प्रधानमंत्री के अनुसार अर्थव्यवस्था प्रगति की राह पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था प्रगति के रास्ते पर है। सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के धीमा होने के संदर्भ में, प्रधानमंत्री ने दोहराया कि उनकी सरकार अगले पांच वर्षोँ में भारतीय अर्थव्यवस्था को 5 खरब(ट्रिलियन) डॉलर तक ले जाने के लिए कृत संकल्प है। प्रधानमंत्री ने सरकार की आर्थिक नीति के एक स्पष्ट दृष्टिकोण के रूप में कहा कि बीते समय में कई सुधारात्मक उपाय किए गए हैं जो आने वाले वर्षों में सुखद परिणाम देने लगेंगे। 100 वर्ष पूरा कर चुके एसोचैम (भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल) को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने इस धारणा को दूर करते हुए एक सशक्त वक्तव्य दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में संकुचन की स्थिति आ गई है। दरअसल, पिछले कुछ तिमाहियों में जीडीपी विकास दर में कमी के विषय में बहुत कुछ कहा गया है। यह वैश्विक आर्थिक मंदी की पृष्ठभूमिके संदर्भ में भी है। संयुक्त राज्य अमरीका और चीन के बीच एक व्यापार युद्ध चल रहा है जो भारतीय अर्थव्यवस्था को भी सुस्त बना रहा है। इस तथ्य से इनकार नहीं कर रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी को एक ऐसी अर्थव्यवस्था विरासत में मिली, जो खराब ऋणों से गंभीर रूप से प्रभावित थी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग संस्थानों ने गैर-निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) के साथ बहुत अधिक संघर्ष किया है। उद्योगों को उधार देने के लिए संकट में आने वाले बैंकिंग संस्थानों के चलते यह स्पष्ट हो गया कि इससे आर्थिक विस्तार पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री ने ठीक ही कहा है कि उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग संस्थानों के स्वास्थ्य को पुनः अच्छी स्थिति में लाने की है। श्री मोदी ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की देखरेख में आधे दर्जन से अधिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों इससे बाहर आ गए है।
यह सच है कि पिछले 5 वर्षों में एनडीए सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण की प्रक्रिया शुरू की है ताकि वे इस क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ बैंकों के साथ प्रतिस्पर्धा करने सक्षम और विस्तृत हो जाएं।
एसोचैम बैठक में, प्रधान मंत्री ने एनपीए के कारण बैंकिंग क्षेत्र की ऋण प्रदान करने में आई कमी के कारण अर्थव्यवस्था के समक्ष संकटों के विषय में विस्तार से बात की। यह सच है कि कई कार्पोरेट संस्थाओं ने ऋण नहीं चुकाए हैं, जिसके कारण देश की अर्थव्यवस्था में राजकोषीय घाटा बढ़ता गया।
एस्सार स्टील के सफल विलय से यह निष्कर्ष निकला कि दिवालियापन की प्रक्रिया से बैंकिंग क्षेत्र के लिए अत्यावश्यक राहत मिल सकेगी। प्रधानमंत्री ने बल दिया कि उनकी सरकार द्वारा उठाए गए कदम अब परिणाम दिखाने लगे हैं। उन्होंने कहा, "जब हमने 2014 में सत्ता संभाली थी तो हम संकट की ओर बढ़ रहे थे। हमने अर्थव्यवस्था को स्थिर बना दिया है और आवश्यक गति भी लाए हैं। सरकार ने उद्योग जगत की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा भी किया है"। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने भारतीय उद्योग जगत की बात सुनी है और कॉर्पोरेट करों में कमी इसका प्रमाण है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सरकार ने अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए कई उपाय किए हैं। वस्तु और सेवा कर(जीएसटी) का क्रियान्वयन भी कराधान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। श्री मोदी ने बताया कि 2014 में व्यापार सुगमता में भारत की रैंकिंग 190 देशों में से 142 थी। भारत द्वारा 63वीं रैंक प्राप्त किया जाना निश्चित रूप से सरकार के उन प्रयासों को पूरी तरह रेखांकित करता है कि निवेशकों के लिए पारदर्शिता के साथ-साथ निवेश में तेजी के लिए भी बहुत कुछ किया गया है। उन्होंने कहा, श्रम सुधारों के लिए उद्योग जगत के लिए वांछित उपाय किए गए हैं जिसमें श्रम कानून संशोधन भी सम्मिलित है।
