अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए भारत ढांचागत योजनाओं में सौ लाख करोंड़ से अधिक निवेश करेगा
अर्थव्यवस्था के रियल क्षेत्रों के बड़े व्यवसायियों और उद्योगपतियों यानि हितधारकों के बीच एक अनूठी साझी पहल करते हुए भारत सरकार केंद्र, राज्यों और निजी क्षेत्र सबको साथ लेकर एक बहुत बड़ी बुनियादी ढांचागत निवेश योजना लेकर आयी है। केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारामन ने कहा कि सरकार का इरादा 2024-25 तक केंद्र, राज्यों और निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय के साथ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में 102 लाख करोड़ रुपये से अधिक का राशि निवेश करने का है और इसमे केंद्र और राज्य, दोनों की परियोजनाओं की हिस्सेदारी 39-39 फीसदी है जबकि निजी क्षेत्र की परियोजनाओं की हिस्सेदारी 22 फीसदी है उन्होंने कहा यह प्रशंसनीय है कि इन परियोजनाओं के अलावा केंद्र और राज्य सरकारों ने पिछले छह सालों में बुनियादी ढांचा संरचना विकास पर 51 लाख करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
ऐसे समय में जब घरेलू अर्थव्यवस्था कमजोर मांग के दौर से गुजर रही है, सरकारी उपभोग व्यय और निर्यात के दूसरे तरीकों के अलावा ये तरीका सरकारी निवेश के जरिए मांग बढ़ाने में एक यंत्र यानि लीवर की तरह काम करता है जो एक समीचीन तरीका है। इस विचार के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि सरकार और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) के पूंजीगत व्यय यानि 'कैपेक्स' में सोच समझ कर उछाल लाना, एक तरह से राज्यों और निजी क्षेत्रों की क्षमता के आधार पर उनकी आनुपातिक वृद्धि के पूरक हैं साथ ही यह विकास के लिए धीमी गति के क्रम में विस्तार और " मांग" को बढ़ाने और पर्याप्त निवेश को बढानें में मददगार होगा। वास्तव में, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की हालिया रिपोर्ट 2019 के अनुच्छेद संख्या- 4, भारतीय प्राधिकारियों के साथ परामर्श में सही कहा गया है कि सरकारी योजनाओं को बुनियादी ढाँचे के अनुरूप बनाने के लिए जोर दिया जाना चाहिए। हवाई अड्डों, सड़कों, दूरसंचार और बिजली उत्पादन जैसी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश के माध्यम से अर्थव्यवस्था में पूर्ति में तेजी लाने के लिए भारत के हालिया प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
इस बात पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है कि पिछले स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2024-25 तक पचास खरब डॉलर की घरेलू अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे में 100 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की थी। इसलिए, आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यबल टास्क फोर्स का गठन करके प्रधानमंत्री की इस योजना को लागू करने में अधिकारियों ने बहुत कम समय लिया। तदनुसार, 18 राज्यों में 102 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की पहचान नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) के रूप में की गई है। कुछ ही सप्ताह में इसमें तीन लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं और जुड़ जाएंगी। इस तथ्य के बावजूद कि कुछ राज्यों को अपनी योजनाओं के कामकाज़ को आगे बढ़ाना था, श्रीमती सीतारामन ने कहा कि किसी भी राज्य को इस योजना से बाहर करने का सरकार का विचार नहीं है। अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए एनआईपी एक नीति स्तंभ के रूप में इस तथ्य के आधार पर काम करता है कि ठीक तरह से विकसित बुनियादी ढांचा, उत्पादक क्षेत्रों में केंद्रित व्यय की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के अलावा, सरकार के राजस्व ढांचे में सुधार करके अतिरिक्त वित्तीय क्षेत्रों को बढ़ावा देता है। एनआईपी, और अधिक संख्या में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सक्षम बनाने, व्यवसायों को विकसित करने, रोजगार सृजित करने, जीवनयापन में सुगमता लाने और सभी के लिए बुनियादी ढांचे में समान पहुंच का विस्तार करने के लिए तैयार किया गया है ताकि एक समावेशी विकास कार्यक्रम से असमानताओं के दुष्परिणामों को कम से कम किया जा सके।
दिए गये विवरण से पता चलता है कि दोनों सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर अलग-अलग प्रत्येक पर 7.7 लाख करोड़ रुपये निवेश किये जायेंगे। औद्योगिक बुनियादी ढांचे पर 3.07 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कृषि और सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए बाकी का हिसाब होगा। सड़क परियोजनाओं पर 19.63 लाख करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे जबकि 13.68 लाख करोड़ रुपये रेलवे परियोजनाओं के लिए होंगें। बंदरगाह विकास परियोजनाओं में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और हवाईअड्डा परियोजनाओं पर 1.43 लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी। शहरी अवसंरचना पर 16.29 लाख करोड़ रुपये और दूरसंचार परियोजनाओं, एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय गैस ग्रिड और प्रधान मंत्री आवास योजना-पीएमएवाई-जी के लिये 3.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
