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Showing posts from October, 2019

दक्षिण चीन सागर: एक नया महत्वपूर्ण मोर्चा

आरोप है कि चीन ने दक्षिण चीन सागर में रेड-लाइन को पार कर लिया है और वियतनाम के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) का अतिक्रमण करके अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन किया है। यह भी आरोप है कि एक चीनी निगरानी जहाज 60 समुद्री मील की दूरी पर, वियतनाम तट के निकटतम बिंदु पर पहुंच गया था। इस प्रकार, चीन द्वारा एक बड़ी विषमता से पीड़ित देश वियतनाम में चीन गतिरोध और आर्थिक सुरक्षा को खतरा पैदा कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, चीनी पोत पर आरोप है कि उसने कम से कम चार जहाजों से एस्कॉर्ट के तहत वियतनाम के फु क्वे द्वीप से लगभग 102 किलोमीटर की दूरी और दक्षिणी वियतनामी शहर फ़ान थियेट के शहर के समुद्र तटों से 185 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में वियतनाम के ईईजेड का सर्वेक्षण करना जारी रखा। एक देश का EEZ आम तौर पर अपनी तटीय रेखा से 200 समुद्री मील (370 किलोमीटर या 230 मील) तक फैला होता है, जो कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के अनुसार, उस क्षेत्र के भीतर प्रत्येक प्राकृतिक संसाधन का दोहन करने के लिए संप्रभु अधिकार प्रदान करता है। दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता के लिए दांव लगाने वाले देशों को चीन से अपने सर्वेक्षण ज...

भारत-सऊदी अरब के रिश्ते लेन देन से बढ़कर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सऊदी अरब की दो दिवसीय यात्रा रियाद के प्रति भारत की नीतियों में हो रहे बदलाव और उसके संभावित लाभों को रेखांकित करती है। हज तीर्थयात्रा और सऊदी अरब से भारत में ऊर्जा आयात परंपरागत रूप से, संबंधों का आधार रहे हैं; लेकिन हाल के वर्षों में दोनों देश लेन-देन से आगे बढ़कर संबंधों को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं। तीसरे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान द्वारा आयोजित तीसरे फ्यूचर इन्वेस्टमेंट इनिशिएटिव (एफ़आईआई) में प्रधानमंत्री मोदी का मुख्य भाषण, इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एफ़आईआई को दावोस इन द डेजर्ट के नाम में भी जाना जाता है। एफआईआई का उद्देश्य गैर-पारंपरिक ऊर्जा, ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था, पर्यटन, मनोरंजन के क्षेत्र जैसे गैर-तेल क्षेत्रों निवेश के अवसरों का पता लगाना है ताकि सऊदी अरब की तेल पर निर्भरता को कम किया जा सके। क्राउन प्रिंस की यह पहल प्रधानमंत्री मोदी की भारत को 2024 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की महत्वाकांक्षा से मेल खाती है। यह यात्रा सऊदी अरब के साथ भारत की बढ़ती मित्रता का हिस्सा है। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के पद संभ...

बगदादी की मौत से क्या अरब दुनिया में नए युग का आरम्भ होगा

आईएसआईएस के स्व-घोषित "खलीफा" अबू बक्र अल-बगदादी की मौत की खबर को लेकर इराक के मोसुल की सड़कों पर लोगों ने खुशी जतायी। यहीं पर 2014 में, इस अत्याचारी ने इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक और सीरिया’ की स्थापना की घोषणा की थी। इसके बाद, नरसंहार, सामूहिक हत्याएं, सामूहिक बलात्कार, सड़क हिंसा, बर्बरता, अपहरण, जबरन वसूली और क्या-क्या नहीं हुआ। मोसुल के तीन लाख लोगों को शहर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था और हजारों को अपने प्रियजनों को खोना पड़ा था। अल-बगदादी, आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का प्रमुख था, जो पहले भी कई रूपों में काम कर चुका था और एक बार तो यह सीरिया और इराक के बीच यूनाटेड किंगडम के बराबर के लंबे क्षेत्रों को नियंत्रित कर चुका था। सीरिया की सभ्यता पर अबू बक्र अल-बगदादी के आईएसआईएस ने कई दाग लगाए हैं। उसने पलमायरा शहर को नष्ट किया और 2017 में, मोसुल की ऐतिहासिक, अल-नूरी मस्जिद को उड़ा दिया, यहीं उसने 2014 में इस्लामिक खलीफा का क्षेत्र घोषित किया था। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि अमेरिका की अगुवाई में इराक और सीरिया में युद्ध और सीरिया के अंदर कुर्दों के नेतृत्व में साहसी लड़ाई क...

