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Showing posts from June, 2020

चीन की युद्धकारिता को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हो रही कड़ी आलोचना

ऐसे समय में जब कोविड-19 महामारी के फैलाव के मामले में सूचना साझा करने को लेकर चीन की असफलता के कारण इसकी कड़ी आलोचना हो रही हो, ठीक इसी समय पिछले सप्ताह मनिला में हुई आसियान समूह के 10 राष्ट्रों की वर्चुअल बैठक में इसकी युद्धकारिता वाले व्यवहार को लेकर भी कड़ी निंदा की गई| इस समूह ने अपनी स्थिति दोहराते हुए कहा कि समुद्र के क़ानून पर हुए 1982 के संयुक्त राष्ट्र सम्मलेन (यू.एन.सी.एल.ओ.एस.) समुद्री हक़दारी, संप्रभु अधिकारों तथा समुद्री क्षेत्रों पर वैध हित निर्धारित करने का आधार है| इस मामले में भी पेईचिंग की हठधर्मिता तथा अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के प्रति कम सम्मान दिखाने सम्बन्धी स्वभाव का ख़ुलासा हुआ| यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे समय में जब विश्व महामारी से लड़ने में व्यस्त है, संयोगवश जिसकी उत्पत्ति वुहान में हुई है| चाहे हॉन्ग-कॉन्ग हो या ताइवान जलडमरूमध्य हो या फिर भारत-चीन सीमा के वास्तविक नियंत्रण रेखा (एल.ए.सी.) पर युद्ध उकसाने का कार्य हो, सभी स्थानों पर चीन की युद्धकारिता प्रधानता पर है| इस वर्ष अप्रैल महीने में, एक निर्दयतापूर्ण कार्य करते हुए एक चीनी जहाज़ ने दक्षिण चीन सागर ...

प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्म-निर्भरता आगे का रास्ता है

ऑल इंडिया रेडियो पर प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक कार्यक्रम, मन की बात में कहा कि 2020 में मन की बात कार्यक्रम अब अपनी यात्रा की आधी दूरी तय कर चुका है| इस अवधि के दौरान, स्वाभाविक रूप से इस प्रसारण के अधिकतर मुद्दे वैश्विक महामारी के इर्द-गिर्द रहे| इस आपदा से मानव-जाति का सामना हुआ, लेकिन, लोगों में अब चर्चा का अंतहीन विषय यह है कि "यह वर्ष कब जाएगा!" प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग एक या दूसरे तरीक़े से अब इस वर्ष को समाप्त होते देखना चाहते हैं| सिर्फ़ 6-7 महीने पहले, कोरोना नाम की इस विपत्ति के बारे में हम कम ही जानते थे और ना ही किसी ने इसके विरुद्ध इतनी लम्बी लड़ाई चलने की आशा की थी| ऐसा लगता है कि एक संकट काफ़ी नहीं था, दिन प्रतिदिन देश चुनौतियों के नए रूप का सामना कर रहा है| हमारे पूर्वी तट को अम्फान चक्रवात के कोप का सामना करना पड़ा, जबकि पश्चिमी तट ने निसर्ग चक्रवात का क़हर झेला| बहुत से राज्यों में, हमारे किसानों को टिड्डियों के झुण्ड का ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ा है| देश के कई भागों में रुक-रुक कर भूकंप आते रहे हैं| इन सबके बीच, देश को हमारे कुछ पड़ोसियों क...

‘मन की बात’ (13वीं कड़ी)

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | ‘मन की बात’ ने वर्ष 2020 में अपना आधा सफ़र अब पूरा कर लिया है | इस दौरान हमने अनेक विषयों पर बात की I स्वाभाविक है कि जो वैश्विक महामारी आयी, मानव जाति पर जो संकट आया, उस पर, हमारी बातचीत कुछ ज्यादा ही रही, लेकिन, इन दिनों मैं देख रहा हूं, लगातार लोगों में, एक विषय पर चर्चा हो रही है, कि, आखिर ये साल कब बीतेगा I कोई किसी को फोन भी कर रहा है, तो, बातचीत, इसी विषय से शुरू हो रही है, कि, ये साल जल्दी क्यों नहीं बीत रहा है I कोई लिख रहा है, दोस्तों से बात कर रहा है, कह रहा है, कि, ये साल अच्छा नहीं है, कोई कह रहा है 2020 शुभ नहीं है I बस, लोग यही चाहते हैं कि किसी भी तरह से ये साल जल्द-से-जल्द बीत जाए I साथियो, कभी कभी मैं सोचता हूँ, कि, ऐसा क्यों हो रहा है, हो सकता है ऐसी बातचीत के कुछ कारण भी हों | 6-7 महीना पहले, ये, हम कहां जानते थे, कि, कोरोना जैसा संकट आएगा और इसके खिलाफ़ ये लड़ाई इतनी लम्बी चलेगी I ये संकट तो बना ही हुआ है, ऊपर से, देश में नित नयी चुनौतियाँ सामने आती जा रही हैं | अभी, कुछ दिन पहले, देश के पूर्वी छोर पर Cyclone Amphan आया, तो, पश्चिमी...

