्वरूप में सुधार” समय की मांग है| इस सुधार के केंद्र में यह है कि असैन्य युद्ध तथा आतंकी हमलों समेत संघर्षों को रोकने में यू॰एन॰ सुरक्षा परिषद की असफलता के कारण हज़ारों बच्चों समेत बहुत अधिक संख्य...

प्रधानमंत्री ने भारतीय किसानों का जयजयकार किया

प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने ऑल इंडिया रेडियो नेटवर्क पर अपने “मन की बात” कार्यक्रम के माध्यम से देश को संबोधित किया| मन की बात के 69वें संस्करण में, प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोविड-19 संकट के दौरान, देश के किसानों ने आश्चर्यजनक लचीलेपन का प्रदर्शन किया है| प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कृषि क्षेत्र सशक्त होता है, तो “आत्मनिर्भर भारत” का आधार भी सशक्त होगा| उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले, इस क्षेत्र को कई तरह के बंधनों से मुक्त कर दिया गया है तथा कई मिथकों से मुक्त करने की कोशिश की गई है| उन्होंने हरियाणा के एक किसान, श्री कंवर चौहान का उदाहरण साझा किया, जिन्हें मंडी के बाहर फलों और सब्ज़ियों को बेचने में बहुत अधिक कठिनाई होती थी, लेकिन 2014 में, फलों और सब्ज़ियों को कृषि उपज विपणन समिति (ए॰पी॰एम॰सी॰) अधिनियम से बाहर कर दिया गया, जिसका उन्हें बहुत लाभ मिला| उन्होंने एक किसान उत्पादक संगठन का गठन किया तथा अब उनके गाँव के किसान स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न की खेती करते हैं तथा अपनी उपज को प्रत्यक्ष रूप से दिल्ली की आज़ादपुर मंडी, बड़ी खुदरा शृंखला और फ़ाइव स्टार होटल को भेजते हैं, जिससे ...

भारत-अफ्रीकी भागीदारी का 15 वां डिजिटल सम्मेलन

विदेश मंत्रालय तथा वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के सहयोग से, भारत-अफ्रीकी साझेदारी पर, 15 वां भारतीय उद्योग परिसंघ और एक्ज़िम बैंक डिजिटल सम्मेलन दिल्ली में आयोजित की गया। सम्मेलन को कोविड -19 महामारी के कारण वीडियों कांफ्रेन्सिग के माध्यम से आयोजित किया गया। इसमें अफ्रीका और भारत दोनों देशों के बीच साझेदारी को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से भुमिका बनाने वालें प्रतिष्ठित गणमान्य लोगों की भागीदारी देखी गई। कुछ क्षेत्रों में कटौती करते हुए बैठक में, दोनों देशों के आर्थिक सम्बंधो को मजबूत करने के लिए रणनीति की नयी रूपरेखा तैयार करने वालें अफ्रीका और भारत के वरिष्ठ मंत्रियों, नीति निर्माताओं और व्यापार जगत के नेताओं को आभासी मंच प्रदान किया गया। यह साझेदारी नई सफलता प्राप्त करने की कगार पर है। यह 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा युगांडा की संसद में दिये भाषण में बताये गये भारत-अफ्रीका सम्बंधों के10 मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुरूप है । अफ्रीका के 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लिया। उद्घाटन सत्र में लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो के प्रधानमंत्री, श्री सिल्वेस्ट्रे इलुंगा, म...

संसद में इस सप्ताह

संसद का मानसून सत्र कई महत्त्वपूर्ण विधेयक पारित करने के बाद बुधवार को समाप्त हो गया। कोविड-19 महामारी की वजह से लोक सभा और राज्य सभा अपने निर्धारित समय से आठ दिन पहले अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गई। दस बैठकों वाला सत्र इस महीने की 14 तारीख़ को शुरू हुआ था और पहली अक्तूबर को समाप्त होना था। अपनी समापन टिप्पणी में राज्य सभा के अध्यक्ष एम वैंकेया नायडू ने कहा कि विपक्ष द्वारा कई मुद्दों पर किए जा रहे विरोध के बीच 25 विधेयक पारित किए गए और 6 नए विधेयक सदन में पेश किए गए। संसद ने कामगारों के कल्याण और सुरक्षा के लिए तीन श्रम संहिता विधेयक पारित किए। आजीविका संबंधी सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्यदशा संहिता 2020 किसी संस्थान में कार्यरत व्यक्ति की आजीविका, स्वास्थ्य और काम के माहौल से जुड़े क़ानूनों में संशोधन की अनुमति से जुड़ा है। औद्योगिक संबंध संहिता 2020 का उद्देश्य व्यापार संघ, औद्योगिक संस्थान में काम के माहौल, औद्योगिक विवादों में जाँच तथा समाधान के क़ानूनों में संशोधन करना है। तीसरा विधेयक सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 देश में कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के क़ानूनों में संशोधन से स...

