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Showing posts from March, 2020

‘मन की बात’ (10वीं कड़ी)

मेरे प्यारे देशवासियो, आमतौर पर ‘मन की बात’, उसमें मैं कई विषयों को ले करके आता हूँ | लेकिन आज, देश और दुनिया के मन में सिर्फ और सिर्फ एक ही बात है- ‘कोरोना वैश्विक महामारी’ से आया हुआ ये भयंकर संकट | ऐसे में , मैं और कुछ बातें करूं वो उचित नहीं होगा | बहुत सी महत्वपूर्ण बाते करूं, लेकिन आज मेरा मन करता है कि इसी महामारी के सन्दर्भ में कुछ बातें बताऊं | लेकिन सबसे पहले मैं सभी देशवासियों से क्षमा माँगता हूँ | और मेरी आत्मा कहती है कि आप मुझे जरुर क्षमा करेंगें क्योंकि कुछ ऐसे निर्णय लेने पड़े हैं जिसकी वजह से आपको कई तरह की कठिनाइयाँ उठानी पड़ रही हैं, खास करके मेरे गरीब भाई-बहनों को देखता हूँ तो जरुर लगता है कि उनको लगता होगा की ऐसा कैसा प्रधानमंत्री है, हमें इस मुसीबत में डाल दिया | उनसे भी मैं विशेष रूप से क्षमा मांगता हूँ | हो सकता है, बहुत से लोग मुझसे नाराज भी होंगे कि ऐसे कैसे सबको घर में बंद कर रखा है | मैं आपकी दिक्कतें समझता हूँ, आपकी परेशानी भी समझता हूँ लेकिन भारत जैसे 130 करोड़ की आबादी वाले देश को, कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई के लिए, ये कदम उठाये बिना कोई रास्ता नहीं था | कोरोना क...

मन की बात- मुख्य बिंदु

बेहद लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात के 63वे अंक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि पूरी दुनिया और भारत कोविड 19 महामारी को लेकर चिंतित है। उन्होंने देश भर में लॉकडाउड करने के लिए देशवासियों से माफ़ी मांगी है। उन्होंने कहा कि वे निर्धन वर्ग द्वारा झेली जा रही परेशानियों को समझते हैं लेकिन कोरोना विषाणु को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन बहुत ज़रूरी था। श्री मोदी ने कहा कि हमारे प्राचीन गंथों में लिखा है कि रोग को शुरुआत में ही दूर कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश यही कर रहा है। कोविड19 सभी के लिए एक चुनौती है। संपूर्ण मानवता को इस दुष्चक्र को रोकने के लिए एकजुट हो जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने ज़ोर दिया कि लॉकडाउन प्रत्येक भारतीय को बचाने के लिए है। लक्ष्मणरेखा के भीतर रहकर हम कोरोना विषाणु से बच सकते हैं। ग्रंथों से उदाहरण देते हुए श्री मोदी ने आज की मन की बात में कहा कि आरोग्यम महाभाग्यम यानी सेहत सबसे बड़ी नियामत है। प्रधानमंत्री मोदी ने चिकित्सकों, नर्सों और कोरोना मरीज़ों के उपचार में लगे सभी लोगों को धन्यवाद कहा। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने ठीक हो चुके कुछ म...

प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन

नमस्कार ! मेरे प्यारे देशवासियों, मैं आज एक बार फिर, कोरोना वैश्विक महामारी पर बात करने के लिए आपके बीच आया हूं। 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का जो संकल्प हमने लिया था, एक राष्ट्र के नाते उसकी सिद्धि के लिए हर भारतवासी ने पूरी संवेदनशीलता के साथ, पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना योगदान दिया। बच्चे-बुजुर्ग, छोटे-बड़े, गरीब-मध्यम वर्ग-उच्च वर्ग, हर कोई परीक्षा की इस घड़ी में साथ आया। जनता कर्फ्यू को हर भारतवासी ने सफल बनाया। एक दिन के जनता कर्फ़्यू से भारत ने दिखा दिया कि जब देश पर संकट आता है, जब मानवता पर संकट आता है तो किस प्रकार से हम सभी भारतीय मिलकर, एकजुट होकर उसका मुकाबला करते हैं। आप सभी जनता कर्फ़्यू के लिए प्रशंसा के पात्र हैं। साथियों, आप कोरोना वैश्विक महामारी पर पूरी दुनिया की स्थिति को समाचारों के माध्यम से सुन भी रहे हैं और देख भी रहे हैं। आप ये भी देख रहे हैं कि दुनिया के समर्थ से समर्थ देशों को भी कैसे इस महामारी ने बिल्कुल बेबस कर दिया है। ऐसा नहीं है कि ये देश प्रयास नहीं कर रहे हैं या उनके पास संसाधनों की कमी है। लेकिन कोरोना वायरस इतनी तेजी से फैल रहा है कि तमाम तैयारियों और ...

