बगदादी की मौत से क्या अरब दुनिया में नए युग का आरम्भ होगा

आईएसआईएस के स्व-घोषित "खलीफा" अबू बक्र अल-बगदादी की मौत की खबर को लेकर इराक के मोसुल की सड़कों पर लोगों ने खुशी जतायी। यहीं पर 2014 में, इस अत्याचारी ने इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक और सीरिया’ की स्थापना की घोषणा की थी। इसके बाद, नरसंहार, सामूहिक हत्याएं, सामूहिक बलात्कार, सड़क हिंसा, बर्बरता, अपहरण, जबरन वसूली और क्या-क्या नहीं हुआ। मोसुल के तीन लाख लोगों को शहर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया था और हजारों को अपने प्रियजनों को खोना पड़ा था।

अल-बगदादी, आतंकवादी संगठन आईएसआईएस का प्रमुख था, जो पहले भी कई रूपों में काम कर चुका था और एक बार तो यह सीरिया और इराक के बीच यूनाटेड किंगडम के बराबर के लंबे क्षेत्रों को नियंत्रित कर चुका था। सीरिया की सभ्यता पर अबू बक्र अल-बगदादी के आईएसआईएस ने कई दाग लगाए हैं। उसने पलमायरा शहर को नष्ट किया और 2017 में, मोसुल की ऐतिहासिक, अल-नूरी मस्जिद को उड़ा दिया, यहीं उसने 2014 में इस्लामिक खलीफा का क्षेत्र घोषित किया था। यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि अमेरिका की अगुवाई में इराक और सीरिया में युद्ध और सीरिया के अंदर कुर्दों के नेतृत्व में साहसी लड़ाई की वजह से पिछले कुछ वर्षों में आईएसआईएस काफी हद तक मंद पड़ गया था।

जैसे ही उसकी मौत की खबर सामने आई, कई लोगों के लिए ये विश्वास करना मुश्किल था कि आतंकवादी मारा जा चुका है। ये इसलिए भी, क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा था जब उसकी मौत की खबर सामने आई हो। वहीं दूसरी ओर, कई लोगों के लिए इसे नजर अंदाज़ करना भी आसान नहीं था क्योंकि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने घोषणा की कि वो "एक कुत्ते और एक कायर" की मौत मारा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति की अरब नीति मुख्य रूप से आईएसआईएस से लड़ने और इसका ख़ात्मा करने पर केंद्रित रही है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने घोषणा करते हुए कहा कि सुरंग में घेरे जाने के बाद बगदादी ने आत्मघाती विस्फोटक वेस्ट से ख़ुद को उड़ा लिया ।

जैसी फोर्स का इस्तेमाल पाकिस्तान में ओसामा बिन लादेन के खिलाफ ऑपरेशन में किया गया था वैसी ही यूएस स्पेशल डेल्टा फोर्स का इस्तेमाल अबू बक्र अल बगदादी को खत्म करने के लिए भी किया गया। अमेरिका ने बगदादी के ठिकाने का पता बताने के लिए ढाई करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम देने की घोषणा की थी।

बगदादी का अंत हो जाने के बाद, अब अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, वैश्विक आतंकवाद को लेकर बगदादी के बाद के परिदृश्य को जानने के लिए उत्सुक होगा। यह याद रखना ज़रूरी है कि ओसामा के मारे जाने के बाद भी इसी तरह की आशाएं और चिंताए जताई गई थी। हालांकि आतंकवाद के ग्राफ में कोई ख़ास गिरावट देखने को नहीं मिली। बल्कि अल कायदा के अवशेषों के तौर पर आज के समय के दो भयानक आतंकी संगठन, अल-नुसराह और आईएसआईएस देखने को मिलें।

अल-कायदा के कमजोर पड़ने के बाद, आईएसआईएस का प्रभाव बढता दिखाई दिया। दुनिया भर में इसके कैडरों ने कई भयानक हमलों को अंजाम दिया। बगदादी और ओसामा सिर्फ चेहरे थे और वो उनके हमदर्दों के लिए दिव्यज्योति स्वरूप थे। लेकिन वे वास्तविक कर्ताधर्ता नहीं थे। अब कई महाद्वीपों में आईएसआईएस अपना सक्रिय नेटवर्क स्थापित कर चुका है जो उसके विशेष डोमेन में काम करते हैं। केंद्रीय नेतृत्व केवल छोटी भूमिका निभाता है। आईएसआईएस के खिलाफ कई मोर्चो पर युद्ध लड़ा जा रहा है और कुछ सफलता भी मिली है। सीरिया और इराक में आईएसआईएस के हजारों लड़ाके गिरफ्तार किए गए हैं। उनमें से कई यूरोपीय लोग भी हैं। कोशिश है कि उन्हें उनके मूल देशों में निर्वासित किया जाए। हालांकि, ऐसे कई लोग हैं जो आईएसआईएस की विचारधारा से प्रभावित हैं, उनसे तुरंत निपटने की आवश्यकता है।

बड़े पैमाने पर आईएसआईएस कैडरों ने विभिन्न सामाजिक समूहों में कट्टरता पैदा की है। यह मान लेना अतिशयोक्ति होगी कि बगदादी के खात्मे के साथ ही आईएसआईएस की कहानी भी खत्म हो गई है। एक अस्थायी शांति की स्थिती लगती है, उनके उत्तराधिकारियों के बीच आंतरिक झगड़े भी हो सकते हैं लेकिन, जब तक क्षेत्र में राजनीतिक खालीपन और अस्थिरता है, आईएसआईएस का अस्तित्व बना रहेगा।

भारत का विचार है कि आईएसआईएस के खिलाफ लड़ाई जारी रहनी चाहिए। लोगों को आईएसआईएस आतंकवादियों के अत्याचारों को भूलना नहीं चाहिए। आईएसआईएस की मध्ययुगीन विचारधारा की किसी भी तरह की वापसी कयामत बरपा देगी। अस्थिरता के दौर से गुजर रही अरब देशों की राजनीतिक प्रणाली में विश्वास को हरहाल में बहाल किया जाना चाहिए ।

आलेख:- डॉ. फज़ूर रहमान सिद्दीकी, पश्चिम एशिया मामलों के विश्लेषक

अनुवाद एवं स्वर- वीरेन्द्र कौशिक

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