देश की जल समस्या के समाधान के लिए जल शक्ति मंत्रालय का गठन।



पानी जीवन के लिए ज़रूरी है, इसके बावजूद दुनियाभर में 844 मिलियन लोग इससे महरूम हैं। विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के मुताबिक पानी का संकट आधुनिक समाज के सामने चौथी सबसे बड़ी समस्या है। भारत में भी पानी के मामले में हालात काफी बदतर हैं। हालांकि, देश ने पिछले दशक के दौरान महानगरों में पानी की उपलब्धता और गुणवत्ता के मामले में खासी तरक्की की है। फिर भी जनसंख्या के बढ़ते दबाव के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की आपूर्ति योजना के अनुरूप सम्भव नहीं हो पाई है। महानगरों में भी आबादी का घनत्व बढ़ता जा रहा है, जिससे पानी की उपलब्धता के साधन अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। जल आपूर्ति के निजीकरण से भी समस्या गहनतर हुई है।

पानी की गुणवत्ता के सवालों के बीच परम्परागत जलस्रोतों के प्रदूषण का खतरा गहराता जा रहा है। ज़्यादातर नदियाँ, झीलें, तालाब और कुएँ जैविक तथा रासायनिक प्रदूषण के शिकार हो रहे हैं। देश के तकरीबन 21 प्रतिशत लोग जलजनित बीमारियों से ग्रस्त हैं। शौचालय-निर्माण की गति में बढ़ोतरी के बावजूद कुल आबादी के 33 फीसदी लोग अभी भी पारंपरिक स्वच्छता तरीकों पर निर्भर हैं।

भारत में पानी के भण्डारों के सिकुड़ने के साथ उनके प्राकृतिक पुनःभण्डारण की समस्या भी काफी गम्भीर है। भारत में हिमालयी नदियाँ और मॉनसून पानी की आपूर्ति के सबसे बड़े स्रोत हैं। इनसे उपलब्ध पानी का बड़ा हिस्सा अनाज के उत्पादन में खर्च होता है। इस कारण अन्य उपयोगों के लिए पानी की कमी बनी रहती है। पानी के भूमिगत स्रोतों का स्तर भी कृषिकार्यों में उपयोग के कारण घटता जा रहा है।

नीतिआयोग के मुताबिक भारत में 600 मिलियन लोग उच्च से गम्भीर जलसंकट से जूझ रहे हैं। तकरीबन 75 फीसदी परिवारों को घर में पानी की आपूर्ति उपलब्ध नहीं है। स्वच्छ पेयजल की कमी के चलते हर साल लगभग 2 लाख लोगों की मौत हो जाती है। प्रतिवर्ष अप्रैल से जुलाई के बीच देश के आठ राज्यों में पानी की उपलब्धता-स्थिति बदतर हो जाती है। आने वाले समय में जलवायु बदलाव और ग्लोबल वॉर्मिंग से हालात और खराब हो सकते हैं। इन स्थितियों से निपटने के लिए सरकार ने एकीकृत जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है। इसका लक्ष्य सभी को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना और देश की जल समस्याओं को सुलझाना है। नए मंत्रालय का गठन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन, पेयजल तथा स्वच्छता मंत्रालयों को मिलाकर किया गया है। नया मन्त्रालय स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से लेकर अन्तर्राज्यीय जल विवादों के समाधान और नमामि गंगे अभियान से लेकर नदी स्वच्छीकरण तक के सभी काम देखेगा।

नए मन्त्रालय का गठन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनावी वायदों के मद्देनज़र किया गया है; जिसमें उन्होंने सभी को पेयजल उपलब्ध कराना एन.डी.ए. सरकार दूसरे कार्यकाल की प्राथमिकता बताया था। उन्होंने पेयजल और सिंचाई के लिए अलग मन्त्रालय के गठन का वायदा किया था, जिसे अब पूरा किया गया है। अभी तक केन्द्र सरकार के अनेक मन्त्रालय जल सम्बन्धी छोटे-बड़े मामले देख रहे थे। उदाहरण के लिए देश की अधिसंख्य नदियों के संरक्षण का काम पर्यावरण और वन मन्त्रालय की ज़िम्मेदारी रहा है। इसी तरह शहरी क्षेत्रों में जल आपूर्ति का काम आवास तथा शहरी मामलों के मंत्रालय और लघु सिंचाई परियोजनाओं का काम कृषिमन्त्रालय के अधीन रहा है।

भारत सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति के मुताबिक नवगठित जलशक्ति मन्त्रालय का कार्यक्षेत्र काफी विस्तृत होगा। इससे यह मंत्रालय देश में पानी की उपलब्धता, माँग, उपयोगिता आदि का प्रबन्धन पेशेवर तरीके से कर सकेगा। जल और कृषिमन्त्रालय आपसी समन्वय से व्यापक नीति बना सकेंगे; क्योंकि देश में मौजूद कुल जल के 80 फीसदी का उपयोग कृषि सम्बन्धी कार्यों में होता है। इससे वैकल्पिक कृषि, देश को कृषिक्षेत्रों में बाँटना और जलसंरक्षणयुक्त सिंचाई जैसी गतिविधियों में इज़ाफा होगा। उपलब्ध जलभण्डारों के अधिकतम उपयोग के लिए कम बारिश वाले क्षेत्रों में छिड़काव और बूँद सिंचाई तकनीकों के विकास का रास्ता भी निकाला जाएगा।



आलेख - बिमान बसु, वरिष्ठ विज्ञान टिप्पणीकार।
अनुवाद और वाचन - डॉ. श्रुतिकान्त पाण्डेय

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