कृषि विधेयक – किसानों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण

संसद द्वारा पारित कृषि विधेयक निश्चित रूप से देश के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक क्षण साबित होंगे| ये विधेयक न केवल किसानों को सारे राज्यों में अपनी उपज का व्यापार करने की स्वतन्त्रता प्रदान करेंगे, बल्कि ये किसानों को अपनी उपज के व्यापारी बनने की शक्ति भी प्रदान करेंगे| वास्तव में, दो कृषि विधेयक, किसान उपज व्यापार तथा वाणिज्य (संवर्धन तथा सुविधा) विधेयक तथा मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा विधेयक पर आधारित किसान (सशक्तिकरण तथा संरक्षण) समझौता भी कल्पित है| ये विधेयक देश के करोड़ों किसानों के लिए एक सुस्थिर और लाभकारी भविष्य को सुनिश्चित करेंगे| प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने उचित ही कहा कि कृषि क्षेत्र में परिवर्तन समय की मांग है| वास्तव में, अपनी उपज संबंधी निर्णय लेने में किसानों को स्वाधीनता देने वाला इससे पहले इस तरह का एक भी क़ानून नहीं था| इसके अलावा, कृषि उत्पादों की ख़रीद और बिक्री में उनके हाथ बंधे हुए थे| अधिसूचित कृषि उपज बाज़ार समिति ने अपने दायरे के बाहर किसानों को अपनी कृषि उपज बेचने से रोके रखा था| राज्य सरकारों के पंजीकृत लाइसेंसधारियों को ही फ़सल बेचने की उनकी सीमाएं तय कर दी गई थ...

संयुक्त राष्ट्र की 75 वीं वर्षगॉठ के ऐतिहासिक सम्मलेन में प्रधानमंत्री का संबोधन

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की 75वीं वर्षगॉठ के उपलक्ष्य में हुए सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व नेताओ के साथ शामिल हुए । कोविड-19 महामारी के मौजूदा संकट के बावजूद विश्व नेता कई चुनौतियों को सामना करते हुए इंटरनेट के माध्यम से एकत्रित हुए जिससे एक अनोखे बहुपक्षीय संस्थान, संयुक्त राष्ट्र के चिरस्थायी होने का पता चलता है । संयुक्त राष्ट्र और इसकी विशेष इकाइयों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक की स्थापना दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति पर विजयी संगठित शक्तियों द्वारा की गई थी । 75 साल पहले भारत ने 25 लाख स्वैच्छिक बलों का योगदान किया था । किसी भी संगठित सेना द्वारा किया गया ये सबसे बड़ा और विशेष योगदान था । जिसने संयुक्त राष्ट्र के निर्माण में भारतीय सहभागिता में बड़ी भूमिका निभाई । प्रधानमंत्री ने 1945 में सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में भारत की मौजूदगी को याद किया जब जून 1945 में भारत ने संस्थापक के रूप में संयुक्त राष्ट्र के घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर किए थे । उन्होंने कहा कि युद्ध की भयावहता से एक नई आशा निकली थी जिसने पूरी दुनिया के लिए एक संस्थान की नींव रखी । ...

