भारत तथा जर्मनी – एक बहुआयामी साझेदारी

भारत के विदेश मंत्री डॉ॰ एस॰ जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में भागीदारी करने के लिए जर्मनी का दौरा किया | इस यात्रा के दौरान, डॉ॰ जयशंकर ने ओमान, स्पेन, कुवैत, अमरीका, सऊदी अरबिया तथा ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत की | उन्होंने सिंगापुर, जर्मनी तथा बेल्जियम के रक्षा मंत्रियों के साथ भी मुलाक़ात की | उनकी बातचीत यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष के साथ भी हुई |

बाद में, विदेश मंत्री ने द्विपक्षीय सम्बन्धों तथा अन्य क्षेत्रीय और आपसी हितों के अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान और विस्तृत चर्चा करने के लिए बर्लिन का भी दौरा किया, जहां उन्होंने जर्मनी के विदेश मंत्री, हाइको मास तथा जर्मनी की रक्षा मंत्री सुश्री एनाग्रेट क्रैम्प-कर्रनबौर के साथ वार्ता की | भारत तथा जर्मनी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सशक्त द्विपक्षीय सम्बन्धों तथा अत्यधिक सहयोगपूर्ण साझेदारी को साझा करते हैं | इस परंपरा को जारी रखते हुए, भारत बहुपक्षवाद के लिए फ्रैंको-जर्मन प्रोन्नत गठबंधन से सार्थक रूप से जुड़ा हुआ है | इसकी घोषणा करते हुए डॉ॰ जयशंकर ने कहा कि आज बहुपक्षवाद राष्ट्रवाद तथा वाणिज्यवाद के कारण दबाव तथा ख़तरे में है | भारत संयुक्त राष्ट्र की केन्द्रीयता तथा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में डब्ल्यूटीओ की प्रासंगिकता में विश्वास करता है |

महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों विदेश मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता में विस्तार करने की प्रक्रिया में गति लाने की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चाएं कीं | भारत तथा जर्मनी दोनों ही चार राष्ट्रों के समूह जी-4 के सदस्य हैं, जो इस समूह के देशों के लिए स्थायी सदस्यता के विस्तार के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए प्रयासरत हैं | मीडिया से बातचीत के दौरान, डॉ॰ एस॰ जयशंकर ने विस्तार से कहा कि यह एक ऐसा विषय है, जिस पर भारत तथा जर्मनी ने कुछ वर्षों से एक साथ मिलकर काम किया है | विदेश मंत्री ने दो भारतीय बहुपक्षीय पहलों को समर्थन देने के लिए अपने जर्मन समकक्ष को धन्यवाद दिया | कथित बहुपक्षीय भारतीय पहल, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) तथा आपदा असम्बद्ध मूलभूतसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) हैं |

भारत तथा जर्मनी वर्षों से उच्च-स्तरीय संबंध रखते हैं | जर्मन चांसलर, एंगेला मार्केल गत वर्ष के अंत में भारत दौरे पर आयीं थीं | दोनों राष्ट्र सौहार्दपूर्ण व्यापारिक संबंध रखते हैं तथा अब एक रणनीतिक साझेदारी में प्रवेश कर चुके हैं | दोनों देश विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय निकायों में सहयोग कर रहे हैं |

भारत की अपनी यात्रा के दौरान, चांसलर मार्केल तथा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-जर्मन रणनीतिक साझेदारी समान मूल्यों और लोकतन्त्र के सिद्धांतों, मुक्त तथा निष्पक्ष व्यापार तथा नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था और परस्पर विश्वास तथा सम्मान पर आधारित है |

वर्ष 2020 में, भारत तथा जर्मनी अपनी रणनीतिक साझेदारी का बीसवाँ वर्ष मना रहा है | दोनों पक्ष ने भारत के विदेश सचिव तथा स्टेट सेक्रेटरी ऑफ़ जर्मन फ़ेडरल ऑफिस के बीच विदेश कार्यालय परामर्शों को संस्थागत बनाने के निर्णय लिए हैं | दोनों देशों ने एक ट्रैक 1॰5 रणनीतिक संवाद की भी शुरुआत की है, जो राष्ट्रीय, क्षेत्रीय तथा रणनीतिक हितों की आपसी समझ को बढ़ाने, साझा सम्बन्धों के लिए सिफ़ारिशों पर काम करने तथा वैयक्तिक नीति के क्षेत्रों पर कार्य करने के लिए मुख्य हिस्सेदारों को वार्षिक तौर पर अपने विचारों का खुलकर आदान-प्रदान करने के योग्य बनाएगा | दोनों पक्षों की मीडिया पेशेवरों की यात्राओं के माध्यम से दोनों देशों के बीच सूचना के प्रवाह को दुरुस्त करने के लिए भारत तथा जर्मनी वचनबद्ध हैं |

जर्मन रक्षा मंत्री के साथ अपनी बैठक के दौरान, डॉ॰ जयशंकर ने रक्षा सहयोग को गहरा बनाने के लिए चल रहे कार्यक्रमों पर चर्चा की | दोनों देश द्विपक्षीय रक्षा सहयोग से संबन्धित एक समझौते के क्रियान्वयन में प्रवेश कर चुके हैं | नई दिल्ली तथा बर्लिन को अब आशा है कि यह वैश्विक, क्षेत्रीय, समुद्री तथा साइबर सुरक्षा मुद्दों पर फ़ोकस करने के साथ-साथ नए रक्षा तथा सुरक्षा संवादों के प्रारूपों और वर्तमान की सुरक्षा नीति में सहयोग को गति प्रदान करेगा |

भारत तथा जर्मनी के रक्षा मंत्रियों ने दो वर्षों में कम से कम एक बार बैठक करने का फ़ैसला किया है | भारतीय राज्यों के उत्तर प्रदेश तथा तमिल नाडू में दो रक्षा गलियारे के निर्माण के प्रति जर्मनी ने भी अपनी इच्छा जताई है |

जर्मनी की अपनी यात्रा के दौरान, भारत के विदेश मंत्री ने बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में भारत के पैविलियन का भी उदघाटन किया | डॉ॰ जयशंकर ने अपने सम्बोधन में कहा कि चर्चित बर्लिन फ़िल्म महोत्सव में भारत की साझेदारी ने फ़िल्म निर्माण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की प्रतिभाओं को अद्भुत अवसर प्रदान किया | भारत तथा जर्मनी रक्षा से लेकर आर्थिक तथा राजनयिक से लेकर सांस्कृतिक मंचों पर बहुआयामी संबंध साझा करते हैं, जो आने वाले वर्षों में और प्रगाढ़ होंगे |

आलेख – रंजीत कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

अनुवादक/वाचक – मनोज कुमार चौधरी

Comments

Popular posts from this blog

भारत ने फिजी को पहुंचाई मानवीय सहायता

आत्मनिर्भर भारत में प्रवासियों की भूमिका

अरब-भारत सहयोग फोरम की बैठक