जुगनाथ के दौरे से भारत-मॉरीशस के सम्बन्धों में मजबूती

मॉरीशस में प्रधानमंत्री पद के लिए फिर से चुने गए प्रवीण जुगनाथ के पिछले हफ्ते भारत आने के फैसले ने दोनों देशों के द्विपक्षीय और सांस्कृतिक संबंधों के महत्व को रेखांकित किया। मॉरीशस की 13 लाख आबादी में से तकरीबन दो तिहाई भारतीय मूल की, इससे हिंद महासागर के इस कथित 'वैनिला द्वीप' और भारत का सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विकासात्मक मामलों में एक-दूसरे की ओर झुकाव स्वाभाविक है। 

हालांकि, प्रधानमंत्री जुगनाथ की इस यात्रा को निजी बताया गया था लेकिन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हैदराबाद हाउस में उनकी मेजबानी की, जो उच्च गणमान्य व्यक्तियों के लिए आधिकारिक बैठक स्थल था। बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने संबंधों को गहरा करने की अपनी इच्छा के बारे में एक-दूसरे को आश्वस्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री को को आश्वस्त किया कि भारत अधिक सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध मॉरीशस की आकांक्षा रखता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मॉरीशस की सरकार और लोग मॉरीशस को एक सशक्त राष्ट्र बनाने की भारत की आकांक्षाओं का अनुभव कर सकते हैं। प्रधानमंत्री जुगनाथ ने द्वीपीय राष्ट्र में अपनी तरह का पहली मेट्रो एक्सप्रेस परियोजना, विशिष्ट ईएनटी अस्पताल, सामाजिक आवास परियोजना जैसी कई विकास और सहयोग परियोजनाओं में भारत के समर्थन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। इन परियोजनाओं ने मॉरीशस के लोगों के जीवन में बदलाव की भूमिका अदा की है। समय के साथ भारत ने हिंद महासागर में स्थित देश मॉरीशस के साथ अपने आर्थिक और राजनीतिक संबंधों को सावधानीपूर्वक पोषित किया है। मॉरीशस के लोग भी भारत के साथ मजबूत संबंधों के पक्षधर रहे हैं। 

प्रधानमंत्री जुगनाथ ने भारतीय प्रधानमंत्री से कहा कि मॉरीशस के सर्वांगीण विकास की रफ्तार को तेज करना और भारत के साथ सहयोग का दायरा बढ़ाना उनकी नई सरकार की प्राथमिकताएं होंगी। उन्हें उम्मीद है कि भारत इस प्रयास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। श्री जुगनाथ की चुनावी जीत के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने टेलीफोन पर उन्हें बधाई दी थी और शेघरा भारत आने का निमंत्रण दिया था। आमंत्रण के जवाब में प्रधानमंत्री जुगनाथ ने अपनी पार्टी मिलिटेंट सोशलिस्ट मूवमेंट के संसद में बहुमत हासिल करने के मात्र एक माह के भीतर ही अपनी पत्नी सहित भारत का दौरा किया।

प्रधानमंत्री प्रवीण जुगनाथ मॉरीशस के पूर्व प्रधानमंत्री अनिरुद्ध जुगनाथ के पुत्र हैं। श्री प्रवीण जुगनाथ ने अपने देश के नागरिकों के हितों को बढ़ावा देने की अपने पिता की विरासत को बनाए रखा है। गौरतलब है कि मॉरीशस में ज़्यादातर लोग भारतीय मूल के हैं जिन्हें लगभग दो शताब्दी पहले ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन गन्ने की खेती में मदद के लिए भारत से मॉरीशस ले जाया गया था। आज वही भारतीय मूल के वंशज रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इस द्वीपीय देश के गौरवशाली नागरिक हैं, जिसके साथ सभी बड़ी ताकतें मजबूत संबंध रखना चाहती हैं। मॉरीशस के लोगों ने हमेशा भारत के साथ मजबूत संबंध बनाए रखने को प्राथमिकता दी है।

यूरोपीय खोजकर्ताओं ने मॉरीशस को हिंद महासागर का सितारा और चाभी कहा था। यूरोप के लोगों ने भारत और यूरोप के बीच समुद्री संचार को सुरक्षित करने के लिए इसे महत्वपूर्ण माना था। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में पोर्ट लुइस की यात्रा के दौरान, पहली बार हिंद महासागर में सभी के लिए सुरक्षा और विकास पर अपनी रणनीति SAGAR की बात की थी।

मॉरीशस, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का शीर्ष स्रोत है और इसलिए यह भारत की अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अफ्रीकी संघ, हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) और हिन्द महासागर आयोग (IOC) के एक सदस्य के रूप में, मॉरीशस अफ्रीकी महाद्वीप और हिंद महासागर रिम के देशों में भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। 

कुल मिलकर कह सटे हैं कि दोनों राष्ट्र एक-दूसरे के आर्थिक और सुरक्षा हितों को आगे बढ़ाने में अपनी-अपनी भूमिकाएँ अदा कर सकते हैं। इन्हीं मुद्दों पर विचार करते हुए, मॉरीशस और भारत के प्रधानमंत्री ने पारस्परिक हितों और प्राथमिकता पर आधारित बहुस्तरीय द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती लाने, नए क्षेत्रों में रिश्तों की तलाश करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।

प्रधानमंत्री प्रविन्द जुगनाथ की भारत यात्रा दोनों राष्ट्रों के बीच रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने में मील का पत्थर साबित होगी क्योंकि दोनों देशों की जनता के परस्परिक रिश्ते सभ्यता के धागे से जुड़े हुए हैं। 

आलेख- प्रो॰ रंजीत कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

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