संसद में पिछला सप्ताह

संसद का मानसून सत्र 14 सितंबर से सख्त सुरक्षा नियमों के साथ चल रहा है। दोनों सदनों की कार्यवाही शनिवार और रविवार को भी बिना अवकाश के चल रही है। प्रत्येक सदन प्रतिदिन चार घंटे चलता है - एक सत्र सुबह और दूसरा दोपहर में। इस मानसून सत्र के दौरान कुल 18 बैठकें आयोजित की जाएंगी। पिछले सप्त जिन तीन प्रमुख मुद्दों का बोलबाला था, उनमें कोविड-19 महामारी, अध्यादेशों के स्थान पर 11 विधेयक और चीन के साथ सीमा विवाद शामिल रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सत्र एक बहुत ही ठोस संदेश देगा कि दोनों सदन एक स्वर में, हमारे बहादुर सैनिकों के पीछे सीमाओं की रक्षा के लिए खड़े हैं। प्रधानमंत्री ने यह कहते हुए एक सधी हुई टिप्पणी की, कि सत्र 'विशेष परिस्थितियों' में आयोजित हो रहा है और कहा कि सदस्यों ने कर्तव्यपरायणता का रास्ता चुना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा को बताया कि भारत किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार था और 15000 फीट की ऊंचाई पर तैनात भारतीय सैनिकों का मनोबल ऊंचा था। उन्होंने एलएसी की यथास्थिति में एकतरफा बदलाव के प्रयास के लिए चीन को दो...

आईबीएसए विदेशमंत्रियों की वर्चुअल बैठक

भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका (आईबीएसए) संवाद मंच कई मायनों में अनोखा है। यह एक औपचारिक संगठन नहीं है। इसका कोई मुख्यालय या सचिवालय भी नहीं है। यह कोई इकाई नहीं है, न ही गठबंधन है। यह एक वैचारिक गुट भी नहीं है। आईबीएसए के मुख्य मिशन और एजेंडे में वैश्विक निर्णय लेने वाले निकायों के लोकतंत्रीकरण, वैश्वीकरण के समकालीन आदर्शों के विकल्पों को विकसित करने और दक्षिण के आर्थिक तथा सामाजिक हितों को बढ़ावा देने के आदर्श को मूर्त रूप देने की पद्धति द्वारा विकसित और विकासशील देशों के बीच शक्ति के संतुलन को बदलना है। प्रारंभ में ब्रिक्स के आगमन ने आईबीएसए को प्रभावित नहीं किया। हितों का टकराव नहीं था। आईबीएसए ने तीनों देशों में लोकतांत्रिक मूल्यों और अन्य साझा गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि अर्थव्यवस्था ब्रिक्स की सर्वोपरि चिंता बनी रही। चीन ने आईबीएसए के विघटन का समर्थन किया लेकिन भारत ने असहमति जताई और इसके पीछे चीनी षड़यंत्र को भाँप लिया। चीन ने बाद में ब्रिक्स प्लस का मुद्दा उठाया। धीरे-धीरे, आईबीएसए को ब्रिक्स से खतरा बढ़ने लगा। आईबीएसए संवाद मंच तब संकट में आ गया जब इसकी श...

भारत जेद्दाह सुधार में शामिल हुआ

हाल ही में आयोजित एक उच्च स्तरीय वर्चुअल बैठक के बाद एक पर्यवेक्षक राज्य के रूप में भारत जिबूती आचार संहिता के लिए जेद्दाह सुधार में शामिल हुआ| नई दिल्ली वर्तमान पर्यवेक्षक राज्यों के समूह का एक हिस्सा बनी, जिसमें जापान, नॉर्वे, यू.के. तथा अमरीका शामिल हैं| हिन्द महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को बढाने में योगदान करने तथा समन्वय करने की दिशा में भारत 18 सदस्यीय समूहों के साथ काम करने की आशा कर रहा है| जेद्दाह सुधार 2017 में जिबूती आचार संहिता के हस्ताक्षरकर्ताओं द्वारा अंगीकृत एक संशोधित आचार संहिता है| यह समुद्री परिवेश की प्रभावशाली सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय क़ानून को अंगीकार करने पर बल देता है तथा यह समुद्री क्षेत्र में आतंकवाद समेत अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध को नियंत्रित करने में सहयोग करने के लिए हस्ताक्षरकर्ताओं का आह्वान करता है| यह अवैध रूप से मछली पकड़ने समेत ग़ैरक़नूनी समुद्री गतिविधियों को रोकने तथा बंदरगाह सुविधाओं के सुरक्षित परिचालन को सुनिश्चित करने तथा ग़ैरकानूनी गतिविधियों से समुद्री व्यापार को बचाने सम्बन्धी सुरक्षा नीतियों को अंगीकार करने पर भी बल देता...

