Posts

Showing posts from August, 2019

बदहाल पाकिस्तान

पाकिस्तान, भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर पर अपने रुख के चलते अब उलझ गया है। जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्ज़ा दिए जाने वाले अनुच्छेद 370 को जब से भारत ने संशोधित किया है तब से पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि उसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से, यहाँ तक कि मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया के उसके प्रभावशाली मित्र देशों से भी समर्थन नहीं मिल रहा है। यह पहली बार है जब मुस्लिम ‘उम्मा’ देश कश्मीर मुद्दे पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। कुछ प्रभावशाली देश कश्मीर को भारत का आंतरिक मामला बता रहे हैं। इन सबके बीच पाकिस्तान अब युद्ध की धमकी दे रहा है। केवल तुर्की और मलेशिया ने पाकिस्तान के विलाप को तवज्जो दी है। लेकिन भारतीय भगोड़े ज़ाकिर नाइक के मलेशिया समुदाय पर कड़ी प्रतिक्रिया का सामना करने वाली डॉ महातिर मोहम्मद की सरकार ने ना सिर्फ ज़ाकिर को प्रतिबंधित कर दिया था बल्कि इसने जम्मू कश्मीर पर कोई भी प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद में भी पाकिस्तान को मुँह की खानी पड़ी जहां पाकिस्तान और चीन की चाल नाकाम हो गई। इसके बाद पाकिस्त...

भारत - रूस : सहयोग के नए क्षेत्रों की खोज

भारत और रूस अपने द्विपक्षीय संबंधों को, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के दौरान नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार हैं। वह 4-6 सितंबर 2019 से व्लादिवोस्तोक में दोनों देशों के बीच 5 वें वार्षिक पूर्वी आर्थिक मंच में मुख्य अतिथि और 20 वें वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। ऐसी नई संभावनाओं का पता लगाया जा रहा है, जिसमें सहयोग के नए क्षेत्रों को शामिल किया गया है और भारत तथा रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार सामरिक साझेदारी पुनः सक्रिय हो गई है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के निरसन का स्वागत करने वाले रूस पहले देशों में से एक था। मॉस्को ने इसे भारत का आंतरिक मामला करार दिया था और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की स्थिति का समर्थन किया था। इस महीने की शुरुआत में, भारतीय वाणिज्य मंत्री, पीयूष गोयल चार मुख्यमंत्रियों के साथ व्लादिवोस्तोक गए, उन्होंने भारतीय राज्यों और रूसी सुदूर पूर्व प्रांतों के बीच यूरी टुटनेव, रूस के उप प्रधान मंत्री और सुदूर पूर्वी संघीय जिले के राष्ट्रपति के साथ साझेदारी के प्रस्ताव पर चर्चा की। भारत आर्थिक सहयोग और निवेश को बढ़ाने के ...

जी-7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की बैठक

प्रधानमंत्री मोदी को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन ने बिअरिट्ज़, फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन में 'विशेष अतिथि' के रूप में आमंत्रित किया था। भारत ईरान परमाणु समझौते को बनाए रखने और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई जैसे कई मुद्दों पर फ्रांस के साथ खड़ा है। इस शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प एक-दूसरे से मिले थे। बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने व्यापार और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा की। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि नई दिल्ली विश्व व्यापार संगठन द्वारा दिए गए ‘विकासशील राष्ट्र’ टैग का लाभ उठा रहा है और भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले उत्पादों पर उच्च शुल्क लगा दिया है। इस कथित पूर्वाग्रह का मुकाबला करने के लिए, अमेरिका ने भारत से इस्पात आयात पर शुल्क लगाया है और भारतीय उत्पादों के लिए प्राथमिकता का दर्जा को समाप्त कर दिया है। भारत ने जून 2019 में अमेरिका से निर्यात किए गए 28 उत्पादों पर प्रतिशोधी शुल्क लगाया था। दोनों नेताओं ने सामरिक संबंधों को व्यापक बनाने के तरीकों पर भी बात की। यद्यपि व्यापार द्विपक्षी...