18वाँ नाम सम्मेलन

अज़रबैजान की स्वास्थ्यवर्धक समुद्र तट वाली राजधानी बाकु में 18वें गुट निरपेक्ष सम्मेलन, नाम की दो दिवसीय बैठक दुनिया को ये अहसास दिला गई कि अभी भी नाम अस्तित्व में है और सक्रिय है। 6 दशक से भी पहले नाम की अवधारणा के साथ पश्चिम में ऐसे समीक्षकों की कोई कमी नहीं रही जो इसे समाप्त करने के पक्ष में थे लेकिन वे लगातार ग़लत साबित होते रहे। अज़रबैजान इसका नया सदस्य है और 2011 में इसमें शामिल हुआ है। लेकिन अज़रबैजान द्वारा नाम के 18वें सम्मेलन का आयोजन किया जाना ये साबित करता है कि तेज़ी से बदलती दुनिया में अभी भी सदस्य देशों के लिए नाम आंदोलन का महत्व है। दुनिया में अभी भी ऐसे बहुत से लोग हैं जो नाम में भरोसा रखते हैं और इसे देशों के लिए ऐसा मंच मानते हैं जो एक आवाज़ में तीसरी दुनिया का पक्ष रख सकता है। इन देशों को बड़ी राजनीतिक शक्तियों के वर्चस्व वाली दुनिया में नाम के द्वारा अपनी बात रखने का मौक़ा मिलता है। गुट निरपेक्ष आंदोलन के संस्थापक देशों में से एक होने के नाते भारत ने इसे आगे बढ़ाने में ऐतिहासिक रूप से एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारतीय शिष्टमंडल का नेतृत्व करने वाले ...

‘मन की बात’ (5वीं कड़ी)

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार | आज दीपावली का पावन पर्व है | आप सबको दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं | हमारे यहाँ कहा गया है - शुभम् करोति कल्याणं आरोग्यं धनसम्पदाम | शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोस्तुते | कितना उत्तम सन्देश है | इस श्लोक में कहा है – प्रकाश जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि लेकर के आता है, जो, विपरीत बुद्धि का नाश करके, सदबुद्धि दिखाता है | ऐसी दिव्यज्योति को मेरा नमन | इस दीपावली को याद रखने के लिए इससे बेहतर विचार और क्या हो सकता है कि हम प्रकाश को विस्तार दें, positivity का प्रसार करें और शत्रुता की भावना को ही नष्ट करने की प्रार्थना करें ! आजकल दुनिया के अनेक देशों में दिवाली मनायी जाती है | विशेष बात यह कि इसमें सिर्फ भारतीय समुदाय शामिल होता है, ऐसा नहीं है बल्कि अब कई देशों की सरकारें, वहां के नागरिक, वहां के सामाजिक संगठन दिवाली को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं | एक प्रकार से वहां ‘भारत’ खड़ा कर देते हैं |  साथियो, दुनिया में festival tourism का अपना ही आकर्षण है | हमारा भारत, जो country of festivals है, उसमें festival tourism क...