इमरान ख़ान का रियासत-ए-मदीना का भ्रामक सपना

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान ने भ्रष्टाचार से मुक्त एक ‘नया पाकिस्तान’ बनाने के अपने सपने के साथ अपने देश की छवि को पुनर्भाषित करने का वचन दिया था|सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने पाकिस्तान को एक इस्लामिक कल्याणकारी राज्य में परिवर्तित करने का वचन दिया, एक ऐसा राज्य जो मदीना राज्य और पैगंबर के मार्गदर्शक सिद्धांतों के मॉडेल पर आधारित हो| चरमराई हुई अर्थव्यवस्था, उनकी गठबंधन सरकार को छोड़ते हुए सहयोगी, पार्टी के अंदरूनी विवाद तथा वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफ़॰ए॰टी॰एफ़॰) द्वारा इसे काली सूची में डाल देने के डर और सत्ता के दूसरे वर्ष के समापन पर पी॰टी॰आई॰ के बैलेंस शीट को देखते हुए निश्चित रूप से यह उत्साहवर्धक नहीं दिखता है| अपनी सरकार की दूसरी सालगिरह पर, गत दो वर्षों में अपनी उपलब्धियों को गिनाने के लिए इमरान ख़ान कुछ बार टेलीविज़न स्टूडियो गए| उनके अनुसार, विदेश नीति में अपनी पसंद के माध्यम से पाकिस्तान की छवि को परिवर्तित करने के साथ कोरोनावायरस महामारी का अनुकरणीय प्रबंधन कर पाना उनकी सरकार की उपलब्धियों में से एक है| जिस काम के लिए मुख्य रूप से इसका निर्माण हुआ है, ऐस...

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत शांति के प्रति वचनबद्ध लेकिन क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने को तैयार

रक्षा मंत्री, राजनाथ सिंह ने पूर्वी लद्दाख की स्थिति पर लोक सभा को संक्षिप्त जानकारी दी| रक्षा मंत्री ने कहा, भारत का मानना है कि भारत-चीन की सीमा का संरेखण संधियों तथा समझौतों और ऐतिहासिक व्यवहारों तथा अभ्यासों द्वारा पुष्ट सुस्थापित भौगोलिक सिद्धांतों पर आधारित है| सदियों से दोनों पक्ष इस सच्चाई से सुपरिचित हैं| बहरहाल,चीनी पक्ष का मानना है कि दोनों देशों की सीमा औपचारिक रूप से सीमांकित नहीं है| भारत तथा चीन औपचारिक रूप से इस बात पर सहमत हो गए हैं कि सीमा का प्रश्न एक जटिल मुद्दा है| इसके लिए धैर्य की आवश्यकता है तथा दोनों पक्षों ने वार्ता और शांतिपूर्ण बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे का एक निष्पक्ष, उचित तथा परस्पर स्वीकार्य समाधान के प्रति वचनबद्धता जताई है| बीच में, दोनों पक्ष सहमत भी हुए कि सीमा क्षेत्र में शांति तथा प्रशान्ति को बनाए रखना द्विपक्षीय सम्बन्धों में आगे के विकास के लिए एक आवश्यक आधार है| रक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न समझौतों के अंतर्गत, दोनों पक्ष वास्तविक नियंत्रण रेखा (एल॰ए॰सी॰) के संरेखण पर अपनी-अपनी स्थितियों तथा सीमा प्रश्न पर बिना किसी प्रकार के पूर्...

