कैरिबियाई तथापैसिफिक देशों के साथ भारत के संबंधो का नवीनीकरण
कैरेबियाई देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक और मधुर संबंधों में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अवसर पर एक नया जोश दिखाई दिया जब देशों के कॅरिकोम समूह अर्थात कैरिबियाई समुदाय देशों के 14 नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले। श्री लुइस चेन्सेट, सेंट लूसिया के प्रधान मंत्री और CARICOM के वर्तमान अध्यक्ष ने बैठक की सह-अध्यक्षता की। इस बैठक में एंटीगा और बारबुडा, बारबाडोस, डोमिनिका, जमैका, सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट लूसिया, सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस, त्रिनिदाद और टोबैगो के राष्ट्राध्यक्षों, सूरीनाम के उपराष्ट्रपति और बहामास, बेलीज, ग्रेनाडा, हैती और गुयाना के राष्ट्राध्यक्षों ने भी भाग लिया।
यह क्षेत्रीय आधार पर CARICOM नेताओं के साथ प्रधान मंत्री मोदी की पहली बैठक थी और भारत तथा कैरेबियाई देशों के सहयोगी देशों के बीच लगातार गहराते गहन संबंधों का पता चलता है। भारत CARICOM के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। एक मिलियन से अधिक प्रवासी भारतीयों की उपस्थिति कैरेबियाई देशों के साथ दोस्ती का एक जीवंत और स्थायी प्रमाण है।
राजनीतिक और संस्थागत संवाद प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने, आर्थिक सहयोग को बढ़ाने, व्यापार और निवेश बढ़ाने और अधिक से अधिक जनसंपर्क को बढ़ावा देने के लिए प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की गई। भारतीय प्रधानमंत्री ने क्षमता निर्माण, विकास सहायता और आपदा प्रबंधन में सहयोग और ढील जैसे विषयों पर CARICOM देशों के साथ भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से बातचीत की गई। भारत ने तूफान डोरियन के बाद बहामा में एक मिलियन अमेरिकी डॉलर की तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान की।
भारत ने CARICOM में सामुदायिक विकास परियोजनाओं के लिए 14 मिलियन अमरीकी डॉलर अनुदान राशि और सौर, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन संबंधित परियोजनाओं के लिए 150 मिलियन अमरीकी डॉलर की एक अन्य ऋण व्यवस्था की घोषणा की। उन्होंने इन देशों में मौजूद भारत द्वारा वित्तपोषित केंद्रों को उन्नत करके जॉर्जेट, गयाना में क्षेत्रीय सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र, गयाना और बेलीज में क्षेत्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की भी घोषणा की। CARICOM नेताओं ने पीएम मोदी द्वारा दोनों पक्षों के बीच संबंधो और सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित पहल का स्वागत किया और अपनी-अपनी सरकारों की ओर से पूर्ण समर्थन का भी आश्वासन दिया।
भारत-प्रशांत द्वीप समूह विकासशील राज्यों (PSIDS) नेताओं की बैठक 74वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के साथ साथ न्यूयॉर्क में आयोजित हुई। बैठक में फिजी के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख, किरिबाती गणराज्य, मार्शल आइलैंड्स गणराज्य, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य, नाउरू गणराज्य, पलाऊ गणराज्य, पापुआ न्यू गिनी के स्वतंत्र राज्य, समोआ के स्वतंत्र राज्य, सोलोमन द्वीप समूह, टोंगा, तुवालु और वानूआतू गणराज्य के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
प्रशांत द्वीपीय राष्ट्रों के साथ भारत के संबंध एक्ट ईस्ट नीति के विकास के साथ मज़बूत हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग (FIPIC) मंच की स्थापना की गई। FIPIC का पहला और दूसरा संस्करण फिजी (2015) और जयपुर (2016) में हुआ। FIPIC सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रशांत द्वीपीय देशों के निकटतम भागीदार बनने की भारत की इच्छा और उनके विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की।
साझा विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अपने अपने विकास के अनुभवों को साझा करने, नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने, आपदा प्रतिरोधक ढांचे के लिए हाल ही में बनाए गए गठबंधन में शामिल होने, क्षमता निर्माण, भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास भागीदारी निधि के तहत परियोजनाओं के कार्यान्वयन सहित कई मुद्दों पर नेताओं ने विचार-विमर्श किया और भविष्य के भारत-पीएसआईडीएस सहयोग के लिए एक रोडमैप की संभावना पर भी विचार किया गया।
प्रधान मंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और PSIDS साझा मूल्यों और एक साझा भविष्य को के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने असमानता को कम करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए विकास नीतियों को समावेशी और स्थाई बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए आवश्यक तकनीकी सहायता द्वारा अपने विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पीएसआईडी के प्रयासों की सराहना करता है।
श्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन की भयावहता को रेखांकित किया और जलवायु परिवर्तन के कई प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए कुल ऊर्जा में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने इस संबंध अपनी संतुष्टि व्यक्त की कि कई देशअंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल हुए और दूसरों को इस पहल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री ने डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) के लिए गठबंधन में शामिल होने के लिए पीएसआईडीएस के नेताओं को भी आमंत्रित किया।