अमरीका ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार पर जताई चिंता

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यक अंत के कगार पर हैं। अल्पसंख्यकों की संख्या पाकिस्तान में निरंतर घटती जा रही है। पाकिस्तान के गठन के समय, हिंदुओं, सिखों, ईसाइयों, पारसियों, और बौद्ध आदि सहित अल्पसंख्यकों की कुल आबादी 28% थी। तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान की हिंदू आबादी लगभग 22% थी। लेकिन आज पाकिस्तान में अल्पसंख्यक 4% से कम के स्तर पर पहुँच गए हैं। पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने एक "धर्मनिरपेक्ष" पाकिस्तान की कल्पना की थी। लेकिन उनके अपने जीवनकाल के दौरान, ही कट्टरपंथियों ने एक धार्मिक राज्य की परिकल्पना पर काम करना शुरू कर दिया। परिणामतः वर्ष 1980 में राष्ट्रपति जिया उल हक के शासनकाल में पाकिस्तान एक धार्मिक राष्ट्र बन गया। अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न पिछले कई दशकों से पाकिस्तान में आम घटना हो गया है। कट्टरपंथी क़ानूनों और आरोपों के डर ने धार्मिक अल्पसंख्यकों को बेहद असुरक्षित बना दिया है। अमरीका ने कहा है कि वह पाकिस्तान में लोगों के अपने धार्मिक विश्वास के कारण भेदभाव और मानवाधिकारों के हनन की रिपोर्ट पर "गहराई से चिंतित" है। वाशिंगटन ने इमरान ...

भारत-अमरीकी रणनीतिक मंच का आर्थिक साझेदारी पर ज़ोर

भारत-अमरीका रणनीतिक मंच की दूसरी बैठक ने द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपनी अमरीकी यात्रा के दौरान भारत को अगले पांच वर्षों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के अपने संकल्प को व्यक्त किया था। भारत-अमरीका रणनीतिक मंच के प्रतिनिधिमंडल ने भारत के अपनी अर्थव्यवस्था के आकार को दोगुना करने के संकल्प पर भरोसा जताया। शीर्ष कॉर्पोरेट सीईओ और राजनयिकों के इस फोरम ने अनुमान लगाया कि भारत के अगले पांच वर्ष दुनिया के अगले 25 वर्षों पर अपना असर छोड़ने वाले होंगे। मंच के प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री मोदी के दृष्टिकोण का समर्थन किया। फोरम की अध्यक्षता जॉन चैम्बर्स ने की। अमरीका की तरफ से इस प्रतिनिधिमंडल में शीत युद्ध काल के जाने माने राजनयिक हेनरी किसिंजर, पूर्व अमरीकी विदेश विदेश मंत्री कोंडोलिज़ा राइस के अलावा शीर्ष रैंकिंग वाली कंपनियों के 300 से अधिक सीईओ शामिल थे। पिछले कुछ दशकों में भारत और अमरीका के परस्परिक संबंधों गुणात्मक सुधार देखा है। इसका समर्थन भारत के केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल भी करते हैं। श्री ग...

आरसीईपी समझौतों को लेकर भारत मुखर

क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बातचीत का क्रम 2 से 4 नवंबर के बीच होने वाली आगामी पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन, आसियान शिखर सम्मेलन और अन्य संबंधित बैठकों से पहले पूरा होने की उम्मीद है। इससे जून 2020 में भागीदारी की औपचारिक शुरुआत के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और अन्य बैठकों में भाग लेने के लिए अगले महीने की शुरुआत में बैंकॉक जाएंगे। बैठक के एजेंडे में आरसीईपी भी प्राथमिक मुद्दों में होगा। आरसीईपी वार्ता में दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (आसियान) के दस सदस्य देश और इसके 6 संवाद सहयोगी भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया और चीन शामिल हैं। आरसीईपी की शुरुआत नवंबर 2012 में हुई थी। इसके अंतर्गत पिछले सात वर्षों में प्रमुख एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को लेकर आसियान की बहुपक्षीय बातचीत हुई हैं। इस मेगा-क्षेत्रीय व्यापार ब्लॉक की हालिया बैठक इस सप्ताह बैंकॉक में संपन्न हुई। 80 प्रतिशत से अधिक समझौते पूर्ण हो चुके हैं। बातचीत करने वाले देशों की 225 बिन्दुओं में से 185 पर ...