जापान दक्षिण कोरिया व्यापारिक तनाव

पूर्वी एशिया की दो प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं जापान और दक्षिण कोरिया आजकल व्यापारिक तनातनी में उलझे हुए हैं। जापान ने दक्षिण कोरिया के विरुद्ध हाइड्रोजन फ्लोराइड गैस, फ्लोरीनीकृत पॉलियामाइड एवं प्रकाश-रोधक रसायनों सहित उच्च तकनीकी उद्योग में उपयोग किए जाने वाले तीन रसायनों पर अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की बात कहकर व्यापारिक प्रतिबंध लगा दिए।  जापान ने इन रसायनों के उपभोग पर अपनी चिंता जताई है जिनका सैन्य अनुप्रयोग भी किया जाता है। जापान ने कथित रूप से, दक्षिण कोरिया पर संवेदनशील पदार्थों के अंतर्राष्ट्रीय निर्यात से जुड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रतिबन्धों को लागू करने के प्रति अपनी चिंता प्रकट की है। यही नहीं, जापान ने 1100 महत्वपूर्ण पदार्थों की जांच के बाद, दक्षिण कोरिया को अपने 'प्राथमिकता वाले देशों की श्वेत सूची' से बाहर कर उस पर अधिक कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। ऐसे प्रतिबंध यदि लंबी अवधि तक जारी रहते हैं तो इस स्थिति में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर कुप्रभाव पड़ सकता है। शीर्ष दक्षिण कोरियाई कंपनियां जापान पर रसायनों के एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में निर्भर हैं...

जी-7 शिखर सम्मेलन

महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए विश्व की सात सबसे अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं को एक लचीला मंच मुहैया कराने के लिए फ्रांस की पहल पर 1975 में जी-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया था | नाज़ुक क्षेत्रों में जी-7 के बाहर प्रमुख देशों को सम्मिलित करके इन चर्चाओं को विस्तार देने से जी-7 की चर्चाओं का असर वैश्विक स्तर का हो सकता है | 1989 में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में आतंकी गतिविधियों को वित्त मुहैया कराने और मनी-लॉन्डरिंग के मामलों से निपटने के लिए वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफ़एटीएफ़) का गठन किया गया | हाल के वर्षों में, आतंकवाद को पाकिस्तान के वित्तपोषण से निपटने में इस मंच के माध्यम से एफ़एटीएफ़ के एक सदस्य के रूप में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को सशक्त बनाने के लिए सक्रियता से अपना योगदान दिया है | फ्रांस के बियारेट्ज़ में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में एक “विशेष बियारेट्ज़ सहयोगी” के रूप में भागीदारी करने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आमंत्रण सभी प्रकार की असमानता से अधिक प्रभावशाली, वैध तरीक़े तथा सुनिश्चित रूप से निपटने के लिए एक “प्रमुख लोकत...

प्रधानमंत्री का संयुक्त अरब अमारात और बहरीन दौरा द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती प्रदान करता है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सप्ताहांत संयुक्त अरब अमारात और बहरीन की यात्रा की। चार साल में यह संयुक्त अरब अमारात की उनकी तीसरी और बहरीन में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। ये यात्रा अरब खाड़ी देशों के साथ भारत की बढ़ते रिश्तों को रेखांकित करती है। संयुक्त अरब अमारात में, प्रधानमंत्री ने अबू धाबी के युवराज मोहम्मद बिन जायद अल-नाहयान के साथ मुलाकात की और पारस्परिक हित के महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। श्री मोदी को संयुक्त अरब अमारात के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार "ऑर्डर ऑफ जायद" से भी सम्मानित किया गया। श्री मोदी को उनके विशिष्ट नेतृत्व के साथ-साथ भारत और संयुक्त अरब अमारात के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान के लिये अप्रैल 2019 में इस पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। भारतीय प्रधानमंत्री ने संयुक्त अरब अमारात में रूपे कार्ड भी लॉन्च किया। इसके साथ ही स्वदेशी भारतीय कार्ड से भुगतान स्वीकार करने के लिए संयुक्त अरब अमारात पश्चिम एशिया में पहला और सिंगापुर और भूटान के बाद तीसरा देश बन गया है। दोनों देशों...

ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा: गहराते द्विपक्षीय संबंध

ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति एड्गर चाग्वा लुंगु राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के निमंत्रण पर भारत यात्रा पर आए। नई सरकार के गठन के बाद ये ज़ाम्बिया के राष्ट्राध्यक्ष की और राष्ट्रपति लुंगु की भारत की पहली राजकीय यात्रा थी। पिछली बार ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति लेवी म्वानावासा ने 16 साल पहले अप्रैल 2003 में भारत की यात्रा की थी। भारत की अफ़्रीका नीति के संदर्भ में ये यात्रा अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही। इस नीति के अंतर्गत तीसरे भारत-अफ्रीका मंच सम्मेलन प्रक्रिया के चलते 32 भारतीय राजनेताओं ने अफ्रीकी देशों की और 35 अफ्रीकी नेताओं ने भारत की यात्रा की है। इसके अतिरिक्त राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा अप्रैल 2018 में ज़ाम्बिया की राजकीय यात्रा के 16 महीनों बाद राष्ट्रपति लुंगु ने भारत की यात्रा की है। ये यात्रा द्विपक्षीय संबंधों में हुई पूर्ण प्रगति का जायज़ा लेने का एक अहम अवसर रही। राष्ट्रपति भवन में स्वागत समारोह का आयोजन,राजघाट का दौरा, राष्ट्रपति से मुलाक़ात तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता ज़ाम्बिया के राष्ट्रपति की यात्रा के मुख्य बिंदु रहे। श्री लुंगु ने नई दिल्ली म...

प्रगाड़ होते भारत-फ्रांस संबंध

इस सप्ताह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फ्रांस यात्रा से द्वीपक्षीय संबंध और दोनों देशों के बीच 20 साल पुरानी सामरिक साझेदारी मज़बूत हुई है। 1998 में दोनों देशों ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। जम्मू और कश्मीर से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम के बीच नई दिल्ली को उस समय बहुत प्रोत्साहन मिला जब फ्रांस ने इसे भारत का आंतरिक मामला माना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में बंद दरवाजे के पीछे हुए विचार-विमर्श में भारत का साथ दिया। प्रधानमंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि भारत और फ्रांस के संबंध स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे तथा कई दशकों के मज़बूत सहयोग की नींव पर टिके हैं। दोनों पक्षों ने सामरिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने के दिशा-निर्देश को सराहा और कौशल विकास, नागरिक उड्डयन, सूचना प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष जैसे कुछ विशेष क्षेत्रों की पहचान भी की गई। श्री मोदी ने कहा कि रक्षा सहयोग इस संबंध का एक मज़बूत स्तम्भ है। उन्होंने सितम्बर माह में भारत को पहला राफेल वायुयान दिए जाने का भी स्वागत किया। द्वीपक्षीय साझेदारी पर ज़ोर देते हुए दोनों नेताओं ने आतंकवाद और कट्टरतावाद जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना करने का...

भारत तथा नेपाल द्विपक्षीय सम्बन्धों को सशक्त बनाने के प्रति वचनबद्ध

काठमाण्डू में भारत-नेपाल साझा आयोग की हाल की पाँचवीं बैठक में कनेक्टिविटी, आर्थिक साझेदारी, व्यापार, परिवहन, बिजली, जल संसाधन तथा संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्रों पर विशेष फ़ोकस के साथ द्विपक्षीय सम्बन्धों की सम्पूर्ण संभावना की विस्तृत समीक्षा की गई है | दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने इस बैठक की सह-अध्यक्षता की | आपसी हितों तथा क्षेत्रीय मुद्दों पर बांग्लादेश के नेताओं के साथ फलदायी चर्चा करने के बाद भारत के विदेश मंत्री, डॉ॰ सुब्रमण्यम जयशंकर ने ढाका से काठमाण्डू की उड़ान भरी |  साझा आयोग की बैठक के पहले, डॉ॰ जयशंकर ने नेपाल के प्रधानमंत्री, के॰ पी॰ शर्मा ओली से मुलाक़ात की | इस वर्ष मई महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यालय में दोबारा निर्वाचित होकर आने के बाद किसी भारतीय मंत्री का यह पहला उच्चस्तरीय नेपाल दौरा था | नेपाल के विदेश मंत्रालय ने एक वक्तव्य में कहा कि विगत दो वर्षों में उच्च-स्तरीय यात्राओं के आदान-प्रदान के बाद भारत-नेपाल के सम्बन्धों के समग्र पहलुओं में आई गति पर साझा आयोग ने ख़ुशी जताई | प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नेपाल की दो लगातार यात्राओं के बाद, गत...

