निवेशकों के अनुकूल भारत का आम बजट
वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट संसद में पेश किया। बजट में तमाम सरकारी प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर बल दिया गया है। यह बजट “ईज़ ऑफ बिज़नेस” को लेकर व्यापार और उद्योग जगत की उम्मीदों पर खरा उतरा है। बजट में अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने पर ध्यान केन्द्रित है, जिससे देशभर में लोगों के जीवन को आसान बनाने में मदद मिलेगी। हम जानते हैं कि भारत इस साल 3 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनने को तैयार है, ऐसे में इस बजट ने, आगामी कुछ सालों में भारत को 05 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनाने की नींव रखी है। ख़ास बात ये है कि इस लक्ष्य को पाने के लिए निवेश को बढ़ाने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है। इस बजट ने इतिहास में पेश किए गए बजट को पीछे छोड़ते हुए सरकार-व्यवसाय और नागरिकों के बीच संतुलन बनाने को महत्व दिया है, ताकि देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन स्तर को बेहतर किया जा सके।
विकास और गरीबों के हित को ध्यान में रखना, वर्तमान सरकार का प्रमुख एजेंडा है। इस एजेंडे को ध्यान में रखते हुए, यह बजट निजी संस्थाओं सहित सभी हितधारकों के साथ सार्थक साझेदारी कर, धन सृजित करने पर केन्द्रित है। अगर धन की व्यवस्था नहीं होगी, तो लोगों की प्रगति और कल्याण, कभी भी स्थायी रूप नहीं ले पाएगा। यही वजह है कि इस बजट में, सालाना 400 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली फर्मों के कॉर्पोरेट आयकर को घटाकर 25 फीसदी करने का वादा किया गया है। इससे देशभर की 99.3 फीसद फर्म एक ही झटके में इस नियम के दायरे में आ गई हैं। इससे भविष्य में निवेश बढ़ने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि अकेले निजी स्तर पर मिलने वाले निवेश से, देश में मांग बढ़ने, उत्पादकता में बढ़ोतरी और श्रम साध्य राष्ट्र में लाभकारी व्यवसाय प्रदान करने जैसे लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।
इस बजट में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें, निजी क्षेत्र से जुड़े आर्थिक एवं कुशल बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए सीवेज, रेलवे, रोडवेज और हवाई अड्डों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में चल रहे कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना शामिल है। संरचनात्मक स्तर पर इसके दूरगामी परिणाम होंगे। यह बजट विभिन्न गतिविधियों के व्यापक स्पेक्ट्रम में दक्षता हासिल करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। निवेश को आकर्षित करने के मद्देनज़र यह बजट विदेशी पोर्टफोलियो वाले निवेशकों के सामने व्यापक स्तर पर भारत में निवेश करने का प्रस्ताव रखता है। बजट में अवसंरचना क्षेत्र के लिए क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप शुरू करने, कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को बढ़ावा देने, और अप्रवासी भारतीयों द्वारा इक्विटी में निवेश करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
नॉन परफॉर्मिंग ऋण के बोझ से दबे घरेलू बैंकिंग सेक्टर और दिवाला एवं दिवालिया संहिता के माध्यम से इस ऋण की भरपाई करने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को ध्यान में रखते हुए बजट में अतिरिक्त 70 हज़ार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। यह बैंकिंग उद्योग के क्रेडिट आधार को बढ़ाने और धन के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करेगा। बजट में कूटनीतिक बिक्री की मदद से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में विनिवेश कर 1 लाख 5 हजार करोड़ रुपये इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा गया है।
विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए, बजट में कहा गया है कि सरकार विमानन क्षेत्र में एफडीआई शुरू करने संबंधी सुझावों की समीक्षा करेगी। गौरतलब है कि विमानन बाज़ार के मामले में भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। बजट में बीमा क्षेत्र के लिए 100 फीसदी एफडीआई और एकल ब्रांड खुदरा क्षेत्र में स्थानीय सोर्सिंग मानदंडों को आसान बनाने की अनुमति देने का प्रस्ताव भी किया गया है, ताकि भारत के लोगों को प्रतिस्पर्धी मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उत्पादों का लाभ मिल सके। इस बजट में गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की समस्याओं का समाधान निकालने पर भी ध्यान दिया गया है। ये कंपनियाँ रियल्टी और परिवहन क्षेत्र में अहम भूमिका निभाती हैं।