भारत की एक्ट ईस्ट नीति मज़बूती की ओर

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद फिलीपींस और जापान की दो देशों की यात्रा पर थे। दोनों ही देश भारत की ’एक्ट ईस्ट’ नीति के महत्वपूर्ण कारक हैं। दौरे के पहले चरण में, राष्ट्रपति कोविंद ने राजनयिक संबंधों की स्थापना की 70 वीं वर्षगांठ मनाने के लिए फिलीपींस का दौरा किया। इसके बाद उन्होंने जापान के सम्राट, नरुहितो के शताब्दी राज्याभिषेक में शामिल होने के के लिए जापान यात्रा की। साझा मूल्यों और रणनीतिक हितों की पारस्परिकता के आधार पर, फिलीपींस भारत की एक्ट ईस्ट नीति का एक महत्वपूर्ण घटक है। एक विधि संगत वैश्विक परम्परा को आगे बढ़ाते हुए, भारत और फिलीपींस अंतरराष्ट्रीय कानून को बनाए रखने और राष्ट्रों की संप्रभु समानता की दृष्टि से 'स्वाभाविक भागीदार' हैं। भारत-फिलीपींस संबंध, दक्षिण-दक्षिण सहयोग और मजबूत लोकतांत्रिक राजनीति पर आधारित, अधिनियम पूर्व नीति के ढांचे के अधीन आगे बढ़ाए गए। समुद्री क्षेत्र, सुरक्षा, पर्यटन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और संस्कृति को शामिल करते हुए यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किये गए चार नए समझौतों के साथ भारत-फिलीपींस संबंधों में गुणात्मक गहराई प्राप्त करने के भी प्र...

संयुक्त राष्ट्र के 74 साल

संयुक्त राष्ट्र दिवस 1948 के बाद से भारत में हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र के 50 संस्थापक सदस्यों में से एक के रूप में सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में 26 जून 1945 को संयुक्त राष्ट्र राजपत्र अर्थात चार्टर पर हस्ताक्षर किए। पांच मूल स्थायी सदस्यों सहित अधिकांश हस्ताक्षरकर्ता देशों द्वारा इसके अनुसमर्थन के बाद 24 अक्टूबर 1945 को चार्टर लागू हुआ। 31 अक्टूबर 1947 को आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में, 24 अक्टूबर को "संयुक्त राष्ट्र दिवस" ​​घोषित करने के लिए एक प्रस्ताव अपनाया गया था। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और उपलब्धियों को उजागर करना था, ताकि इस सार्वभौमिक अंतर-सरकारी संगठन के काम के लिए समर्थन बनाए रखा जा सके। भारत 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से स्वतंत्र हो गया। भारत की स्वतंत्रता के दो महीने से भी कम समय बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा के इस प्रस्ताव को अपनाना उनके लिए संयुक्त राष्ट्र दिवस संकल्प के उद्देश्यों में योगदान करने का एक बड़ा अवसर था। उपनिवेशवाद की समाप्ति, सतत विकास के लिए एक सार्वभौमिक एजेंडा, और मौलिक मा...

भारत-बांग्लादेश का एलपीजी आयात समझौता 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना के बीच बांग्लादेश से भारी मात्रा में तरलीकृत पैट्रोलियम गैस या बल्क एलपीजी के आयात के संदर्भ में सहमति समझौते पर हस्ताक्षर होना दोनों पड़ौसियों के परस्पर संबंधों को और मज़बूत करने के लिए महत्त्वपूर्ण गतिविधि है। पूर्वोत्तरी राज्य त्रिपुरा में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ती सुनिश्चित करने की अनोखी चुनौती का सामना करने के लिए भारत सरकार द्वारा बांग्लादेश के साथ एक समझ पैदा करना एक दूसरे की परेशानी को समझने, उसे प्रभावी तरीक़े से दूर करने का रास्ता तलाशने और आपसी सामंजस्य बढ़ाने का बहुत अच्छा उदाहरण है। इस मामले में बांग्लादेश से भारत के सीमाई राज्य में भारी मात्रा में एलपीजी के आयात से ना केवल साल भर की आपूर्ति सुनिश्चित होगी बल्कि परिवहन लागत और समय में भी बहुत कमी आएगी। वर्तमान समय में त्रिपुरा को मेघालय या सिलचर से गुवाहाटी मार्ग द्वारा एलपीजी आपूर्ति होती है। एलपीजी टैंकर्स जब अपनी 600 किलोमीटर यात्रा के लिए गुवाहाटी से चलते हैं तब ये भूस्खलन की आशंका वाले पहाड़ी क्षेत्रों से गुज़रते हैं। बरसात में कई-कई दिनों तक एलपीजी आ...