कोविड19 से लड़ने के लिए भारत का संकल्प

1.3 अरब भारतीयों ने कोरोना विषाणु से लड़ने का अपना संकल्प दोहराया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर देश ने रविवार को जनता कर्फ़्यू का पालन किया। राजनेताओं, खिलाड़ियों, फ़िल्म कलाकारों और अन्य जानी-मानी हस्तियों सहित लोगों ने अपने घरों की छतों, छज्जों और खुली खिड़कियों पर आकर तालियाँ, थालियाँ और घंटियाँ बजाकर आगे बढ़कर विषाणु से लड़ने वाले चिकित्सकों, नर्सों, चिकित्सा सहायकों, पुलिस, सफ़ाईकर्मियों और ज़रूरी सामान तथा सेवाएँ उपलब्ध करवाने वाले लोगों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार को राष्ट्र को संबोधित किया था और लोगों से रविवार, 22 मार्च को सुबह सात से रात नौ बजे तक स्वेच्छा से अपने घरों में ही रहने का आह्वान किया था। पूरे देश ने इस महान कार्य में सहयोग किया। ज़रूरी सेवाएँ चालू रहीं। जन स्वास्थ्य को देखते हुए बहुत से राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने 31 मार्च तक पूरी तरह लॉकडाउन या बंद की घोषणा की है। कोरोना विषाणु को तीसरे चरण यानी कि सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोकने के लिए ये बहुत ज़रूरी है। उन्होंने लोगों से घरों में रहने और केवल बहुत ज...

संसद में बीता सप्ताह

इस सप्ताह कोरोना विषाणु के ख़तरे समेत बहुत से अन्य मुद्दे संसद के दोनों सदनों में छाए रहे। विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने लोक सभा को बताया कि संयुक्त अरब अमारात में रहने वाले 8 भारतीय पृथकवास में हैं यानी अलग-थलग रह रहे हैं जबकि कुवैत से ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। ईरान में 6 हज़ार से ज़्यादा भारतीय हैं जिनमें मुख्य रूप से केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख तथा जम्मू और कश्मीर तथा महाराष्ट्र से लगभग 11 सौ तीर्थयात्री, जम्मू और कश्मीर तथा अन्य क्षेत्रों के लगभग तीन सौ छात्र, केरला, तमिलनाडू और गुजरात तथा अन्य क्षेत्रों के लगभग एक हज़ार मछुआरे तथा ईरान में धार्मिक शिक्षा या आजीविका के लिए लंबे समय से रह रहे अन्य भारतीय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ईरान में फँसे भारतीयों को सुरक्षित वापिस लाने की कोशिशों पर ध्यान दे रही है। जाँच तथा नमूने एकत्र करने के लिए 6 भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों का एक दल ईरान भेजा गया है। उन्होंने बताया कि जाँच के लिए ईरान में मौजूद तीर्थयात्रियों, छात्रों और अन्य भारतीयों के एक हज़ार सात सौ छ: नमूने लिए जा चुके हैं और 16 मार्च को 389 भारतीयों क...

कोविड 19 का सामना करने की रणनीति में सार्क शामिल

रविवार, 15 मार्च 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी सार्क के सभी सदस्य देशों से वीडियो कॉन्फ़्रेंस के माध्यम से घातक विषाणु कोविड 19 का सामना करने के लिए वार्ता की। वार्ता का उद्देश्य तेज़ी से फैल रहे इस विषाणु से बचाव की एक साझा मज़बूत रणनीति तैयार करना था। इस विषाणु की वजह से अभी तक दुनिया भर में दस हज़ार से ज़्यादा लोगों की मृत्यु हो चुकी है और पूरी दुनिया में विषाणु से प्रभावित दो लाख से ज़्यादा लोग अस्पतालों में अलग-थलग रहते हुए स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। सभी आठ सार्क देशों ने कोविड 19 से लड़ने के लिए संयुक्त रणनीति की प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और श्रीलंका, मालदीव और अफ़्ग़ानिस्तान के राष्ट्रपतियों तथा भारत, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के प्रधानमंत्रियों ने वीडियो वार्ता में सक्रियता से भाग लिया। पाकिस्तान की ओर से प्रधानमंत्री के विशेष स्वास्थ्य सहयोगी जफ़र मिर्ज़ा ने इसमें हिस्सा लिया। सभी नेताओं ने इस महामारी से बचाव के लिए अपनी कोशिशें साझा करने की ज़रूरत पर बल दिया। वे सभी इस तथ्य को लेकर सचेत थे कि ये एक...

