दोहरे मापदंड के लिए पाकिस्तान फिर से बेनक़ाब

भारतीय राज्य जम्मू तथा कश्मीर के मुद्दे पर अपने हठ के कारण पाकिस्तान एक अशांत चरण से गुज़र रहा है | पाकिस्तान को झिड़की लगाते हुए, लगभग प्रत्येक वैश्विक शक्ति ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के मुद्दे को भारत का आंतरिक मामला कहा है | पाकिस्तान अब समर्थन जुटाने के लिए पुरज़ोर कोशिश कर रहा है | बहरहाल, यह समर्थन भ्रांतिजनक प्रतीत होता है |

एक निजी टेलीविज़न चैनेल को दिये हाल के साक्षात्कार में, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने स्वीकार किया कि इस्लामाबाद भारत के विरुद्ध एक परंपरागत युद्ध नहीं जीत सकता है | उन्होंने परमाणु ख़तरे की बात दुहराई तथा कश्मीर मुद्दे पर दुनिया का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की | उन्होंने दुनिया को यह कहते हुए आगाह भी किया कि अगर दुनिया भारत के परमाणु शस्त्रागार पर ध्यान देने में असफल रहती है, तो इससे होने वाली “तबाही के बाद” की ज़िम्मेदारी दुनिया की होगी | उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने विश्व को सूचित कर दिया है कि पाकिस्तान जंग नहीं चाहता है, लेकिन अपनी सुरक्षा और अखंडता को मिल रही चुनौतियों से यह अनभिज्ञ नहीं रह सकता है |

उन्होंने स्वीकार भी किया कि जब अंतर्राष्ट्रीय आतंक वित्तीय निकाय, वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफ़एटीएफ़) आतंक को वित्त मुहैया कराने के मुद्दे पर पाकिस्तान को “ब्लैकलिस्ट” करने का मुद्दा उठाएगा, तब इस्लामाबाद एक कठिन समय से गुज़र रहा होगा | इस साक्षात्कार में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को तोड़ने के लिए विश्व षड्यंत्र रच रहा है | उन्होंने भारत के साथ वार्ता शुरू करने के अपने प्रयासों का भी उल्लेख किया |

यह सत्य से दूर है | जनवरी 2016 में पठानकोट वायु सेना के ठिकाने पर हुए हमले के बाद से भारत लगातार कहता रहा है कि “आतंक और वार्ता” एक साथ संभव नहीं है | वास्तव में, नई दिल्ली ने कई अवसरों पर पाकिस्तान को मेल-मिलाप करने की पेशकश की है | लेकिन, भारत की ओर से बढ़ाए जाने वाले मित्रता के हाथ की राह में पाकिस्तान ने हमेशा बाधा ही खड़ी की है | अब, इस्लामाबाद की खोखली वाक्पटुता से सभी परिचित है |

कश्मीर मुद्दे पर अपने ही कुचक्र के कारण, इस्लामाबाद अलग-थलग पड़ चुका है | भारतीय राज्य जम्मू तथा कश्मीर में एक छद्म युद्ध छेड़ने के लिए लगभग तीन दशक से इसने विभिन्न आतंकी समूहों को मदद दी, धन मुहैया करवाया तथा प्रशिक्षित किया है | पाकिस्तान के सीमा-पार आतंकवाद के कारण हज़ारों बेगुनाह भारतीय नागरीकों ने अपने प्राण गँवाए हैं | अपने असफल प्रयासों पर पाकिस्तान मदद नहीं मांग सकता है |

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने जैसे ही अपना साक्षात्कार समाप्त किया, उनके सामने चीन के शिंजियांग प्रांत के ऊईगुर मुस्लिम समुदाय की ओर से प्रश्नों की झड़ी लग गई | चीन में ऊईगुर मुस्लिमों के उत्पीड़न से संबन्धित मुद्दे से आँख फेर लेने के कारण विश्व ऊईगुर समुदाय पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के “दोहरे रवैये” पर टूट पड़ा तथा कहा कि यह शर्म की बात है कि इस समुदाय पर पेइचिंग की नीति को समर्थन देते हुए इस्लामाबाद ख़ामोश रहा | कुछ महीने पहले, ऊईगुर मुद्दे को लेकर श्री ख़ान से अंतर्राष्ट्रीय पत्रकारों ने सवाल किए थे, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ पता नहीं है तथा वे इससे अवगत नहीं हैं | जेनेवा में इस संगठन के अध्यक्ष डोलकुन ईसा ने कहा कि “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बहुत अच्छी तरह से जानते हैं कि चीनी सरकार ऊईगुर मुस्लिमों के साथ क्या कर रही है, लेकिन वे इस मुद्दे पर बात करना नहीं चाहते हैं |”

श्री ईसा ने आगे कहा कि ”पाकिस्तान मानवाधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघंकर्ता है तथा चीन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वास्तविकता को छुपा रहा है |”

चीन दावा करता है कि ऊईगुर नज़रबंदी शिविर वास्तव में व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र हैं, जबकि ऊईगुर कार्यकर्ताओं ने इसे “झूठ” करार दिया है, क्योंकि चीन सच्चाई छुपा रहा है | श्री ईसा ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हमेशा कश्मीर मुद्दा उठाते रहे हैं, लेकिन ऊईगुर के मुद्दे पर वे अपनी आँखें बंद करके चीन की नीति का समर्थन करते हैं | यह दोहरा रवैया है और शर्म की बात है |

श्री इमरान ख़ान ख़ुद को कश्मीरी लोगों का मित्र साबित करने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं, जिस कारण बलूची लोग भी गुस्से में हैं | गत सप्ताह, जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानव अधिकार परिषद के सत्र के दौरान, बलूची नेताओं ने बलूचिस्तान में इमरान ख़ान सरकार की गतिविधियों के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन किया | एक बलूच कार्यकर्ता, मेहरान मर्री ने कहा कि पाकिस्तान बलूचिस्तान में मानवअधिकारों का उल्लंघन तथा जनसंहार कर रहा है, फिर भी यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के सामने कश्मीर में मनवाधिकारों की रक्षा करने का दिखावा करता है |

ऐसा लगता है कि पाकिस्तान का दुख जारी रहेगा, क्योंकि यह अपने दोहरे रवैये के कारण अपनी नियति निर्धारित करता है |

आलेख – कौशिक रॉय, एआईआर: समाचार विश्लेषक

अनुवादक/वाचक – मनोज कुमार चौधरी

Comments

Popular posts from this blog

भारत ने फिजी को पहुंचाई मानवीय सहायता

आत्मनिर्भर भारत में प्रवासियों की भूमिका

अरब-भारत सहयोग फोरम की बैठक