भारत-ईरान संयुक्त आयोग की 19वीं बैठक

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने दोनों देशों के बीच संयुक्त आयोग की बैठक के 19वें संस्करण में भाग लेने के लिए ईरान की यात्रा की। संयुक्त आयोग, जो भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों की सह-अध्यक्षता में कार्य कर रहा है, इन दो मित्र देशों के बीच गहरे संबंधों को आगे बढ़ाने का एक माध्यम है। अपनी यात्रा के दौरान, डॉ. जयशंकर ने ईरान के राष्ट्रपति हसन रुहानी से भी भेंट की और उन्हें संयुक्त आयोग की बैठक की प्रगति के विषय में भी अवगत कराया। भारतीय विदेश मंत्री ने ईरानी प्रमुख राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव रियर एडमिरल अली शंखानी और ईरानी शहरी विकास मंत्री, मोहम्मद इस्लामी से भी मिले।

भारत और ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से ये बैठकें ऐसे समय में की गईं हैं जब ईरान और संयुक्त राज्य के बीच निरंतर गतिरोध के कारण ईरान गम्भीर आर्थिक संकट में आ गया है। विशेष रूप से, इस गतिरोध के चलते ईरान पर उस अमरीका द्वारा कड़े आर्थिक और राजनैतिक प्रतिबंध लगा दिये गए हैं, जिसने ऐतिहासिक परमाणु संधि से एकतरफ़ा अलग कर लिया था।

इस 'बहुत ही रचनात्मक' संयुक्त आयोग की बैठक में, दोनों पक्षों ने भारत-ईरान संबंधों की व्यापक प्रकृति की समीक्षा की और भारत तथा ईरान, ईरान में चाबहार बन्दरगाह परियोजना को तीव्र बनाने पर भी सहमत हुए। ईरानी विदेश मंत्री श्री जावेद ज़रीफ़ ने भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों की 'उत्कृष्ट चर्चा' पर अपनी संतुष्टि व्यक्त की और दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की 'प्राचीन, ऐतिहासिक और अटूट' प्रकृति को दोहराया।

बैठक के दौरान चर्चा की जाने वाली प्रमुख मुद्दों में भारत-ईरान कनेक्टिविटी, व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में सहयोग सम्मिलित हैं। दोनों पक्षों ने भारत और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया और चाबहार परियोजना में शाहिद बेहशती बंदरगाह के संचालन में प्रगति पर अपनी पारस्परिक संतुष्टि व्यक्त की। विशेष रूप से, चाबहार बन्दरगाह को भारतीय उपमहाद्वीप, ईरान, अफगानिस्तान, मध्य एशिया और यूरोप के बीच प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करने की क्षमता के रूप में मान्यता दी गई है। ऊर्जा-समृद्ध इस देश के दक्षिणी तट पर यह बंदरगाह आसानी से भारत के पश्चिमी तट से पहुंच के भीतर है और पाकिस्तान के ग्वादर बन्दरगाह के एक प्रत्युत्तर के रूप में इसे देखा जा रहा है, जिसे चीन द्वारा विकसित किया जा रहा है और चाबहार से करीब 80 किलोमीटर दूर दूरी पर स्थित है। भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों ने अफगानिस्तान से निर्यात के लिए चाबहार पोर्ट के उपयोग का भी स्वागत किया और उन्होंने व्यापार और पारगमन के उद्देश्य के लिए व्यापक क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ाने के लिए इस बंदरगाह के विकास के संभावित तरीकों पर चर्चा की।

इस संयुक्त आयोग की बैठक के दौरान, भारत और ईरान ने अपने द्विपक्षीय व्यापार और वाणिज्य को मजबूत करने के लिए भी समर्थन दोहराया है और इस संदर्भ में भारत-ईरान संयुक्त कार्य समूह को प्राथमिकता के उद्देश्य से व्यापारिक समझौता करने हेतु एक बैठक आयोजित करने के लिए सहमत हुए जिसमें द्विपक्षीय निवेश संधि, और भारत-ईरान को बढ़ावा देने के लिए सीमा शुल्क मामलों को अंतिम रूप दिया जा सकेगा।

भारत और ईरान ने आतंकवाद से उत्पन्न होने वाले खतरे पर अपने साझा विचारों को दोहराया है और उन्होंने आतंकवादी अड्डों के समूल विनाश को भी अतिशीघ्र संपादित करने की बात दोहराई है। उन्होंने इस क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया। 2020 में दोनों देशों की मैत्री की द्विपक्षीय संधि की 70वीं वर्षगांठ की याद में दोनों देशों के बीच समझौता, 19वीं भारत-ईरान संयुक्त आयोग की बैठक का एक और उल्लेखनीय परिणाम रहा। इस संदर्भ में, भारत और ईरान ने अपने राजनयिकों की यात्राओं के आदान प्रदान और सांस्कृतिक आयोजनों की योजना बनाई है।

एक ऐसे समय पर जब ईरान से भारत का तेल आयात कठोर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण प्रभावित हो गया है, तो इस संयुक्त आयोग की बैठक भारत और ईरान के दृढ़ प्रयासों को बहुपक्षीय स्वरूप प्रदान करती है। बीते समय में दोनों पक्ष नियमित रूप से उच्चस्तरीय बैठकें करते रहे हैं और इस संबंध में दोनों पक्षों ने अपनी अपनी प्रतिबद्धताओं को दोहराया है। ईरानी राष्ट्रपति डॉ. हसन रूहानी ने पिछले साल भारत की एक महत्वपूर्ण यात्रा की थी। भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने न्यूयॉर्क में इस साल सितंबर के महीने में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र के दौरान ईरान के राष्ट्रपति से मिले थे जहाँ उन्होंने भारत और ईरान के द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की थी। हाल ही में संपन्न संयुक्त आयोग की यह बैठक भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रही है।


आलेख - डॉ. आसिफ़ शुजा

अनुवादक एवं वाचक - हर्ष वर्धन

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