एक बार फिर पाकिस्तान का स्व लक्ष्य

पाकिस्तान में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है| देश कोविड-19 की दोहरी मुसीबत और विकट आर्थिक परिदृश्य का सामना कर रहा है| वैश्विक आतंकवाद पर इसका अपना रवैया इस मुसीबत में बढ़ोतरी कर रहा है, जिसका यह कभी "फ़्रंटलाइन फ़ाइटर" था| जैसे ही अमरीका के स्टेट डिपार्टमेंट ने अपनी हालिया रिपोर्ट में ख़ुलासा किया कि क्षेत्रीय आतंकी समूहों के लिए पाकिस्तान एक "सुरक्षित आश्रय" है तथा इस्लामाबाद ने आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए कुछ भी नहीं किया है, तो पाकिस्तानी नेतृत्व ने इन आरोपों से बचाव करने की कोशिश की, लेकिन इसके बजाय विवाद और बढ़ गया| बृहस्पतिवार को पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेम्बली में चल रहे बजट सत्र में एक बहस के दौरान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान ने 9 / 11 के हमलों के मास्टरमाइंड और अल-क़ायदा प्रमुख, ओसामा बिन लादेन को एक "शहीद" कहा| श्री ख़ान ने आगे कहा कि अमरीका के आतंक पर जंग में हिस्सा लेकर इस्लामाबाद को "शर्मिंदगी" झेलनी पड़ी| पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस्लामाबाद को सूचित किये बग़ैर अमरीकी बलों ने पा...

मज़बूत भारत एल.ए.सी. पर चीन के उकसावे का विरोध कर रहा है

विगत दशकों में भारत-चीन सीमा पर चीन अपनी सैन्य मूलभूत सुविधाओं को सशक्त करता रहा है| दूसरी ओर, भारत ने सीमा के भारतीय पक्ष पर अपनी मूलभूत सुविधाओं में सुधार करना बहुत देर से शुरू किया| भारत के इस कार्य में गति 2014 के बाद आई है|              अपनी सीमा परियोजना के हिस्से के रूप में, भारतीय पक्ष ने अब तक 1000 किलोमीटर की सड़क के निर्माण कार्य को संपन्न किया है| भारत-चीन सीमा परियोजना के तीन चरण हैं और भारत, परियोजना के पहले चरण को पूरा करने के निकट है| भारतीय मूलभूत सुविधाओं के निर्माण ने चीन को सशंकित बनाया है| चूँकि, भारत सीमा पर अपनी मूलभूत सुविधाओं के निर्माण कार्य को आगे बढ़ा रहा है, एल.ए.सी. पर इसकी गश्ती क्षमता में बहुत अधिक वृद्धि हुई है, जो चीन को चिढ़ाने के लिए पर्याप्त है|              परिणामस्वरूप, सीमा की स्थिति तनावपूर्ण हो चुकी है| पहला गतिरोध 5 मई, 2020 को ...