दोहा अंतर-अफ़ग़ान वार्ता

12 सितंबर को अफ़ग़ानिस्तान सरकार तथा तालिबान के बीच बहु-प्रतीक्षित वार्ता की शुरुआत हुई| इससे पहले मार्च में इस शांति वार्ता के होने की बात थी, लेकिन अफ़ग़ान सरकार के साथ वार्ता शुरू करने के लिए तालिबान द्वारा लगाई गई पूर्व की शर्तों में से एक क़ैदियों के आदान-प्रदान पर बनी असहमति के कारण कथित वार्ता नहीं हो सकी थी| यह वार्ता तालिबान तथा अमरीका के बीच के समझौते का हिस्सा थी| ध्यातव्य है कि अमरीका तथा तालिबान अमरीकी सैनिकों की प्रस्थान रणनीति को योग्य बनाने की एक गुप्त वार्ता में व्यस्त थे| अफ़ग़ानिस्तान की जेलों में बंद 5,000 क़ैदियों को तालिबान रिहा करवाना चाहता था, जबकि, हिंसा में कमी लाने की शर्त पर अशरफ़ ग़नी सरकार ने वार्ता करने की बात कही| अमरीका के दबाव में, काबुल जल्द से जल्द वार्ता शुरू करने पर बल दे रहा था| प्रचंड हिंसा तथा एक मज़बूत स्थिति से वार्ता शुरू करने की जुगत में अपने नियंत्रण में अधिक से अधिक क्षेत्रों को लेने की तालिबान की कोशिशों के बावजूद अफ़ग़ान सरकार वार्ता शुरू करने को बाध्य हुई थी| पूर्ववर्ती इस्लामिक अमीरात के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, शेख़ अब्दुल हाकिम त...

भारत-आसियान संबंध विकास के लिए तैयार

दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) के साथ एक सशक्त तथा बहु-आयामी सम्बन्धों पर भारत का फ़ोकस 1990 के दशक की शुरुआत में तथा आर्थिक उदारीकरण की दिशा में भारत की अपनी यात्रा के बाद विश्व के राजनीतिक तथा आर्थिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण परिवर्तनों का एक परिणाम है| आज एक्ट ईस्ट नीति एक गतिशील तथा कार्योन्मुख नीति के रूप में परिपक्व हो चुकी है| प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2014 में म्यांमार के नेपिदा में आयोजित 9वें पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन तथा 12वें आसियान भारत शिखर सम्मेलन में औपचारिक रूप से ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को प्रस्तुत किया था| आसियान के अलावा, इस क्षेत्र में भारत ने नीति संबंधी अन्य पहल की है, जिसमें बिम्स्टेक, एम॰जी॰सी॰ आदि जैसे आसियान के कुछ सदस्य शामिल हैं| एशिया-यूरोप बैठक (ए॰एस॰ई॰एम॰), पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन (ई॰ए॰एस॰), आसियान क्षेत्रीय मंच (ए॰आर॰एफ़॰), आसियान रक्षा मंत्रियों की बैठक प्लस (ए॰डी॰एम॰एम॰प्लस) तथा विस्तारित आसियान समुद्री मंच (ई॰ए॰एम॰एफ़॰) जैसे कई क्षेत्रीय मंचों में भारत ने सक्रिय भागीदारी की है| आसियान के साथ भारत का संबंध इसकी विदेश नीति त...

विशिष्ट हाइपरसोनिक क्लब में भारत का प्रवेश

भारत ने एक स्क्रैमजेट इंजन द्वारा संचालित स्वदेशी रूप से विकसित हाइपरसोनिक तकनीक वाले प्रदर्शनकारी वाहन को सफलतापूर्वक लॉन्च करने का गौरव हासिल किया, जो अगली पीढ़ी की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलों के लिए एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ के रूप में काम करेगा। भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इसे विकसित किया है जिसने इसे एक बड़ी तकनीकी सफलता बताया है। वायु-श्वास स्क्रैमजेट इंजन का सभी तकनीकी मापदंडों को पूरा करते हुए, वायुमंडल के भीतर हाइपरसोनिक गति से सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। परीक्षण कई और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, सामग्रियों और हाइपरसोनिक वाहनों के विकास का मार्ग भी प्रशस्त करता है। अगले चरण में, डीआरडीओ पांच से छह वर्षों में लंबी दूरी की हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल विकसित करने के प्रति आशान्वित है। जब एक प्रक्षेप्य 5 मैक से अधिक गति से प्राप्त कर लेता है; जो कि ध्वनि की गति का 5 गुना है, तो उस गति को हाइपरसोनिक गति कहा जाता है। अब तक, केवल अमेरिका, रूस और चीन हाइपरसोनिक मिसाइल विकसित करने की क्षमता के साथ एक अत्यंत विशिष्ट हाइपरसोनिक क्लब शामिल हैं। अब, भारत उस अनन्य क्लब का...