बालटिक्स में भारत की पहुँच

भारत ने बाल्टिक देशों के साथ महत्वपूर्ण मील के पत्थर तब स्थापित किए जब उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया का दौरा किया। बाल्टिक देशों के लिए भारत की तरफ से यह पहली उच्चस्तरीय आधिकारिक यात्रा थी। इन देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत के अलावा श्री नायडू ने व्यापार मंच के साथ बैठक, भारतीय समुदाय के साथ बातचीत सहित कृषि, साइबर सुरक्षा, ई-गवर्नेंस और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े कई सहयोग एवं समझौतों पर हस्ताक्षर किए। भारतीय उपराष्ट्रपति ने एस्टोनिया के मिशन कांफ्रेंस के प्रमुखों को संबोधित भी किया। इन चर्चाओं के केंद्र में था भारतीय सभ्यता के संस्कृत, योग और आयुर्वेद के साथ गहरे संबंध जो बाल्टिक देशों के मानस पटल पर भी अंकित है। यह ऐसे विषय हैं जिनके चलते द्विपक्षीय संबंधों में और नजदीकी आएगी, जो वास्तव में वसुधैव कुटुंबकम सूत्र वाक्य का प्रतिबिंब होगा। उल्लेखनीय है कि सभी तीन बाल्टिक देशों में हिंदी अध्यक्ष मौजूद है। उपराष्ट्रपति ने इन देशों की राजधानियों अलावा अन्य शहरों के साथ संबंध मजबूत करने पर बल दिया और इसी क्रम में उन्होंने लिथुआनिया के दूसरे बड़े श...

भारत के विदेश मंत्री की पहली बांग्लादेश यात्रा

भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की बांग्लादेश की पहली यात्रा मुख्यतः बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना को अक्टूबर के पहले हफ्ते में भारत की राजकीय यात्रा के लिए आमंत्रित करने के क्रम में एक शिष्टाचार यात्रा के तौर पर थी। विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण शेख हसीना को दिया। इस पहल को दोनों पड़ोसियों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के एक महत्वपूर्ण मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्री की बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के साथ बातचीत उपयोगी रही। इसका बैठक का उद्देश्य शेख़ हसीना और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच अक्टूबर में होने वाली बैठक के लिए जमीन तैयार करना था। शेख हसीना के साथ उनके आधिकारिक निवास गणोभबन में बैठक के दौरान डॉ. जयशंकर ने प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण पत्र उन्हें सौंपा। सुश्री हसीना ने निमंत्रण के लिए श्री मोदी का आभार व्यक्त किया। भारत के विदेशमंत्री ने कहा कि नई दिल्ली अक्टूबर में उनकी भारत यात्रा की प्रतीक्षा कर रही है। डॉ. जयशंकर और शेख़ हसीना दोनों के बीच बातचीत उपयोगी रही, जिसमें आपसी हित के मुद्दों पर बातचीत की गई। इससे पहले पूर्...

