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Showing posts from January, 2020

भारत की पड़ोस पहले की नीति : क्षेत्रीय अनुभूतियां  

भारत के अग्रणी विचार-समूह, रक्षा अध्ययन तथा विश्लेषण संस्थान (आईडीएसए), नई दिल्ली ने भारत की पड़ोस पहले की नीति: क्षेत्रीय अनुभूतियों” पर आधारित 12वें दक्षिण एशिया सम्मेलन का आयोजन किया | इस सम्मेलन ने भारत की पड़ोस पहले की नीति पर बहस करने के लिए दक्षिण एशियाई क्षेत्र के देशों तथा म्यांमार के नीति निर्माताओं, शिक्षाविदों और विशेषज्ञों को एक मंच पर एकत्रित किया | इस दो दिवसीय सम्मेलन में लगभग 25 पत्र प्रस्तुत किए गए | विदेशी भागीदारों के अलावा, 9 भारतीय प्रतिभागियों ने भारत की पड़ोस पहले की नीति पर अपने विचार साझा किए | अपने आरंभिक भाषण में, रक्षा मंत्री, श्री राज नाथ सिंह ने बल देते हुए कहा कि अब इस क्षेत्र को अपनी निजी राष्ट्रीय पहचान से ऊपर जाकर दक्षिण एशियाई के रूप में आगे बढ़ने को लेकर सोचने का समय आ चुका है | ध्यातव्य है कि श्री राज नाथ सिंह आईडीएसए के अध्यक्ष भी हैं | विदेश मामलों के राज्य मंत्री, श्री वी॰ मुरलीधरन ने भारत की पड़ोस पहले की नीति के विभिन्न पहलुओं पर बल दिया | 2014 में, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने कार्यालय का शपथ ग्रहण करते समय भारत के तत्काल पड़ोसियों पर ...

स्टार्टअप अभियान की चमक

स्टार्ट-अप इंडिया योजना से जुड़ी झांकी को 71 वें गणतंत्र दिवस की परेड में स्थान देने के गौरवपूर्ण कारण थे। इस योजना से देश में कुछ ही समय में 300,000 से अधिक नौकरियां पैदा हुईं; 26,000 से अधिक स्टार्ट-अप भारत में अपना विस्तार कर रहे हैं। सरकार द्वारा उपलब्ध कराये गए बेहतर इको-सिस्टम से स्टार्ट-अप्स की लोकप्रियता बढ़ी है और इनमें उच्च निवेश आकर्षित किया जा रहा है। भारत में स्टार्ट-अप का समग्र मूल्यांकन 35 बिलियन डॉलर के करीब पहुँच गया है। आज स्थिति यह हो गई है कि भारत के प्रमुख तकनीकी और प्रबंधन संस्थानों से पढ़ाई पूरी करने वाले स्नातक प्रतिभाएँ नौकरी करने के बजाए स्टार्ट-अप्स शुरू करने को अपनी प्राथमिकता बना रहे हैं। यह रुझान भारत में मौजूद नवाचार प्रतिभा की कहानी स्वयं कह रहा है। गणतंत्र दिवस परेड में राजपथ पर उतरी स्टार्ट-अप की झांकी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। झांकी की रचनात्मकता उत्कृष्ट रही, क्योंकि इसने स्टार्ट-अप के इको-सिस्टम को स्पष्ट रूप से चित्रित किया। झांकी में एक वृक्ष के मद्यम से यह भी दर्शाया गया था कि कर रियायतों और बाहर से मिलने वाले निवेश के दमपर कैसे छोटे-छोटे स...

