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Showing posts from January, 2021

अरब-भारत सहयोग फोरम की बैठक

अरब-भारत सहयोग मंच के वरिष्ठ अधिकारियों की तीसरी बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सम्पन्न हुई। विदेश मंत्रालय में (महापौर, पासपोर्ट और वीजा तथा प्रवासी भारतीय मामलों) के सचिव, संजय भट्टाचार्य और सहायक विदेश मंत्री एवं अरब देशों की लीग के साथ मिस्र के स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत मोहम्मद अबू अल-ख़ैर ने बैठक की सह-अध्यक्षता की थी जिसमें अरब देशो और भारत के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ अरब लीग के महासचिवों की भागीदारी रही। वरिष्ठ अधिकारियों ने अरब और भारत के बीच मौजूद ऐतिहासिक और सभ्यतागत सम्बंधों को याद किया और दोनों पक्षों को एक सूत्र में पिरोने वाले वाणिज्यिक और सांस्कृतिक सम्बंधों के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने अरब देशो औरभारत के सहयोग के लिए मजबूत नींव, महान क्षमता और व्यापक संभावना की सराहना की, अरब-भारत के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए मंच की भूमिका की जिम्मेदारी का इसमें अहम स्थान है। वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की और दोनों पक्षों के बीच सहयोग और समन्वय तंत्र को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया जो एक तरह स...

भारत विश्व के सबसे बड़े कोविड-19 टीकाकरण अभियान शुरू करने को तैयार

विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण में, भारत कोरोनावायरस के विरुद्ध अपनी 1॰3 बिलियन आबादी को टीके लगाने की शुरुआत 16 जनवरी से करेगा| इस चुनौतीपूर्ण तथा जटिल कार्य के पहले चरण में 30 मिलियन अगली धार में काम करने वाले लोगों तथा स्वास्थ्य कर्मियों का टीकाकरण किया जाएगा| इसके बाद 50 वर्ष से अधिक उम्र के 270 मिलियन लोगों तथा सहरुग्णता वाले या संक्रमित होने के उच्च जोखिम वर्ग के 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों का टीकाकरण किया जाएगा| जुलाई महीने तक 300 मिलियन लोगों को टीके लगाने का लक्ष्य रखा गया है, जो अमरीका की लगभग पूरी आबादी के बराबर है| यह टीकाकरण एक अभूतपूर्व स्तर का होगा| विकसित करने, विनिर्माण करने से लेकर एक मुख्य आपूर्तिकर्ता बनने में भारत इस वैश्विक टीकाकरण कार्यक्रम में अपने दो “मेड इन इंडिया” टीके-कोवैक्सीन तथा कोविशील्ड के साथ एक निर्णायक भूमिका निभाएगा| कोवैक्सीन, कोविड-19 के विरुद्ध भारत का पहला स्वदेशी टीका है, जिसका निर्माण हैदराबाद स्थित फ़ार्मा कंपनी, भारत बायोटेक ने किया है| दूसरे टीके कोविशील्ड को ऑक्सफ़ोर्ड तथा एस्ट्राज़ेनेका ने संयुक्त रूप से विकसित किया है और इस टीके का निर्माण पुणे...

