सऊदी-क़तर संबंध- विनम्र संकेतों का खेल

चालीसवीं खाड़ी सहयोग परिषद के सर्वोच्च परिषद सम्मेलन ने सऊदी अरब और क़तर के संबंधों में बदलाव का संकेत दिया। ग़ौरतलब है कि सऊदी-अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमारात और बहरीन ने क़तर पर ये आरोप लगाया था कि ये आतंकी गुटों की मदद करता है। इन चारों देशों ने क़तर से कूटनीतिक रिश्ते पूरी तरह समाप्त कर दिए थे। सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुलाज़ीज़ अल सौद ने क़तर के अमीर शेख़ तमीम बिन हमद अल थानी को रियाद में हो रहे 2019 जीसीसी सम्मेलन का व्यक्तिगत न्यौता भेजा था। बदले में क़तर ने अपने प्रधानमंत्री शेख़ अब्दुल्लाह बिन नास्सेर अल थानी को सम्मेलन में शामिल होने के लिए भेजा। 2017 के बाद से ये क़तर का सर्वोच्च प्रतिनिधित्व था। उस समय क़तर को सऊदी अरब बहुत नुक्सान पहुँचाना चाहता था और इसकी सीमा के साथ 61 किलोमीटर के क्षेत्र में एक 200 मीटर चौड़ी नहर सालवा खोदकर इसे एक द्वीप में बदल दिया था।

दोनों पक्षों की ओर से मिलने वाले विनम्र संकेतों से लगता है कि क़तर और सऊदी अरब के आपसी संबंध सामान्य होने की ओर अग्रसर हैं। इस साल क़तर के प्रधानमंत्री सऊदी अरब में अरामको तेल संस्थान पर हुए हमलों के चलते आपात सुरक्षा सम्मेलन में शामिल होने के लिए सऊदी अरब गए थे। सऊदी अरब की ख़ुफ़िया सेवा के भूतपूर्व प्रमुख युवराज तुर्की अल-फ़ैज़ल ने रेखांकित किया था कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमारात और बहरीन द्वारा दोहा में खाड़ी कप फ़ुटबॉल प्रतिस्पर्धा में भाग लेना इस बात का संकेत है कि ये तीनों देश क़तर के साथ सक्रियता बढ़ाना चाहते हैं। हो सकता है कि अरामको हमले के बाद सऊदी अरब ने थोड़ी नरमी बरती है क्योंकि इस हमले में इसके तेल उत्पादन पर बुरा प्रभाव पड़ा है। इसके अतिरिक्त अरामको हमले सहित क्षेत्रीय घटनाओं को लेकर अमरीका की ढीली प्रतिक्रिया ने भी सऊदी अरब की अमरीका पर निर्भरता कम कर दी और खाड़ी की एकता बढ़ा दी जो कि 2019 जीसीसी सम्मेलन की संयुक्त विज्ञप्ति में साफ़ दिखाई दी।

हालांकि इन संकेतों से निकट भविष्य में क़तर संकट के समाप्त होने का कोई इशारा नहीं मिलता क्योंकि अभी भी संयुक्त अरब अमारात का क़तर के ख़िलाफ़ कड़ा रुख बना हुआ है और इसने किसी भी बदलाव का संकेत नहीं दिया है। संयुक्त अरब अमारात के विदेश मंत्री अनवर गरगाश ने इस संकट के लिए क़तर पर आरोप लगाया और कहा कि समाधान का दायित्व भी उसी का है जिसने संकट खड़ा किया है। उन्होंने ये भी कहा कि क़तर संकट के दूर होने में अभी समय लगेगा। बहरीन के विदेश मंत्री ख़ालिद बिन अहमद अल ख़लीफ़ा ने जीसीसी सम्मेलन में क़तर के अमीर की अनुपस्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि क़तर सऊदी धड़े वाले समूह के साथ लंबे समय से चले आ रहे टकराव को दूर करने के लिए गंभीर प्रतीत नहीं होता।

लेकिन फिर भी क़तर के विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी ने अन्य देशों के मामलों में अहस्तक्षेप और परस्पर सम्मान पर आधारित बिना शर्त वार्ता में शामिल होने की क़तर की इच्छा व्यक्त की। सद्भाव संकेत के रूप में क़तर के अमीर ने संयुक्त अरब अमारात के राष्ट्रपति शेख़ ख़लीफ़ा बिन ज़ायद अल न्हयान के भाई शेख़ सुल्तान की मृत्यु के समय उन्हें शोक संदेश भेजा था। 

वे क़तर में अक्तूबर में आयोजित बहरीन की मौजूदगी वाले हैंडबॉल खेल में भी शामिल हुए थे। पारम्परिक अरब जगत में इस तरह के संकेत बहुत मायने रखते हैं। हालांकि फिर भी जीसीसी में दरार अन्य क्षेत्रीय ताक़त, ईरान द्वारा अपने पक्ष में समझी जा रही है क्योंकि ये ईरान-अमरीका के परमाणु समझौते के अधर में लटकने के बाद अमरीका द्वारा इस पर लगाए गए प्रतिबंधों से छुटकारा पाने को आतुर है।

भारत ने हमेशा चाहा है कि क़तर संकट का अंत हो। ये फ़ारस की खाड़ी की स्थिरता, सुरक्षा और शांति के लिए बहुत ज़रूरी है। इतना ही नहीं सऊदी अरब में मौजूद 3.2 मिलियन और क़तर में मौजूद 0.6 मिलियन भारतीयों की सुरक्षा भी भारत के लिए चिंता का विषय है। व्यापार, ऊर्जा, प्रवासी, हज यात्री और भारत भेजी गई विदेशी मुद्रा के मद्देनज़र सऊदी अरब भारत के लिए महत्वपूर्ण है और क़तर ऐसा एकमात्र देश है जिसके साथ भारत का लंबे समय से ऊर्जा आयात समझौता चला आ रहा है। 

भारत ने इन चारों देशों द्वारा अलग-थलग किए गए क़तर के साथ संतुलित रवैया अपनाया और आधिकारिक वक्तव्य जारी करते हुए सभी पक्षों से अनुरोध किया कि सकारात्मक संवाद और शांतिपूर्ण समझौता वार्ता द्वारा अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए, परस्पर सम्मान, संप्रभुता और अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से परहेज़ करते हुए जल्द से जल्द समस्या का समाधान किया जाए। क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए क़तर संकट का समाधान बहुत ज़रूरी है और सऊदी अरब तथा क़तर के संबंधों में नरमी के संकेत पूरे क्षेत्र के साथ भारत के लिए भी सकारात्मक संकेत है। 




आलेख- डॉ. लक्ष्मीप्रिया, शोध विश्लेषक, आईडीएसए

अनुवाद- नीलम मलकानिया

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