‘मन की बात’ (8वीं कड़ी)

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | आज 26 जनवरी है | गणतंत्र पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनायें | 2020 का ये प्रथम ‘मन की बात’ का मिलन है | इस वर्ष का भी यह पहला कार्यक्रम है, इस दशक का भी यह पहला कार्यक्रम है | साथियो, इस बार ‘गणतंत्र दिवस’ समारोह की वजह से आपसे ‘मन की बात’, उसके समय में परिवर्तन करना, उचित लगा | और इसीलिए, एक अलग समय तय करके आज आपसे ‘मन की बात’ कर रहा हूँ | साथियो, दिन बदलते हैं, हफ्ते बदल जाते हैं, महीने भी बदलते हैं, साल बदल जाते हैं, लेकिन, भारत के लोगों का उत्साह और हम भी कुछ कम नहीं हैं, हम भी कुछ करके रहेंगे | ‘Can do’, ये ‘Can do’ का भाव, संकल्प बनता हुआ उभर रहा है | देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की भावना, हर दिन, पहले से अधिक मजबूत होती जाती है | साथियो, ‘मन की बात’ के मंच पर, हम सब, एक बार फिर इकट्ठा हुए हैं | नये-नये विषयों पर चर्चा करने के लिए और देशवासियों की नयी-नयी उपलब्धियों को celebrate करने के लिए, भारत को celebrate करने के लिए | ‘मन की बात’ - sharing, learning और growing together का एक अच्छा और सहज platform बन गया है | हर महीने हज़ारों की संख्या में लो...

दावोस में इमरान खान असफल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने विश्व आर्थिक मंच 2020 की बैठक के लिए दावोस में अपना बहुप्रचारित दौरा किया। स्विट्ज़रलैंड स्की-रिसॉर्ट में, उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ भेंट की। जैसा कि उनके वक्तव्यों से इंगित होता है, श्री खान ने एक बार फिर से कश्मीर के मुद्दे को उठाया और उनके द्वारा भारत विरोधी बयानबाजी की गई। उन्होंने यह कहने के लिए भी इसी मंच का उपयोग किया और कहा कि, "जब भी भारत के साथ हमारे बेहतर संबंध होंगे, दुनिया देखेगी कि हम सामरिक रूप से कितने मजबूत हैं"। उन्होंने दावा किया कि "पाकिस्तान में आतंकवाद नहीं है"।सत्य से बाहर कुछ भी नहीं हो सकता। वास्तव में, आतंकवादी समूह पाकिस्तानी सरकार के आधिकारिक संरक्षण का आनंद ले रहे हैं। उस देश में आतंकवादी संगठन पनप रहे हैं। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल(एफएटीएफ) की अगली बैठके में, पेरिस स्थित वैश्विक आतंकवाद-निरोधी वित्तीय निगरानी संस्था द्वारा पाकिस्तान को काली सूची में डालने पर निर्णय लेना है; ऐसा लगता है कि पाकिस्तान सरकार ने अपनी धरती पर सक्रिय आतंकी संगठनों को फिलहाल कम झूठ बोलने को कहा है।...

राष्ट्रपति बोलसोनारो के 71वें गणतंत्र दिवस में मुख्य अतिथि के रूप में आगमन से संबंध और गहरे हुए

वैश्विक समुद्र में भारत और ब्राज़ील दो बड़ी मछलियॉ हैं। चीन के अतिरिक्त केवल भारत और ब्राज़ील ही ऐसे दो देश हैं जिन में बड़ी शक्तियों से महाशक्ति बनने की क्षमता है। लेकिन कुछ समय पहले तक भारत को इसकी हिन्दु विकास दर और पुरानी ग़रीबी के लिए जाना गया तो ब्राज़ील को बढ़ते क़र्ज और अति-मुद्रस्फिति के लिए। अगर भारत को लोकतंत्र के बावजूद पश्चिम ने सपेरों और रहस्यवादी साधुओं की जमीन कहा तो ब्राज़ील को फ्रॉस के Charles de Gawell ने अगंभीर देश कहा। उन्होंने कहा ब्राज़ील आने वाले कल का देश है और हमेशा रहेगा। आज भारत और ब्राज़ील दोनों ही संतुलन करने वाली शक्तियों से आगे बढ़कर अग्रणी वैश्विक खिलाड़ी बन चुके हैं। पिछले लगभग एक दशक से दोनों देशों की विदेश नीति ने विविध बहुपक्षीय और द्वीपक्षीय मंचों के साथ सक्रियता के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बदलती प्रकृति के साथ तालमेल बनाया है। ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर मेसियान बोलसोनारो का भारत के 71वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में चार दिन के लिए भारत आना इस तथ्य को स्पष्ट करता है कि भारत और ब्राज़ील की साझेदारी गहराती जा रह...

