राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की पश्चिमी अफ्रीकी देशों की यात्रा से सम्बन्धों में सुधार

भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने पश्चिमी अफ्रीकी देशों- बेनिन, गाम्बिया और गिनी की हाल ही 7 दिवसीय यात्रा सम्पन्न हुई है। इन देशों का चयन कर भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि अफ्रीका, विशेष रूप से पश्चिमी अफ्रीकी देशों के साथ संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारत प्रतिबद्ध है।

राष्ट्रपति कोविंद की तीन देशों की यह यात्रा ऐतिहासिक रही, क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी भारतीय राष्ट्रपति ने इन देशों का दौरा किया है। यह उल्लेखनीय तथ्य है कि भारत के पारंपरिक रूप से जीतने अच्छे संबंध एंग्लोफोन अफ्रीकी देशों के साथ हैं, उतने मधुर संबंध फ्रैंकोफोन पश्चिम अफ्रीकी देशों के साथ नहीं रहे हैं। अवरोध के कारणों पर अगर नज़र डालें तो भाषागत और संपर्क में कमी दूरी मुख्यतः जिम्मेदार रहे। संबंधों को बढ़ाने के लिए विभिन्न नीतिगत पहलें की गई हैं इसके बावजूद संबंधों में अपेक्षा अनुरूप सुधार नहीं दिखे हैं। अब उच्च स्तरीय भारतीय दौरों से फ़्रैंकोफ़ोन पश्चिम अफ्रीकी देशों के साथ भारत के संबंधों को बढ़ाने में मदद मिलेगी। हाल ही में भारत ने अफ्रीका में 18 मिशनों को खोलने की घोषणा की थी। इसमें ज्यादातर फ्रैंकोफोन अफ्रीकी देशों में होंगे। इससे इन क्षेत्र में भी भारत की राजनयिक दखल बढ़ेगी। इन प्रयासों को भारत के अफ्रीकी देशों के साथ राजनयिक रिश्तों को विस्तार देने के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

इन यात्राओं के दौरान राष्ट्रपति कोविंद ने नेताओं के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। बेनिन और गाम्बिया में राष्ट्रीय सभा को संबोधित किया और तीन देशों में मौजूद भारतीय समुदाय के साथ बातचीत की। व्यापार, निवेश, सौर ऊर्जा, कृषि, डिजिटल प्रौद्योगिकी, क्षमता निर्माण, समुद्री सुरक्षा और रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में आम चिंता के मुद्दों पर चर्चा बातचीत के केंद्र में रहे।

बेनिन में, दोनों पक्ष निर्यात को विस्तार देने और आपसी निवेश को समर्थन देने पर सहमत हुए। राष्ट्रपति कोविंद ने ई-वीजा सुविधा के विस्तार की घोषणा की, क्योंकि उनका मानना है कि इससे व्यापार संबंधों को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। गाम्बिया में, राष्ट्रपति कोविंद ने भारतीय उद्यमों और निवेश के लिए गाम्बिया के निरंतर समर्थन की भारत की अपेक्षाओं उल्लेख किया। गिनी में, राष्ट्रपति कोविंद ने विशेष रूप से खनन, बुनियादी ढांचे,स्वास्थ्य और दवा क्षेत्रों में निवेश करने के लिए भारतीय कंपनियों की उत्सुकता का ज़िक्र किया।

इन अफ्रीकी देशों की प्राथमिकताओं के अनुसार विकास साझेदारी को बढ़ाने के लिए, भारतीय राष्ट्रपति ने विभिन्न घोषणाएँ कीं। उन्होंने बेनिन को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए 100 मिलियन अमरीकी डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट की घोषणा की; बेनिन के विदेशी राजनयिकों के लिए एक विशेष व्यावसायिक पाठ्यक्रम और अंग्रेजी दक्षता के लिए एक विशेष आईटीईसी पाठ्यक्रम की शुरुआत का ज़िक्र किया;गाम्बिया के लिए कौशल विकास और कुटीर उद्योग परियोजनाओं के समर्थन हेतु 500,000 अमेरिकी डॉलर की सहायता की घोषणा की; गाम्बिया के अनुरोध के अनुसार, न्यायपालिका, पुलिस, प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञता के क्षेत्रों में प्रशिक्षण की पेशकश; कॉनक्री वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट के लिए गिनी को 170 मिलियन अमरीकी डॉलर की नई लाइन ऑफ क्रेडिट की सहायता की घोषणा शामिल है। साथ ही श्री कोविंद ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सौर ऊर्जा में सहयोग पर भी जोर दिया और बेनिन, गाम्बिया और गिनी के नेतृत्व की अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में भारत के साथ हाथ मिलाने के लिए उनकी सराहना की।

भारत ने रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी बल दिया। गिनी की खाड़ी में बढ़ते समुद्री डकैती के मामलों को देखते हुए, भारत ने एंटी-पायरेसी क्षमता का विस्तार करने के लिए बेनिन को प्रशिक्षण सहायता देने की पेशकश की। संयुक्त बयानों में दोनों पक्षों ने आतंकवाद के विस्तार पर चिंता जताई और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौते को जल्द अपनाने की आवश्यकता व्यक्त की।

राष्ट्रपति की तीन देशों की इस यात्रा में साझेदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। बेनिन में दोनों पक्षों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान, निर्यात ऋण और निवेश बीमा में सहयोग, ई-वीबीएबी (ई-विद्या भारती और ई-अरोग्य भारती) नेटवर्क परियोजना, भारतीय राजनयिक और आधिकारिक पासपोर्ट के लिए वीजा छूट पर चार समझौतों पर हस्ताक्षर किए। गाम्बिया में दोनों पक्षों ने पारंपरिक चिकित्सा और होम्योपैथी के क्षेत्र में सहयोग पर समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए और आदान-प्रदान किया। गिनी में भी, दोनों राष्ट्रपतियों ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और होम्योपैथी के क्षेत्र में सहयोग से जुड़े समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

निष्कर्ष यह है कि भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का 3 अफ्रीकी देशों का दौरा क्षेत्र के साथ घनिष्ठ संबंधों को बढ़ाने में बहुत सफल रहा।

आलेख- डॉ निवेदिता रे, अफ्रीकी मामलों के रणनीतिक विश्लेषक

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