आर्थिक प्रगति की राह पकड़ती अर्थव्यवस्था

शरद ऋतु के आगमन के साथ, घरेलू अर्थव्यवस्था के कुछ वास्तविक क्षेत्रों में हलचल के कुछ सकारात्मक संकेत दिखाई दे रहे हैं। हाल ही में जारी की गई वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग की नवीनतम समीक्षा द्वारा ऐसे संकेत दिये गए हैं। कोविड 19 के द्वारा व्याप्त वृहद पर अनिश्चितता को कम करने के लिए महत्वपूर्ण और अर्थव्यवस्था के सर्वाधिक प्रभावित वर्गों और क्षेत्रों के लिए आपातकालीन राहत के चुनौतीपूर्ण कार्य के साथ-साथ सरकार को कड़े लॉकडाउन का सहारा लेना पड़ा था। इस समीक्षा में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2020-21 की अप्रैल-जून तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में 23.9 प्रतिशत की तेज गिरावट आई है। लेकिन, हमारी विशाल आबादी को देखते हुए, विश्व में सबसे कम मृत्यु दर में से एक को बनाए रखने में भी इसने सहायता की है। तीव्र सुधार प्रक्रिया की दिशा में एक सहयोगी तत्व के रूप में, अर्थव्यवस्था अब एक तेज "वी-आकार" की क्षतिपूर्ति अनुभव रही है। तकनीकी रूप में, इसका अर्थ है कि अर्थव्यवस्था स्पष्ट रूप से एक तीव्र गिरावट के बाद एक मजबूत उछाल की ओर बढ़ रही है। समीक्षा में कहा गया है कि ज...

एससीओ सम्मेलन में भारत-चीन वार्ता

शंघाई सहयोग संगठन के लिए भारत की प्रतिबद्धता से यूरेशिया के साथ सहयोग बढ़ाने की भारत की इच्छा का पता चलता है। क्षेत्रीय समूह से भारत का थल सम्पर्क ना होने के बावजूद मध्य एशिया से जुड़ने का अवसर मिलता है और साथ ही आर्थिक और ऊर्जा साझेदारी बढ़ाने की भी। शंघाई सहयोग संगठन या एससीओ परिषद में विदेश मंत्रियों की दसवी बैठक में शामिल होने के लिए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ऐसे समय में मॉस्को गए जब कोविड-19 महामारी फैलने की वजह से देश अनिश्चित अंतररष्ट्रीय आर्थिक और व्यापारिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और लदाख में भी तनाव चल रहा है। भारत पहली बार एससीओ शासनाध्यक्षों को इसी साल 29 और 30 नवंबर को भारत बुलाने वाला है  भारत इस क्षेत्र में साझी सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए क्षेत्र के साथ अपने एतेहासिक संबंधों और सांमजस्य का उपयोग करना चाहता है। एससीओ भी अंतरराष्ट्रीय उतर-दक्षिण परिवर्तन गलियारे जैसी पहलों को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्रीय मंचों के रूप में इन्हें लाभकारी मानता है। इससे भारत को मध्य एशिया नीति और एससीओ क्षेत्रीय सहयोग नीति के बीच सांमजस्य बैठाने का मौका भ...

प्रगाढ़ होते भारत ईरान संबंध

भारत के दो वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों का एक ही सप्ताह में एक के बाद एक ईरान जाना दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते संबंधों को दर्शता है । शंघाई सहयोग संगठन में शामिल होने रूस गए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत लौटते समय पिछले रविवार को ईरान में रुके थे । श्री सिंह ने तेहरान में अपने समकक्ष ब्रिगेडियर जनरल आमिर हातामि से मुलाक़ात की और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा परस्पर सहयोग के मुद्दों पर विचार विमर्श किया । भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर भी शंघाई संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होने के लिए मॉस्को जाते समय तेहरान गए थे। इस दौरान उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जावद जारिफ़ से रचनात्मक मुलाकात की दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय सहयोग मजबूत करने के बारे में चर्चा की और साथ ही क्षेत्रीय घटनाक्रम की भी समीक्षा की । ये उल्लेखनीय है कि डॉ जयशंकर ने 19वें भारत ईरान संयुक्त आयोग बैठक में शामिल होने के लिए दिसंबर 2019 में तेहरान की यात्रा की थी, जबकि ईरान के विदेश मंत्री डॉ जावद जारिफ़ इसी साल जनवरी में रायसीना संवाद 2020 में शामिल होने भारत आये आये थे।  कोवि...