भारत का संविधान इस भूमि का सर्वोच्च क़ानून

भारतीय संविधान, संविधान सभा की 3 सालों की कड़ी मेहनत के बाद तैयार हुआ। भारतीय संविधान के बारे में उस समय विश्लेषकों का कहना था कि सावधानीपूर्वक तैयार किया गया यह संविधान लंबे समय तक अस्तित्व में रहेगा। स्वाधीन भारत की नींव रखने वाली महान भारतीय मेधाओं के प्रति यह सम्मान है कि जो नींव उन्होंने रखी थी वह आज भी मजबूती के साथ अचल है और जिस पर भारत का संसदीय लोकतंत्र सजीव है। भारत का संविधान न सिर्फ संविधान निर्माताओं के लिए बल्कि भारतीय नागरिकों के लिए भी प्रकाश स्तंभ के रूप में रहा है। 7 दशकों के लंबे समय के बाद भी संविधान का मूल स्वरूप अपरिवर्तनीय रहा है। विभिन्न संशोधनों के बावजूद भारतीय संविधान का मूल सिद्धांत अपने वास्तविक स्वरूप में मौजूद है, जो यह दर्शाता है कि संविधान में भारत का विश्वास अटूट है। संविधान की प्रस्तावना में दुनिया के समक्ष एक संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के जन्म का उल्लेख किया गया। ठीक उसी प्रकार हम भारत के लोग न्याय के सिद्धांत, स्वाधीनता, समानता और भाईचारे के साथ रहते हैं। भारतीय संविधान न सिर्फ एक मूर्त देश का प्रतिबिंब है बल्कि इसमें भारत ...

भारत के नाइजर और ट्यूनीशिया के साथ सम्बंधो में मज़बूती

भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अफ्रीकी देशों पर और अधिक ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य और उनके साथ घनिष्ठ कूटनीतिक और आर्थिक सम्बंधों को विकसित करने के लिए इस सप्ताह की शुरुआत में नाइजर और ट्यूनीशिया का दौरा किया। इन अफ्रीकी राष्ट्रों ने संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्यों के रूप में भारत की मदद की थी इसलिए भारत इन्हे बहुत महत्व देता है। विदेश मंत्रालय में कार्यभार संभालने के बाद से अफ्रीका देशो की उनकी यह पहली यात्रा थी। नाइजर के नियामे में अपनी यात्रा के दौरान डॉ. जयशंकर ने नाइजर के राष्ट्रपति, महामदौ इस्सौफौ से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने संयुक्त रूप से महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र का उद्घाटन किया। वर्तमान में महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती मनाई जा रही है और ये उन्ही की स्मृति के सम्मान में भारत द्वारा अफ्रीका में स्थापित किया जाने वाला पहला केंद्र है। इस केंद्र की स्थापना भारत-नाइजर के बीच मित्रता के लिए एक मील का पत्थर होने के साथ ही अफ्रीका के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। केंद्र को आधुनिक सुविधा के सा...

JCPOA समझौते से ईरान का अलग होना और विश्व पर इसका प्रभाव

अमरीका द्वारा ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद उपजे हालात और प्रतिक्रियात्मक घटनाओं की श्रृंखला में एक नई कड़ी तब जुड़ी जब ईरान ने धमकी दी कि अगर यूरोपीय संघ ईरान के परमाणु मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में ले जाता है तो वह परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) से अलग हो सकता। जनरल सुलेमानी की हत्या के बाद यह सबसे कड़ी प्रतिक्रिया है और निहितार्थ बहुत मायने रखते हैं। यह ना सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरनाक है बल्कि वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए बेहद घटक सिद्ध हो सकता है। यह फैसला ईरान परमाणु समझौते यानि संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) की शर्तों का पालन नहीं करने के ईरान सरकार के फैसले के करीब है।  एनपीटी से अलग होने के लिए ईरान का यह फैसला ईरान परमाणु समझौते में विवाद समाधान तंत्र (डीआरएम) को तीन यूरोपीय देशों ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी द्वारा शामिल किए जाने की भी प्रतिक्रिया माना जा सकता है। उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी भी इस समझौते में शामिल हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि अमरीका ने यूरोपीय देशों पर यह रुख अपनाने के लिए दबाव डाला था। इससे...

