भारत-अफ्रीकी रक्षा मंत्रियों का सम्मेलन

भारतीय रक्षा प्रदर्शनी के संयोजन में भारत-अफ्रीका रक्षा मंत्रियों का प्रथम सम्मेलन लखनऊ में आयोजित किया गया। अफ्रीकी महाद्वीपीय देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए भारत की ओर से यह एक बड़ी पहल थी। इस आयोजन ने 50 के दशक के लंबे समय से चली आ रही रक्षा साझेदारी को ध्यान में रखते हुए अफ्रीकी महाद्वीप के लिए उपकरण बनाने के लिए नए अवसर प्रदान करने के लिए भारत को एक मंच प्रदान किया। 14 अफ्रीकी देशों के रक्षा मंत्रियों, संसद के सदस्यों, 19 रक्षा और सेवा प्रमुखों और अफ्रीकी देशों के 8 स्थायी सचिवों सहित अफ्रीका के 154 से अधिक प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया। ये सभी रक्षा और सुरक्षा में भारत-अफ्रीका सम्बंधो के लिए उच्च प्राथमिकता रखते हैं।

वर्तमान समय में शांति और सुरक्षा अफ्रीकी देशों की प्राथमिकता हैं। अफ्रीकी संघ का इस वर्ष का विषय है- "साइलेंसिंग गन्स यानि बन्दूकों की खामोशी: अफ्रीकी विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बनाना" । इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अफ्रीकी संघ का रोड मैप शांति, सुरक्षा और विकास के बीच आपसी सम्बंध की बात को मानता है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सागर- SAGAR (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के दृष्टिकोण के साथ मेल खाता है।

कई दशकों से रक्षा और सुरक्षा जुड़ाव भारत-अफ्रीकी सम्बंधों का हिस्सा रहे हैं। यह बात याद रखी जा सकती है कि अफ्रीका में औपनिवेशिक काल के बाद भारत ने घाना में वायु सेना की स्थापना करने के अलावा इथियोपिया में सैन्य अकादमी स्थापित करने, नाईजीरिया में रक्षा कॉलेज तथा नौसेना युद्ध कॉलेज और कई अफ्रीकी देशों में सैन्य कर्मियों को प्रशिक्षित करने में सहायता की थी। संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से भारत ने अफ्रीकी महाद्वीप में शांति में योगदान देता रहा है।

सम्मेलन के दौरान अफ्रीकी राष्ट्रों ने रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भारत द्वारा किए गए कामों को स्वीकार किया और बढ़ती चुनौतियों के बीच भारत के साथ व्यापक रक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाइ में सम्बंध बढाने का आग्रह किया। लोगों की आजीविका के लिए महासागरों और समुद्रों के महत्व को पहचानते हुए इस सम्मेलन में समुद्री डोमेन में सहयोग बढ़ाने की मांग की गई। भारत ने अपनी मजबूत भारत-अफ्रीका विकास साझेदारी के माध्यम से अफ्रीकी देशों को रक्षा उपकरण और आपूर्ति उपलब्ध कराने का भी वादा किया है। भारत-अफ्रीकी सम्बंधो को बढ़ाने के लिए इस प्रयास को रक्षा सहयोग के लिए प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण और उनके 10 मार्गदर्शक सिद्धांतों के अनुरूप और बल दिया जाएगा।

हॉर्न ऑफ अफ्रीका,उत्तरी अफ्रीका,पश्चिम अफ्रीका,साहेल और ग्रेट लेक्स क्षेत्र के कुछ हिस्सों में संघर्ष जारी है। उस महाद्वीप में इस्लामिक स्टेट ऑफ़ इराक एंड सीरिया (ISIS) और जमात नुसरत अल-इस्लाम वाल मुस्लीमीन (JNIM) सहित बड़ी संख्या में आतंकवादी सगंठन हैं। इसके अलावा समुद्री युद्ध,समुद्री डकैती,सशस्त्र डकैती, गैरकानूनी तरीके से बिना लाइसेंस अनियमित मछली पकड़ने की समस्या,तस्करी,मानव और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी चुनौतियों ने भी लंबे समय से अफ्रीका में हिंद महासागर के तटवर्ती देशों को परेशान कर रखा है।

अफ्रीकी संघ ने क्षेत्र में बढ़ती समुद्री असुरक्षा से निपटने के लिए एक पैन-अफ्रीकी समुद्री रणनीति अपनाई है जो 2050 अफ्रीका की एकीकृत समुद्री रणनीति के रूप में जानी जाती है। पारंपरिक समुद्री चुनौतियों को कम करने के साथ-साथ अफ्रीकी ’नीली’ अर्थव्यवस्था के सतत विकास के लिए यह रणनीति अद्वितीय है।

उल्लेखनीय रूप से, विविध महाद्वीपों के साथ भारत की बढ़ती व्यस्तता अफ्रीका के अन्य बाहरी भागीदारों के हितों में असमानता देखने को मिलती है। अफ्रीका के साथ भारत की भागीदारी पूरी तरह से समावेशी है और अफ्रीकी प्राथमिकताओं पर आधारित है। गौरतलब है कि इस सम्मेलन में भारत की गैर-शोषक दृष्टिकोण आधारित सम्बंधो के लिए काफी सराहना की गयी है। हाल ही में, भारत के एक पड़ोसी देश को जिबूती के दोरालेह पोर्ट को अपने अधिकार में लेने के लिए उसकी ऋण-जाल कूटनीति के कारण कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा है।

अफ्रीका में हिंद महासागर के समुद्री देशों के साथ भारत का मजबूत समुद्री सुरक्षा सहयोग है। भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अफ्रीकी देशों के अनुरोध पर समुद्री डकैती रोधी गश्त, निगरानी और मानवीय तथा आपदा राहत कार्यों के लिए अपनी नौसेना तैनात की है। आतंकवाद और समुद्री डकैती की आम चुनौतियों के मद्देनजर भारत और अफ्रीका के बीच सैन्य सम्बंधों का विस्तार हो रहा है क्योंकि भारत, अफ्रीका में एक शुद्ध सुरक्षा प्रदाता के रूप में उभरना चाहता है। इस उद्देश्य के साथ भारत अफ्रीकी देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

सम्मेलन में, विचारों के आदान प्रदान के सत्रों के दौरान आपसी चिंताओं और प्राथमिकताओं के प्रति अधिक समझ पैदा हुई। आशा है कि आने वाले दिनों में भारत-अफ्रीका विकास साझेदारी को सार्थक रूप से बढ़ाया जाएगा। अफ्रीका के साथ भारत की साझेदारी पारदर्शी है क्योंकि यह समानता के सिद्धांत पर बनी है।

आलेख: उत्तम कुमार विश्वास, रक्षा विश्लेषक

अनुवाद एवं स्वर- वीरेन्द्र कौशिक

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