एफ़एटीएफ़ की चेतावनी के बाद पाकिस्तान ग्रे लिस्ट में रहेगा

पाकिस्तान द्वारा नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन किए जाने के बाद भारत ने पाकिस्तान के क़ब्ज़े वाले कश्मीर पर आतंकियों के लॉंच पैड और ठिकानों को निशाना बनाया है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने कहा कि भारतीय बलों द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कई पाकिस्तानी सैनिक और आतंकी मारे गए। पाकिस्तानी संघर्ष विराम का उल्लंघन करते रहे हैं, जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद विशेष रूप से ऐसा किया जा रहा है। पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन हासिल करने में पूरी तरह नाकाम रहा है और इसीलिए भारतीय राज्यक्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश और संघर्ष विराम उल्लंघन का सहारा ले रहा है। लेकिन भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा इसकी ये कोशिश पूरी तरह नाकाम की जा रही है। इसी बीच वित्त कार्रवाई बल, एफ़एटीएफ़ ने पेरिस में अपने पूर्ण सत्र में एक मत से ये निर्णय ले लिया है कि पाकिस्तान को फ़रवरी 2020 तक ये अपनी ग्रे लिस्ट में रखेगा। इस तरह पाकिस्तान को और चार महीने मिल गए हैं कि ये आतंकवादियों और उनके संगठनों द्वारा किए जा रहे आतंक वित्त पोषण और हवाला के ख़िलाफ़ जल्द ही मज़बू...

करतारपुर गलियारे का उद्घाटन

आपसी तनाव के बावजूद भारत और पाकिस्तान ने श्रद्धालुओं की इच्छा देखते हुए करतारपुर साहिब गलियारे को खोलने का फैसला किया। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित नरौवाल जिले में मौजूद गुरूद्वारा दरबार साहिब के दर्शन के लिए श्रद्धालु इस रास्ते का प्रयोग कर सकेंगे। करतारपुर साहिब गुरूद्वारा सिख पंथ के संस्थापक गुरूनानक देव जी को समर्पित है। गुरूनानक देव जी ने इस स्थान पर 18 वर्ष तक प्रवचन दिये और वे अंत तक यहीं रहे। गुरू जी की 550वीं जयंती के अवसर पर ये मार्ग खोला जाएगा। पिछले साल नवंबर में भारत सरकार ने गुरदास पुर जिले से अंतर्राष्ट्रिय सीमा तक चार लेन का गलियारा बनाने को मंजूरी दी थी। पाकिस्तान में लगभग 173 सिख धर्म स्थल हैं। भारत के सिख श्रद्धालुओं को 1974 की एक द्वीपक्षीय संधि के तहत इनमे से केवल कुछ में जाने की इजाज़त है। इससे पहले सिख श्रद्धालु सीमा पर स्थित डेरा बाबा नानक में लगी दूरबीनों से गुरूद्वारा दरबार साहिब के दर्शन कर पाते थे। पाकिस्तान ने केवल चार अवसरों पर तीर्थ यात्रियों को आने की इजाज़त दी थी। यानि बैसाखि, गुरू अर्जुन देव के बलिदान दिवस, महाराजा रंजीतसिंह की पुण्य तिथि और गु...