भारत का स्थान एफडीआई के क्षेत्र में शीर्ष दस में बरकरार

भारत ने 2019 में, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के प्रवाह में 42 अरब डॉलर से लेकर 49 अरब डॉलर फायदे मे रहते हुए शीर्ष 10 एफडीआई प्रवाह की प्राप्त करने वालें देशों के बीच अपने स्थान को बनाए रखा है। व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन UNCTAD की "निवेश की प्रवृत्ति मॉनिटर" शीर्षक वाली हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में यह वृद्धि तब देखने को मिली है जब 2019 में वैश्विक विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 1.41 ट्रिलियन डॉलर में 1% की गिरावट के साथ 1.39 ट्रिलियन डॉलर पर सपाट रहा। एफडीआई के क्षेत्र में भारत सबसे ऊपर है जबकि पूंजी प्रवाह में शून्य-वृद्धि के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन जैसे दोनों देशो में एक जैसा एफडीआई का नजारा देखने को मिला। दक्षिण एशियाई क्षेत्र ने 10% की वृद्धि दर्ज करते हुए 60 अरब डॉलर एफडीआई हासिल की जिसमें 80% से अधिक हिस्सा भारत का था। सूचना प्रौद्योगिकी सहित सेवा क्षेत्र के उद्योगों में सबसे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ। हमारे पड़ोसी देशो में बांग्लादेश को छह प्रतिशत की गिरावट के साथ 3.4 अरब डॉलर और पाकि...

ईयू विदेश मामलों तथा सुरक्षा नीति के प्रमुख ने भारत के साथ सशक्त संबंध की बात को दोहराया

यूरोपीय संघ के विदेश मामलों तथा सुरक्षा नीति के उच्च प्रतिनिधि, जोसेफ बोर्रेल फोंटेल्स हाल ही में भारत यात्रा पर आए, जहां उन्होंने रायसीना डायलॉग 2020 में भागीदारी की | भारत तथा यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच की समानताओं पर बोलते हुए, श्री फोंटेल्स ने एक नियम आधारित बहुपक्षीय आदेश की रक्षा करने के लिए दोनों पार्टियों की आवश्यकता की बात कही, वह भी ऐसे समय में जब डब्ल्यूटीओ का निपटारा विवाद तंत्र यूरोप, भारत तथा बहुत से दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के लिए चिंता का कारण बन चुका है | इस मामले में उच्च प्रतिनिधि ने सूचित किया कि ईयू ने इस गतिरोध को तोड़ने के लिए प्रस्ताव किया है | इस मुद्दे का निपटारा करने के लिए तथा व्यावहारिक समाधान का सुझाव दोनों ही पार्टियों के हित में है | जब वैश्विक समुदाय पर समुद्री डकैती तथा संरक्षण और समुद्री संसाधनों के संरक्षण जैसी कई चुनौतियों का ख़तरा मंडरा रहा हो, तब समुद्री सुरक्षा का सशक्तिकरण एक गंभीर चिंता का कारण बन चुका है | इस प्रकार, समुद्री सुरक्षा तथा स्थिरता का रख-रखाव करने के लिए एकजुट होकर काम करना अत्यावश्यक हो जाता है | हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका के समुद्र...