यूएनएससी में भी पाकिस्तान को समर्थन नहीं

कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने की पाकिस्तान की कोशिश एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पूरी तरह से असफल हो चुकी है | अपने तथाकथित सर्वकालिक मित्र पाकिस्तान के इशारे पर चीन ने सभी 15 सदस्यों की एक तत्काल बैठक बुलाने का आह्वान किया था | इस बैठक में सिर्फ़ चीन ने जम्मू तथा कश्मीर के मुद्दे पर भारत द्वारा क़दम उठाए जाने पर चिंता जताई, जबकि अन्य सभी बड़ी शक्तियों ने पाकिस्तान को भारत के साथ स्थिति पर द्विपक्षीय रूप से चर्चा करने की सलाह दी | भारतीय राज्य जम्मू तथा कश्मीर से संबन्धित भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के सम्बद्ध प्रावधानों को भारत द्वारा हटाये जाने के बाद पाकिस्तान इस मुद्दे को लेकर परेशान है | भारत के इस निर्णय ने जम्मू तथा कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तानी सुर को बेसुरा बना दिया है | भारत ने जम्मू तथा कश्मीर मुद्दे को अपना आंतरिक मामला बताया है, जिसका ज़िक्र अमरीकी प्रशासन ने किया है | रूस ने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए, भारत तथा पाकिस्तान दोनों से इस मुद्दे का निपटारा द्विपक्षीय राजनीतिक तथा राजनयिक वार्ता के माध्यम से करने को कहा है | यहाँ तक कि सुरक्षा परिष...

भारत के प्रधानमंत्री की भूटान यात्रा : द्विपक्षीय संबंधों का प्रसार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भूटान के प्रधानमंत्री लोते शेरिंग के निमन्त्रण पर थिंपू की दो दिवसीय राजकीय यात्रा की। उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी उनके साथ था। दूसरी बार कार्यभार संभालने के बाद ये श्री मोदी की पहली आधिकारिक यात्रा थी और पिछले पाँच वर्षों में भूटान की दूसरी यात्रा। लगातार दूसरी बार कार्यभार संभालने के बाद भारत के प्रधानमंत्री मालदीव और श्रीलंका की यात्रा कर चुके हैं। इन तीनों पड़ौसी देशों की यात्रा से संकेत मिलता है कि भारत पड़ौस प्रथम नीति को नई तरजीह दे रहा है।  भूटान यात्रा एक ऐसे समय में हुई है जब भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की जम्मू और कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीकरण करने की कोशिशों को पूरी तरह नाकाम करने में लगा है। इससे पहले भूटान ने जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को हटाने के भारत के फ़ैसले को साहसी, भविष्योन्मुखी और निर्भीक कहा था। इसने माना था कि जम्मू-कश्मीर पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है।  भारत के साथ विशेष संबंधों के चलते भूटान ने श्री मोदी की यात्रा को उच्च प्राथमिकता दी और भूटान के प्रधानमंत्री डॉ. शेरिंग ने हवाई अड्डे पर उनका स्...

यमन में शांति झलक

एक रोचक धटनाक्रम में इस सप्ताह आशा की किरण नज़र आई है। क्योंकि यमन के अलगाववादी आंदोलन के नेता ने अदन सत्ता पलट के बाद सऊदी की मध्यस्थता वाली शांति वार्ता में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की है। सऊदी अरब अमिरात के समर्थन वाले यमन के दक्षिणी अलगाववादी बलों ने भीषण लड़ाई के बाद अदन में राष्ट्रपति भवन का अधिहरण कर लिया था। इस लड़ाई में 40 लोगों की मृत्यु हो गई थी और 260 से अधिक लोग घायल हो गए थे। अलबगदादी नेता एहारस अल जबैदी ने कहा कि अब्दराबू मंसूर हादी की सेनाओं द्वारा हूथी आंदोलन के नेताओं की हत्या करने और आंदोलन दबाने की कोशिश की वजह से हिंसा भड़की थी। अदन में दक्षिणी माध्यामिक परिषद पर सऊदी हवाई हमले की पृष्ठभूमि में ये घोषणा की गई है। संयुक्त अरब अमिरात और सऊदी अरब ने सरकार समर्थक यमनी दलों के अगले सप्ताह वार्ता के लिए बुलाया है ताकि अदन में व्याप्त हालिया तनाव को कम किया जा सके। इस टकराव की जड़े उस समय से जुड़ी है जब अरब क्रांति के समय राजनीतिक हस्तांतरण नहीं हो पाया था जिस वजह से अली अब्दुल्लाह सालेह को 2011 में अपने उप हादी को सत्ता सौपनी पड़ी। अपने शासन के दौरान हादी सरकार जिहाद...

