भारत-पुर्तगाल के मज़बूत होते संबंध
श्री एंटोनियो कोस्टा का पुर्तगाल के प्रधानमंत्री पद पर फिर से चुने के बाद यूरोप के बाहर सबसे पहले भारत दौरा किया है जो द्विपक्षीय रिश्तों के महत्व को दर्शाता है। श्री कोस्टा अब तक तीन बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल चुके हैं। इससे पहले उन्होंने जनवरी 2017 में भारत का दौरा किया था, जब भारत ने उन्हें "प्रवासी भारतीय सम्मान" पुरस्कार से सम्मानित किया। श्री कोस्टा ने गांधीनगर में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट’ को भी संबोधित किया था।
बाद में उसी वर्ष भारतीय प्रधानमंत्री पुर्तगाल गए। अपनी इस यात्रा के दौरान श्री मोदी ने श्री कोस्टा से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की और सहयोग के विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान की। श्री मोदी ने पुर्तगाल में 65,000 भारतीयों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें भारत का "वास्तविक दूत" कहा। 2018 में, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने पुर्तगाल का दौरा किया था।
पुर्तगाल दशकों बाद भारतीय विदेश नीति के रडार पर आया है। पुर्तगाल के साथ सम्बन्धों को मजबूत करने के लिए भारत के पास अनेक व्यावहारिक कारण हैं। जैसा प्रधानमंत्री कोस्टा ने कहा, पुर्तगाल भारत का यूरोप का प्रवेश द्वार बनना चाहता है। पुर्तगाल वास्तव में यूरोपीय एकीकरण का केंद्र रहा है। यूरो मुद्रा शुरू होने के आरंभ में ही पुर्तगाल इसमें शामिल हो गया था। यह यूरोपीय संघ की राजनीति को आकार देने में पुर्तगाल की अहम भूमिका रही है। लिस्बन संधि और विकास के लिए लिस्बन रणनीति इनमें से एक हैं। पुर्तगाल-2020 यूरोपीय आयोग के साथ एक समझौता है जो पांच यूरोपीय बुनियादी और निवेश कोष पर केन्द्रित है। पुर्तगाल को यूरोप की 2020 रणनीति के अनुरूप स्मार्ट, टिकाऊ और समावेशी विकास से काफी लाभ होगा।
भारत के साथ पुर्तगाल की प्रगाढ़ता के भी इसी तरह मिलते-जुलते कारण हैं। वैश्विक मंच पर भारत का प्रभुत्व बढ़ रहा है। भारत की आर्थिक वृद्धि ने दुनिया भर को आकर्षित किया है। भारत ने साबित कर दिया है कि लोकतंत्र और विकास साथ-साथ चल सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और श्री कोस्टा ने दोनों देशों के बीच संबंधों को गहरा करने के लिए व्यक्तिगत प्रतिबद्धता दिखाई है। प्रधानमंत्री कोस्टा महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजन समिति की दूसरी बैठक में भाग लेने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर नई दिल्ली आए। पुर्तगाली प्रधानमंत्री ने "गांधी नागरिकता शिक्षा" पुरस्कार की स्थापना की घोषणा की। गांधीजी के विचारों और उद्धरणों से प्रेरित यह पुरस्कार प्रति वर्ष दिया जाएगा। पुरस्कार का पहला संस्करण पशु कल्याण के लिए समर्पित होगा।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा व्यापार जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। दोनों देश सहयोग के क्षेत्रों में विविधता लाने के इच्छुक हैं। शिक्षा और संस्कृति पर अत्यधिक ध्यान दिया जा रहा है। पुर्तगाल के साथ सम्बन्धों में मज़बूती से अन्य पुर्तगाली भाषी देशों के साथ भारत के व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा मिलेगा। भारत यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते को अंतिम रूप देने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
भारत ने पुर्तगाल में ‘फेस्टिवल ऑफ इंडिया’ का आयोजन किया जिसमें संगीत, नृत्य, व्यंजन और योग सहित भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और बहुआयामी विविधताएं प्रदर्शित की गई थीं। यह अच्छी बात है कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ रहा है। हालांकि यह क्षमता से अभी भी काफी कम है। भारत और पुर्तगाल की कंपनियां अफ्रीका में खासकर पुर्तगाल भाषी देशों में एक साथ काम करने की इच्छुक हैं। दोनों देश साथ मिलकर अन्य देशों में संयुक्त उद्यम की खोज कर रहे हैं।
पुर्तगाल के साथ भारत के संबंध प्राचीन हैं। यूरोप से भारत के लिए समुद्री मार्ग की खोज करने वाला वास्को डी गामा पुर्तगाली खोजकर्ता ही था। वह मई 1498 में कोझीकोड में उतरा। भारत और पुर्तगाल के बीच मसाला-व्यापार तभी से जारी है।
उच्च-स्तरीय राजनीतिक यात्राएं आधुनिक कूटनीति के लिए आवश्यक हैं। भारत और पुर्तगाल ने अंतरिक्ष, स्टार्टअप, शिपिंग, यूथ एक्सचेंज और संस्कृति जैसे सहयोग के नए क्षेत्रों में निरंतर सक्रियता दिखाई है और इसके मध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को नई गति दी है। अच्छी विदेश नीति में समझदारी की आवश्यकता होती है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह तभी संभव है जब नेतृत्व में साहस और कल्पनाशीलता दोनों हों। पुर्तगाल के साथ भारत की बढ़ती निकटता वर्तमान भारतीय नेतृत्व में इसी सहत और कल्पनाशीलता का परिणाम हैं।