ईयू विदेश मामलों तथा सुरक्षा नीति के प्रमुख ने भारत के साथ सशक्त संबंध की बात को दोहराया

यूरोपीय संघ के विदेश मामलों तथा सुरक्षा नीति के उच्च प्रतिनिधि, जोसेफ बोर्रेल फोंटेल्स हाल ही में भारत यात्रा पर आए, जहां उन्होंने रायसीना डायलॉग 2020 में भागीदारी की | भारत तथा यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच की समानताओं पर बोलते हुए, श्री फोंटेल्स ने एक नियम आधारित बहुपक्षीय आदेश की रक्षा करने के लिए दोनों पार्टियों की आवश्यकता की बात कही, वह भी ऐसे समय में जब डब्ल्यूटीओ का निपटारा विवाद तंत्र यूरोप, भारत तथा बहुत से दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के लिए चिंता का कारण बन चुका है | इस मामले में उच्च प्रतिनिधि ने सूचित किया कि ईयू ने इस गतिरोध को तोड़ने के लिए प्रस्ताव किया है | इस मुद्दे का निपटारा करने के लिए तथा व्यावहारिक समाधान का सुझाव दोनों ही पार्टियों के हित में है | जब वैश्विक समुदाय पर समुद्री डकैती तथा संरक्षण और समुद्री संसाधनों के संरक्षण जैसी कई चुनौतियों का ख़तरा मंडरा रहा हो, तब समुद्री सुरक्षा का सशक्तिकरण एक गंभीर चिंता का कारण बन चुका है | इस प्रकार, समुद्री सुरक्षा तथा स्थिरता का रख-रखाव करने के लिए एकजुट होकर काम करना अत्यावश्यक हो जाता है | हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका के समुद्र...

भारत द्वारा जीसैट-तीस का सफल प्रक्षेपण

भारत द्वारा 17 जनवरी 2020 को 41वें संचार उपग्रह जीसैट-तीस का सफल प्रक्षेपण निर्बाध संचार सेवा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से ऐसे समय में एक बहुत ही महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है जब 14वर्ष पुराना इनसैट-4ए जल्द ही कार्य करना बंद कर देगा। इनसैट 4ए का उपयोग भारत के केबल संचालक अपने कार्यक्रम विदेशों में प्रसारित करने के लिए करते हैं। जीसैट-तीस की वजह से इन सेवाओं को और 15 वर्षों के लिए जारी रखा जा सकेगा। जीसैट-तीस ने फ्रेंच गुयाना, कौरु में युरोप के अंतरिक्षकेन्द्र, गुयाना अंतरिक्ष केन्द्र के एरियनक्षेत्र से एरियन-5 रॉकेट में उड़ान भरी। जीसैट-तीस एरियनस्पेस द्वारा प्रक्षेपित किया जाने वाला 24वां भारतीय उपग्रह है। इसने भारत का पहला संचार उपग्रह एप्पल 1981 में प्रक्षेपित किया था। इस बार एरियन-5 द्वारा ईयू-टैल-सैट कन्नैक्ट भी भेजा गया जो कि एक आधुनिक उपग्रह है जिससे युरोप और अफ़्रीका में दूरसंचार सेवाएँ उपलब्ध करवाई जाएंगी। 15 वर्षों के कार्यकाल के उद्देश्य वाला जीसैट-तीस भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन का उच्च क्षमता वाला संचार उपग्रह है जिसमें स्थिति के अनुरूप बदलने वाली फ़्रिक्वेंसी व्यवस्था और ...

चीन-पाकिस्तान की साँठ-गांठ फिर से उजागर

कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ने “अनौपचारिक परामर्श” की मांग की| चीन के इस क़दम से उसके लिए प्रतिकूल स्थिति उत्पन्न हुई | इसमें पाकिस्तान का समर्थन था | बहरहाल, सुरक्षा परिषद के अधिकतर सदस्यों ने इस क़दम को ख़ारिज़ कर दिया है | भारत के संविधान से अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के मुद्दे को उठाने संबंधी चीन का यह तीसरा प्रयास था | भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इन प्रयासों से पेइचिंग को “समुचित सबक” लेना चाहिए | यूएनएससी के अधिकतर सदस्यों का मानना है कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है | संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि,सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि “ देश को प्रभावित करने वाली परेशानी से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए झूठे बहाने बनाने की पाकिस्तान की आदत से सभी परिचित हो चुके हैं | राजनय का अर्थ अनावश्यक सहायता प्राप्त करने की गुहार लगाना नहीं है | इसके लिए कठिन और उचित क़दम उठाने की आवश्यकता है | यह क़दम छोटा भी हो सकता है | श्री अकबरुद्दीन ने कहा कि यह क़दम वहाँ होना चाहिए, जहां हम 5 अगस्त को थे |”वास्तव में, सुरक्षा परिषद के मुख्य स्थायी सदस्यों, अमरीका, यू॰...