प्रधानमंत्री ने कहा- राष्ट्र का संकल्प, कारोना से लड़ने की कुंजी

रेडियो और टेलीविजन पर कल शाम प्रसारित राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर सतर्कता बरतने को कहा। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से अपील की कि वे असावधानी से पेश न आएं और यह ना मान बैठे कि वो ठीक हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि लगभग पूरी दुनिया इस जानलेवा और विनाशकारी बीमारी के कहर से प्रभावित है और ये भारत में भी दस्तक दे चुकी है और अब वो स्थिती नहीं बची है कि हम इसे नजरअंदाज करें। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों में एक अरब 30 करोड़ भारतीयों ने आवश्यक सावधानी बरतते हुए कोरोना के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया है। उन्होंने आगाह किया कि भारत में अब तक संक्रमित लोगों की अपेक्षाकृत कम संख्या को लेकर किसी को भी किसी प्रकार के भ्रम में नहीं रहना चाहिए कि वो मान ले कि सबसे बुरा समय बीत चुका है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सबसे ज्यादा प्रभावित देशों के आंकड़े बताते हैं कि शुरुआती चरण के बाद कैसे संख्या एक दम आसमान को छूने लगी। इसलिए, भारत सावधानी हटने का जोखिम नहीं उठा सकता है और प्रत्येक नागरिक को सतर्क रहने की आवश्यकता है। जो देश अपने यहां लो...

अमरीका और इरान के बीच फँसा इराक़

इराक़ लंबे समय से आंतरिक विभाजन और बाहरी हस्तक्षेप का सामना कर रहा है। 2017 में आईएसआईएस की हार से पैदा हुई आशा के बावजूद इराक़ के लोगों की समस्या का अंत नहीं हो रहा। आंतरिक भ्रष्टाचार और पूंजीवाद के घालमेल को लेकर इराक़ी लोगों की आकांक्षाओं को पूरी करने में बग़दाद की सरकार की नाकामी की वजह से ऐसा हो रहा है। इसके अतिरिक्त राजनीतिक श्रेणी के बीच आपसी सामंजस्य के अभाव में सरकार के गठन में भी रुकावट पैदा हुई बल्कि सरकारी प्रक्रिया भी शक्तिहीन हो गई। राजनीतिक और सैन्य हस्तक्षेप, विशेष रूप से ईरान और अमरीका के द्वारा किए गए हस्तक्षेप ने आंतरिक विभाजन को और बढ़ा दिया। इसका विरोध करते हुए इराक़ी लोगों ने देश भर में प्रदर्शन और विरोध आरम्भ किए और सरकार से ज़िम्मेदार शासन, बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाने, पूंजीवाद और भ्रष्टाचार की साठ-गाँठ और बाहरी हस्तक्षेप समाप्त करने की मांग की। सुरक्षा बलों और कातिब हिज़बुल्लाह जैसे ईरान समर्थन वाले लड़ाकों द्वारा की गई कार्रवाई में कुछ प्रदर्शनकारियों के मारे जाने के बाद ये प्रदर्शन एक बड़े संकट में तबदील हो गए। इराक़ में अमरीकी सेना की उपस्थिति समाप्त करन...

