अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप की नवीन भारत यात्रा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अहमदाबाद पहुँचकर भारत की अपनी स्वतंत्र यात्रा का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी की। दोनों नेताओं के बीच व्यक्तिगत तालमेल विश्वप्रसिद्ध है। गुजरात महात्मा गांधी की भूमि है और राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा साबरमती आश्रम जाना भारत को ब्रिटिश राज के चंगुल से मुक्त कराने में गांधीजी की भूमिका की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। एक लाख से भी अधिक जनसमूह की उपस्थिति में अहमदाबाद के मोटेरा में श्री ट्रंप का भारत द्वारा इससे बेहतर स्वागत क्या हो सकता था कि उनसे विश्व के सबसे बड़े स्टेडियम का उद्घाटन करवाया गया। कुछ ही घंटों के समय में, अमेरिकी राष्ट्रपति भारतीय राज्यों की मेहमाननवाजी के लिए संगीत और नृत्य के प्रदर्शन के माध्यम से भारतीय संस्कृति की एक विशाल विविधता का दृश्य प्रस्तुत किया गया।
राष्ट्रपति ट्रम्प भारतीय विविधता और भारतीय समाज की बहु-सांस्कृतिक सुंदरता से प्रभावित थे। हालाँकि, मोटेरा स्टेडियम में उनका भाषण लाखों भारतीयों के कानों में एक संगीत की तरहथा, जिन्होंने उन्हें सीधे अथवा रेडियो या टेलीविजन पर सुना। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प गरीबी उन्मूलन, आर्थिक विकास, वैज्ञानिक और तकनीकी विकास तथा कई अन्य क्षेत्रों में सात दशकों की अवधि में भारत की विकासगाथा की सर्वश्रेष्ठ सराहना दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की एक प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है और वास्तव में, भारत ने हाल ही में जीडीपी के मामले में ब्रिटेन को दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने अमेरिकी समाज में लगभग चार मिलियन भारतीय-अमेरिकियों के योगदान का मुक्त हृदय से उल्लेख किया।
इसके अलावा, राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित किया और भविष्यवाणी की कि साझेदारी अभी भी टिकाऊ है और आगे भी रहेगी। आतंकवाद के खतरे से निपटने में भारत-अमेरिका के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, राष्ट्रपति ट्रम्प ने पश्चिम एशिया में आईएसआईएस के अंत और इसके शीर्ष नेताओं के उन्मूलन पर प्रकाश डाला। उन्होंने पाकिस्तान पर दबाव बनाने के अपने प्रयासों को दोहराया और पाकिस्तान को संयुक्त राज्य का सहयोगी बताया।
कई लोगों के लिए, पाकिस्तान पर उनकी टिप्पणी अनावश्यक लगा। हालाँकि, उनकी टिप्पणी अफगानिस्तान में युद्ध समाप्त करने के लिए चल रहे अमरीकी प्रयासों से जुड़ी थी। अपने बयानों को संतुलित करने के लिए उन्होंने आतंकवाद से निपटने में भारत और अमरीका की भूमिका पर जोर दिया। हाल ही में, भारत, अमेरिका और यहां तक कि चीन यह सुनिश्चित करने में एकमत थे कि पाकिस्तान आतंकवादी वित्तपोषण वाले देशों की ग्रे सूची में ही बना रहे। ट्रम्प प्रशासन ने या तो प्रतिबंध लगाए हैं अथवा पाकिस्तान को दी जाने वाली राशि रोक ली है। अमेरिकी कार्रवाइयों की पृष्ठभूमि में देखा जाए तो पाकिस्तान पर उनका बयान तर्कपूर्ण लगता है।
उन्होंने भारत और संयुक्त राज्य अमरीका के बीच बढ़ते रक्षा और सुरक्षा सहयोग के महत्व को व्यक्त कर, द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास में विकास के महत्व को रेखांकित किया, और भारत को अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों की बिक्री का भी वादा किया।
प्रारंभ में, ऐसा लग रहा था कि भारत में उनकी इस नवीन यात्रा का पहला चरण सिर्फ दिखावा और प्रतीकात्मक होगा। लेकिन वास्तव में, यह काफी हद तक लाभप्रद सिद्ध हुआ। अपने भाषण के दौरान, राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारतीय जनता को बिना किसी भूमिका के भारत-अमेरिका सामरिक साझेदारी के महत्व, गहराई और उपयोगिता के बारे में बताया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ाने के लिए एक नयाऔर बड़ा समझौता किया जा सकता है।
इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि बदलते वैश्विक क्रम में, सोवियत संघ के पतन और शीत युद्ध के अंत के बाद से, वैश्विक घटनाक्रमों में एक महत्वपूर्ण आयाम के रूप में भारत-अमरीका सामरिक साझेदारी उभर कर सामने आई है। यद्यपि यह साझेदारी सतत रूप से आगे ही बढ़ी है, परन्तु इसे अनेक उतार-चढ़ाव और बाधाओं तथा चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। जब से डोनाल्ड ट्रम्प सत्ता में आए हैं भारत ने विशेष रूप से व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में नई चुनौतियों का सामना किया है। लेकिन दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों द्वारा समझौते पर निर्णायक बातचीत करने का प्रयास किया जा रहा है।