खाड़ी देशों ने पाकिस्तान को किया अनदेखा

भारत सरकार ने संविधान में संशोधन कर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटा दिया है। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केन्द्र शासित प्रदेश का दर्ज़ा दे दिया है। इस मामले में पाकिस्तान को उम्मीद थी कि खाड़ी के अरब देशों से उसे समर्थन मिलेगा, लेकिन खाड़ी ये देश तटस्थ बने हुए हैं, और ज़्यादातर देशों ने ख़ुद को इस पूरे प्रकरण से अलग रखा है। खाड़ी देशों की यह मौन प्रतिक्रिया इसलिए भी देखने को मिल रही है, क्योंकि भारत एक स्थिर और परिपक्व देश है, और पिछले कुछ सालों के दौरान भारत का कद दुनियाभर में तेज़ी से बढ़ा है। खाड़ी देशों की मौन प्रतिक्रिया के पीछे एक कारण यह भी है कि भारत के इन देशों के साथ काफी घनिष्ठ और बेहतर रणनीतिक संबंध हैं। भारत इन देशों के साथ सालाना 100 बिलियन अमरीकी डॉलर से ज़्यादा का व्यापार करता है, जो भारत को अरब द्वीप के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक भागीदारों में शामिल करता है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली इस्लामिक देश सउदी अरब की ओर से हालाँकि हल्की-फुल्की प्रतिक्रिया दी गई है। सउदी अरब ने इस पूरे प्रकरण में भारत से, संयम बरतने का आग्रह किया है। कुवैत, कतर, बेहराइन और ओमान जै...

प्रधानमंत्री के स्वाधीनता दिवस के भाषण में नए भारत की परिकल्पना दिखी

दूसरे कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वाधीनता दिवस के अवसर पर दिये गए उनके पहले भाषण ने देश के 1॰3 बिलियन से अधिक लोगों को एक सशक्त राजनीतिक और सामाजिक संदेश दिया है | वास्तव में, भारत के राजनीतिक इतिहास में पहली बार, जनसंख्या विस्फोट के कारण देश के विकास पर पड़नेवाले नकारात्मक प्रभाव पर अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए एक प्रधानमंत्री ने स्वाधीनता दिवस के सम्बोधन को चुना | संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2027 तक भारत जनसंख्या के मामले में चीन से आगे निकलते हुए विश्व का अत्यधिक जनसंख्या वाला देश होगा | इस जनसंख्या विस्फोट की अनदेखी करोड़ों लोगों को निर्धनता से निजात दिलाने के लिए किए जाने वाले प्रयास के विपरीत जा सकती है तथा यह अनदेखी निर्धनों के लिए उच्चतर कल्याणकारी व्यय के लाभों को निरर्थक साबित कर सकती है | सरकार का उद्देश्य सभी घरों को खाना पकाने के स्वच्छ ईंधन, शौचालय, बिजली, आवास, स्वच्छ पेय जल तथा स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है | अगर जनसंख्या बढ्ने का यही सिलसिला जारी रहता है, तो इससे निर्धनों को दी जाने वाली जनहितकारी वस्तुओं तथा सेवाओं की सुपुर्दगी म...

राष्ट्रपति का एक नए भारत के लिए आह्वान

राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद ने भारत के 73वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम अपना संदेश दिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने एक स्वतंत्र राष्ट के रूप में 72 वर्ष पूरे कर लिए हैं। ये मौका ऐसे समय पर आया है, जब कुछ ही हफ्तों बाद 2 अक्टूबर को पूरा देश राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की जयंती मनाएगा। देश को आज़ादी दिलाने और समाज सुधार की दिशा में किए जाने वाले निरंतर प्रयासों में उन्होंने हमेशा ही देश का मार्गदर्शन किया है। राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान भारत काफी बदल गया है। यह भारत उस दौर के भारत से काफी अलग है, जब महात्मा गाँधी ने देश को आज़ादी दिलाने के लिए काम किया था। लेकिन महात्मा गाँधी आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितना उस दौर में थे। वंचित वर्ग के लोगों और परिवारों के लिए कल्याणकारी योजनाएँ बनाने और उनके क्रियान्वयन से लेकर, नवीकरणीय ऊर्जा के रूप में सूर्य की रोशनी का दोहन करने तक, हर जगह हम गाँधीवादी दर्शन को अपनाते हैं। श्री कोविंद ने इस वर्ष को महान और अत्यधिक प्रभावशाली श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के रूप में मनाने का आह्वान किया। उन्हें सिख दर्...