रक्षा मंत्री की रूस यात्रा

भारत के रक्षा मंत्री, राजनाथ सिंह की रूस यात्रा भारत के लिए ना केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि यह रूस और चीन के लिए भी महत्वपूर्ण है, विशेषकर तब, जब दुनिया कोविड-19 महामारी के लिए एक साथ आ रही है| इस तीन दिवसीय यात्रा के दौरान, भारतीय रक्षा मंत्री ने रूस के शीर्ष सैन्य अधिकारियों से बातचीत की और दूसरे विश्व युद्ध में जर्मनी पर सोवियत की जीत की 75वीं वर्षगाँठ को चिन्हित करने के लिए मॉस्को में आयोजित भव्य सैन्य परेड में भागीदारी की| विजय दिवस की परेड में भारत की भागीदारी ने ना केवल दूसरे विश्व युद्ध में रूस और अन्य देशों के महान बलिदानों के प्रति एक श्रद्धांजलि को चिन्हित किया, बल्कि इस विश्व युद्ध में भारत के सैनिकों के भी महत्वपूर्ण योगदान को चिन्हित किया| भारत तथा चीन के बीच बढ़ते सीमा गतिरोध के बीच, श्री सिंह की हुई इस यात्रा की मुख्य बातों को परेड में 75 सदस्यीय भारतीय सैन्य टुकड़ियों की त्रिकोणीय सेवा की भागीदारी को शंका की नज़र से देखा जा सकता है, क्योंकि यहां चीन के सैनिकों ने भी भागीदारी की| यह यात्रा नई दिल्ली की परिपक्वता तथा इसकी नीतियों की शक्ति की पृष्ठभूमि में भी हुई...

नेपाल को अपने हाल के कर्मों पर दोबारा ग़ौर करने की आवश्यकता है

भारत के साथ नेपाल का हर दिन का जीवन किसी भी क्षेत्र से कई तरह से जुड़ा हुआ होकर भी असंबंधित है| वास्तव में इस प्रकार के सम्बन्ध विश्व में और कहीं देखने को नहीं मिलते हैं| लेकिन, नेपाल की राजनीति में व्याप्त भारत-विरोधी राष्ट्रवाद को उपयोग करने की इच्छा और जटिलताएं हैं| हाल के हफ़्तों में, इस प्रकार की राजनीति ने भूगोल तथा इतिहास द्वारा जनित समय की कसौटी पर परखे गए भारत-नेपाल के संबंधों को एक छोटी सी वजह के लिए एक गंभीर चुनौती के लिए उकसाया है| पिछले सप्ताह नेपाल द्वारा अपने संविधान में संशोधन किये जाने और भारत के संप्रभु क्षेत्रों को मानचित्र के आधार पर अद्यतन को शामिल करने के साथ मामलों में अनियंत्रित गिरावट आई| ये चीनी सीमा के निकट उत्तराखंड में स्थित कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा के क्षेत्र हैं, जिनका इस्तेमाल पारम्परिक रूप से कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए किया जाता है| इस मानचित्र की रुपरेखा नेपाल के राष्ट्रीय चिन्ह में है| इसे एकपक्षीय रूप से शामिल किया गया था तथा इसने एक मुद्दे की शुरुआत कर दी है, जो स्पष्ट रूप से असमर्थनीय है और इससे हर परिस्थिति में बचा जाना चाहिए था| नेपाल ...

आर.आई.सी. के विदेश मंत्रियों की बैठक

हाल ही में त्रिपक्षीय रूस-भारत-चीन(आर.आई.सी.) फ़ॉर्मेट के अंतर्गत रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की 17वीं बैठक हुई| इस बैठक की अध्यक्षता रूस ने की| इस बैठक का उद्देश्य कोविड-19 संकट के प्रति एक सामान्य प्रतिक्रिया के लिए रणनीति बनाने के अलावा, दूसरे विश्व युद्ध में नाज़ीवाद पर जीत के 75वें वर्ष का जश्न मनाना था| नई दिल्ली तथा पेईचिंग के बीच चल रहे सीमा गतिरोध के परिदृश्य में स्पष्ट रूप से यह वर्चुअल इवेंट हुआ| यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि भारत के विदेश मंत्री, डॉ. एस. जयशंकर ने भविष्य में किसी प्रकार के तनाव को बढ़ाने के प्रति आर.आई.सी. के लिए प्रारंभिक एक आवश्यक शर्त के रूप में राष्ट्र की स्थिति को पूरी तरह से समझाया| इसमें अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के प्रति सम्मान दिखाने की आवश्यकता, सहयोगियों के वैध हित को पहचानना, बहुपक्षवाद को समर्थन देना तथा सर्वहित को बढ़ावा देना शामिल था| यह आर.आई.सी. फ़ॉर्मेट के मुख्य उद्देश्यों का बड़े स्तर पर समीक्षा करता है, जो निःसंदेह, अपने सच्चाई के क्षण का सामना कर रहा है| इस तिकड़ी के भीतर बढ़ते दोष को ध्यान में रखते हुए, इसके प्रभाव को लेकर प्रश्न उठाये ...