प्रधानमंत्री ने प्रगति के लिए सुधारों का किया समर्थन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यपाल सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्व पर अपने विचार प्रकट किए। इस अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की भी उपस्थिति रही। प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति किसी एक सरकार से संबंधित नहीं है बल्कि पूरे देश से संबंधित है और इसका सही मायनों में पालन किया जाना चाहिए चाहे सत्ता में कोई भी सरकार हो।  नीति लागू करने के लिए राष्ट्रव्यापी चर्चा पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के बारे में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच वैसी ही व्यापक जागरूकता होनी चाहिए जैसी चर्चा इस नीति का मसौदा तैयार करने से पहले विभिन्न पक्षों के बीच हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नई शिक्षा नीति और इसके प्रावधानों के बारे में हमारी जागरूकता उतनी ही गहरी और विस्तृत होनी चाहिए जितनी विमर्श प्रक्रिया रही है। दस्तावेज के व्यवहारिक उपयोग और इसके प्रावधानों पर चर्चा करना बेहद महत्वपूर्ण है। इसे तभी लागू किया जा सकेगा जब लोगों के सभी प्रश्नों और संदेहों को दूर किया जाए। उन्होंने कहा कि जब हम बदलाव...

ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक

महामारी के इस समय में वैश्विक सम्मेलनों और उच्च स्तरीय बहुपक्षीय बैठकों को बहुत सी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जब प्रमुख निर्णायक एक ही स्थान पर मौजूद होते है तब अपना पक्ष रखना, साथ मिलकर काम करना और प्रत्येक सदस्य देश द्वारा अपना फ़ैसला लेना आसान हो जाता है। लेकिन, जब ऑनलाइन या इंटरनेट के माध्यम से वार्ता की जाती है तब डिजिटल दुनिया की कई चुनौतियाँ सामने आती है। ज़रूरी कूटनीतिक कॉफ़ी बैठक, टैक्सी यात्रा और देर रात वाले भोज ना होने के साथ ही नई सामरिक नीतियों या कुछ विशेष परिस्थितियों को अपनाना बहुत ही नई व्यवस्था है। हालाँकि, वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से उच्च स्तरीय बैठक और सम्मेलन नए नियम बन रहे हैं लेकिन फिर भी रूस इस साल ब्रिक्स और एससीओ सम्मेलनों का आयोजन कर रहा है। पिछले सप्ताह ये दोनों बैठकें की गई। एससीओ या शंघाई सहयोग संगठन के रक्षा मंत्रियों की बैठक मॉस्को में हुई और ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक वीडियो कॉन्फ्रेन्स के माध्यम से हुई। ब्रिक्स सम्मेलन पहले जुलाई में होना था लेकिन बाद में कोरोना विषाणु फैलने की वजह से इसे अक्टूबर में आयोजित करना तय किया गया था।...

रक्षा मंत्री की रूस यात्रा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले सप्ताह रूस की यात्रा की। वे वहाँ द्वितीय विश्व युद्ध में विजय की 75वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में शंघाई सहयोग संगठन और सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन के विदेश मंत्रियों तथा सीआईएस सदस्यों की सामूहिक बैठक में शामिल होने के लिए गए थे। यात्रा के दौरान उन्होंने रूस के रक्षा मंत्री जनरल सर्गेई शोइगू से भी मुलाक़ात की।  कोविड-19 महामारी के दौरान हालिया सप्ताहों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मॉस्को की दूसरी यात्रा भारत के सामरिक हितों को बढ़ावा देने में रक्षा राजनय का महत्त्व दर्शाती है। जून में श्री सिंह ने द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति की याद में आयोजित रूस की विजय दिवस परेड में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। लाखों भारतीय सैनिकों के योगदान के साथ ही सोवियत सेना की अन्य मदद और युद्ध में गंठबंधन की जीत को याद करते हुए भारत की तीनों सेनाओं के दस्तों ने परेड में हिस्सा लिया था।  रूस के रक्षा मंत्री के साथ भारत के रक्षा मंत्री की द्विपक्षीय बैठक में रक्षा और सामरिक सहयोग को और मज़बूत करने के लिए बहुत से मुद्दों पर चर्चा की गई। ये बैठक 4 और 5 सितंब...