बाद में उसी वर्ष भारतीय प्रधानमंत्री पुर्तगाल गए। अपनी इस यात्रा के दौरान श्री मोदी ने श्री कोस्टा से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की और सहयोग के विशिष्ट क्षेत्रों की पहचान की। श्री मोदी ने पुर्तगाल में 65,000 भारतीयों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें भारत का "वास्तविक दूत" कहा। 2018 में, उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने पुर्तगाल का दौरा किया था।
पुर्तगाल दशकों बाद भारतीय विदेश नीति के रडार पर आया है। पुर्तगाल के साथ सम्बन्धों को मजबूत करने के लिए भारत के पास अनेक व्यावहारिक कारण हैं। जैसा प्रधानमंत्री कोस्टा ने कहा, पुर्तगाल भारत का यूरोप का प्रवेश द्वार बनना चाहता है। पुर्तगाल वास्तव में यूरोपीय एकीकरण का केंद्र रहा है। यूरो मुद्रा शुरू होने के आरंभ में ही पुर्तगाल इसमें शामिल हो गया था। यह यूरोपीय संघ की राजनीति को आकार देने में पुर्तगाल की अहम भूमिका रही है। लिस्बन संधि और विकास के लिए लिस्बन रणनीति इनमें से एक हैं। पुर्तगाल-2020 यूरोपीय आयोग के साथ एक समझौता है जो पांच यूरोपीय बुनियादी और निवेश कोष पर केन्द्रित है। पुर्तगाल को यूरोप की 2020 रणनीति के अनुरूप स्मार्ट, टिकाऊ और समावेशी विकास से काफी लाभ होगा।
भारत के साथ पुर्तगाल की प्रगाढ़ता के भी इसी तरह मिलते-जुलते कारण हैं। वैश्विक मंच पर भारत का प्रभुत्व बढ़ रहा है। भारत की आर्थिक वृद्धि ने दुनिया भर को आकर्षित किया है। भारत ने साबित कर दिया है कि लोकतंत्र और विकास साथ-साथ चल सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी और श्री कोस्टा ने दोनों देशों के बीच संबंधों को गहरा करने के लिए व्यक्तिगत प्रतिबद्धता दिखाई है। प्रधानमंत्री कोस्टा महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजन समिति की दूसरी बैठक में भाग लेने के लिए भारतीय प्रधानमंत्री के निमंत्रण पर नई दिल्ली आए। पुर्तगाली प्रधानमंत्री ने "गांधी नागरिकता शिक्षा" पुरस्कार की स्थापना की घोषणा की। गांधीजी के विचारों और उद्धरणों से प्रेरित यह पुरस्कार प्रति वर्ष दिया जाएगा। पुरस्कार का पहला संस्करण पशु कल्याण के लिए समर्पित होगा।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने रक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा व्यापार जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया। दोनों देश सहयोग के क्षेत्रों में विविधता लाने के इच्छुक हैं। शिक्षा और संस्कृति पर अत्यधिक ध्यान दिया जा रहा है। पुर्तगाल के साथ सम्बन्धों में मज़बूती से अन्य पुर्तगाली भाषी देशों के साथ भारत के व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा मिलेगा। भारत यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। दोनों पक्ष द्विपक्षीय व्यापार और निवेश समझौते को अंतिम रूप देने की आवश्यकता को रेखांकित किया।
भारत ने पुर्तगाल में ‘फेस्टिवल ऑफ इंडिया’ का आयोजन किया जिसमें संगीत, नृत्य, व्यंजन और योग सहित भारत की सांस्कृतिक समृद्धि और बहुआयामी विविधताएं प्रदर्शित की गई थीं। यह अच्छी बात है कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ रहा है। हालांकि यह क्षमता से अभी भी काफी कम है। भारत और पुर्तगाल की कंपनियां अफ्रीका में खासकर पुर्तगाल भाषी देशों में एक साथ काम करने की इच्छुक हैं। दोनों देश साथ मिलकर अन्य देशों में संयुक्त उद्यम की खोज कर रहे हैं।
पुर्तगाल के साथ भारत के संबंध प्राचीन हैं। यूरोप से भारत के लिए समुद्री मार्ग की खोज करने वाला वास्को डी गामा पुर्तगाली खोजकर्ता ही था। वह मई 1498 में कोझीकोड में उतरा। भारत और पुर्तगाल के बीच मसाला-व्यापार तभी से जारी है।
उच्च-स्तरीय राजनीतिक यात्राएं आधुनिक कूटनीति के लिए आवश्यक हैं। भारत और पुर्तगाल ने अंतरिक्ष, स्टार्टअप, शिपिंग, यूथ एक्सचेंज और संस्कृति जैसे सहयोग के नए क्षेत्रों में निरंतर सक्रियता दिखाई है और इसके मध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को नई गति दी है। अच्छी विदेश नीति में समझदारी की आवश्यकता होती है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर यह तभी संभव है जब नेतृत्व में साहस और कल्पनाशीलता दोनों हों। पुर्तगाल के साथ भारत की बढ़ती निकटता वर्तमान भारतीय नेतृत्व में इसी सहत और कल्पनाशीलता का परिणाम हैं।
आलेख: डॉ आश नारायण राय, निदेशक, सामाजिक विज्ञान संस्थान दिल्ली
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