आत्मनिर्भर भारत में प्रवासियों की भूमिका

भारत के विदेश मंत्री, डॉ॰ एस॰ जयशंकर ने 16वें प्रवासी भारतीय दिवस समारोह के दौरान “आत्मनिर्भर भारत में डायसपोरा की भूमिका” पर आयोजित एक सत्र को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया| डॉ॰ जयशंकर ने कहा कि आत्मनिर्भर दृष्टिकोण का वैश्विक तात्पर्य विषयवस्तु का मुख्य आकर्षण रहा| यह प्रवासियों के लिए सशक्त संपर्कों के लिए नए द्वार खोलने में सहायता भी करता है| विदेश मामलों के मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का उद्देश्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय क्षमताओं को निर्मित करना है, ताकि हम वैश्विक स्तर पर एक बड़ा योगदान कर सकें| हालांकि, यह एक प्रशंसनीय लक्ष्य था| लेकिन कोविड-19 महामारी के अनुभव ने अधिक विश्वसनीय, लचीले, भरोसेमंद तथा अधिक आपूर्ति शृंखलाओं की आवश्यकता को देश में पहुंचाया है| इस प्रयास में डायसपोरा को सम्मिलित करना स्वाभाविक है| भारतीय डायसपोरा राष्ट्र निर्माण के लिए सदा ही उत्साही योगदानकर्ता रहा है| दूसरे, अपने समाजों के उच्च विजेता के रूप में, वे अपने काम के लिए संसाधनों, प्रौद्योगिकी, श्रेष्ठ अभ्यासों तथा नवाचार को लाना सहन कर सकते हैं| तीसरे, वे एक वास्तविक वैश्विक पहचान के लिए इस महत्वकांक्ष...

16वां प्रवासी भारतीय दिवस

प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने 16वें प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर उदघाटन सम्बोधन वर्चुअल माध्यम से किया| प्रधानमंत्री ने नए साल 2021 के अवसर पर सभी को शुभकामनायें दीं| श्री मोदी ने कहा की आज विश्व के कोने-कोने में बसा भारतीय डायसपोरा इन्टरनेट से जुड़ा हो सकता है, लेकिन हम सभी एक दूसरे के प्रति और मदर भारती से स्नेह के साथ जुड़े हुए हैं| उन्होंने कहा कि विश्व भर में मदर भारती के गौरव को बढ़ाने वाले सभी सहयोगियों को प्रत्येक वर्ष “प्रवासी भारतीय सम्मान” के साथ सम्मानित करने की एक परंपरा है| इस यात्रा की शुरुआत के बाद 60 से अधिक अलग-अलग देशों में बसे लगभग 240 व्यक्तित्व सम्मानित किए गए हैं| भारत रत्न से सम्मानित, दिवंगत अटल बिहारी वाजपेयी के मार्गदर्शन में इस यात्रा की शुरुआत हुई थी| इसी प्रकार, विश्व भर के हज़ारों सहयोगी भारत को जानिए प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में भागीदारी कर चुके हैं| यह संख्या बताती है कि वे अपनी जड़ों से दूर हो सकते हैं, लेकिन नई पीढ़ी का जुड़ाव अपनी मिट्टी से बड़े स्तर पर हो रहा है| इस प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता के 15 विजेता भी इस वर्चुअल समारोह में शामिल थे| प्रधानमंत्री ने स...

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार निरंतर जारी

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार एवं भेदभाव निरंतर जारी है। यह सब वर्ष 1947 में पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के बाद से ही हो रहा है। लेकिन स्थितियां बीती सदी के आठवें दशक से ज़्यादा बिगड़ीं। शुरुआत में अत्याचार के शिकार मुख्यतः हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और ईसाई हुआ करते थे लेकिन बाद में पाकिस्तान के अलग-अलग भागों में रहने वाले शिया, अहमदिया, मुहाजिर, हजरास समेत इसी तरह के अन्य समूह भी चपेट में आए। यह अत्याचार और भेदभाव विभिन्न रूपों में देखा जा रहा है जिसमें अपहरण, हत्या, सामूहिक हत्या, धर्मांतरण, हिंसा की चेतावनी, न्याय के विकल्प के बिना की जाने वाली हत्याएं और ईशनिंदा के आरोपों में हत्याएं शामिल हैं। अल्पसंख्यकों के विरुद्ध होने वाले इन अत्याचारों के पीछे मुख्यतः ऐसी ताकतें हैं, जो धार्मिक कट्टरपंथ से प्रेरित हैं। अहमदिया समुदाय को पहले ही विधर्मी घोषित कर दिया गया है। पाकिस्तान में सुन्नी बहुसंख्यक और शिया अल्पसंख्यकों के बीच धार्मिक टकराव बढ़ता गया है। धार्मिक कट्टरता से जुड़ी अत्याचार की घटना हाल ही में बलूचिस्तान में घटी, जहां कोयला खदानों में काम करने वाले हजारा समुदाय क...

