म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन 2020: मुख्य बिन्दु

56 वां म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन पिछले सप्ताह जर्मनी के म्यूनिख में हुआ। सम्मेलन में मुख्य रूप से "पश्चिमहीनता" की अवधारणा पर ध्यान केंद्रित किया गया जो पश्चिम के मतभेदों और अनिश्चितताओं के कारण उनके मूल्यों और रणनीतिक झुकावों में उभर कर आयी है। नाटो महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग ने सम्मेलन में संबोधन के दौरान कहा कि अमरीका अपने सहयोगियों और वैश्विक चिंताओं की अनदेखी कर रहा था। यूरोपीय भावनाओं को आश्वस्त करने की मांग करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि ट्रान्साटलांटिक गठबंधन खत्म होने को आवश्यकता से अधिक महत्व दिया गया। उनकी माने तो पश्चिम "जीत रहा था" और वास्तव में एक साथ जीत रहा था।

उन्होंने कहा कि अमरीका यूरोप की सीमाओं की रक्षा करने में नाटो के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और साथ ही इस्लामिक स्टेट को हराने के लिए बहुराष्ट्रीय प्रयासों का नेतृत्व कर रहा है। उनके कथनों को जर्मन राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर की प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा गया जिन्होंने कहा था कि अमेरिका ने "यहां तक कि एक अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विचार" को खारिज कर दिया था और वो "पड़ोसियों और भागीदारों के बल पर कार्य कर रहा था। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी पश्चिम के कमजोर पड़ने' की चेतावनी दी।

नाटो का समर्थन करते हुए, राष्ट्रपति मैक्रों ने रक्षा के मामलों में अमरीका के स्वतंत्र रूप से कार्य करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। सम्मेलन अध्यक्ष इस्किंगर ने श्री मैक्रों के नई सैन्य शक्ति के साथ यूरोपीय रणनीति के दृष्टिकोण का स्वागत किया। यूरोपीय संघ द्वारा यूक्रेन में की गयी कार्रवाई की वजह से रूस पर प्रतिबंधों के लगाए जाने के बावजूद फ्रांस के राष्ट्रपति ने रूस के साथ अधिक वार्ता और पुनरुत्थान की वकालत की। डोनबास में शत्रुता फिर से शुरू होने की संभावना के कारण म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के आयोजकों ने यूक्रेन को 2020 के संभावित खतरनाक क्षेत्रों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया है।

जर्मन रक्षा मंत्री एनेग्रेट क्रैम्प-कर्रेनबॉयर ने इस बात का उल्लेख किया कि पश्चिम के आदर्शों को आज चुनौती दी जा रही है। सुरक्षा बढ़ाने के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयासों के लिए अपील करते हुए उन्होने जर्मनी से अफ्रीका के साहेल क्षेत्र सहित अपने विदेशी मिशनों में अधिक सक्रिय होने का आह्वान किया। चीनी दूरसंचार कंपनी से अपने मतभेदों के कारण अमरीका और यूरोप ने लगातार पूरे सम्मेलन के दौरान अन्तर बनाए रखा। इस कंपनी को अमेरिका पेइचिंग का जासूस मानता है। अमरीकी रक्षा सचिव ने बताया कि हुवाई चीन की कुटिल रणनीति के लिए पोस्टर चाइल्ड यानि दिखाने भर का चेहरा है जिसने पश्चिमी बुनियादी ढांचे में घुसपैठ की और ब्रिटेन को चेतावनी दी कि वह 5 जी नेटवर्क के निर्माण में हुआवेई को सीमित भूमिका की अनुमति देने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करे। जर्मन विदेश मंत्री हेइको मास ने हालांकि नाटो सुधारों की आवश्यकता और यूरोप के सामान्य दृष्टिकोण का हवाला देते हुए अमेरिका और यूरोप के बीच संघर्ष के किसी भी संभावना को खारिज कर दिया।

अमरीका-यूरोप की के बीच आई दरार के बारें में एक महत्वपूर्ण बात यह महसूस की गयी कि पश्चिम ने सर्वसम्मति से दक्षिण चीन सागर में चीनी की कार्रवाई और 'सैन्यीकरण' कम कर दिया। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने यह कहकर अपने देश की कार्रवाईयो का बचाव किया कि बजाय इसके दुनिया में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए सहयोग के लिए कहे, चीन शांतिपूर्ण विकास के लिए खड़ा है और वह पश्चिमी मॉडल की नकल नहीं करेगा। ।

सम्मेलन में भाग लेने वालों ने वुहान में कोरोनावायरस के प्रकोप के प्रभाव से निपटने पर भी विचार-विमर्श किया। चीनी उप-विदेश मंत्री किन गैंग ने अपनी सरकार की बीमारी से निपटने के कामों की प्रशंसा की और दावा किया कि जहां तक चिंता की बात है वो ये कि अब तक सामने आए मामलों में से केवल 1% चीन की सीमाओं के बाहर के हैं।

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन 2020 के दौरान अमरीका के सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने संकेत दिया कि लोकतंत्र को बनाये रखने का सबसे अच्छा तरीका कश्मीर मुद्दे का लोकतांत्रिक तरीके से निपटारा किया जाना होगा। इसके जवाब में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने अमेरिकी सीनेटर को अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र इतना सक्षम है कि इस मुद्दे को अपने दम पर सुलझा सकता है। म्यूनिख में डॉ. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ से भी मुलाकात की और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आगामी भारत यात्रा के तौर-तरीकों पर चर्चा की। डॉ. जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन से अलग सऊदी और ओमान के विदेश मंत्रियों के साथ भी मुलाकात की।

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन 2020 महत्वपूर्ण था क्योंकि इसमें वो विरोधी विचार हमें सुनने को मिले जो विश्व नेताओं के पश्चिमी गठबंधन को लेकर थे। खतरों और मुद्दों पर विचारों और बहस के लिए म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन जैसा मंच पर समुपस्थित है हालाँकि यह याद रखना चाहिये कि आम सुरक्षा और रक्षा समस्याओं पर आपसी विचारों को साझा करने के लिए यह अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए और बेहतर साबित हो सकता है ताकि संयुक्त रूप से उनसे निपटा जा सके और दुनिया को भय रहित और सुरक्षित स्थान बनाया जा सके।

आलेख:- डॉ. संघमित्रा सरमा, यूरोपीय मामलों के रणनीतिक विश्लेषक

अनुवाद एवं स्वर- वीरेन्द्र कौशिक

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