भारत के विदेश मंत्री की पहली बांग्लादेश यात्रा
भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर की बांग्लादेश की पहली यात्रा मुख्यतः बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना को अक्टूबर के पहले हफ्ते में भारत की राजकीय यात्रा के लिए आमंत्रित करने के क्रम में एक शिष्टाचार यात्रा के तौर पर थी। विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण शेख हसीना को दिया। इस पहल को दोनों पड़ोसियों के द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के एक महत्वपूर्ण मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।
भारतीय विदेश मंत्री की बांग्लादेश की प्रधानमंत्री के साथ बातचीत उपयोगी रही। इसका बैठक का उद्देश्य शेख़ हसीना और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच अक्टूबर में होने वाली बैठक के लिए जमीन तैयार करना था।
शेख हसीना के साथ उनके आधिकारिक निवास गणोभबन में बैठक के दौरान डॉ. जयशंकर ने प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण पत्र उन्हें सौंपा। सुश्री हसीना ने निमंत्रण के लिए श्री मोदी का आभार व्यक्त किया।
भारत के विदेशमंत्री ने कहा कि नई दिल्ली अक्टूबर में उनकी भारत यात्रा की प्रतीक्षा कर रही है। डॉ. जयशंकर और शेख़ हसीना दोनों के बीच बातचीत उपयोगी रही, जिसमें आपसी हित के मुद्दों पर बातचीत की गई।
इससे पहले पूर्व राजनयिक, डॉ. जयशंकर ने बांग्लादेश का जब दौरा किया था तब वह भारत के विदेश सचिव की हैसियत से गए थे। भारत के विदेश मंत्री के रूप में अपनी पहली यात्रा में उन्होंने बांग्लादेशी विदेश मंत्री ए के अब्दुल मोमन के साथ बैठक के साथ अपने दौरे की शुरुआत की।
दोनों विदेश मंत्रियों के बीच बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय, सुरक्षा और रणनीतिक हितों के मुद्दों पर चर्चा की। दोनों देश वर्तमान सम्बन्धों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच पारस्परिक विश्वास बहाली के लिए उत्सुक हैं। यह इसी बात से स्पष्ट है क्योंकि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के हितों और चिंताओं को बातचीत में महत्व दिया है।
भारत और बांग्लादेश के संबंध एक 'रणनीतिक साझेदारी' से अधिक हैं। डॉ. जयशंकर ने कहा कि यह उनके लिए महत्वपूर्ण है कि दोनों देशों के सम्बन्धों को बेहतर करने की दिशा में जहां पहले उन्होंने एक विदेश सचिव के रूप में भूमिका अदा की थी वहीं अब विदेश मंत्री के रूप में सम्बन्धों को दुरुस्त करने का अवसर मिला है।
विदेशमंत्री जयशंकर ने कहा कि हम मानते हैं कि दोनों देशों के लोगों के हित से जुड़े मुद्दों में सुरक्षा के अलावा हैं अपराध, आतंकवाद व उग्रवाद तथा आतंकवादी समूह के खिलाफ बेहतर साझेदारी। डॉ जयशंकर ने आगे कहा कि रोहिङ्ग्या जैसे जटिल मुद्दे सहित सुरक्षा पर साझेदारी के मुद्दे पर भी दोनों देशों को आगे बढ़ना है।
बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमन का मानना है कि अन्य बातों के अलावा वह भारतीय विदेश मंत्री से कहना चाहेंगे कि रोहिंग्या संकट के जल्द समाधान की आवश्यकता पर चर्चा करनी होगी क्योंकि यह क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित करने वाला मुद्दा है।
मीडिया को संबोधित करते हुए, डॉ. जयशंकर ने कहा कि बांग्लादेश के विदेश मंत्री अब्दुल मोमन के साथ उनकी बातचीत उपयोगी हुई। विदेश मंत्री जयशंकर ने रोहिंग्या मुद्दे पर कहा कि भारत और बांग्लादेश उनकी म्यांमार वापसी के लिए जल्द और सुरक्षित वापसी के लिए पर सहमत हुए हैं।
गौरतलब है कि 700,000 से अधिक रोहिंग्या, म्यांमार की सेना द्वारा उन पर शुरू की गई कार्रवाई के कारण म्यांमार से पलायन कर गए थे। उनमें से बड़ी संख्या में बांग्लादेश में रह रहे हैं। भारत और बांग्लादेश दोनों अब म्यांमार में उनकी शीघ्र वापसी के लिए प्रयास कर रहे हैं।
डॉ. जयशंकर ने भारत-बांग्लादेश सम्बन्धों को अन्य दक्षिण एशियाई देशों के अनुकरण के लिए एक मॉडल करार दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 में सत्ता में आने के बाद से संबंधों को और मजबूत करने की दिशा अनेक प्रयास किए गए हैं। सम्बन्धों में एक ऐतिहासिक बदलाव में जून 2015 में आया जब प्रधानमंत्री मोदी की पहली बांग्लादेश यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 41 साल पुराने सीमा विवाद को हल करने के लिए भूमि-सीमा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
अप्रैल 2017 में प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के नई दिल्ली दौरे में रक्षा, परमाणु ऊर्जा, साइबर सुरक्षा और मीडिया के क्षेत्र सहित 22 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। भारत ने बांग्लादेश में बंदरगाहों के उन्नयन सहित 17 विकास परियोजनाओं के लिए उसे दो क्रेडिट लाइन के अंतर्गत 2015 में 3 बिलियन अमरीकी डॉलर और 2017 में 4.5 बिलियन डॉलर डॉलर का ऋण दिया।
जब शेख हसीना इस वर्ष नई दिल्ली का दौरा करेंगी, तो यह बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान को भी याद करने का अवसर होगा, जिनकी 2020 में 100 वीं जयंती मनाई जाएगी। बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में भारतीय सेनाओं की भूमिका उल्लेखनीय है। अब दोनों देशों के बीच संबंध सबसे अच्छे हैं। भारत दक्षिण एशियाई क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए एक मजबूत और समृद्ध बांग्लादेश की कामना करता है।
शेख़ हसीना जब इस साल भारत दौरे पर होंगी, यह एक अच्छा संयोग होगा कि 2020 में बांग्लादेश अपने राष्ट्रपिता शेख़ मुजीबुररहमान की 100 सालगिरह मना रहा होगा। बांग्लादेश के मुक्तिसंग्राम में भारतीय सेना का योगदान अविस्मरणीय है। इस समय दोनों देशों के परस्परिक संबंध सबसे अच्छी स्थिति में हैं। भारत की इच्छा है कि बांग्लादेश मजबूत बने और खुशहाल हो, जो दक्षिण एशिया के हित में भी है।
आलेख- दीपांकर चक्रवर्ती, विशेष प्रतिनिधि, द स्टेट्समैन
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