भारत ने गलवान घाटी पर चीन के दावे को ख़ारिज़ किया

भारत-चीन सीमा पर वास्तविक नियंत्रण रेखा में 15 जून को भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करनेवाले 20 भारतीय सैनिकों तथा अधिकारियों की नृशंस हत्या के बाद, चीन लद्दाख में गलवान घाटी पर अपने झूठे दावे को लेकर बेतरतीब ढंग की बातें कर रहा है| गलवान घाटी पर निःसंदेह भारत का संप्रभु प्रादेशिक क्षेत्राधिकार है, जबकि पेईचिंग स्वयं की पूर्व की स्थिति के उलट छल और कपट से परिपूर्ण एक कृत्य कर रहा है| चीन के निराधार दावे का भारत सरकार ने दृढ़ता से खंडन किया है| विदेश मंत्रालय ने एक वक्तव्य में गलवान घाटी पर भारत की सुव्यवस्थित ऐतिहासिक स्थिति को दोहराया है| नई दिल्ली ने बल देते हुए कहा है कि "एल.ए.सी. के मामले में चीनी पक्ष की अतिश्योक्तिपूर्ण और असमर्थनीय दावेदारी की कोशिशें अब अस्वीकार्य हैं|" ये प्रयास चीन की ख़ुद की स्थिति के अनुरूप नहीं हैं| भारत न केवल इस क्षेत्र पर वास्तविक नियंत्रण रखता है, बल्कि इसका नाम भी यही बताता है| ब्रिटिश-भारत के समय के दौरान, ग़ुलाम रसूल गलवान नामक एक स्थानीय निवासी के नाम पर इसका नामकरण किया गया था| इतने सशक्त प्रमाण और साक्ष्यों के बावजूद, पेईचिंग ने इस क्...

भारत एक विजेता बनकर उभरेगा

विगत कुछ दिनों से भारत तथा चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एल.एल.सी.) के एक निश्चित बिंदु पर अचानक भड़की अनावश्यक हिंसा पर रिपोर्टिंग करने में मीडिया व्यस्त रही है| बहुत से देशों के बीच सीमा के मुद्दों पर भिन्नताएं हो सकती हैं और यह एक सच्चाई है| इनमें से अधिकतर देशों ने इन भिन्नताओं के शांतिपूर्ण निपटारे के लिए सैन्य तथा राजनयिक दोनों ही स्तरों पर कई तरह की व्यवस्थाएं बना रखी हैं, ऐसे में भारत कोई अपवाद नहीं है| फिर चीनी सैनिकों ने अकारण आक्रामकता क्यों दिखाई, वो भी ऐसे समय में जब पूरी दुनिया एक ऐसी महामारी से लड़ रही है, जिसकी उत्पत्ति चीन में हुई है| चीन की इस आक्रामकता को लेकर जनता में रोष और आक्रोश है| हालांकि, क्रय शक्ति के मामले में दोनों ही विकासशील अर्थव्यवस्थाएं हैं, ये विश्व की दूसरी तथा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं| दोनों राष्ट्रों में विकास का सबसे बड़ा स्रोत विश्व व्यापार में इनकी प्रभावशाली भागीदारी है| भारत की तुलना में चीन के लिए यह अधिक सत्य है| रूढ़िवादी मार्क्सवादी विचारधारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को पूंजीवादी शोषण का एक उपकरण मा...

यू.एन.एस.सी. की सीट के लिये भारत निर्वाचित

भारत संयुक्त राष्ट्र का एक संस्थापक सदस्य है| इसने 26 जून,1945 को सैन फ़्रांसिस्को सम्मलेन में यू.एन. चार्टर पर हस्ताक्षर किया था| यू.एन. चार्टर ने पांच ग़ैर निर्वाचित सदस्य चीन, फ्रांस, यूनाइटेड किंग्डम, अमरीका तथा सोवियत संघ और 2 वर्ष के कार्यकाल में अपनी सेवा देनेवाले 10 निर्वाचित सदस्यों को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (यू.एन.एस.सी.) को बनाया| यू.एन. चार्टर ने यू.एन.एस.सी. को अंतर्राष्ट्रीय शान्ति और सुरक्षा बनाये रखने की मुख्य ज़िम्मेदारी दी है| अगस्त 1947 में स्वाधीनता प्राप्ति के बाद, 1950-51 के कार्यकाल के लिए भारत पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में एक रिक्त सीट के लिए निर्वाचित हुआ| तब से, सुरक्षा परिषद् में दो वर्ष के कार्यकाल के लिए भारत सात बार निर्वाचित हो चुका है| औसतन यह कार्यकाल एक दशक में एक बार है| सुरक्षा परिषद् में भारत का गत कार्यकाल दिसंबर 2012 में समाप्त हुआ| नवम्बर 2013 में, आठवें कार्यकाल के लिए भारत की उम्मीदवारी का सन्देश भारत तथा इस्लामिक गणतंत्र अफ़ग़ानिस्तान से एक साझा संचार-व्यवस्था के अंतर्गत यू.एन.जी.ए. को दिया गया| इसके बाद, भारत के पक्ष मे...

