चीन-पाकिस्तान की साँठ-गांठ फिर से उजागर

कश्मीर मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन ने “अनौपचारिक परामर्श” की मांग की| चीन के इस क़दम से उसके लिए प्रतिकूल स्थिति उत्पन्न हुई | इसमें पाकिस्तान का समर्थन था | बहरहाल, सुरक्षा परिषद के अधिकतर सदस्यों ने इस क़दम को ख़ारिज़ कर दिया है | भारत के संविधान से अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के मुद्दे को उठाने संबंधी चीन का यह तीसरा प्रयास था | भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इन प्रयासों से पेइचिंग को “समुचित सबक” लेना चाहिए | यूएनएससी के अधिकतर सदस्यों का मानना है कि यह एक द्विपक्षीय मुद्दा है |

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि,सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि “ देश को प्रभावित करने वाली परेशानी से दुनिया का ध्यान हटाने के लिए झूठे बहाने बनाने की पाकिस्तान की आदत से सभी परिचित हो चुके हैं | राजनय का अर्थ अनावश्यक सहायता प्राप्त करने की गुहार लगाना नहीं है | इसके लिए कठिन और उचित क़दम उठाने की आवश्यकता है | यह क़दम छोटा भी हो सकता है | श्री अकबरुद्दीन ने कहा कि यह क़दम वहाँ होना चाहिए, जहां हम 5 अगस्त को थे |”वास्तव में, सुरक्षा परिषद के मुख्य स्थायी सदस्यों, अमरीका, यू॰के॰, फ्रांस तथा रूस ने भारत के इस क़दम का पक्ष लिया है | चार स्थायी सदस्यों ने इसे “भारत का आंतरिक मुद्दा” कहा है” |

श्री अकबरुद्दीन ने कहा कि राजनय को मार्ग की बाधा हटाने की आवश्यकता होती है,जिसे पाकिस्तान ने पाँच महीने से बाधित कर रखा है | इस्लामाबाद का पहला क़दम उस मार्ग पर आगे बढ़ने का हो सकता है और इसके बाद उसे राजनय में गंभीरता प्रदर्शित करनी चाहिए |

पाकिस्तान के “सर्वकालिक मित्र” चीन ने सुरक्षा परिषद में बंद कक्ष के परामर्श के दौरान अन्य मामलों में कश्मीर का मुद्दा उठाने के लिए फिर से नए सिरे से प्रयास किया | “पाँच स्थायी सदस्यों में से एक ने कश्मीर मुद्दे पर एक बहस को आगे बढ़ाने के लिए अपनी उपस्थिती का प्रयोग किया |जबकि अन्य स्थायी सदस्यों की प्रतिक्रिया पूरी तरह से अलग थी | संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि इस मुद्दे पर ध्यान देने वाले किसी के भी लिए वैश्विक सहमति अब स्पष्ट है |”

इस प्रकार के हस्तक्षेपों से चीन अभी तक इस मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने के लिए तीन प्रयास कर चुका है | संयुक्त राष्ट्र में भारत के शीर्ष राजनयिक ने कहा कि सुरक्षा परिषद के नए सदस्यों के समक्ष पेइचिंग द्वारा किया गया एक और प्रयास सिर्फ़ अपना भाग्य आज़माने भर का हो सकता है | सुरक्षा परिषद एक ऐसा निकाय है, जिसमें पाँच सदस्य होते हैं और ये हर वर्ष बदलते हैं | गत वर्ष, पाँच सदस्य थे, जो इस वर्ष से भिन्न थे | पेइचिंग ने सोचा कि परिवर्तित संयोजन के कारण यूएनएससी के नए सदस्य अपने दृष्टिकोण में अलग होंगे | लेकिन, चीन-पाकिस्तान की यह कोशिश भी बेकार साबित हुई | बंद दरवाज़े के नवीनतम अनौपचारिक परामर्श का यह परिणाम दिखाता है कि पूरी दुनिया कश्मीर मुद्दे को एक ऐसा मुद्दा मानती है,जिसे भारत तथा पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय स्तर पर संबोधित किया जाना चाहिए | श्री अकबरुद्दीन ने कहा कि “पेइचिंग तथा इस्लामाबाद को अब यह समझ लेना चाहिए कि संयुक्त राष्ट्र का हर सदस्य अब क्या स्पष्ट संदेश दे रहा है |” राज्य की एक नीति के रूप में आतंक का इस्तेमाल करने के मुद्दे पर भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान की आलोचना की |श्री अकबरुद्दीन ने कहा कि “कोई भी सामान्य राज्य ऐसा नहीं करता है | हम सामान्य रूप से बातचीत करने को तैयार हैं |”

अनुच्छेद 370 के हटाये जाने के बाद से,पाकिस्तान हर अवसर पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश करता रहा है | इस्लामाबाद को इस रणनीति से किसी प्रकार का लाभ नहीं हुआ है |अपनी सरकार के कु-प्रशासन से ध्यान हटाने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान भारत के आंतरिक कार्यवाहियों को मुद्दा बनाने की कोशिश करते रहे हैं | यह वास्तव में एक पाखंड है |

पाकिस्तान आर्थिक समस्याओं तथा यहाँ तक कि आंतरिक उथल-पुथल का सामना कर रहा है, लेकिन इन मुद्दों को दबाने के लिए प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान ने प्रत्येक पाकिस्तानी राजनीतिज्ञ को भारत-विरोधी बयानबाज़ी करने के लिए प्रेरित किया | क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बने श्री ख़ान को यह समझना चाहिए कि इस प्रकार की चालाकियाँ लोगों की शिकायतों को संबोधित करने में कभी कारगर साबित नहीं हो सकती हैं | सभी दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में पाकिस्तान में सबसे कम मानव विकास सूचकांक(एचडीआई) है | इस देश में 65 मिलियन लोग “अत्यधिक निर्धन” हैं |पाकिस्तानी महिलाओं की एक बड़ी संख्या निर्धनता और जीवनपर्यंत अवसरों की कमी से जूझती रहती है | 

अब समय आ गया है जब इमरान ख़ान भारत को लेकर बातें करना बंद करें और पाकिस्तान को “रियासत-ए-मदीना” अर्थात कल्याणकारी राज्य बनाने संबंधी अपने विचारों को ठोस आकार दें, जिसका उन्होंने पाकिस्तानी आवाम को वचन दिया था |

आलेख – कौशिक रॉय, समाचार विश्लेषक

अनुवादक/वाचक – मनोज कुमार चौधरी

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