नोवेल कोरोना डर पर भारत का रक्षात्मक उपाय

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने नोवेल कोरोना वायरस के प्रकोप को एक वैश्विक महामारी कहा है | इस कारण, विश्वभर में 7,500 से अधिक लोग मर चुके हैं तथा कई देशों में लॉकडाउन जैसी स्थिति है, ऐसे में भारत ने एक बार फिर से इस संकट की घड़ी में नेतृत्व का प्रदर्शन किया है | चीन से फैलने वाले इस घातक वायरस के प्रकोप को कम करने के लिए भारत ने इंटेलिजेंस स्तर पर तेज़ी लाने के साथ अति सक्रियता दिखाई है |  कोविड-19 वायरस से प्रभावित देशों से भारतीय नागरिकों को तेज़ी से उनके देश में लाकर विशेष सुविधा के साथ उन्हें अलग रखा जा रहा है | मानवता के दृष्टिकोण से, इस वायरस से बुरी तरह से प्रभावित राष्ट्रों से भारत ने अन्य देशों के बहुत से नागरिकों को वहाँ से बाहर निकाला है | भारत के स्वास्थ्य मंत्री, डॉ॰ हर्षवर्धन ने कहा कि भारत इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए अत्यधिक सक्रियता से काम कर रहा है | चूंकि, भारत चीन का एक निकटतम पड़ोसी है तथा यहाँ की जनसंख्या 1॰3 बिलियन है, फिर भी यहाँ केवल 120 पॉज़िटिव पाये गए हैं | इसी से पता चलता है कि भारत इस दिशा में अत्यधिक सावधानी बरत रहा है | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ...

कोविड-19 के विरुद्ध क्षेत्रीय प्रतिक्रिया

विश्व स्वास्थ्य संगठन अर्थात डब्ल्यूएचओ द्वारा महामारी के रूप में घोषित कोविड 19 का मुकाबला करने के उपायों को संयुक्त रूप से विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सार्क नेताओं का एक वीडियो सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव अद्वितीय था। इसने समूचे दक्षिण एशियाई क्षेत्र का तत्काल ध्यान आकर्षित किया। चूंकि क्षेत्र के सभी देश बेहद आबादी वाले हैं, इसलिए वायरस के फैलने का खतरा एक सच्चाई है। वायरस के प्रसार का मुकाबला सभी के लिए समान रूप से एक कठिन कार्य है। यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि चीन में उत्पन्न होने वाले इस वायरस के कारण दुनिया भर में 7000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। नोवेल कोरोनोवायरस ने कई देशों को एक साथ अनेक प्रकार से प्रभावित किया है; उड़ानों को रद्द करना, सार्वजनिक स्थानों को बंद करना और नागरिकों को घर के अंदर रहने का आग्रह करना जैसे कार्य करने के लिए बाध्य होना पड़ा है। भारत ने अपने आस पास पड़ोसी प्रथम की नीति के बाद बांग्लादेश और मालदीव के नागरिकों के साथ-साथ चीन, इटली और ईरान जैसे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों से अपने नागरिकों को निकाला है। भारत अपने हवाई अड्...

कोविड-19  के विरुद्ध सार्क के साझा संघर्ष की प्रधानमंत्री पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) देशों के नेताओं से क्षेत्र में घातक कोविड 19 वायरस के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए संसाधनों को एकत्र और एक आम रणनीति तैयार करने के लिए करने में हाथ मिलाने नेताओं का स्पष्ट आह्वान पाकिस्तान के प्रधान मंत्री इमरान खान सहित सभी सार्क देशों के नेताओं द्वारा तत्काल स्वीकार कर लिया गया। प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल की दुनिया भर में सराहना हो रही है। यह भी आशा जगाता है कि यह हमारे समय की प्रमुख विपत्तियों में से एक से लड़ने के लिए एक साथ आने से अंततः सार्क का पुनरुत्थान हो सकता है जो 2014 के बाद से लगभग क्षीण हो गया था। दक्षिण एशियाई और उप-महाद्वीपीय मामलों के विशेषज्ञ अभी भी इस तरह की साझेदारी के लिए तैयार नहीं हैं। फिर भी सार्क के दो मुख्य घटक - भारत और पाकिस्तान के बीच एक बहुपक्षीय मंच पर इस तरह लघु उद्देश्य के लिए जमे हुए रिश्ते और सहयोग का विगलन सार्क संबंधों के लिए माहौल तैयार कर सकता है। सार्क दक्षिण एशिया के लोगों को मित्रता, विश्वास और समझ की भावना के साथ मिलकर काम करने के लिए एक मंच प्रदान ...

अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों की बढ़ती सरगर्मी।

अमरीका में नवम्बर 2020 में देश के 46वें राष्ट्रपति के चुनाव की प्रक्रिया शुरु हो गई है। रिपब्लिकन पार्टी जिसे ग्रैण्ड ओल्ड पार्टी या जी.ओ.पी. के नाम से भी जाना जाता है; की तरफ से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मुख्तलिफ राज्यों के 1099 प्रमुखों का समर्थन हासिल कर लिया है। पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी प्राप्त करने के लिए उन्हें 1276 प्रतिनिधियों के अनुमोदन की ज़रूरत है। डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से फिलहाल पूर्व उपराष्ट्रपति जो बिडन और वरमाउण्ट के सीनेटर बर्नी सैण्डर्स के बीच काँटे का मुकाबला चल रहा है। सुपर ट्यूज़डे अधिवेशनों में जो बिडन को भारी समर्थन हासिल हुआ, जिससे वे अपने प्रतिद्वन्द्वी से काफी आगे निकल गए हैं। नियमों के मुताबिक, राज्यों के प्रतिनिधियों का अनुमोदन जीतने वाले प्रत्याशी को डेमोक्रेटिक पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा। अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया के तहत, इच्छुक प्रत्याशियों को राज्यों के प्रतिनिधियों का समर्थन हासिल करना होता है। इसके लिए बाकायदा पार्टी अधिवेशनों का आयोजन होता है जिनमें राज्यों के प्रतिनिधि भाग लेते हैं। य...

तेल कीमतों पर जारी तनातनी

साउदी अरब द्वारा तेल के दामों में 30 फीसदी से भी ज़्यादा की कमी के साथ ही तेल उत्पादकों के बीच खींचतान का दौर शुरु हो गया है। 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद से तेल की कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट पहली बार देखी जा रही है। यह स्थिति साउदी अरब और रूस के बीच तेल उत्पादन में कटौती को लेकर उपजी असहमति से उत्पन्न हुई है। साउदी अरब के नेतृत्व वाला तेल उत्पादक देशों का संगठन ‘ओपेक’ कोरोना वायरस से उपजी वैश्विक मन्दी को ध्यान में रखते हुए तेल उत्पादन में प्रतिदिन 1.5 मिलियन बैरल की कटौती करना चाहता था, जबकि रूस अपने स्तर पर उत्पादन घटाने पर सहमत नहीं था। इस तकरार के बीच साउदी तेल कम्पनी ब्रैण्ट ने अपनी तरफ से दामों में ऐतिहासिक कमी की घोषणा कर दी। कोरोना वायरस से उत्पन्न संकट के चलते दुनियाभर के वित्तीय संस्थानों, विनिर्माण और ऊर्जाक्षेत्र में निवेश पर मन्दी की छाया मँडरा रही है। ऐसे में साउदी अरब ने तेल के दामों में कटौती करके फिॅस्कल-ब्रेक-इवन के हालात पैदा कर दिए हैं। यह शब्दावली ऐसे हालातों के लिए इस्तेमाल की जाती है, जबकि तेल उत्पादक अपने स्तर पर उत्पादन में कटौती करते हैं और तेल निर्यातकों को बज...

कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ता तनाव

उत्तर कोरिया ने इस सप्ताह के आरंभ में कम से कम तीन अनाम मिसाईलों को छोड़ा, जो किम जोंग-उन के प्रशासन द्वारा दो सप्ताह में दूसरी बार किया गया था। प्योंगयांग द्वारा अपने पहले के लाइव-फायर अभ्यासों की निंदा के विरोध में "त्वरित" कार्रवाई करने की धमकी दिये जाने के दो दिन बाद ही यह प्रक्षेपण किया गया। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उसने उत्तर कोरिया के पूर्वी तट से कोरियाई प्रायद्वीप और जापान के बीच पानी में अलग-अलग प्रकार के छोटी दूरी के प्रक्षेपास्त्रों का पता लगाया। प्रक्षेपास्त्रों की अधिकतम उड़ान की दूरी 200 किलोमीटर और अधिकतम ऊंचाई 50 कि.मी. थी। दक्षिण कोरिया ने कहा है कि हर प्रकार की तैयारियों के साथ-साथ उसकी सेना पूरे घटनाक्रम पर नज़र रख रही है। उसने कहा है कि इन प्रक्षेपणों से उत्तर कोरिया के साथ 2018 में किए गए उन समझौतों का उल्लंघन होता है जो कि कोरियाई प्रायद्वीप में सैन्य तनाव कम करने के उद्देश्य से संपादित किये गए थे। उत्तर कोरियाई के सरकारी मीडिया ने बताया है कि उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हनोई में किम के शिखर सम्मेलन, जो बि...