भारत-श्रीलंका की साझेदारी का आधार आपसी संवेदनशीलता

भारत के विदेश मंत्री, डॉ॰ एस॰ जयशंकर श्रीलंका के अपने प्रतिपक्ष के आमंत्रण पर कोलंबो की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर थे| यह 2021 में विदेश मंत्री की पहली विदेश यात्रा तो थी ही साथ ही यह नए वर्ष में किसी विदेशी उच्च पदधारी की श्रीलंका की पहली यात्रा थी| डॉ॰ एस॰ जयशंकर ने राष्ट्रपति, गोठभय राजपक्षे, प्रधानमंत्री, महिंदा राजपक्षे, विदेश मंत्री, दिनेश गुनावर्धने, मत्स्योद्योग मंत्री, डगलस देवानन्दा, पूर्व प्रधानमंत्री, रनिल विक्रमसिंघे, विपक्षी नेता, सजीथ प्रेमदासा, संपदा आवास और सामुदायिक आधारभूत संरचना राज्य मंत्री, जीवन ठोंडमान तथा पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र विकास राज्य मंत्री, सथासिवन वियलेंदिरन, तमिल नेता तथा श्रीलंका के व्यावसायिक समुदाय के साथ मुलाक़ात की| इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय सम्बन्धों के आड़े आ रही विशेष चुनौतियों को संबोधित करने की प्रक्रियाओं में सुविधा पहुंचाना तथा सम्पूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना था| दोनों देशों के बीच के समझौतों तथा सहमति पत्रों के क्रियान्वयन में हो रही देरी मुख्य मुद्दों में से एक मुद्दा है| इस यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री ने श्रीलंका की आर्थिक र...

हाँग काँग में चीन की कड़ी क़ानूनी कार्रवाई

चीन के नए राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून का कथित रूप से उल्लंघन करने के मामले में हाँग काँग में पुलिस ने लगभग 50 लोकतन्त्र समर्थकों को गिरफ़्तार किया है| गत वर्ष एक अनाधिकारिक प्रारम्भिक चुनाव में लोकतन्त्र समर्थक आंदोलनकारियों ने भागीदारी की थी| हाँग काँग की क़ानून व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए लोकतन्त्र समर्थक नीति निर्माताओं के अवसरों को बढ़ाने के लिए इसका आयोजन किया गया था| गत वर्ष जून महीने में स्व-स्वायत्त क्षेत्र के लिए पेईचिंग द्वारा चीन के राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून पारित किए जाने के बाद हुई सामूहिक गिरफ़्तारी हाँग काँग के लोकतन्त्र आंदोलन के विरुद्ध सबसे बड़ी कार्रवाई है| हाँग काँग पुलिस ने गिरफ़्तारी की पुष्टि नहीं की है| इस द्वीप की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी, हाँग काँग डेमोक्रेटिक पार्टी के पूर्व अध्यक्ष समेत कम से कम 7 सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया है| पूर्व के नीतिनिर्माताओं की भी गिरफ़्तारी हुई है| ख़बरों के अनुसार, 2014 में हुए हाँग काँग में विरोध प्रदर्शनों के ज़िम्मेदार मुख्य व्यक्ति तथा विधि के पूर्व प्रोफ़ेसर पेन्नी ताई को भी गिरफ़्तार किया गया है| वे गत वर्ष के प्रारंभिक चुनावों के मु...