भारत ने बाहरी उधार कार्यक्रम को बढ़ावा देने के प्रति अपनी इच्छा जताई है, क्योंकि जीडीपी अनुपात के मामले में भारत का बाहरी ऋण पाँच प्रतिशत से भी कम और दुनियाभर में सबसे निचले स्तर पर है। वहीं दूसरी ओर राजकोषीय मोर्चे पर, सरकार ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम को गति देने के लिए, कच्चे तेल और सोने जैसे औद्योगिक उत्पादों सहित कई सामानों पर आयात शुल्क बढ़ाने के अलावा, अत्यंत अमीर श्रेणी में आने वाले लोगों के आयकर में बढ़ोतरी भी की है। कुल मिलाकर कहें तो, यह बजट विकास को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी उपायों को अपनाने वाला है। इस बजट में राजकोषीय स्तर पर संतुलन बनाने की कोशिश भी की गई है, जो सराहनीय कदम है।
आलेख – जी. श्रीनिवासन, वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार
अनुवाद एवं स्वर – डॉ. प्रवीन गौतम
विकास और गरीबों के हित को ध्यान में रखना, वर्तमान सरकार का प्रमुख एजेंडा है। इस एजेंडे को ध्यान में रखते हुए, यह बजट निजी संस्थाओं सहित सभी हितधारकों के साथ सार्थक साझेदारी कर, धन सृजित करने पर केन्द्रित है। अगर धन की व्यवस्था नहीं होगी, तो लोगों की प्रगति और कल्याण, कभी भी स्थायी रूप नहीं ले पाएगा। यही वजह है कि इस बजट में, सालाना 400 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली फर्मों के कॉर्पोरेट आयकर को घटाकर 25 फीसदी करने का वादा किया गया है। इससे देशभर की 99.3 फीसद फर्म एक ही झटके में इस नियम के दायरे में आ गई हैं। इससे भविष्य में निवेश बढ़ने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि अकेले निजी स्तर पर मिलने वाले निवेश से, देश में मांग बढ़ने, उत्पादकता में बढ़ोतरी और श्रम साध्य राष्ट्र में लाभकारी व्यवसाय प्रदान करने जैसे लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।
इस बजट में बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी पर विशेष जोर दिया गया है। इसमें, निजी क्षेत्र से जुड़े आर्थिक एवं कुशल बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए सीवेज, रेलवे, रोडवेज और हवाई अड्डों जैसे प्रमुख क्षेत्रों में चल रहे कार्यक्रमों को आगे बढ़ाना शामिल है। संरचनात्मक स्तर पर इसके दूरगामी परिणाम होंगे। यह बजट विभिन्न गतिविधियों के व्यापक स्पेक्ट्रम में दक्षता हासिल करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। निवेश को आकर्षित करने के मद्देनज़र यह बजट विदेशी पोर्टफोलियो वाले निवेशकों के सामने व्यापक स्तर पर भारत में निवेश करने का प्रस्ताव रखता है। बजट में अवसंरचना क्षेत्र के लिए क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप शुरू करने, कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट को बढ़ावा देने, और अप्रवासी भारतीयों द्वारा इक्विटी में निवेश करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
नॉन परफॉर्मिंग ऋण के बोझ से दबे घरेलू बैंकिंग सेक्टर और दिवाला एवं दिवालिया संहिता के माध्यम से इस ऋण की भरपाई करने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को ध्यान में रखते हुए बजट में अतिरिक्त 70 हज़ार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। यह बैंकिंग उद्योग के क्रेडिट आधार को बढ़ाने और धन के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करेगा। बजट में कूटनीतिक बिक्री की मदद से सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में विनिवेश कर 1 लाख 5 हजार करोड़ रुपये इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा गया है।
विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए, बजट में कहा गया है कि सरकार विमानन क्षेत्र में एफडीआई शुरू करने संबंधी सुझावों की समीक्षा करेगी। गौरतलब है कि विमानन बाज़ार के मामले में भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है। बजट में बीमा क्षेत्र के लिए 100 फीसदी एफडीआई और एकल ब्रांड खुदरा क्षेत्र में स्थानीय सोर्सिंग मानदंडों को आसान बनाने की अनुमति देने का प्रस्ताव भी किया गया है, ताकि भारत के लोगों को प्रतिस्पर्धी मूल्य पर गुणवत्तापूर्ण उत्पादों का लाभ मिल सके। इस बजट में गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की समस्याओं का समाधान निकालने पर भी ध्यान दिया गया है। ये कंपनियाँ रियल्टी और परिवहन क्षेत्र में अहम भूमिका निभाती हैं।
भारत ने बाहरी उधार कार्यक्रम को बढ़ावा देने के प्रति अपनी इच्छा जताई है, क्योंकि जीडीपी अनुपात के मामले में भारत का बाहरी ऋण पाँच प्रतिशत से भी कम और दुनियाभर में सबसे निचले स्तर पर है। वहीं दूसरी ओर राजकोषीय मोर्चे पर, सरकार ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम को गति देने के लिए, कच्चे तेल और सोने जैसे औद्योगिक उत्पादों सहित कई सामानों पर आयात शुल्क बढ़ाने के अलावा, अत्यंत अमीर श्रेणी में आने वाले लोगों के आयकर में बढ़ोतरी भी की है। कुल मिलाकर कहें तो, यह बजट विकास को बढ़ावा देने के लिए ज़रूरी उपायों को अपनाने वाला है। इस बजट में राजकोषीय स्तर पर संतुलन बनाने की कोशिश भी की गई है, जो सराहनीय कदम है।
अनुवाद एवं स्वर – डॉ. प्रवीन गौतम
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