आशा थी कि ट्रम्प की वर्तमान भारत यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। लेकिन दोनों सरकारों को और अधिक समय की आवश्यकता है और आशा है कि शीघ्र ही एक नए सौदे पर सहमति बन जाएगी।
आलेख - प्रो. चिंतामणि महापात्रा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय
अनुवादक एवं वाचक - हर्ष वर्धन
राष्ट्रपति ट्रम्प भारतीय विविधता और भारतीय समाज की बहु-सांस्कृतिक सुंदरता से प्रभावित थे। हालाँकि, मोटेरा स्टेडियम में उनका भाषण लाखों भारतीयों के कानों में एक संगीत की तरहथा, जिन्होंने उन्हें सीधे अथवा रेडियो या टेलीविजन पर सुना। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प गरीबी उन्मूलन, आर्थिक विकास, वैज्ञानिक और तकनीकी विकास तथा कई अन्य क्षेत्रों में सात दशकों की अवधि में भारत की विकासगाथा की सर्वश्रेष्ठ सराहना दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की एक प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है और वास्तव में, भारत ने हाल ही में जीडीपी के मामले में ब्रिटेन को दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने अमेरिकी समाज में लगभग चार मिलियन भारतीय-अमेरिकियों के योगदान का मुक्त हृदय से उल्लेख किया।
इसके अलावा, राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में उल्लेखनीय प्रगति को रेखांकित किया और भविष्यवाणी की कि साझेदारी अभी भी टिकाऊ है और आगे भी रहेगी। आतंकवाद के खतरे से निपटने में भारत-अमेरिका के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, राष्ट्रपति ट्रम्प ने पश्चिम एशिया में आईएसआईएस के अंत और इसके शीर्ष नेताओं के उन्मूलन पर प्रकाश डाला। उन्होंने पाकिस्तान पर दबाव बनाने के अपने प्रयासों को दोहराया और पाकिस्तान को संयुक्त राज्य का सहयोगी बताया।
कई लोगों के लिए, पाकिस्तान पर उनकी टिप्पणी अनावश्यक लगा। हालाँकि, उनकी टिप्पणी अफगानिस्तान में युद्ध समाप्त करने के लिए चल रहे अमरीकी प्रयासों से जुड़ी थी। अपने बयानों को संतुलित करने के लिए उन्होंने आतंकवाद से निपटने में भारत और अमरीका की भूमिका पर जोर दिया। हाल ही में, भारत, अमेरिका और यहां तक कि चीन यह सुनिश्चित करने में एकमत थे कि पाकिस्तान आतंकवादी वित्तपोषण वाले देशों की ग्रे सूची में ही बना रहे। ट्रम्प प्रशासन ने या तो प्रतिबंध लगाए हैं अथवा पाकिस्तान को दी जाने वाली राशि रोक ली है। अमेरिकी कार्रवाइयों की पृष्ठभूमि में देखा जाए तो पाकिस्तान पर उनका बयान तर्कपूर्ण लगता है।
उन्होंने भारत और संयुक्त राज्य अमरीका के बीच बढ़ते रक्षा और सुरक्षा सहयोग के महत्व को व्यक्त कर, द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास में विकास के महत्व को रेखांकित किया, और भारत को अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों की बिक्री का भी वादा किया।
प्रारंभ में, ऐसा लग रहा था कि भारत में उनकी इस नवीन यात्रा का पहला चरण सिर्फ दिखावा और प्रतीकात्मक होगा। लेकिन वास्तव में, यह काफी हद तक लाभप्रद सिद्ध हुआ। अपने भाषण के दौरान, राष्ट्रपति ट्रम्प ने भारतीय जनता को बिना किसी भूमिका के भारत-अमेरिका सामरिक साझेदारी के महत्व, गहराई और उपयोगिता के बारे में बताया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और बढ़ाने के लिए एक नयाऔर बड़ा समझौता किया जा सकता है।
इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि बदलते वैश्विक क्रम में, सोवियत संघ के पतन और शीत युद्ध के अंत के बाद से, वैश्विक घटनाक्रमों में एक महत्वपूर्ण आयाम के रूप में भारत-अमरीका सामरिक साझेदारी उभर कर सामने आई है। यद्यपि यह साझेदारी सतत रूप से आगे ही बढ़ी है, परन्तु इसे अनेक उतार-चढ़ाव और बाधाओं तथा चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। जब से डोनाल्ड ट्रम्प सत्ता में आए हैं भारत ने विशेष रूप से व्यापार और वाणिज्य के क्षेत्र में नई चुनौतियों का सामना किया है। लेकिन दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों द्वारा समझौते पर निर्णायक बातचीत करने का प्रयास किया जा रहा है।
आशा थी कि ट्रम्प की वर्तमान भारत यात्रा के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। लेकिन दोनों सरकारों को और अधिक समय की आवश्यकता है और आशा है कि शीघ्र ही एक नए सौदे पर सहमति बन जाएगी।
आलेख - प्रो. चिंतामणि महापात्रा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय
अनुवादक एवं वाचक - हर्ष वर्धन
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