भारन ने ब्रिक्स सदस्यों के साथ रिश्ते मज़बूत किए

भारत की बहुपक्षीय सक्रियता में भारत की विदेश नीति में ब्रिक्स का बहुत महत्वपूर्ण सामरिक स्थान है। जब से चार देशों का समूह अस्तित्व में आया है तभी से ये स्थान है। बदलते भू-राजनीतिक और आर्थिक परिवेश में पूरी दुनिया में ब्रिक्स को उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में महत्वपूर्ण इकाई माना जाता है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ब्राजील की राजधानी ब्राजीलिया में 11वें ब्रिक्स सम्मेलन में शिरक़त करना अहम है। सम्मेलन से पहले इसके महत्व को उजागर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि भारत और अन्य ब्रिक्स देश संगठन की रूपरेखा के भीतर आतंकरोध के लिए सहयोग हेतु एक व्यवस्था तैयार करना चाहते हैं। 

भारत के प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स कारोबारी परिषद को संबोधित करते हुए इस तथ्य पर ज़ोर दिया कि ये देश दुनिया के आर्थिक विकास के पचास प्रतिशत हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में मंदी के बावजूद ब्रिक्स देशों में तेजी से होते आर्थिक विकास से लाखों लोगों को ग़रीबी से छुटकारा मिला है और तकनीक तथा नवाचार के क्षेत्र में राष्ट्र आगे बढ़े हैं। हमारे बाज़ारों का आकार, विविधता और हमारी विशेषताएँ एक-दूसरे के लिए हितकारी हैं। दुनिया के कारोबारी जगत को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे अधिक खुली और निवेश हेतैषी अर्थव्यवस्था है। भारत को असीम संभावनाओं का देश बताते हुए प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स के कारोबारी नेताओं से भारत में विशेष रूप से इसके अवसंरचनात्मक विकास में निवेश करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि अगले ब्रिक्स सम्मेलन तक कम से कम पाँच ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जानी चाहिए जिन में परस्पर लाभ के आधार पर हमारे बीच संयुक्त अद्यम शुरू किए जा सकें। 

ब्रिक्स मंच सदस्य देशों के उच्च नेताओं को ये अवसर प्रदान करता है कि वे परस्पर हितों वाले वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श कर सकें। ब्रिक्स से अलग होने वाली बैठकों का भी नेताओं ने बहुत अच्छा इस्तेमाल किया है और द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा बहुपक्षीय मुद्दों पर अपने-अपने विचार और अनुभव साझे किए हैं। इसी परिदृश्य में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सम्मेलन से इतर मुलाक़ात की। राष्ट्रपति पुतिन से अपनी मुलाक़ात के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया कि राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात बहुत अच्छी रही। हमने भारत-रूस संबंधों की पूर्ण समीक्षा की। भारत और रूस व्यापार, सुरक्षा और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में खूब सहयोग कर रहे हैं। इन द्विपक्षीय संबंधों का हमारे देश के लोगों को लाभ मिलेगा। श्री पुतिन ने कहा कि रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार में 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। राष्ट्रपति पुतिन ने श्री मोदी को अगले साल मई में होने वाले विक्ट्री डे सेलिब्रेशन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। 

माम्ल्लापुरम में अपनी दूसरी अनौपचारिक शीर्ष मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री ने एक माह के भीतर ही चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से दूसरी बार मुलाक़ात की। दोनो नेताओं ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया। 

भारत ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी में शामिल नहीं होने का फ़ैसला किया है। इसके कुछ दिन बाद ही ब्रिक्स सम्मेलन से इतर ये मुलाक़ात हुई। यहाँ ये याद रखना महत्वपूर्ण है कि चीन चाहता है कि भारत क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी में शामिल हो जाए। इस संदर्भ में चीन के नेताओं ने आशा भी जताई है। बैठक के दौरान राष्ट्रपति शी ने दूसरी अनौपचारिक शीर्ष मुलाकात के समय गर्मजोशी से स्वागत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अगले साल चीन द्वारा आयोजित की जाने वाली तीसरी अनौपचारिक शीर्ष बैठक के लिए प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया। 

श्री मोदी और श्री शी ने कहा कि जल्द ही व्यापार और अर्थव्यवस्था के बारे में उच्च स्तरीय तंत्र की मुलाकात होनी चाहिए। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद और सीमा पर शांति तथा सौहार्द बनाए रखने के महत्व को दोहराते हुए दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों की और बैठके आयोजित करने की भी इच्छा जताई। उन्होने ब्रिक्स, क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी और डब्ल्यूटीओ जैसे मंचो पर परस्पर हितो के बारे में भी चर्चा की। 



भारत के प्रधानमंत्री और चीन के राष्ट्रपति ने अगले साल दोनो देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की स्थापना की 70वीं वर्षगाँठ मनाए जाने की तैयारियों का भी जायज़ा लिया। 




आलेख – डॉ0 रूपा नारायण दास, सामरिक विश्लेषक 

अनुवाद – नीलम मलकानिया

Comments

Popular posts from this blog

भारत ने फिजी को पहुंचाई मानवीय सहायता

आत्मनिर्भर भारत में प्रवासियों की भूमिका

अरब-भारत सहयोग फोरम की बैठक