ओसाका में भारत और अमरीका का संवाद

 जी-20 ओसाका शिखर सम्मेलन की बाहरी पंक्ति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नौ द्विपक्षीय और दो त्रिपक्षीय वार्ताएँ कीं और साथ ही तीन दिनों के भीतर ब्रिक्स नेताओं के साथ अनौपचारिक बैठकें भी कीं। ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, जर्मनी, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब, तुर्की और अमरीका के साथ द्विपक्षीय वार्ता हुई और जापान, भारत और अमरीका तथा रूस, भारत और चीन की त्रिपक्षीय वार्ताएँ हुईं। हालांकि जी-20 की मुख्य कार्यसूची वैश्विक अर्थव्यवस्था के बारे में विचार-विमर्श करनी थी लेकिन व्यापार और भू-राजनीति भी आपस में जुड़े हुए हैं और परस्पर निर्भर हैं। भारत और अमरीका के बीच व्यापार एक मुख्य विषय है। द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प ने व्यापार से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। 
जी-20 शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम चीन और अमरीका के बीच जारी व्यापार युद्ध में आई नरमी है। भारत दोनों देशों के बीच जारी वार्ता पर ध्यान दे रहा है क्योंकि भारत भी अमरीका के साथ शुल्क के जुड़े अपने मतभेद दूर करने की कोशिश कर रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत के उच्च शुल्कों की निंदा की है और वे चाहते हैं कि नई दिल्ली अपनी व्यापार बाधाओं को कम करे। भारत ने बादाम, दालों और अखरोट सहित अमरीका से आयात की जाने वाली 28 मदों पर शुल्क बढ़ा दिए हैं। भारतीय उत्पादों पर से अमरीका द्वारा प्राथमिकता के आधार पर पहुँच की सुविधा वापस ले लिए जाने के बदले में भारत ने ऐसा किया है। भारत स्टील और एल्युमीनियम पर आयात शुल्क अधिरोपण के मामले में अमरीका को विश्व व्यापार संगठन में विवाद निपटान व्यवस्था में ले गया। जी-बीस से पहले अमरीका के विदेश मंत्री पोम्पिओ ने भी अपनी भारत यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर बात की थी। अब भारत और अमरीका ने ये निर्णय लिया है कि दोनों देशों के व्यापार मंत्री इन मुद्दों को सुलझाने के लिए जल्द ही मुलाक़ात करेंगे।   
व्यापार के अतिरिक्त भारतीय प्रधानमंत्री और अमरीकी राष्ट्रपति ने 5-जी तकनीक, रक्षा संबंधों और ईरान के बारे में भी वार्ता की। ईरान के संदर्भ में भारत का ध्यान मुख्य रूप से फ़ारस की खाड़ी में स्थिरता और शांति पर लगा हुआ है। हालांकि क्षेत्रीय संकट के गहराने की वजह से भारतीय पोतों का मुक्त वहन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारतीय नौसेना के पोतों की तैनाती ज़रूरी हो गई है। अमरीका ने इस निर्णय की प्रशंसा की थी जिससे आश्वासन मिला कि भारत को होने वाली तेल आपूर्ति प्रभावित ना हो।  
5 जी तकनीक एक अहम विषय-वस्तु रही क्योंकि अमरीका हुवाई के साथ व्यवसाय जारी रखने की अपनी कंपनियों को अनुमति दे रहा है। भारत 5-जी तकनीक हासिल करना चाहता है और अमरीका द्वारा उठाए गए सुरक्षा मुद्दों के बारे में अब भारत द्वारा भी विचार किया जा रहा है। अमरीका नई प्रौद्योगिकी में अपनी विशेषज्ञा विकसित कर रहा है और तकनीक से जुड़ी संभावनाओं तथा व्यवसाय के लिए भारत की ओर देख रहा है। भारत इस संदर्भ में प्रक्रिया से जुड़ा प्रारूप तैयार करने, तकनीक विकास और गठजोड़ चाहता है।     
भारत इस तकनीक के अरबों उपयोगकर्ता उपलब्ध करवा सकता है और इस मामले में अहम वैश्विक रुझान तय करेगा। इस बात पर ध्यान दिया जाएगा कि 5-जी क्षमता की तकनीक, प्रारूप और सॉफ़्टवेयर विकास को किस तरह मेक इन इंडिया अभियान का हिस्सा बनाया जा सकता है। इससे अमरीकी और भारतीय कंपनियों को दो सरकारों से इतर एक साथ काम करने का अवसर मिलेगा। 
रक्षा क्षेत्र दोनों देशों के बीच गठजोड़ का अन्य क्षेत्र रहा है। हालांकि ओसाका में हुई बैठक में इस संदर्भ में अधिक बात नहीं की जा सकी लेकिन भारत अमरीका के साथ अपने रक्षा संबंध गहरे करता आ रहा है और अमरीका की भी हिन्द-प्रशांत विस्तृत क्षेत्र में सुरक्षा साझेदारी है। जापान-अमरीका और भारत के बीच दूसरी त्रिपक्षीय वार्ता में इस मुद्दे पर तीनों पक्षों ने बात की। 

तीनों देशों ने इस मुद्दे पर बात की कि क्षेत्र के विस्तृत विकास के लिए तीनों देश सम्पर्क और आधारभूत संरचना क्षेत्र में किस प्रकार साथ मिलकर काम कर सकते हैं। तीनों देशों ने शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साझे लक्ष्यों पर भी चर्चा की ताक़ि नई अवधारणाओं का लाभ पूरे क्षेत्र को मिल सके। तीनों पक्षों ने हिन्द महासागर में समुद्री क्षेत्र में परस्पर सहयोग बेहतर करने के उद्देश्य से वार्षिक शिखर बैठक करने के लिए भी सहमति व्यक्त की। इस क्षेत्र में बढ़ती चीनी सैन्य आक्रामकता के मद्देनज़र ये बहुत ही महत्त्वपूर्ण है।
आलेख- डॉ. स्तुति बैनर्जी, अमरीका के सामरिक मामलों की विश्लेषक  
अनुवाद- नीलम मलकानिया

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