श्रीलंका के विदेश मंत्री की पहली भारत यात्रा

विदेश मामलों, कौशल विकास, रोज़गार तथा श्रम मामलों के श्रीलंकाई मंत्री, गुनावरदने ने अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा की | इस यात्रा पर उनके साथ एक चार सदस्यों वाला उच्च स्तरीय शिष्टमंडल था | यह यात्रा नवंबर 2019 में श्रीलंका के राष्ट्रपति, गोठभय राजपक्षे की हाल की भारत यात्रा के बाद हुई है | इस यात्रा के दौरान, श्री गुनावरदने ने अपने समकक्षों, विदेश मंत्री, डॉ॰ एस॰ जयशंकर, कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्री, श्री महेंद्र नाथ पाण्डेय तथा भारत के श्रम तथा रोज़गार मंत्री, श्री संतोष कुमार गंगवार के साथ उच्च स्तरीय वार्ता की | श्रीलंका के विदेश मंत्री ने भारतीय वाणिज्य तथा उद्योग मण्डल (फिक्की) के सदस्यों को भी संबोधित किया | उन्होंने दिल्ली स्थित एक जनहित अनुसंधान तथा हिमायत संगठन, विज्ञान तथा पर्यावरण केंद्र और महाबोधि सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के नई दिल्ली केंद्र का दौरा किया |

भारत के विदेश मंत्री, डॉ॰ एस॰ जयशंकर द्वारा आयोजित शिष्टमंडल स्तर की वार्ता के दौरान, दोनों मंत्रियों ने निवेश, सुरक्षा, मछली पालन, विकास सहायता तथा चल रही परियोजनाओं, पर्यटन, शिक्षा तथा सांस्कृतिक सहयोग और भारत तथा श्रीलंका के बीच निकटतम तथा मित्रवत सम्बन्धों को और सशक्त करने के तलाशे गए तरीक़ों समेत द्विपक्षीय सम्बन्धों पर विस्तार से चर्चाएं कीं | श्रीलंका के विदेश मंत्री ने कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण तथा क्षमता वर्धन पर बल देते हुए भारत के साथ सहयोग के नए क्षेत्रों को तलाशने पर राष्ट्रपति, राजपक्षे की पहली भारत यात्रा के दौरान के महत्व को संक्षेप में दोहराया और भारत के समर्थन का अनुरोध किया | डॉ॰ एस॰ जयशंकर ने श्रीलंका की आवश्यकताओं पर आधारित तथा इन क्षेत्रों में इसके संस्थानों की स्वीकृत शक्ति के आधार पर इस प्रकार की पहलों के प्रति भारत के पूर्ण समर्थन को लेकर आश्वस्त किया | दोनों पक्ष इन क्षेत्रों में सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर करने पर विचार कर रहे हैं | दोनों मंत्रियों ने जलवायु परिवर्तन तथा आतंक से मुक़ाबला समेत आपसी हितों के क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर अपने विचारो का आदान-प्रदान भी किया |

डॉ॰ जयशंकर ने श्रीलंका की हिरासत में लिए गए 15 भारतीय मछुआरों तथा 52 नौकाओं को मुक्त करने पर राष्ट्रपति, गोठभय राजपक्षे की घोषणा की प्रगति का जायज़ा लिया | श्रीलंकाई पक्ष ने बताया कि इस मामले में प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है | मीडिया की ख़बरों से पता चलता है कि भारत में रह रहे श्रीलंका के शरणार्थियों की वापसी पर चर्चाएं हुईं हैं |

श्रीलंका वापस लौटने पर, मंत्री गुनावरदने ने मीडिया को बताया कि अपने घर लौटने को इच्छुक लगभग 3000 श्रीलंका के शरणार्थियों को उनके ज़िला सचिवालयों के माध्यम से आवश्यक सुविधा प्रदान करने और औपचारिक रूप से उन्हें सुपुर्द करने संबंधी व्यवस्था की जा रही है | फरवरी महीने में पहला जत्था आ सकता है | श्रीलंका के मंत्री ने कहा कि लौटने वालों की पहचान संबंधी जांच पूरी हो जाने पर, उनके मूल स्थान पर उन्हें दोबारा बसाने के लिए इस द्वीप राष्ट्र के उत्तर तथा पूर्व में राज्य की एजेंसियों के साथ मिलकर व्यवस्थाएं की जाएंगी | इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए कि वर्षों से भारत में रह रहे श्रीलंका के शरणार्थियों की वापसी पर दोनों देश चर्चा कर रहे हैं | अभी तक, श्रीलंका लौटने के लिए स्वयं प्रयास करने वाले सभी शरणार्थियों के लिए यूएनएचआरसी ने व्यवस्था की है | शरणार्थियों को दोबारा बसाने के लिए श्रीलंका की सरकार की ओर से दी जाने वाली सहायता तथा सुविधाओं की अनुपस्थिति में बहुत से शरणार्थियों ने वापस लौटने से इंकार किया है | इस संदर्भ में, श्री गुनावरदने का मीडिया को दिया गया वक्तव्य एक स्वागत योग्य विकास है |

मित्र देश के रूप में भारत तथा श्रीलंका सुरक्षा, पर्यटन, संस्कृति, शिक्षा, कौशल विकास, क्षमता वर्धन तथा मूलभूत संरचना विकास के क्षेत्र में पहले से ही सशक्त संबंध रखते हैं | इसके बावजूद, मछली पालन तथा श्रीलंका में भारत द्वारा वित्त पोषित विकास परियोजनाओं के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच कुछ चिंताएँ तथा मुद्दे हैं | हालांकि, बहुत पहले ही इन मुद्दों की पहचान की जा चुकी हैं और द्विपक्षीय सम्बन्धों में बाधा की वजह ये मुद्दे हैं | ऐसा माना जा रहा है कि दिनेश गुनावरदने की यात्रा समेत नवंबर 2019 में हुए राष्ट्रपति चुनावों के बाद दोनों देशों के बीच उच्च स्तर के विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू हुई, जो न केवल द्विपक्षीय सम्बन्धों को सशक्त बनाएगी, बल्कि मौजूदा मुद्दों की चिंताओं को संबोधित करने के लिए एक प्रभावी और सुस्थिर समाधान तलाशने में सुविधा भी पहुंचाएगी |

आलेख – गुलबिन सुलताना, शोध विश्लेषक, आई॰ डी॰ एस॰ ए॰

अनुवादक/ वाचक – मनोज कुमार चौधरी

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