चांस्लर मर्केल की भारत यात्रा से आपसी संबंधों को बढ़ावा
जर्मन चांस्लर एंगला मर्केल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ पांचवी अंत: सरकारी विचार विनिमय बैठक की सह-अध्यक्षता की। जर्मनी ऐसे कुछ देशों में से है जिनके साथ भारत उच्चस्तरीय विचार विनिमय के लिए इस प्रकार की व्यवस्था को अपनाता है। ये उनकी चौथी भारत यात्रा रही। उनके साथ 12 मंत्री और एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया हुआ था। चांस्लर मर्केल ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मुलाकात की और राष्ट्रपति के शब्दों में “जर्मनी के भारत के साथ मजबूत व्यवसायिक संबंधों को देखते हुए भारत यूरोपीय संघ के साथ अपने व्यापारिक और निवेश समझौते को उसकी सहायता से संतुलन एंव शीध्रतापूर्वक अंतिम आकार देना चाहता है। यूरोपीय संघ के भीतर जर्मनी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। राष्ट्रपति के वक्तव्य से संकेत मिलता है कि भारत जल्द ही इस समझौते पर चर्चा प्रारंभ करेगा। राष्ट्रपति कोविंद ने ये भी कहा कि दोनों देशों को एक बहुपक्षीय व बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में मजबूती लाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए ओर वित्त कार्यवाही बल की बैठकों में अपनी स्थीति दृढ बनाते हुए आतंक का मुकाबला करने में सहयोग करना चाहिए।
आईजीसी के बैठकों में प्रधानमंत्री मोदी और चांस्लर मर्केल ने दोहराया कि भारत जर्मन रणनीतिक साझेदारी, साझामूल्यों और लोकतंत्र के सिद्धांतों पर आधारित है और दोनों ही देश मुक्त एंव निष्पक्ष व्यापार, नियमों पर आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और आपसी विश्वास पर समान सोच रखते हैं। श्री मोदी ने कहा कि चांस्लर मर्केल केवल एक मित्र ही नहीं है बल्कि लम्बे समय से सेवारत एक विश्व नेता भी हैं। जिन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं वो भारत और जर्मनी के मध्य मित्रता और निकट संबंधों की गवाही देते हैं। दो साल पहले उठाये गए कदमों की समीक्षा करते हुए दोनों देशों ने विभिन्न विषयों पर चर्चा की और 11 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इन्हें चार श्रेणियों में रखा जा सकता है यानि आर्टिफिश्ल इंटेलिजेंस, ज्ञान एंव पहल के माध्यम से व्यापार एंव निवेश में इजाफा, सतत विकास और जलवायु चक्र की रक्षा के लिए कार्यवाही, जनता को निकट लाना ओर सार्वभौमिक दायित्व को साझा करना। आईजीसी बैठक के अंत में जारी हस्ताक्षरित संयुक्त वक्तव्य में 73 बिंदुओं के तहत दोनों देशों के बीच पांच क्षेत्रों में साझेदारी के क्षेत्र तय किये गए। दोनो पक्ष स्वास्थ्य, परिवहन, पर्यावरण एंव कृषि क्षेत्र में आर्टिफिश्ल इंटेलिजेंस का उपयोग करने पर राजी हुए और मानकी करण, सूचना प्रौद्योगिकी में सुरक्षा को लेकर जर्मन प्लेटफार्म इंडस्ट्री तथा सीआईआई स्मार्ट मैनूफैक्चरिंग के बीच सम्पर्क कायम करने पर भी सहमत हुए। व्यापार और निवेश के क्षेत्र में दोनो नेताओं ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रणाली और विश्व व्यापार संगठन की नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के लिए सहयोग पर सहमति जताई। अन्य बातों के अलावा मेक इंडिया मित्तल स्टैंड कार्यक्रम और भारत जर्मनी स्टार्ट-अप आदान प्रदान कार्यक्रम पर भी बल दिया गया। दोनो नेताओं ने ऊर्जा के कुशल उपयोग, ई-मोबीलिटी कार्यक्रम और अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के आदान प्रदान पर भी बल दिया। इसके अलावा भारत और जर्मनी के वित्त मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बैठकों की फिर से शुरूआत हुई और साझा आर्थिक हितों के आदान प्रदान पर बल दिया गया। सहयोग के अन्य क्षेत्र हैं तीव्रगामी रेल परियोजनाएं नागरिक उड्डयन और प्राकृतिक विनाश को झेलने में सक्षम बुनियादी ढांचे से संबंधित गठबंधन का भी स्वागत किया गया।
दोनो पक्षों के लिए सतत विकास लक्ष्य और पेरिस सझौता आपसी सहयोग व जलवायु चक्र परिवर्तन के मुद्दों पर दिशानिर्देशक तत्वों के तौर पर काम करते हैं। ऊर्जा संचरण के क्षेत्र में कार्यरत भारत जर्मनी ऊर्जा मंच, भारत जर्मनी सौर साझेदारी 2015 और हरित ऊर्जा गलियारा 2013 का भी जिक्र हुआ। जनसम्पर्क के स्तर पर उच्चशिक्षा के क्षेत्र में दोनो देशों की साझेदारी को रेखांकित करते हुए दोनों देशों के बीच छात्रों के लिए प्रयास बढ़ाने पर भी बात हुई। दोनो देशों के बीच 2020 में रणनीतिक साझेदारी के दो दशक पूरे हो रहे हैं। इसे देखते हुए यह तय किया गया कि हर साल विदेश मंत्रालय स्तर के विचार विनमय को नियमित किया जाए। रणनीतिक वार्ता का अगला दौर शुरू किया जाए और रक्षा मंत्रियों के बीच द्वीपक्षीय वार्ता भी नियमित रूप से रखी जाए ताकि सार्वभौमिक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों पर बात हो सके। दोनो पक्षों ने अफगानिस्तान के शांति पूर्ण विकास को स्वीकृति देते हुए ईरान के साथ परमाणु समझौते को भी अपना पूर्ण समर्थन दिया। दोनो पक्षो ने दोहराया कि शांति स्थिरता और खुशहाली के लिए बहुपक्षीय सहयोग अति आवश्यक है।
आलेख:- उम्मू सलमा बावा
अनुवाद एवं स्वर – मुनीश शर्मा
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