भारत-अमेरिका ऊर्जा सम्बंध: बड़े फायदे की तैयारी

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया अमेरिकी यात्रा के दौरान ह्यूस्टन पहुंचने पर ट्वीट किया था कि ह्यूस्टन आना हो और ऊर्जा की बात ना हो ये असंभव है! विश्व के सबसे बड़े ऊर्जा केन्दों में से एक टेक्सास के ह्यूस्टन शहर अपनी यात्रा में सबसे पहले पहुंचने के पीछे श्री मोदी का उद्देश्य, ये स्पष्ट संकेत भेजना था कि ऊर्जा सम्बंधित समझौतों का भारत-अमेरिकी सम्बंधों में मुख्य स्थान हैं। प्रधानमंत्री मोदी का ट्वीट, ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए शीर्ष वैश्विक ऊर्जा कम्पनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ उनकी बैठक के बाद आया। प्रभावशाली हाउडी मोदी कार्यक्रम में, श्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प दोनों ने इस बात को रेखांकित किया था कि ऊर्जा द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी के महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक है।

जून 2017 में, दोनों नेताओं ने अपनी बैठक में, अमेरिकी-भारत रणनीतिक ऊर्जा भागीदारी की फिर से पुष्टि की थी। राष्ट्रपति ट्रम्प का “एन अमेरिका फर्स्ट एनर्जी प्लान” कानूनी और निवेश बाधाओं को हटा कर अप्रयुक्त शेल, तेल और गैस भंडार की खोज और इनका उत्पादन करने के लिये है। भारत के तेजी से विकास के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा खपत की आवश्यकता है और इसलिए इसकी नीति, ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की खोज और अपनी इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए कुछ देशों से उर्जा आयात की निर्भरता को कम करने पर केंद्रित है। भारत की नीतियां अर्थव्यवस्था को गैस आधारित बनाने के लिये तैयार की गयी है और साथ ही इनके पेरिस जलवायु परिवर्तन (सीओपी 21) की प्रतिबद्धताओं पर खरा उतरने का भी पूरा ध्यान रखा गया है।

भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा कार्टेल की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। मध्य-पूर्व से कच्चे तेल आयात की अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए भारत ने गैर-खाड़ी देशों तक बहुत तेजी से पहुंच बनाई है। अमेरिका भारत को तेल और गैस की आपूर्ति करने वालें प्रमुख स्रोत के रूप में तेजी से उभर रहा है। अमेरिका से कच्चे तेल का आयात 2017 में शुरू किया गया था लेकिन मात्र दो साल की अवधि में इसमें बड़ी वृद्धी यानि क्वांटम छलांग देखने को मिली है। पिछले साल गैस की पहली खेप भारत भेजी गयी और अमेरिका से आयात बढ़ा जो व्यापार घाटे को कम करने में मदद करेगा- ये एक ऐसा मुद्दा है जो अमेरिका अक्सर भारत के सामने उठाता रहा है।

ऊर्जा प्राप्त करने, ऊर्जा सुरक्षा और ऊर्जा दक्षता हासिल करने की दिशा में आगे बढने के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए दोनों देशों ने पिछले साल पहली रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी बैठक की। भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान और अमेरिकी ऊर्जा मामलों के मंत्री रिक पेरी की सह-अध्यक्षता में हुई इस बैठक में, (1) तेल और गैस (2) बिजली और ऊर्जा दक्षता (3) नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ विकास और (4) कोयला, सहयोग के प्राथमिक स्तंभ कहे जाने वालें इन चार घटकों पर काम करने करने का निर्णय लिया गया।

एक महत्वपूर्ण बात ये है कि भारत की पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड और अमरीका की टेल्यूरिन इंक ने सात अरब पचास करोड़ (7.5 बिलियन) डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें से दो अरब पचास करोड़ (2.5 बिलियन) डॉलर का निवेश, ड्रिफ्टवुड एलएनजी निर्यात टर्मिनल में पेट्रोनेट की 18% हिस्सेदारी सुनिश्चित करेगा। पेट्रोनेट के पास प्रति वर्ष 50 लाख मीट्रिक टन एलएनजी का अधिकार होगा जो इसके इक्विटी निवेश के बराबर है। भारतीय प्रधानमंत्री की मौजूदगी में किया गया यह समझौता, अमेरिका के सबसे बड़े विदेशी निवेश समझौतों में से एक है

शेल गैस क्षेत्र। अलग से, सोच समझ कर अच्छी तरह से उठाये कदमों में, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियों ने यूएस कच्चे तेल को पर्याप्त मात्रा में उठाने के लिए समझौतें किये हैं, जबकि गेल और रिलायंस जैसे खिलाड़ियों ने यूएस गैस परियोजनाओं में निवेश किया है, जो प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के ज़रिए भारत में तेल और गैस क्षेत्रों की पहचान करने और इनके उत्पादन के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

वैश्विक ऊर्जा कम्पनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, भारतीय प्रधानमंत्री के साथ हुए विचार-विमर्श में भारत की ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश को लेकर उत्साहित थे और उन्होंने उदार निवेश जलवायु और कॉर्पोरेट कर दरों में कमी का स्वागत किया। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने नोट किया है कि भारत के विदेशी ऊर्जा निवेश में मोदी सरकार में 85 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है जो 12% की रिकॉर्ड वृद्धि और दुनिया भर में उच्चतम वृद्धि है । भारत अगले 10 साल में हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में 300 अरब डॉलर तक की राशि के निवेश के अवसर प्रदान करेगा।

भारत-अमेरिका ऊर्जा क्षेत्र की अन्य पहलों में, असैन्य परमाणु साझेदारी को आगे बढ़ाने, एडवांस क्लीन एनर्जी यानि उन्नत स्वच्छ उर्जा कार्यक्रम में सहयोग के तहत पावर ग्रिड और ट्रांसमिशन लाइनों में निवेश शामिल हैं। भारत-अमेरिकी सम्बंधों में सुधार हो रहा है और आने वाले वर्षों में ऊर्जा सम्बंधों की बात करें तो बड़े फायदें के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है।

आलेख: सत्यजीत मोहंती, आईआरएस, वरिष्ठ आर्थिक विश्लेषक

अनुवाद एवं स्वर- वीरेन्द्र कौशिक

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