संबंधों को मजबूती देती विदेशमंत्री की चीन यात्रा

चीन के साथ महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहुँच बढ़ाने के उद्देश्य से, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सांस्कृतिक और जनमानस के संपर्को पर आधारित एक उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए बीजिंग की आधिकारिक यात्रा की। यह यात्रा मुख्य रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 'वुहान' जैसी अनौपचारिक बैठक के दूसरे दौर हेतु इस साल के अंत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आगामी यात्रा के लिए ज़मीन तैयार करने के उद्देश्य से की गई थी। दोनों पक्ष राजनयिक संबंधों की 70 वीं वर्षगांठ की भी मना रहे हैं। भारतीय संसद में जम्मू और कश्मीर से जुड़ा विधायी अधिनियम भी दोनों विदेशमंत्रियों के बीच चर्चा में रहा। श्री जयशंकर ने चीनी उपराष्ट्रपति वांग क़ी शान के साथ वार्ता की। दोनों पक्षों ने बदलते वैश्विक परिवेश एवं व्यापक पुनर्संतुलन पर चर्चा की जिसमें भारत और चीन प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के रूप में उभर रहे हैं। यद्यपि यह नए भारतीय विदेशमंत्री द्वारा चीन की पहली यात्रा थी; इससे पहले वह चीन में पूर्व राजदूत रहे हैं और चीन तथा श्री जयशंकर एक दूसरे से भली भांति परिचित हैं। उन्होंने अपने चीनी स...

पाकिस्तान का एकाकीपन

कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने की पाकिस्तान की कोशिश निष्फल साबित हो चुकी है | कश्मीर मुद्दे पर अन्य देशों को अपने साथ मिलाने की इस्लामाबाद की अचानक कोशिश पर इसके घनिष्ठ मित्र चीन तथा सऊदी अरबिया ने भी किसी तरह की गर्मजोशी नहीं दिखाई है | रियाद तथा पेइचिंग दोनों ने इस्लामाबाद से कहा है कि वे इस मामले में बहुत कुछ नहीं कर सकते हैं | दोनों देशों ने शांति का आह्वान किया है | दोनों देशों ने पाकिस्तान से संयम बरतने को कहा है |  भारत ने अपने संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने की जैसे ही घोषणा की वैसे ही पाकिस्तान का रवैया अत्यधिक आक्रामक हो गया | भारत ने विगत के राज्य जम्मू तथा कश्मीर को दो संघ शासित प्रदेश जम्मू तथा कश्मीर और लद्दाख के रूप में पुनर्गठित करने का निर्णय लिया | यह निर्णय संसद के दोनों सदनों में पड़े ज़बरदस्त मत के बाद लिया गया है | इन दो संघ शासित प्रदेशों में विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है | विगत तीन दशकों से पाकिस्तान प्रायोजित सीमा-पार आतंकवाद से जम्मू तथा कश्मीर राज्य पीड़ित रहा है, इससे इसे नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी | प...