निर्गुट आंदोलन के समक्ष चुनौतियां

ऐसे में जब कि निर्गुट आंदोलन पहले जितना चर्चित नहीं रह गया है, अज़रबैजान निर्गुट आंदोलन की 18वीं शिखर बैठक का आयोजन करने जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता के ध्रुवों में आये परिवर्तन के चलते वैश्विक रिश्तों में नए समीकरण बने हैं और निर्गुट आंदोलन हाशिए पर चला गया है। अटलांटिक युग के बाद एशिया की सदी का उदय जारी है और दुनिया नए भू-राजनैतिक तालमेल देख रही है। 21वीं सदी को एक विशेषज्ञ ने “G Zero” विश्व कहा है यानि जहॉ किसी एक ग्रुप, देश या संस्था की नहीं चलती और विभिन्न क्षेत्रीय तथा वैश्विक गुटों का प्रभाव आर्थिक तथा रणनीतिक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। कुछ वर्ष पहले भारत के उच्च रणनीतिज्ञों ने निर्गुट आंदोलन-2 नाम से एक दस्तावेज़ जारी किया था। जिसमें कहा गया था कि निर्गुट आंदोलन के मूल सिद्धांतों पर स्थिर रहते हुए भारत विश्व मंच पर प्रभावशाली बनेगा और अपनी रणनीतिक स्वायत्ता और मूल्यों की रक्षा कर सकेगा। शीत युद्ध की समाप्ति के बाद शीत युद्ध द्वितीय जारी है। इसकी प्रकृति भिन्न है मग़र है उतना ही घातक। अब ये केवल अपने हितों की नहीं बल्कि जीवन मूल्यों की स्पर्द्धा पर भी आधारित है...

भारत-डच संबंध एक नई ऊंचाई पर

भारत तथा नीदरलैंड के दीर्घ ऐतिहासिक संबंध 17वीं सदी से चले आ रहे हैं | 1947 में भारत की स्वाधीनता के बाद, दोनों देशों के बीच आधिकारिक सम्बन्धों की स्थापना हुई | 1970 तथा 1980 के दशक में आर्थिक सम्बन्धों में व्यवस्थित रूप से वृद्धि हुई, लेकिन, 1990 के दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण के बाद इसमें वास्तविक गति आई | राजनीतिक, आर्थिक तथा सम-सांस्कृतिक स्तर पर द्विपक्षीय सम्बन्धों में बढ़ती तीव्रता देखने को मिली है | राजनीतिक सम्बन्धों को लेकर दोनों पक्षों की उच्च स्तरीय यात्राओं के बढ़ने से यह तीव्रता स्पष्ट दिखती है | 2006 में, डच प्रधानमंत्री जां पीटर बाकेनेण्डे ने भारत की यात्रा की | दोनों देशों के बीच गत चार वर्षों में प्रधानमंत्री स्तर की तीन यात्राएं हुईं हैं | मई 2018 में, नीदरलैंड के प्रधानमंत्री, मार्क रट ने भारत में सबसे बड़े व्यावसायिक शिष्टमंडल का नेतृत्व किया, जो दोनों देशों के बीच के बढ़ते आर्थिक सम्बन्धों का संकेत है | डच की राजकीय जोड़ी, किंग विल्लेम अलेक्ज़ेंडर तथा क़्वीन मकसीमा ने पाँच दिन का भारत दौरा किया | 2013 में शासन संभालने के बाद किंग विल्लेम अलेक्ज़ेंडर का...

ट्रम्प ने सीरिया पर तुर्की की चढ़ाई के प्रति अंतरराष्ट्रीय अस्वीकृति का दिया संकेत