भारत ने उनके इच्छित क्षेत्रों में अति आवश्यक विकासात्मक परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 12 मिलियन अमेरिकी डॉलर (प्रत्येक PSIDS में US $ 1 मिलियन) के आवंटन की घोषणा की।
आलेख - कौशिक रॉय
अनुवादक एवं वाचक - हर्ष वर्धन
यह क्षेत्रीय आधार पर CARICOM नेताओं के साथ प्रधान मंत्री मोदी की पहली बैठक थी और भारत तथा कैरेबियाई देशों के सहयोगी देशों के बीच लगातार गहराते गहन संबंधों का पता चलता है। भारत CARICOM के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। एक मिलियन से अधिक प्रवासी भारतीयों की उपस्थिति कैरेबियाई देशों के साथ दोस्ती का एक जीवंत और स्थायी प्रमाण है।
राजनीतिक और संस्थागत संवाद प्रक्रियाओं को मजबूत बनाने, आर्थिक सहयोग को बढ़ाने, व्यापार और निवेश बढ़ाने और अधिक से अधिक जनसंपर्क को बढ़ावा देने के लिए प्रतिनिधि स्तर की वार्ता की गई। भारतीय प्रधानमंत्री ने क्षमता निर्माण, विकास सहायता और आपदा प्रबंधन में सहयोग और ढील जैसे विषयों पर CARICOM देशों के साथ भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से बातचीत की गई। भारत ने तूफान डोरियन के बाद बहामा में एक मिलियन अमेरिकी डॉलर की तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान की।
भारत ने CARICOM में सामुदायिक विकास परियोजनाओं के लिए 14 मिलियन अमरीकी डॉलर अनुदान राशि और सौर, नवीकरणीय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन संबंधित परियोजनाओं के लिए 150 मिलियन अमरीकी डॉलर की एक अन्य ऋण व्यवस्था की घोषणा की। उन्होंने इन देशों में मौजूद भारत द्वारा वित्तपोषित केंद्रों को उन्नत करके जॉर्जेट, गयाना में क्षेत्रीय सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र, गयाना और बेलीज में क्षेत्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की भी घोषणा की। CARICOM नेताओं ने पीएम मोदी द्वारा दोनों पक्षों के बीच संबंधो और सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रस्तावित पहल का स्वागत किया और अपनी-अपनी सरकारों की ओर से पूर्ण समर्थन का भी आश्वासन दिया।
भारत-प्रशांत द्वीप समूह विकासशील राज्यों (PSIDS) नेताओं की बैठक 74वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के साथ साथ न्यूयॉर्क में आयोजित हुई। बैठक में फिजी के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख, किरिबाती गणराज्य, मार्शल आइलैंड्स गणराज्य, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य, नाउरू गणराज्य, पलाऊ गणराज्य, पापुआ न्यू गिनी के स्वतंत्र राज्य, समोआ के स्वतंत्र राज्य, सोलोमन द्वीप समूह, टोंगा, तुवालु और वानूआतू गणराज्य के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
प्रशांत द्वीपीय राष्ट्रों के साथ भारत के संबंध एक्ट ईस्ट नीति के विकास के साथ मज़बूत हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप भारत-प्रशांत द्वीप सहयोग (FIPIC) मंच की स्थापना की गई। FIPIC का पहला और दूसरा संस्करण फिजी (2015) और जयपुर (2016) में हुआ। FIPIC सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने प्रशांत द्वीपीय देशों के निकटतम भागीदार बनने की भारत की इच्छा और उनके विकास के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की।
साझा विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए अपने अपने विकास के अनुभवों को साझा करने, नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने, आपदा प्रतिरोधक ढांचे के लिए हाल ही में बनाए गए गठबंधन में शामिल होने, क्षमता निर्माण, भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास भागीदारी निधि के तहत परियोजनाओं के कार्यान्वयन सहित कई मुद्दों पर नेताओं ने विचार-विमर्श किया और भविष्य के भारत-पीएसआईडीएस सहयोग के लिए एक रोडमैप की संभावना पर भी विचार किया गया।
प्रधान मंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और PSIDS साझा मूल्यों और एक साझा भविष्य को के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने असमानता को कम करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए विकास नीतियों को समावेशी और स्थाई बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए आवश्यक तकनीकी सहायता द्वारा अपने विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पीएसआईडी के प्रयासों की सराहना करता है।
श्री मोदी ने जलवायु परिवर्तन की भयावहता को रेखांकित किया और जलवायु परिवर्तन के कई प्रतिकूल प्रभावों को कम करने के लिए कुल ऊर्जा में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने इस संबंध अपनी संतुष्टि व्यक्त की कि कई देशअंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल हुए और दूसरों को इस पहल में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। प्रधानमंत्री ने डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) के लिए गठबंधन में शामिल होने के लिए पीएसआईडीएस के नेताओं को भी आमंत्रित किया।
भारत ने उनके इच्छित क्षेत्रों में अति आवश्यक विकासात्मक परियोजना के क्रियान्वयन के लिए 12 मिलियन अमेरिकी डॉलर (प्रत्येक PSIDS में US $ 1 मिलियन) के आवंटन की घोषणा की।
आलेख - कौशिक रॉय
अनुवादक एवं वाचक - हर्ष वर्धन
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