भारत को 5 खरब अर्थव्यवस्था बनाने में विनिर्माण क्षेत्र की भूमिका

भारत अपनी अर्थव्यवस्था को आने वाले पाँच वर्षों में 5 खरब अर्थात 5 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर और उसके बाद आठ वर्षों में 10 ट्रिलियन डॉलर की बनाने के लिए तैयारी कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख भूमिका को अस्वीकार नहीं किया जा सकता। हाल ही में समाप्त हुए संसद के अधिवेशन में दिये गए एक प्रश्न के उत्तर में बताया गया कि भारत प्रतिवर्ष इस क्षेत्र में एक ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक खर्च कर रहा है। वित्त राज्यमंत्री श्री अनुराग सिंह ठाकुर ने यह बात लोकसभा में कही। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 के लिए विनिर्माण क्षेत्र में सरकारी व्यय का बजटीय अनुमान 5.97 ट्रिलियन रुपये था। भारत की अर्थव्यवस्था को 2025 तक 5 ट्रिलियन की बनाने का लक्ष्य यद्यपि बहुत बड़ा अवश्य है लेकिन असंभव नहीं है। इस दिशा में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सही समय पर साहसिक क़दम उठाए जा रहे हैं। इस समय भारत की अर्थव्यवस्था 2.8 ट्रिलियन डॉलर की है जिसे आने वाले पाँच वर्षों में 8 प्रतिशत वार्षिक विकासदर की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह लक्ष्य पहुँच से दूर नहीं है क्योंक...

अमरीका-तालिबान वार्ता और भारत के पास विकल्प

दोहा में अमरीका-तालिबान वार्ता का आठवाँ चरण एक संभावित शांति समझौते के साथ संपन्न हुआ जिसके अंतर्गत एक निर्धारित समय सीमा के भीतर अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी एवं नाटो सेनाओं की वापसी सुनिश्चित हो सकेगी। इसके बदले में तालिबान अफ़ग़ानिस्तान में अल कायदा और आईएसआईएस जैसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठनों को पनाह नहीं देगा। वह अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के साथ सत्ता में भागीदारी के सूत्र पर आधारित वार्ताओं में भी भाग लेगा जिससे कि युद्ध से त्रस्त देश मे शांति और स्थायित्व लाया जा सके। अमरीका के साथ वार्ता के लिए तालिबान ने वर्ष 2013 में दोहा में अपना कार्यालय स्थापित किया था। कुछ आरंभिक चरणों की वार्ताओं का कोई परिणाम नहीं निकल पाया क्योंकि सभी पक्ष अपनी अपनी अतिवादी माँगों पर अड़े रहे थे। 2014 में जब अफ़ग़ानिस्तान के भीतर अमरीकी तथा नाटो सेनाओं ने अपना सैन्य अभियान संपन्न किया और युद्ध की ज़िम्मेदारी नई नवेली अफ़ग़ानी सेना को सौंपी तब वार्ताओं की संभावनाएं उत्पन्न हुईं क्योंकि धरातल पर सच्चाई कुछ और थी। आधे से भी अधिक भूभाग पर तालिबान के आधिपत्य था और अफ़ग़ानी सेना उसके समक्ष कहीं नहीं टिकती थी। ऐसा अनुभव किया गया...

सशस्त्र सेनाओं का आधुनिकीकरण

भारत के पड़ौस में पिछले दशक से जन्म ले रहा घटनाक्रम और विदेशों से मिलने वाली लगातार मदद के भरोसे सीमा पर आतंकी गतिविधि का बढ़ाते जाना ये बताने के लिए पर्याप्त है कि भारत के सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने की तुरंत आवश्यकता है। ये काम सरल नहीं है क्योंकि भारत को अपने लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास पर ध्यान देना है। लेकिन बिना पूर्ण सुरक्षा के किसी भी देश का सर्वांगीण विकास नहीं हो सकता। इस परिदृश्य में वर्तमान साल के लिए रक्षा क्षेत्र को 4.31ट्रिलियन रूपये का बजट आवंटित किया जाना स्वागत योग्य है। हालांकि ये भारत के सकल घरेलू उत्पाद का केवल 2.04 प्रतिशत है। रक्षा उपकरणों के आयात से मूल सीमा शुल्क हटाए जाने का फ़ैसला करना ये साबित करता है कि रक्षा क्षेत्र का आधुनिकीकरण सरकार की उच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। भारतीय सेना की आधुनिकीकरण प्रक्रिया दीर्घ कालीन एकीकृत परिप्रेक्ष्य योजना में विस्तार से वर्णित है जो कि 2027 तक की अवधि के लिए है। भारत में तैयार सामान की आपूर्ति पर ज़ोर दिया जा रहा है ताकि स्वदेशी क्षमता को बढ़ावा मिले। सरकार के सक्रिय रवैये के साथ समयसीमा के भीतर की काम पूरा करने क...