प्रधानमंत्री ने कहा की अर्थव्यवस्था में "अच्छे संकेत" दिख रहे हैं

कोविड-19 महामारी से निपटने सम्बन्धी आगे की योजनाएं तथा अनलॉक-1 के बाद उभरती स्थिति पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से राज्यों के मुख्य मंत्रियों तथा संघ शासित प्रदेशों के लेफ़्टिनेंट गवर्नरों के साथ बातचीत की| मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की इस प्रकार की यह छठवीं चर्चा थी| पूर्व की चर्चाएं 20 मार्च, 2 अप्रैल, 11 अप्रैल, 27 अप्रैल और 11 मई को हुई थीं| प्रधानमंत्री ने माना कि इस महामारी से निपटने के लिए उचित समय पर लिया गया निर्णय देश में इसके प्रसार को रोकने में प्रभावशाली रहा है| उन्होंने कहा कि हम जब पीछे मुड़कर देखते हैं तो पाते हैं कि हमने विश्व के लिए सहकारी संघवाद का एक उदाहरण प्रस्तुत किया है| प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को बचाने की कोशिश की है| उन्होंने रेखांकित किया कि यातायात के सारे साधन अब खुले हैं, लाखों प्रवासी श्रमिक अब अपने-अपने गाँव पहुँच चुके हैं, हज़ारों भारतीय नागरिक विदेश से स्वदेश लौट चुके हैं और यहाँ तक कि भारत का एक विशाल जनसँख्या वाला देश होने के बावजूद कोरोनावायरस को यहाँ शेष ...

भारत ने नेपाल के नए नक़्शे को ख़ारिज़ किया

नेपाल की संसद के निचले सदन, प्रतिनिधि सभा ने 13 जून, 2020 को देश के राजनीतिक तथा क्षेत्रीय नक़्शे को परिवर्तित करने के लिए एक संविधान संशोधन विधेयक को अनुमोदित किया | नेपाल के नए नक़्शे में उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ ज़िले के भारतीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों को नेपाल के क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है| एक प्रस्ताव को अंगीकार करते हुए, पूर्व में सदन ने विधेयक पर चर्चा तीव्र गति से की| मंत्रिमंडल ने नेपाल के नए नक़्शे को 18 मई, 2020 को अनुमोदित किया था, जिसमें कालापानी, लिम्पियाधुरा तथा लिपुलेख को नेपाली क्षेत्र के रूप में दिखया गया है| ये क्षेत्र उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत सदा से ही भारत के अभिन्न अंग रहे हैं| भारत के रणनीतिक महत्व के लगभग 350 वर्ग किलोमीटर का भूखंड इस क्षेत्र में शामिल है| इस क्षेत्र को कैलाश-मानसरोवर तीर्थस्थल के महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में जाना जाता है| यह प्रत्येक भारतीय का पसंदीदा स्थान है| हालांकि, इसके अलावा यह भारत तथा तिब्बत के बीच का व्यापार मार्ग भी है| यह भारत, नेपाल तथा चीन के स्वायत्त तिब्बत क्षेत्र के तिराहे के आस-...