रायसीना डायलॉग 2020

ज्यों ज्यों हम 21 वीं सदी के तीसरे दशक में आगे बढ़ते हैं, दुनिया कई वैश्विक चुनौतियों और प्रमुख शक्ति परिवर्तनों की साक्षी बन रही है। जहां नई शक्तियां उभर रही हैं, वहीं कुछ पुरानी शक्तियां अपने वैश्विक स्तर पर क्षरण का अनुभव करने लगी हैं। दो तरह के ऐतिहासिक शक्ति परिवर्तन हो रहे हैं- पावर ट्रांजिशन और पावर डिफ्यूजन। चीन की अभूतपूर्व प्रगति ने दुनिया को हिला दिया है। लेकिन भारत, वैश्विक परिदृश्य पर भी विशाल रूप धारण कर रहा है। एशिया आर्थिक मोर्चे पर एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है। साथ ही वह बदलते वैश्विक परिवेश में सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद एक निर्णायक माध्यम के रूप में भी उभरा है।नवाचार भविष्य की मांग है। नवाचार का इतिहास विचारों की कहानी है। यदि आप नया नहीं करते हैं, तो आप विस्मरण में सो जाते हैं। यह विदेश नीति और सामरिक हितों के संवर्धन की दृष्टि से भी समान रूप से सत्य है। नवीन जटिल विश्व गंभीर चुनौतियों के साथ साथ नए अवसर भी उपलब्ध कराता है। दुनिया के पूर्वोन्मुखी केंद्रीकरण के साथ, शीर्ष शक्ति के रूप में पश्चिम का लंबे समय से पतन हो रहा है, लेकिन उभरती शक्तियों से चुनौतिया...

लावरोव की यात्रा से मज़बूत होते भारत-रूस संबंध

 "रायसीना डायलॉग" में भाग लेने के लिए नई दिल्ली में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव की यात्रा ने भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों की उत्कृष्ट स्थिति की समीक्षा करने का अवसर प्रदान किया है। श्री लावरोव ने वर्तमान क्षेत्रीय परिस्थिति पर भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ गहन चर्चा की जिसमें ईरान, लीबिया और सीरिया के हालात भी शामिल थे। बाद में, रूसी विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया और उनसे बातचीत की। श्री लावरोव के साथ बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले साल कई महत्वपूर्ण निर्णय और उनके अच्छे परिणाम सामने आए और उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि वर्ष 2020 जो नई दिल्ली और मॉस्को के बीच सामरिक साझेदारी की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ का वर्ष है, उसका भी उन निर्णयों के कार्यान्वयन के वर्ष के रूप में सदुपयोग किया जाना चाहिए।  विदेश मंत्री स्तर के विचार-विमर्श के दौरान, डॉ. जयशंकर और श्री लावरोव दोनों ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और विश्व अर्थव्यवस्था तथा फारस की खाड़ी क्षेत्र की भू-राजनीति पर इसका प्रभाव विषय पर चर्चा की जिसमें और वृद्धि ह...

