श्री लंका ने भारतीय सहायता से निर्मित पहले मॉडल गाँव का उद्घाटन किया

श्री लंका सरकार के आवास तथा निर्माण और सांस्कृतिक मामलों के मंत्रालय के मॉडल गाँव कार्यक्रम के अंतर्गत श्री लंका के गमपाह ज़िले में भारतीय सहायता से निर्मित पहले मॉडल गाँव का उद्घाटन 06 जुलाई, 2019 को किया गया | उद्घाटन समारोह को चिन्हित करने के लिए आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके घर लाभार्थियों को सुपुर्द किए गए | कई अन्य राजनीतिज्ञों और उच्चाधिकारियों समेत श्री लंका के आवास तथा निर्माण और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री सजिथ प्रेमदासा, पूर्व राष्ट्रपति चंद्रिका भंडारनायके कुमारतुंगा तथा कार्यकारी भारतीय उच्चायुक्त डॉ॰ शिल्पक एंबुले ने इस अवसर की शोभा बढ़ाई |

वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) 1200 मिलियन के भारतीय सहायता अनुदान के तहत समूचे श्री लंका में कुल 2400 घरों वाले 100 मॉडल गाँव निर्मित करने के लिए भारत सरकार ने आवास तथा निर्माण और सांस्कृतिक मामलों के श्री लंकाई मंत्रालय के साथ भागीदारी की थी | इस प्रतिबद्धता के हिस्से के रूप में, भारतीय अनुदान सहायता के 600 मिलियन श्री लंकाई रुपये का प्रयोग करते हुए, श्री लंका के 25 ज़िलों में मॉडल गाँव आवासीय परियोजना के तहत 600 घरों तथा ग्राम शक्ति आवासीय परियोजना के तहत श्री लंका के दक्षिणी प्रांत में 600 घरों के निर्माण के लिए 26 अक्तूबर, 2017 को भारत-श्री लंका ने दो सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए |

भारत सरकार की तकनीकी तथा वित्तीय सहायता से इन घरों का निर्माण मालिक द्वारा दिये जाने वाले मॉडल के अनुसार किया जा रहा है | गृह-निर्माण के पाँच चरणों में लगने वाले पाँच लाख एसएलआर के नक़द अनुदान कम आय, भूमिहीन तथा आवासहीन लाभार्थियों को पाँच किस्तों में दिये जाते हैं | ये परियोजनाएं उत्तर तथा पूर्व में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के लिए 50,000 घरों का निर्माण तथा कृषि क्षेत्र के लाभार्थियों के लिए 10,000 घरों का निर्माण करने की भारत सरकार की वचनबद्धता के अतिरिक्त हैं | इसके लिए जून 2010 तथा मई 2017 में क्रमशः सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए गए थे | एसएलआर 300 मिलियन की भारतीय सहायता के तहत अनुराधापुर के सोबिथा थेरो गाँव में एक बहुउद्देशीय समुदाय भवन तथा एक छोटे दान भवन, आंतरिक जलापूर्ति व्यवस्था, भिक्षु आवास का नवीनीकरण तथा एक लाइब्रेरी और 153 आवासों के निर्माण के लिए दोनों सरकारों द्वारा 14 जुलाई, 2017 को एक सहमति पत्र भी हस्ताक्षर किया गया था | श्री लंका में भारत के उच्चायुक्त तरनजीत सिंह संधु के अनुसार, किसी बाहरी देश के लिए भारत की सहायता से निर्मित श्री लंका के आवास अब तक की सबसे बड़ी परियोजना है |

चल रही आवासीय परियोजनाओं तथा स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, मूलभूत संरचना, व्यावसायिक प्रशिक्षण और अन्य क्षेत्रों समेत भारत ने लोगों के लिए 70 से अधिक विकास परियोजनाओं का उत्तरदायित्व ले रखा है | भारत सरकार का श्री लंका में विकास संबंधी सम्पूर्ण निवेश तीन बिलियन अमरीकी डॉलर के क़रीब है, जिसमें 560 मिलियन अमरीकी डॉलर का अनुदान है |

लंबे समय तक श्री लंका में भारत समर्थित परियोजनाओं को लेकर एक भूल धारणा थी कि ये परियोजनाएं उत्तर तथा पूर्व में बसे तमिलों के विकास तथा उनके कल्याण के लिए है | युद्ध के तत्काल बाद, भारत सरकार ने युद्ध प्रभावित क्षेत्रों की राहत, पुनर्निर्माण तथा पुनर्वास के लिए श्री लंका की सरकार की सहायता करने की वचनबद्धता जताई थी | परिणामस्वरूप, भारतीय विकास परियोजनाओं के एक बड़े हिस्से का प्रयोग श्री लंका के उत्तर तथा पूर्वी प्रांत में किया गया, लेकिन ये परियोजनाएं सिर्फ़ दो प्रान्तों तक ही सीमित नहीं रहीं | भारत ने अपनी विकास संबंधी सहायता का विस्तार श्री लंकाई अधिकारियों की आवश्यकता तथा अनुरोध के अनुसार किया | इसी संदर्भ में, भारतीय सहायता के तहत इस द्वीप में प्रदान की गईं 1990 निःशुल्क आपातकालीन एम्ब्युलेंस सेवाओं का विशेष उल्लेख करने की आवश्यकता है | प्रारम्भिक तौर पर, यह सेवा दक्षिणी तथा पश्चिमी प्रान्तों में क्रियान्वित की गई थी | इसकी विशाल सफलता के बाद, श्री लंका की सरकार ने देश भर में इस सेवा का विस्तार करने का आग्रह भारत से किया, जिसे भारत सरकार ने स्वीकार कर लिया | श्री लंका के रेलवे क्षेत्र के विकास के लिए भारत लगभग 1॰3 बिलियन अमरीकी डॉलर का ऋण देने के प्रति वचनबद्ध है |

समय पर पूरी न हो पाने के लिए भारतीय परियोजनाओं की प्रायः आलोचना होती रही है | इस चिंता से निपटने संबंधी छोटी विकास परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए श्री लंका सरकार के साथ हस्ताक्षरित एक सहमति पत्र से भारत समर्थित परियोजनाएं बंधी हुई हैं | इस तंत्र के माध्यम से सम्पूर्ण क्रियान्वयन प्रक्रिया को अधिक ठोस बनाया गया है | जीओआई की सहायता से चल रही अधिकतर परियोजनाएं या तो समय पर चल रही हैं या फिर समय से पहले पूरी होने को हैं |

आलेख – गुलबिन सुलताना, शोध विश्लेषक, आईडीएसए
अनुवादक/वाचक – मनोज कुमार चौधरी

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