प्रधानमंत्री ने "विकास के परे" के मॉडल का आह्वान किया

इंडियन चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स (आई.सी.सी.) के 95वें पूर्ण वार्षिक अधिवेशन के उद्घाटन सम्बोधन के दौरान, प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने कहा की कोई भी संकट हमें अवसर प्रदान करता है| हमें एक "आत्म-निर्भर" भारत बनाने के लिए इन अवसरों को पहचानने की आवश्यकता है| उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि हम जलवायु परिवर्तन के बीच कोविड- 19 महामारी जैसे विशाल जन स्वास्थ्य संकट से निपट रहे हैं| भारतीय अर्थव्यवस्था "अधीन और नियंत्रण" मोड में है| प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को "प्लग एन्ड प्ले" मोड में ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया| इन घोषणाओं की विस्तृत कार्य-प्रणालियों की प्रतीक्षा है| रूढ़िवादी रवैये को छोड़कर, भारत को एक वैश्विक स्तर के प्रतिस्पर्धी घरेलू आपूर्ति क्रम तैयार करने की आवश्यकता है| इसके लिए साहसिक निवेश फैसलों की आवश्यकता है| निजी कॉर्पोरेट निवेश को आकर्षित करने के लिए जन निवेश को बढ़ाना समय की मांग है|  एम.एस.एम.ई. तथा ग़ैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एन.बी.एफ.सी.) में तरलता डालने सम्बन्धी सुधारों पर प्रधानमंत्री मोदी ने बल दिया| वित्त मंत्री ने कई भागों...

कोविड-19 के बीच पाकिस्तान का आर्थिक संघर्ष

पाकिस्तान दोहरी चुनौतियों के प्रभाव का सामना कर रहा है| इनमें पहली तो कोविड-19 महामारी है और दूसरी अत्यधिक आर्थिक कठिनाई की चुनौती है| यह चुनौती देश के सबसे बदतर स्थितियों में से एक के दौरान आई है| अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष(आई.एम्.एफ.) द्वारा 6 बिलियन अमरीकी डॉलर के एक बेलआउट पैकेज जारी करने के दौरान लगाईं गई कड़ी शर्तों के कारण, पाकिस्तान पहले ही कठिन आर्थिक संकट से गुज़र रहा था| गत वर्ष के बजट में, पकिस्तान ने जी.डी.पी. के 0.6 प्रतिशत के एक प्राथमिक घाटे का लक्ष्य निर्धारित किया था| छूटों को कम करने, विशेष प्रबंधनों को घटाने और कर प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए कर नीति राजस्व में लामबंदी के उपाय का समर्थन इसे मिलना था| पकिस्तान को कर राजस्व उत्पन्न करने में बार-बार संघर्ष करना पड़ा है| आई.एम्.एफ़. के बेलआउट पैकेज का उद्देश्य सार्वजनिक वित्त को दुरुस्त करना तथा कर नीति और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से सार्वजनिक ऋण में कटौती करना तथा कर भार के पारदर्शी वितरण और इसमें अधिक समानता को सुनिश्चित करना था| इस बेलआउट के पहले अंश को जारी करते हुए, आई.एम.एफ़. ने कहा था कि पाकिस्तान के ऊर्...

प्रधानमंत्री ने उद्योग जगत को कहा कि भारत जल्द ही अपनी विकास गति को प्राप्त करेगा

भारत और अधिक संरचनात्मक सुधारों के साथ अपनी विकास की गति को फिर से प्राप्त करेगा| यह गति विकास यात्रा में एक सहयोगी के रूप में निजी क्षेत्र के साथ कोविड-19 की चुनौतियों के साथ निपटते हुए, हमारे देश की दिशा बदलेगी| यह राजधानी में भारतीय उद्योग परिसंघ (सी॰आई॰आई॰) के 125वें वार्षिक सत्र में एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया एक हितकर संदेश था| शब्दों को कम किए बगैर, श्री मोदी ने उद्योग के संचालकों को आश्वस्त किया कि “एक साथ मिलकर हम निश्चित रूप से अपनी विकास गति को फिर से प्राप्त करेंगे|” परेशान घरेलू उद्यमियों में विश्वास का संचार करते हुए, प्रधानमंत्री ने बल दिया कि देश की क्षमताओं तथा संकट प्रबंधन, देश की विविध प्रतिभाओं तथा तकनीक, इसके नवोन्मेष तथा बौद्धिकता, राष्ट्र के मेहनतकश किसानों और सूक्ष्म, लघु तथा मझोले उद्यमों (एम॰एस॰एम॰ईज़॰) की अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण शाखाओं में उनका बेहिचक विश्वास पहले की तरह विकास की गति को हासिल करने के प्रति उन्हें आशान्वित करता है| जी॰डी॰पी॰ में एम॰एस॰एम॰ई॰ का भाग 30 प्रतिशत है| इसकी परिभाषा की ताज़ा स्पष्टता...