भारत ने फिजी को पहुंचाई मानवीय सहायता

भारत के फिजी के साथ ऐतिहासिक संबंध हैं। यह संबंध 1879 में उस समय शुरू हुए थे जब गिरमिटिया व्यवस्था के अंतर्गत गन्ने की खेती के लिए भारतीय श्रमिकों को फिजी ले जाया गया था। 1879 से 1916 के बीच लगभग 60 हजार भारतीयों को भी फिजी ले जाया गया। 20वीं सदी की शुरुआत में भारतीय व्यापारी और अन्य लोग भी फिजी पहुंचने लगे। कामगारों के आंदोलन और 1915 तथा 1917 में फिजी जाने वालों सी एफ एंन्ड्रयूस की रिपोर्ट के बाद 1920 में गिरमिटिया व्यवस्था समाप्त हो गई। आज 9 लाख की आबादी में 37 प्रतिशत लोग भारतीय मूल के हैं। 1970 में फिजी की स्वतंत्रता से पहले भारतीय मूल के लोगों के हितों की देखभाल के लिए 1948 तक भारत का आयुक्त होता था। आजादी के बाद इस पद को उच्चायुक्त में बदल दिया गया। दोनों पक्षों के बीच एक मजबूत तथा प्रभावशाली संबंध हैं। भारत और फिजी के बीच उच्च स्तरीय यात्राएं होती रहती हैं। भारत ने चक्रवाती तूफान से प्रभावित लोगों के लिए राहत सामग्री की दो खेप भेजी थी जो फिजी पहुंच चुकी है। 17-18 दिसंबर 2020 को द्विपीय देश श्रेणी 5 के समुद्री तूफान 'यासा' से बुरी तरह प्रभावित हुआ और इसमें अहम आधारभूत ढां...

पाकिस्तान में राजनीतिक धोखाधड़ी जारी

पाकिस्तान में विपक्षी दलों में गैर सरकारी संगठन पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट या पीडीएम ने लाहौर में मीनार-ए-पाकिस्तान पर 2020 में अपने विरोध प्रदर्शन का पहला चरण समाप्त किया। इस विरोध प्रदर्शन को इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को सत्ता से हटाने के लिए निर्णायक झटका करार दिया। हालांकि लाहौर का जलसा इच्छित परिणाम सामने नहीं ला सका और दल का मजबूत गढ़ माने जाने वाले पंजाब में पीएमएल-एन कोई खास प्रदर्शन नहीं कर पाई। इस्लामाबाद तक लंबी यात्रा के रूप में पीडीएम ने दूसरे चरण के प्रदर्शन की घोषणा की थी। लेकिन पीडीएम का मनोबल इस समय कमजोर है। पीडीएम के बहुत से सदस्यों के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सभाओं से इस्तीफा देने के विचार का विरोध किया जो कि लाहोर जलसा के बाद उनका अगला कदम हो सकता था। जमात-ए-उलेमा-ए-इस्लामी एफ में दरार पड़ने लगी है और मौलाना फज्ल उर्र रहमान के विरोध में आवाजें बुलंद होने लगी हैं। साथ ही पाकिस्तान सरकार ने भी अपनी जवाबी रणनीति आरंभ कर दी है क्योंकि प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि वे एनआरओ के अतिरिक्त किसी भी मुद्दे पर पीडीएम से वार्ता करने के लिए तैयार हैं। ...

भारत ने कोविड-19 का टीका तैयार किया

'आत्मानिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' अभियानों की एक बड़ी सफलता के रूप में, भारत के वैज्ञानिक और चिकित्सा समुदाय ने अपनी कर्तव्य की रेखा को पार करते हुए देश के लिए पहली स्वदेशी कोविड-19 वैक्सीन तैयार कर ली है। हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक की वैक्सीन, कोवाक्सिन को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) द्वारा "सीमित आपातकालीन उपयोग" के लिए अनुमोदन कर दिया गया है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे के ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका विकसित कोविशील्ड को डीसीजीआई द्वारा आपातकालीन उपयोग की मंजूरी भी दी गई है। ये दोनों टीके सुरक्षित, कुशल, सस्ते और भारत के मौसम की स्थिति के लिए उपयुक्त हैं। सीरम और भारत बायोटेक टीकों को दो खुराक में दिया जाना है। सभी टीकों को 2-8 डिग्री सेल्सियस के बीच संग्रहीत किया जाना है। टीकाकरण कार्यक्रम जल्द ही घोषित किये जाने की आशा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना के खिलाफ उत्साहपूर्ण लड़ाई को मजबूत करने के लिए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक टीकों के डीसीजीआई अनुमोदन को निर्णायक मोड़ बताया है। ट्वीट्स की एक श्रृंखला में, प्रधानमंत्र...