दिवालिया क़ानून(आईबीसी) में संशोधन एक प्रमाण है कि सरकार बैंकों और उद्योगों के हितों की रक्षा कर रही है, जिससे अर्थव्यवस्था को बल मिल सकेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि अर्थव्यवस्था को पाँच खरब अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने का लक्ष्य बहुत सोचा-समझा हुआ है और अपनी पहुंच के भीतर है। प्रधानमंत्री ने बीते समय में दिखा दिया है कि उनकी सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य हासिल किये जा सकते हैं। 'स्वच्छ भारत अभियान’ सरकार के लक्ष्य-उन्मुख दृष्टिकोण का एक सजीव प्रमाण है।
आलेख: मनीष आनंद, पत्रकार
अनुवादक एवं वाचक – हर्ष वर्धन
यह सच है कि पिछले 5 वर्षों में एनडीए सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण की प्रक्रिया शुरू की है ताकि वे इस क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ बैंकों के साथ प्रतिस्पर्धा करने सक्षम और विस्तृत हो जाएं।
एसोचैम बैठक में, प्रधान मंत्री ने एनपीए के कारण बैंकिंग क्षेत्र की ऋण प्रदान करने में आई कमी के कारण अर्थव्यवस्था के समक्ष संकटों के विषय में विस्तार से बात की। यह सच है कि कई कार्पोरेट संस्थाओं ने ऋण नहीं चुकाए हैं, जिसके कारण देश की अर्थव्यवस्था में राजकोषीय घाटा बढ़ता गया।
एस्सार स्टील के सफल विलय से यह निष्कर्ष निकला कि दिवालियापन की प्रक्रिया से बैंकिंग क्षेत्र के लिए अत्यावश्यक राहत मिल सकेगी। प्रधानमंत्री ने बल दिया कि उनकी सरकार द्वारा उठाए गए कदम अब परिणाम दिखाने लगे हैं। उन्होंने कहा, "जब हमने 2014 में सत्ता संभाली थी तो हम संकट की ओर बढ़ रहे थे। हमने अर्थव्यवस्था को स्थिर बना दिया है और आवश्यक गति भी लाए हैं। सरकार ने उद्योग जगत की लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा भी किया है"। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने भारतीय उद्योग जगत की बात सुनी है और कॉर्पोरेट करों में कमी इसका प्रमाण है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि सरकार ने अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए कई उपाय किए हैं। वस्तु और सेवा कर(जीएसटी) का क्रियान्वयन भी कराधान में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। श्री मोदी ने बताया कि 2014 में व्यापार सुगमता में भारत की रैंकिंग 190 देशों में से 142 थी। भारत द्वारा 63वीं रैंक प्राप्त किया जाना निश्चित रूप से सरकार के उन प्रयासों को पूरी तरह रेखांकित करता है कि निवेशकों के लिए पारदर्शिता के साथ-साथ निवेश में तेजी के लिए भी बहुत कुछ किया गया है। उन्होंने कहा, श्रम सुधारों के लिए उद्योग जगत के लिए वांछित उपाय किए गए हैं जिसमें श्रम कानून संशोधन भी सम्मिलित है।
दिवालिया क़ानून(आईबीसी) में संशोधन एक प्रमाण है कि सरकार बैंकों और उद्योगों के हितों की रक्षा कर रही है, जिससे अर्थव्यवस्था को बल मिल सकेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोहराया कि अर्थव्यवस्था को पाँच खरब अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने का लक्ष्य बहुत सोचा-समझा हुआ है और अपनी पहुंच के भीतर है। प्रधानमंत्री ने बीते समय में दिखा दिया है कि उनकी सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य हासिल किये जा सकते हैं। 'स्वच्छ भारत अभियान’ सरकार के लक्ष्य-उन्मुख दृष्टिकोण का एक सजीव प्रमाण है।
आलेख: मनीष आनंद, पत्रकार
अनुवादक एवं वाचक – हर्ष वर्धन
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