भारत और लातविया के संबंधों में प्रगाढ़ता

लातविया के विदेश मंत्री एड्गर्स रिनकेविक्स की आधिकारिक भारत यात्रा से दोनों देशों के मौजूदा आपसी संबंधों को नई गति मिली है। सितंबर 2016 में भारत के सूचना व प्रौद्योगिकी तथा क़ानून और न्याय मंत्री, श्री रवि शंकर प्रसाद लातविया गए थे और वहाँ के प्रधानमंत्री ने नवंबर 2017 में भारत की पहली ऐतिहासिक यात्रा की थी। भारत के उप राष्ट्रपति श्री एम. वैंकेया नायडू ने अगस्त 2019 में लातविया की यात्रा की थी। भारत और लातविया के संबंध सौ साल पुराने हैं। 22 सितंबर 1921 को लातविया लीग राष्ट्रों में स्वतंत्र सदस्य बना। 10 जनवरी 1920 से लीग या गुट का वास्तविक संस्थापक सदस्य होने के नाते भारत ने दुनिया के पहले बहुपक्षीय संगठन ने लातविया की सदस्यता का समर्थन किया। शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग के क्षेत्र में भारत और लातविया ने संगठन के भीतर आरंभिक संपर्क मज़बूत किया। लातविया के विदेश मंत्रालय की मदद से 1923 में रीगा विश्वविद्यालय में लातविया की राष्ट्रीय बौद्धिक सहयोग समिति की स्थापना की गई। भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बनने वाले डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन द्वारा किए गए प्रतिनिधित्व में भारत 1930 के दशक के दौरान...

ओमान में एक युग का अंत

दस जनवरी को सुल्तान क़ाबूस बिन सईद अल सईद का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। इसके साथ ही एक युग का अंत हुआ। उन्होंने पाँच दशकों तक देश पर राज किया था। सुल्तान क़ाबूस का रुतबा बहुत बड़ा था और विश्व भर में उन्हें सम्मान मिला था। एक महत्त्वपूर्ण खाड़ी देश में अब सर्वोच्च पद पर बदलाव का दौर है। 79 वर्षीय सुल्तान ने क्षेत्र में प्रभावशाली देश सऊदी अरब और ईरान के बीच संतुलन बनाते हुए ओमान में स्थिरता और स्वतंत्र विदेश नीति का दौर आरम्भ किया। 1970 में एक अहिंसक तख्तापलट में अपने रूढ़िवादी पिता सईद बिन तैमूर का स्थान लेने वाले सुल्तान क़ाबूस ने दफ़र विद्रोहियों को समाप्त किया, दासता का अंत किया, ओमान को आधुनिक बनाते हुए 1996 में पहला लिखित संविधान पेश किया और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए राजनीति, कारोबार और खेलों में उन्हें प्रोत्साहित किया। आधुनिक ओमान के जनक को 2015 में ईरान परमाणु संधि में उनकी भूमिका और यमन में युद्धरत पक्षों को एकजुट करने के लिए की गई मध्यस्थता के लिए जाना जाता है।  इस समय ओमान में स्वाभाविक उत्तराधिकारी के न होने की वजह से उनके उत्तराधिकारी को चुनन...

श्रीलंका के विदेश मंत्री की पहली भारत यात्रा

विदेश मामलों, कौशल विकास, रोज़गार तथा श्रम मामलों के श्रीलंकाई मंत्री, गुनावरदने ने अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा की | इस यात्रा पर उनके साथ एक चार सदस्यों वाला उच्च स्तरीय शिष्टमंडल था | यह यात्रा नवंबर 2019 में श्रीलंका के राष्ट्रपति, गोठभय राजपक्षे की हाल की भारत यात्रा के बाद हुई है | इस यात्रा के दौरान, श्री गुनावरदने ने अपने समकक्षों, विदेश मंत्री, डॉ॰ एस॰ जयशंकर, कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्री, श्री महेंद्र नाथ पाण्डेय तथा भारत के श्रम तथा रोज़गार मंत्री, श्री संतोष कुमार गंगवार के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की | श्रीलंका के विदेश मंत्री ने भारतीय वाणिज्य तथा उद्योग मण्डल (फिक्की) के सदस्यों को भी संबोधित किया | उन्होंने दिल्ली स्थित एक जनहित अनुसंधान तथा हिमायत संगठन, विज्ञान तथा पर्यावरण केंद्र और महाबोधि सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के नई दिल्ली केंद्र का दौरा किया | भारत के विदेश मंत्री, डॉ॰ एस॰ जयशंकर द्वारा आयोजित शिष्टमंडल स्तर की वार्ता के दौरान, दोनों मंत्रियों ने निवेश, सुरक्षा, मछली पालन, विकास सहायता तथा चल रही परियोजनाओं, पर्यटन, शिक्षा तथा सांस्कृतिक सहयोग और भारत तथा श्रीलं...