कूटनीतिक संबंध मज़बूत करते भारत और ओमान


अपने अधिक सम्पन्न और अधिक प्रभावशाली पड़ौसियों के मुक़ाबले ओमान पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान कम जाता है। लेकिन फारस की खाड़ी में भारत की अपना प्रभाव बढ़ाने की नीति को देखते हुए ओमान अपनी सामरिक स्थिति की वजह से एक बेहद महत्तवपूर्ण देश है। लंबे समय तक आर्थिक विकास की कमी और आतंरिक उथल-पुथल में फँसे देश ने सुलतान क़बूस के नेतृत्व में उल्लेखनीय बदलाव हासिल किया है।

सुलतान ने 1970 से देश की बागडोर संभाली थी। तेल संसाधनों का इस्तेमाल करते हुए जन कल्याण की नीतियों ने देश में आर्थिक प्रगति स्थापित की। सुलतान क़बूस के नेतृत्व में ओमान ने अपने पड़ौसियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे और बिखरे हुए खाड़ी क्षेत्र में अहम क्षेत्रीय भूमिका निभाई। क्षेत्रीय तनाव कम करने और टकराव वाले मुद्दे समाप्त करने के लिए कूटनीतिक माध्यमों के उपयोग को देखते हुए ओमान की भूमिका का महत्व समझा जा सकता है।

भारत ओमान का महत्व समझता है और पिछले कुछ दशकों में इसने ओमान के साथ मज़बूत कूटनीतिक संबंध स्थापित किए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ओमान के साथ भारत के संबंध राजनीतिक, कूटनीतिक और वाणिज्यिक दायरों से बाहर निकलकर सामरिक स्तर के विस्तृत क्षेत्रों को छूते हैं।

जून 2014 में ओमान के विदेश मंत्री यूसुफ़ बिन अलावी अपना कार्यभार संभालने के बाद प्रधानमंत्री से मिलने वाले पहले विदेशी पदाधिकारी थे। तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने फरवरी 2015 में ओमान की यात्रा की थी और उसके बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर मई 2016 में मस्कट गए थे।

फ़रवरी 2018 में प्रधानमंत्री मोदी द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए ओमान गए थे और सुल्तान क़बूस से मुलाक़ात की थी। दोनों नेताओं ने परस्पर हित के बहुत से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के बारे में विचार-विमर्श किया था। व्यापार और निवेश के माध्यम से वाणिज्यिक संबंध बेहतर करते हुए और उभरते आतंकवाद तथा चरमपंथ के परस्पर ख़तरों का सामने करने के लिए सुरक्षा संबंध मज़बूत करते हुए आगे बढ़ना बैठक के दौरान वार्ता के मुख्य विषय रहे।

भारत और ओमान समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में एक साथ काम करने के लिए तैयार हुए और साथ ही दोनों पक्षों ने रक्षा क्षेत्र से जुड़े सहमति पत्र पर भी हस्ताक्षर किए ताकि भारतीय नौसेना हिन्द महासागर में गश्त के लिए सामरिक महत्व के दुकम पत्तन के हिस्सों का इस्तेमाल कर सकें।

दोनों देशों के गहराते द्विपक्षीय संबंधों के बीच विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने इस सप्ताह ओमान की यात्रा की थी। इस यात्रा के दौरान अन्य नेताओं के अतिरिक्त उन्होंने अपने समकक्ष, ओमान के विदेश मंत्री यूसुफ़ बिन अलावी से मुलाक़ात की और परस्पर हितों के महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श किया। दोनों पक्षों ने समुद्री परिवहन में सहयोग के क्षेत्र से जुड़े एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए। भारत के विदेश मंत्री ने मस्कट में भारतीय समुदाय को भी संबोधित किया।

लगभग सात लाख अस्सी हज़ार भारतीय ओमान में रहते हैं और सबसे बड़े विदेशी समुदाय के रूप में देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते रहे हैं। भारत ओमान का एक महत्वपूर्ण वाणिज्यिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2018-2019 में पाँच अरब अमरीकी डॉलर तक पहुँचा। भारत ओमान से ऊर्जा और उर्वरक मंगाने वाले सबसे बड़े आयातक देशों में से एक है।

भारत खाड़ी क्षेत्र में ओमान को एक महत्वपूर्ण सामरिक साझेदार मानता है और भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यात्रा से भारत को ओमान के राजनीतिक नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर गहरे विचार-विमर्श करने का अवसर मिला जिससे क्षेत्र में ओमान के साथ भारत की सक्रियता बढ़ाने में मदद मिली। उच्च स्तरीय यात्राओं से भारत की कूटनीतिक और राजनीतिक पहुँच का विस्तार हुआ और ये भारत की विस्तारित पड़ौत नीति के अंतर्गत ओमान के साथ संबंध प्रगाढ़ करने के लक्ष्य के अनुरूप है।

भारत के विदेश मंत्री की यात्रा से भारत द्वारा ओमान को दिए जाने वाले महत्व तथा खाड़ी क्षेत्र के साथ भारत की बढ़ती राजनीतिक और कूटनीतिक सक्रियता उजागर होती है।


आलेख- पश्चिम एशिया के सामरिक मामलों के विश्लेषक डॉ. मो. मुद्दस्सर क़मर

अनुवाद- नीलम मलकानिया

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