यह बात संतुष्टि प्रदान करती है कि बुनियादी ढांचा टास्क फोर्स के तहत विभिन्न कार्य समूहों द्वारा एनआईपी के सराहनीय उद्देश्य की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए सुधार सुझाव पुरजोर तरीके से उठाए जाएंगे। इसमें सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) आधारित अनुबंधों को सुधारना, अनुबंधों को लागू करना और विवाद समाधान प्रक्रिया शामिल किया जाएगा। श्रीमती सीतारामन ने फिर से आश्वस्त करते हुए कहा कि एनआईपी की गति निर्बाध रूप से चलायमान रखने के लिए "एक मजबूत निगरानी तंत्र भी स्थापित किया जाएगा" क्योंकि इस वर्ष मध्याअवधि योजना के रूप में इसमें आर्थिक सुस्ती छायी है।
आलेख:- जी. श्रीनिवासन, वरिष्ठ पत्रकार
अनुवाद एवं स्वर- वीरेन्द्र कौशिक
ऐसे समय में जब घरेलू अर्थव्यवस्था कमजोर मांग के दौर से गुजर रही है, सरकारी उपभोग व्यय और निर्यात के दूसरे तरीकों के अलावा ये तरीका सरकारी निवेश के जरिए मांग बढ़ाने में एक यंत्र यानि लीवर की तरह काम करता है जो एक समीचीन तरीका है। इस विचार के पीछे यह तर्क दिया जाता है कि सरकार और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSUs) के पूंजीगत व्यय यानि 'कैपेक्स' में सोच समझ कर उछाल लाना, एक तरह से राज्यों और निजी क्षेत्रों की क्षमता के आधार पर उनकी आनुपातिक वृद्धि के पूरक हैं साथ ही यह विकास के लिए धीमी गति के क्रम में विस्तार और " मांग" को बढ़ाने और पर्याप्त निवेश को बढानें में मददगार होगा। वास्तव में, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की हालिया रिपोर्ट 2019 के अनुच्छेद संख्या- 4, भारतीय प्राधिकारियों के साथ परामर्श में सही कहा गया है कि सरकारी योजनाओं को बुनियादी ढाँचे के अनुरूप बनाने के लिए जोर दिया जाना चाहिए। हवाई अड्डों, सड़कों, दूरसंचार और बिजली उत्पादन जैसी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश के माध्यम से अर्थव्यवस्था में पूर्ति में तेजी लाने के लिए भारत के हालिया प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
इस बात पर ध्यान दिया जाना आवश्यक है कि पिछले स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2024-25 तक पचास खरब डॉलर की घरेलू अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे में 100 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की थी। इसलिए, आर्थिक मामलों के सचिव अतनु चक्रवर्ती की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यबल टास्क फोर्स का गठन करके प्रधानमंत्री की इस योजना को लागू करने में अधिकारियों ने बहुत कम समय लिया। तदनुसार, 18 राज्यों में 102 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं की पहचान नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) के रूप में की गई है। कुछ ही सप्ताह में इसमें तीन लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं और जुड़ जाएंगी। इस तथ्य के बावजूद कि कुछ राज्यों को अपनी योजनाओं के कामकाज़ को आगे बढ़ाना था, श्रीमती सीतारामन ने कहा कि किसी भी राज्य को इस योजना से बाहर करने का सरकार का विचार नहीं है। अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए एनआईपी एक नीति स्तंभ के रूप में इस तथ्य के आधार पर काम करता है कि ठीक तरह से विकसित बुनियादी ढांचा, उत्पादक क्षेत्रों में केंद्रित व्यय की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के अलावा, सरकार के राजस्व ढांचे में सुधार करके अतिरिक्त वित्तीय क्षेत्रों को बढ़ावा देता है। एनआईपी, और अधिक संख्या में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सक्षम बनाने, व्यवसायों को विकसित करने, रोजगार सृजित करने, जीवनयापन में सुगमता लाने और सभी के लिए बुनियादी ढांचे में समान पहुंच का विस्तार करने के लिए तैयार किया गया है ताकि एक समावेशी विकास कार्यक्रम से असमानताओं के दुष्परिणामों को कम से कम किया जा सके।
दिए गये विवरण से पता चलता है कि दोनों सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर अलग-अलग प्रत्येक पर 7.7 लाख करोड़ रुपये निवेश किये जायेंगे। औद्योगिक बुनियादी ढांचे पर 3.07 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कृषि और सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए बाकी का हिसाब होगा। सड़क परियोजनाओं पर 19.63 लाख करोड़ रुपये निवेश किए जाएंगे जबकि 13.68 लाख करोड़ रुपये रेलवे परियोजनाओं के लिए होंगें। बंदरगाह विकास परियोजनाओं में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा और हवाईअड्डा परियोजनाओं पर 1.43 लाख करोड़ रुपये की लागत आएगी। शहरी अवसंरचना पर 16.29 लाख करोड़ रुपये और दूरसंचार परियोजनाओं, एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय गैस ग्रिड और प्रधान मंत्री आवास योजना-पीएमएवाई-जी के लिये 3.2 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।
यह बात संतुष्टि प्रदान करती है कि बुनियादी ढांचा टास्क फोर्स के तहत विभिन्न कार्य समूहों द्वारा एनआईपी के सराहनीय उद्देश्य की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए सुधार सुझाव पुरजोर तरीके से उठाए जाएंगे। इसमें सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) आधारित अनुबंधों को सुधारना, अनुबंधों को लागू करना और विवाद समाधान प्रक्रिया शामिल किया जाएगा। श्रीमती सीतारामन ने फिर से आश्वस्त करते हुए कहा कि एनआईपी की गति निर्बाध रूप से चलायमान रखने के लिए "एक मजबूत निगरानी तंत्र भी स्थापित किया जाएगा" क्योंकि इस वर्ष मध्याअवधि योजना के रूप में इसमें आर्थिक सुस्ती छायी है।
अनुवाद एवं स्वर- वीरेन्द्र कौशिक
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