कॉरोना वायरसजन्य महामारी की जद में दुनिया।

कॉरोना वायरसजन्य महामारी ने पूरी दुनिया को थर्रा दिया है। इससे पहले मनुष्य में इस बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए थे। अब तक 81 हज़ार से ज़्यादा लोग इस वायरस से पैदा होने वाली साँस सम्बन्धी बीमारी ‘कोविड-19’ की जद में आ चुके हैं। जिनमें से तकरीबर तीन हज़ार की मृत्यु हो चुकी है। इनमें से 95 फीसदी यानि 2,800 लोगों की मौत अकेले चीन में हुई है, जहाँ इस घातक बीमारी की शुरुआत हुई थी। 

चीन के बाहर कॉरोना वायरस से दूषित लोगों की संख्या में लगातार इज़ाफ़ा हो रहा है। विशेष तौर पर यूरोप, मध्यएशिया, अमेरिका और एशिया में यह वायरस लगातार फैल रहा है। इन क्षेत्रों के 51 देशों में महामारी का कोई सीधा सम्पर्क जैसे चीनयात्रा या संक्रमित व्यक्ति से सम्बन्ध नहीं पाया गया है। ब्राज़ील में लैटिन अमेरिका का पहला रोगी चिह्नित किया गया है। चीन के बाद इस बीमारी के सबसे बड़े केन्द्र ईरान में 245 लोग कॉरोना से संक्रमित पाए गए हैं, जिनमें से 26 की मृत्यु हो चुकी है। ईरान के उपराष्ट्रपति मसोमे एब्तेकार और उप-स्वास्थ्यमंत्री इराज हरीरकी कॉरोना से संक्रमित हैं और इनकी एकान्त चिकित्सा की जा रही है। उधर, इटली में 400 लोग संक्रमित पाए गए और 12 की मृत्यु हुई है। कॉरोना के फैलाव के चलते यूरोप अब तक के सबसे कठिन दौर से गुज़र रहा है। 

भारत में अभी तक कॉरोना संक्रमण का कोई मामला सामने नहीं आया है। कोविड-19 से कथित तौर पर संक्रमित तीन विद्यार्थियों को हाल ही में रोगमुक्त घोषित कर दिया गया है। जापान के एक जलयान में यात्रा के दौरान संक्रमित हुए जिन तीन यात्रियों को एकान्त में रखा गया था; उन्हें डाक्टरी निगरानी में घर भेज दिया गया है। भारत ने इस बीमारी से बचाव के लिए 15 टन चिकित्सा सामग्री विमान से वुहान भेजी है। भारत ने इस शहर से अपने नागरिकों और बहुत से विदेशियों को बाहर निकाला है। एहतियात के तौर पर भारत ने चीन, ईरान और हॉन्गकॉन्ग से होकर जाने वाली विमान सेवाओं पर रोक लगा दी है। 

माना जा रहा है कि कॉरोना वायरस 2019 के आखिरी महीनों में गै़रकानूनी ढंग से वुहान में बेचे गए जंगली जानवरों से इन्सानों में फैला है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह विषाणु चमगादड़ों से कुछ अन्य प्रजातियों और फिर इन्सानों में संक्रमित हुआ। विश्व स्वास्थ्य संगठन को दिसम्बर के अन्त में वुहान में न्यूमोनिया के कुछ मामलों की जानकारी मिली थी। इसके एक हफ्ते बाद चीनी अधिकारियों ने माना कि ये बीमारी एक नए वायरस से हो रही थी। 

कॉरोना वायरस का परिवार काफी बड़ा है और इसके कारण सामान्य जुकाम से लेकर सॉर्स यानि गम्भीर श्वास संक्रमण तक हो सकता है। कॉरोना संक्रमण के सामान्य लक्षणों में बुखार, खाँसी, साँस फूलने और साँस लेने में समस्याएँ हो सकती हैं। मामला ज़्यादा गम्भीर होने पर न्यूमोनिया, सॉर्स, किडनी खराब होने आदि से मृत्यु हो सकती है। सतह पर अनेक मुकुट जैसी आकृतियाँ होने के चलते इस विषाणु को कॉरोना वायरस का नाम दिया गया है। इस वायरस से बचाव के लिए दुनिया के अनेक देश तमाम उपाय कर रहे हैं। जापान में सभी स्कूलों को बन्द कर दिया गया है, जबकि साउदी अरब ने मक्का के लिए वीज़ा पर रोक लगा दी है। 

इन सबके बावजूद, करोना का खौफ़ थम नहीं रहा है। दुनियाभर के शेयर बाज़ार सुस्त हैं। अर्थव्यवस्था पर इसके दुष्प्रभावों का कुल आकलन फिलहाल तो संभव नहीं है; फिर भी अनुमान लगाया जा रहा है कि बीजिंग वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में तकरीबन एक तिहाई के अपने योगदान को कायम नहीं रख पाएगा। मुद्रा के पैमाने पर विश्व व्यापार को एक दशमलव एक ट्रिलियन डॉलर की चपत लग सकती है। चीन के कारखानों से दुनियाभर के उद्योगों को कलपुर्जों की सप्लाई होती है। वहाँ उत्पादन पर कॉरोना के दुष्प्रभाव से विश्व की आर्थिक आपूर्ति शृंखला भी बाधित हुई है। 

इसके अलावा, चीन में दवाइयों, जीवाणुरोधियों, मधुमेहनियंत्रकों, दर्दनिवारकों और एण्टी-रैट्रोवायरस के निर्माण में काम आने वाले घटकों का उत्पादन होता है। उत्पादन इकाइयों में रुकावट से इनकी आपूर्ति नहीं हो रही है। दुनिया का अग्रणी जेनरिक औषधि निर्माता होने के कारण, इन घटकों की कमी से भारत को भी परेशानी हो रही है। भारत, हालांकि कॉरोना विषाणु से मुक्त है, लेकिन चीन से सम्बन्ध के बिना भी दुनियाभर में कॉरोना का फैलना काफी चिन्ताजनक है। चीन में इस वायरस के प्रसार को रोकने की हर संभव कोशिश की जा रही है। 

भारत, जो जनसंख्या के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है; ने इस बीमारी से संक्रमित रोगियों के देश में प्रवेश को रोकने के लिए थर्मल स्कैनर से लैस चिकित्साकर्मियों को हवाईअड्डों और बन्दरगाहों पर तैनात किया है। इसके अलावा, कड़ी निगरानी और निवारक उपाय अपनाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य और निरोगिता बनाए रखने और कॉरोना से बचने के उपायों के बारे में अनेक माध्यमों से प्रचार भी किया जा रहा है। 

आलेख - के. वी. वैकटसुब्रमण्यन, वरिष्ठ पत्रकार।

अनुवाद और वाचन - डॉ. श्रुतिकान्त पाण्डेय।

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