भारत-भूटान के सम्बन्धों की विकास यात्रा निर्धारित

भूटान के विदेश मंत्री ल्योंपों (डॉ॰) तंदी दोरजी की सप्ताह व्यापी भारत यात्रा द्विपक्षीय सम्बन्धों के लिए एक नया मानदंड तय करती है | इस यात्रा के दौरान, डॉ॰ दोरजी ने भारत के विदेश मंत्री डॉ॰ एस॰ जयशंकर के साथ द्विपक्षीय चर्चाएं कीं तथा भारत-भूटान के सम्बन्धों पर विस्तार से समीक्षा की | दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग, विकास साझेदारी तथा पनबिजली सहयोग समेत द्विपक्षीय सम्बन्धों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चाएं कीं | अपने भारतीय प्रतिपक्ष के साथ बैठक से पहले, डॉ॰ दोरजी ने भारतीय विदेश सचिव विजय गोखले के साथ भी मुलाक़ात की | दिल्ली की यात्रा के बाद, भूटानी विदेश मंत्री बिहार के बौद्धगया तथा राजगीर का दौरा करेंगे | यहाँ की यात्रा के बाद पदाधिकारी कोलकाता जाएंगे, जहां उनकी पश्चिम बंगाल के गवर्नर तथा तथा मुख्यमंत्री के साथ बैठक होने की आशा की जा रही है |

ल्योंपों तंदी दोरजी की यात्रा तथा दोनों देशों के बीच के उच्चतम स्तरीय के विचारों के आदान-प्रदान संबंधी नियमित यात्राओं की परंपरा के अनुरूप थी | प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग ने द्रुक न्यामरूप शोग्पा (डीएनटी) का नेतृत्व किया, इसी दौरान यह यात्रा हुई है | ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग ने कार्यालय में सात नवंबर 2019 को एक वर्ष पूर्ण किया | विकास परियोजनाओं, विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र की परियोजना को प्रारम्भ करने के लिए कोष जुटाने में शेरिंग सरकार ने कई चुनौतियों का सामना किया | विदेश मंत्री को एनयू 3.5 बिलियन आवंटित किया गया था, जबकि इस मंत्रालय को देश की 12वीं योजना में लगभग एनयू 13 बिलियन की आवश्यकता थी | अत्यधिक महत्वपूर्ण बात है कि काफ़ी आर्थिक सुधारों के बावजूद बाहरी ऋण में वृद्धि के प्रबंधन, व्यापार घाटा और एफ़डीआई तथा बाहर से भेजे जाने वाले धन प्रवाह में कमी का सामना भूटानी सरकार ने किया है | थिंपु में एक आम धारणा रही है कि नकारात्मक वृहत-आर्थिक संकेतक का संबंध भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी से हो सकता है |

भारत तथा भूटान के बीच उच्च स्तरीय आदान-प्रदान में यह यात्रा एक नई गति का आभास भी है | दोनों देश परस्पर विश्वास, सद्भावना तथा आपसी समझ से प्रेरित एक अद्भुत तथा समय की कसौटी पर खरे उतरे द्विपक्षीय सम्बन्धों को साझा करते हैं | भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की थिंपु की चार महीने पहले हुई यात्रा के बाद यह यात्रा हुई है | पूर्व में, कार्यालय संभालने के बाद, “पड़ोसी पहले” की नीति के तहत भारत के विदेश मंत्री ने भूटान का दौरा किया था | वास्तव में, डॉ॰ जयशंकर की यह पहली विदेश यात्रा थी | पूर्व में, दिसंबर 2018 में प्रधानमंत्री लोटे शेरिंग ने भारत की पहली विदेश यात्रा की थी |

1968 में भूटान तथा भारतीय गणतन्त्र के बीच राजनयिक सम्बन्धों की स्थापना के समय से, यह दक्षिण एशिया के अत्यधिक सफलतम सम्बन्धों में से एक बनकर उभरा है, जो परस्पर विश्वास, आपसी समझ तथा परिपक्वता पर आधारित है | भारत-भूटान मित्रता तथा सहयोग की संधि पर 1949 में हस्ताक्षर किया गया था | फरवरी 2007 में इस संधि में संशोधन भी किया गया | यह संधि इस संबंध का एक स्तम्भ रहा है | इसने खुली सीमा, सुरक्षा सहयोग तथा लोगों से लोगों के सम्बन्धों को गहरा बनाने जैसी विशेष व्यवस्थाओं में सुविधा पहुंचाई | कई विषमताओं के बावजूद, दोनों देश आर्थिक विकास, लोकतन्त्र तथा क्षेत्रीय शांति के सशक्तिकरण की दिशा में अपने प्रयासों में समान साझेदार के रूप में एक दूसरे पर निर्भर तथा एक दूसरे के आभारी हैं | वर्तमान में, जल संसाधन, व्यापार तथा परिवहन, आर्थिक सहयोग, सुरक्षा तथा सीमा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच की कार्यप्रणालियों में कई द्विपक्षीय संस्थागत प्रबंधन हैं |

इसी दौरान, भूटान ने भारतीय पर्यटकों से शुल्क वसूलने का निर्णय लिया है | भारतीय पर्यटक अभी इस शुल्क से मुक्त हैं | इस हिमालयी राज्य में पर्यटकों विशेषकर भारत के पर्यटकों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि हुई है | 2018 में ही दक्षिण एशिया क्षेत्र के आधे से अधिक पर्यटक भारत के थे | भूटान पर्यटन प्राधिकरण एक “सुस्थिर विकास शुल्क” वसूलेगा | “अनुमति प्रसंस्करण शुल्क” के साथ इस शुल्क पर निर्णय लिया जाना शेष है | एक सुनियोजित तरीक़े से भूटान में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ऐसा किया जा रहा है, क्योंकि इस देश का पारिस्थितिकी तंत्र बहुत ही संवेदनशील है |

डॉ॰ दोरजी की यह यात्रा राजनीतिक तथा धार्मिक महत्व का एक मिश्रण है | इस यात्रा का उद्देश्य सीमा आर्थिक सहयोग भी है | इस यात्रा का उद्देश्य राजनयिक सम्बन्धों को विस्तार देना तथा दोनों देशों के बीच के वर्तमान समबन्धों को और सशक्त बनाना है | दोनों विदेश मंत्रियों ने कई तरह के मुद्दों तथा द्विपक्षीय सम्बन्धों को और बढ़ाने के लिए नए तंत्रों पर चर्चाएं कीं | उन्होंने जलवायु परिवर्तन, मूलभूत संरचना, सुरक्षा तथा रणनीतिक मुद्दों और भूटान की 12वीं पाँच वर्षीय योजना के लिए भारत की तकनीकी/आर्थिक सहायता पर सहयोग की भी समीक्षा की | बदलते क्षेत्रीय तथा वैश्विक गतिशीलताओं को ध्यान में रखते हुए, दोनों मंत्री द्विपक्षीय सम्बन्धों को दुरुस्त करने पर सहमत हुए |

आलेख – डॉ॰ निहार आर नायक, रिसर्च फैलो, आईडीएसए

अनुवादक/वाचक – मनोज कुमार चौधरी

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