भारत-पुर्तगाल सम्बंधों में नया अध्याय
पुर्तगाल के राष्ट्रपति, श्री मार्सेलो रेबेलो डी सूजा ने भारत की सफल यात्रा की। इस यात्रा का मुख्य उपलब्धि रही पारस्परिक रूप से लाभकारी मुद्दों को विस्तार से समाहित करने वाले 14 समझौता ज्ञापनों और अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर होना। इनमें समुद्री परिवहन और बंदरगाह विकास, स्टार्ट-अप, एयरोस्पेस, राजनयिक प्रशिक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और सार्वजनिक-नीति के समझौते शामिल रहें।
यह यात्रा पिछले तीन वर्षों में पूरी तरह से भारत-पुर्तगाल सम्बंधों के नये रूप में परिभाषित और रूपांतरित होने के साथ उनमें एक नई गतिशीलता का प्रतिबिंब है। यकीनन, भारत और पुर्तगाल दोनों अपने द्विपक्षीय सम्बंधों की पूर्ण क्षमता का फायदा उठाने के लिए एक दूसरे के यहां तेजी आ रहे परिवर्तन को लेकर पर दांव लगाते दिखाई देते हैं।
भारत और पुर्तगाल के हित जहां एक हो जाते है आज ऐसी वैश्विक और द्विपक्षीय मुद्दों की एक श्रृंखला मौजूद है। दुनिया में अप्रत्याशित और अस्थिर, गलत लाइनों का प्रवाह बना हुआ है। दिग्गज राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को स्थानांतरित करना, भू-आर्थिक और भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा की अंतर्वस्तु, दबे हुए आर्थिक विकास और बढ़ती पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों ने वैश्विक रणनीतिक परिदृश्य को धराशायी कर दिया है। 21 वीं सदी में भूमंडलीकरण प्रमुख हो गया है राष्ट्रों की अंदर की ओर देखने की बढ़ती प्रवृत्ति के लिए राष्ट्रवाद की भावना उभरी है। और अब जब हम चौथी औद्योगिक क्रांति की दौर में प्रवेश करते दिखाई देते है तब भी तकनीक का दुरुपयोग अक्सर होता है। ट्रांस-अटलांटिक रिश्ते में दरार ने यूरोप के लिए अमेरिका की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाए हैं। ये घटनाक्रम नई साझेदारी और संतुलन के लिए कहते हैं
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रासंगिकता और यूरोपीय संघ और नाटो की पुर्तगाल की सदस्यता ही वो वजह है जिन्होंने वैश्विक उथल-पुथल से निपटने के लिए दोनों देशों को अपनी ताकत संयोजित करने की स्थिति में ला दिया। पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग के इस तर्क को कोरोनोवायरस जैसे आम खतरों के कारण और अधिक मजबूती मिली है।
इस संदर्भ में, भारत और पुर्तगाल एक दूसरे की प्रमुख सुरक्षा चिंताओं के प्रति पूरी तरह साथ हैं। पुर्तगाली संसद ने 2019 में पुलवामा आतंकवादी हमले की स्पष्ट रूप से निंदा की थी जबकि खूंखार गैंगस्टर अबू सलेम को 2005 में लिस्बन से प्रत्यर्पित किया गया था। पुर्तगाल ने यूरोपीय संघ के साथ भारत के मजबूत जुड़ाव के लिए आधार यूरोपीय संघ-भारत शिखर सम्मेलन में प्रमुख भुमिका निभाने के अलावा सभी प्रमुख बहुपक्षीय संस्थानों में भारत की सदस्यता का भी समर्थन किया है। आज, सुरक्षा की समान आवश्यकता के मद्देनजर भारत और पुर्तगाल की भौगोलिक स्थिति क्रमशः हिंद महासागर और अटलांटिक महासागर में समान है जिसे 500 साल पहले वास्को डी गामा ने दोनों देशों के साझा समुद्री सुरक्षा हितों के रूप में उजागर किया था।
इसी तरह, पुर्तगाल का मजबूत राष्ट्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था भारत के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है। लिस्बन ने इंटरनेट ऑफ थिंग्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉक-चेन और ई-गवर्नेंस में बड़े पैमाने पर प्रगति की है। इसकी डिजिटल प्रगति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के एकीकरण के माध्यम से भारतीय अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने और भारत की बौद्धिक क्षमता को अधिकतम करने के विकास के आदर्श के साथ मेल खाती है। इस प्रकार, पुर्तगाली कंपनियां मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, और स्टार्ट-अप इंडिया जैसी भारत की परिवर्तनकारी परियोजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने को तैयार हैं। विशेष रूप से, भारत पुर्तगाली कंपनियों का परिचालन बढ़ाने के लिए एक व्यवहारिक प्रयोगशाला प्रदान करता है। इसी तरह, प्रवास और गतिशीलता पर समझौता भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश और पुर्तगाल की कुशल जनशक्ति की आवश्यकता की पूरकता पर प्रकाश डालता है। ये सकारात्मक सोच से द्विपक्षीय व्यापार एक अरब यूरो से ऊपर पहुंच रहा हैं जो पिछले दो वर्षों में भारत में पुर्तगाली निवेश दोगुना कर रहा है।
वर्तमान में, पुर्तगाल की लागत-प्रतिस्पर्धी और व्यवसाय के अनुकूल जलवायु की वजह से ये ब्रेक्सिट के बाद ब्रिटेन के स्थान पर भारतीय कंपनियों के लिये यूरोप के आम बाजार के प्रवेश द्वार बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि पुर्तगाल भी भारतीय कंपनियों के लिए लुसोफोन यानि पुर्तगाली भाषी देशों में आधार स्थापित करने के लिए स्प्रिंगबोर्ड हो सकता है जिनमें दुनिया भर में फैले पारंपरिक लिस्बन नेता हैं। इन लुसोफोन देशों में संयुक्त इंडो-पुर्तगाली सहयोग की संभावनाएं भी बहुत अधिक हैं।
पुर्तगाली आबादी के कल्याण और आध्यात्मिकता के लिए प्राकृतिक आकर्षण के साथ बड़े भारतीय प्रवासी लाभ उठाते रहे है। द्विपक्षीय सहयोग के नए विस्तारों में योग, आयुर्वेद के अलावा फुटबॉल, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा, अपशिष्ट प्रबंधन, समुद्र विज्ञान, रक्षा और कृषि शामिल हैं।
इसलिए, राष्ट्रपति सूजा की यात्रा, इंडो-पुर्तगाली द्विपक्षीय सहयोग के बढाने के लिए एक नया अध्याय है।
आलेख:- राजर्षि रॉय, रिसर्च एनालिस्ट, आईडीएसए
अनुवाद एवं स्वर- वीरेन्द्र कौशिक
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