रक्षा उत्पादों के निर्यात क्षेत्र में भारत के बढ़ते कदम

भारत रक्षा उपकरणों का निर्यातक बनने की तैयारी कर रहा है। भारत ने 5 बिलियन अमरीकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है। भारत ने वित्तीय वर्ष 2018 की तुलना में वित्तीय वर्ष 2019 में रक्षा उत्पादों के निर्यात को 4,682 करोड़ रुपये से दोगुना 10,745 करोड़ रुपये करने में सफलता प्राप्त की है।  आत्म निर्भर भारत योजना के अंतर्गत भारत विभिन्न रक्षा उपकरणों और मिसाइल उत्पादन क्षमता को लगातार बढ़ावा दे रहा है। ‘आकाश’ देश की महत्वपूर्ण मिसाइल प्रणाली में से एक है और इसके विकास एवं उत्पादन में 96 प्रतिशत स्वदेशी तकनीकि एवं कौशल का उपयोग किया गया है। आकाश मिसाइल सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है जिसकी क्षमता 25 किलोमीटर की है। इस मिसाइल को वर्ष 2014 में भारतीय वायु सेना में जबकि 2015 में भारतीय थल सेना में शामिल किया गया।  आकाश मिसाइल प्रणाली के सेवा में शामिल किए जाने के बाद विभिन्न मित्र देशों ने अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनों/ रक्षा प्रदर्शनों और एयरो इंडिया प्रदर्शन इत्यादि के दौरान इसमें दिलचस्पी दिखाई। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद भारतीय निर्माता भी विभिन्न देशों द्वारा जारी आरएफ़आई/आरएफ़पी में भा...

भारत ने सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा  परिषद में आठंवी पारी आरम्भ की

पहली जनवरी 2021 से भारत ने सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में दो वर्षों के लिए चुने जाने पर अपनी आठंवी पारी शुरू की है। 1950 में पहली पारी से सयुंक्त राष्ट्र महासभा के दो तिहाई से ज्यादा सदस्यों के मतों से ये चुनाव होता आया है। इसके विपरीत पांच स्थायी या पी 5 सदस्यों को सुरक्षा परिषद में कभी भी इतना बड़ा लोकतांत्रिक निर्वाचन समर्थन नहीं मिला है। सुरक्षा परिषद में भारत का प्रभाव दो मुद्दों पर निर्भर करेगा। पहला तो ये की सुरक्षा परिषद् किस प्रकार अपने फैसले लेगी। पी 5 सदस्यों के विशेषाधिकार या वीटो अधिकार की वजह से ये प्रक्रिया इन्हीं के प्रभाव में रही। वीटो अधिकार का इस्तेमाल 1946 से 293 बार किया गया है। वीटो की वजह से फ़ैसला लेने में सामने आये गतिरोध की वजह से मानवीय स्तर पर त्रासदी का सामना करना पड़ा है। इस गतिरोध का सबसे ताज़ा उदहारण सयुंक्त राष्ट्र और चीन के बीच 2020 की शरूआत में देखने को मिला, जिसकी वजह से कोविड-19 महामारी को लेकर सभी सदस्यों की प्रतिक्रिया के लिए राजनीतिक समर्थन हेतु परिषद कोई प्रस्ताव स्वीकार नहीं कर पाई। ये एक उभरती वैश्विक ताक़त के रूप में भारत की आक...