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के तुर्की पर प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले से पहले से परेशान पश्चिम एशिया में हलचल बढ़ गई है। अमरीका के राष्ट्रपति ने निर्णय लिया था कि सीरिया में कुर्दों के समर्थन में तैनात अमरीकी सेनाओं को वापिस बुलाया जाएगा। उन्होंने कुर्दिश बहुल सीरियाई डेमोक्रेटिक बलों (एसडीएफ़) के बिना उत्तरी सीरिया में चढ़ाई करके टकराव क्षेत्र तैयार करने के तुर्की के फ़ैसले पर नाराज़गी ज़ाहिर की। तुर्की के राष्ट्रपति रेसप तैय्यप एर्दोआन अपने देश में कुर्दिश वर्कर्स पार्टी के साथ अपने संबंधों की वजह से एसडीएफ़ को एक आतंकी गुट के रूप में देखते हैं। सीरियाई कुर्दों के पीछे पड़ कर वे तुर्की में कुर्दिश राष्ट्रवादियों के प्रभाव को कम करना चाहते हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प ने अचानक फ़ैसला लिया कि सीरिया से सेनाएँ बाहर बुलाएँगे और क्षेत्र को स्वयं अपने समाधान तलाशने देंगे। इस निर्णय को कुर्दों के साथ किए गए धोख़े के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि आईएसआईएस की सैन्य हार के पीछे वही प्रमुख बल रहे हैं। मार्च 2019 में आईएसआईएस सीरिया के चरमपंथियों की हार के बावजूद ये डर है कि बचे हुए चरमपंथी फ...

भारत के कोमोरोस और सिएरा लियोन के साथ मजबूत होते रिश्तें

अफ्रीकी महाद्वीप के साथ सम्बंधों को और सुदृढ़ करने के लिए भारत के उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू ने कोमोरोस और सिएरा लियोन की यात्राएं की। एक समुद्री पड़ोसी देश के रूप में, भारत कोमोरोस के लोगों के साथ अपनी प्रगति के अनुभव साझा करने के लिए तैयार है। भारत कोमोरोस के विकास में एक प्रमुख साझेदार बनने की इच्छा रखता है। उपराष्ट्रपति नायडू ने राष्ट्रपति अज़ाली असोमनी के साथ वार्ता की। दोनों नेताओं ने कई दिलचस्प अवसरों को लेकर चर्चा की। दोनों नेता द्विपक्षीय आर्थिक सम्बंधों के अलावा अन्य क्षेत्रों जैसे स्वास्थ्य, नवीकरणीय ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा का विस्तार करने पर सहमत हुए। रक्षा सहयोग को लेकर एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। स्वास्थ्य और संस्कृति को लेकर भी महत्वपूर्ण समझौते किए गए। भारत और कोमोरोस ने छोटी यात्राओं के लिए राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट वालों के लिए वीजा होने की अनिवार्यता से एक-दूसरे को छूट देने का फैसला किया। भारत ने मोरोनी में 18 मेगावाट पावर प्लांट की स्थापना के लिए चार करोड़ सोलह लाख अमेरिकी डॉलर की ऋण सुविधा दे कर सहयोग बढ़ाया ...

भारत-चीन का उच्च स्तरीय आर्थिक और व्यापार संवाद तंत्र

मामल्लापुरम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिंपिंग की अनौपचारिक शीर्ष बैठक में एक उच्च स्तरीय आर्थिक और व्यापारिक संवाद तंत्र स्थापित किए जाने का उल्लेखनीय फ़ैसला लिया गया। ये निर्णय भारत और चीन के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए विशेष प्रतिनिधियों की नियुक्ति के समान ही है। भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और चीन के वाइस-प्रिमियर हू चुन हुआ इस संवाद तंत्र के अध्यक्ष होंगे। इस अनौपचारिक शीर्ष बैठक का उद्देश्य सर्वोच्च नेतृत्व स्तर पर द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करना था। इस तंत्र की स्थापना का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच महत्त्वपूर्ण और अतिआवश्यक मामलों पर तुरंत विचार-विमर्श करना है। इन मामलों में चीन के पक्ष में जाता हुआ पचास अरब डॉलर से भी ऊपर का व्यापार घाटा भी है। इस तंत्र के विषय में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है। ऐसे में ये प्रश्न उठता है कि क्या भारतीय उद्योग को अपने विचार सामने रखने का अवसर मिलेगा। इस तरह के द्विपक्षीय तंत्र की स्थापना का एक संभावित उद्देश्य हो सकता है कि विश्व व्यापार संगठन जैसे बहुपक्षीय मंच ऐसे मामलों को सुलझाने में सक्षम नहीं ...