कोविड-19 के विरुद्ध क्षेत्रीय प्रतिक्रिया

विश्व स्वास्थ्य संगठन अर्थात डब्ल्यूएचओ द्वारा महामारी के रूप में घोषित कोविड 19 का मुकाबला करने के उपायों को संयुक्त रूप से विकसित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सार्क नेताओं का एक वीडियो सम्मेलन आयोजित करने का प्रस्ताव अद्वितीय था। इसने समूचे दक्षिण एशियाई क्षेत्र का तत्काल ध्यान आकर्षित किया। चूंकि क्षेत्र के सभी देश बेहद आबादी वाले हैं, इसलिए वायरस के फैलने का खतरा एक सच्चाई है। वायरस के प्रसार का मुकाबला सभी के लिए समान रूप से एक कठिन कार्य है। यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि चीन में उत्पन्न होने वाले इस वायरस के कारण दुनिया भर में 7000 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। नोवेल कोरोनोवायरस ने कई देशों को एक साथ अनेक प्रकार से प्रभावित किया है; उड़ानों को रद्द करना, सार्वजनिक स्थानों को बंद करना और नागरिकों को घर के अंदर रहने का आग्रह करना जैसे कार्य करने के लिए बाध्य होना पड़ा है। भारत ने अपने आस पास पड़ोसी प्रथम की नीति के बाद बांग्लादेश और मालदीव के नागरिकों के साथ-साथ चीन, इटली और ईरान जैसे सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों से अपने नागरिकों को निकाला है। भारत अपने हवाई अड्डों पर कड़ी जांच कर रहा है और संदिग्ध वायरस संक्रमित रोगियों को विभिन्न सुविधाओं के के साथ इलाज दिया जा रहा है।

दुनिया के अन्य हिस्सों की तुलना में, दक्षिण एशिया में कम मामले पाए गए हैं। भारत में 100 से अधिक मामले दर्ज किए गए, इसके बाद पाकिस्तान में 55, मालदीव में 8, अफगानिस्तान में 7, श्रीलंका में 3, बांग्लादेश में 2, नेपाल और भूटान में एक-एक मामले दर्ज किए गये हैं। श्रीलंका और मालदीव को छोड़कर क्षेत्र के अधिकांश देश बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज रिपोर्ट में निचले स्थान पर हैं। इसलिए प्रत्येक राष्ट्र के अनुभवों को साझा करके महामारी का मुकाबला करने का एक प्रयास महत्वपूर्ण हो जाता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि प्रत्येक देश में इस भयावह स्वास्थ्य संकट से निपटने की आर्थिक क्षमता नहीं हो सकती है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक कोविड-19 कोष स्थापित करने का प्रस्ताव एक स्वागत योग्य कदम है। भारत ने क्षेत्रीय निधि शुरू करने के लिए 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर के योगदान की घोषणा की। इस कोष में योगदान स्वैच्छिक है और सदस्य देश तत्काल बचाव कार्यों को पूरा करने के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं। भारत ने सीमाओं की बाध्यता से परे और आंतरिक उपभोग हेतु आम सार्क महामारी प्रोटोकॉल को विकसित करते हुए भी सार्क आपदा प्रबंधन केंद्र के मौजूदा तंत्र का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा।

वीडियो कॉन्फ्रेंस की घोषणा का सार्क के सभी सदस्य राज्यों ने स्वागत किया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को छोड़कर जिन्होंने स्वास्थ्य मामलों के अपने विशेष सहायक को भेजा; अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों या सदस्य देशों की सरकार प्रमुखों ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग में भाग लिया। उन्होंने न केवल महामारी से निपटने के लिए अपने अपने देशों के अनुभवों को साझा किया बल्कि उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में इस सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रस्तावित साधनों का भी उल्लेख किया।

इस विचार का समर्थन मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सोलीह द्वारा किया गया जिन्होंने कहा कि कोई भी देश अपने दम पर इस महामारी से नहीं लड़ सकता है। आर्थिक चुनौती की ओर संकेत देते हुए इस तरह की महामारी के परीक्षण और अलगाव के लिए बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के मामले में, श्रीलंकाई राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे ने कोविड-19 से निपटने के लिए अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने पर जोर दिया। अफगानिस्तान के राष्ट्रपति, डॉ. अशरफ गनी ने सीमाओं को बंद करने पर जोर दिया, जबकि सब ओर से भूमि से घिरे कुछ देशों के लिए यह समाधान व्यवहारिक नहीं हो सकता। पाकिस्तान ने वास्तविक समय में रोग निगरानी डेटा का प्रस्ताव दिया और इस बात पर जोर दिया कि इस बीमारी के अधिक प्रसार को रोकने के लिए राष्ट्रीय और स्थानीय प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने संयुक्त रूप से महामारी से निपटने के प्रयासों के समन्वय के लिए सार्क स्वास्थ्य मंत्रियों और सचिवों के वीडियो सम्मेलन प्रस्तावित किए। नेपाल और भूटान दोनों ने कोविड-19 के कारण होने वाले स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए मिलकर काम करने के भारत के प्रस्ताव पर जोर दिया और उसका स्वागत किया।

वीडियो कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए सार्क नेताओं को आमंत्रित करना यह भी दर्शाता है कि इस क्षेत्र के अन्य नेताओं के साथ काम करने के लिए भारत की उत्सुकता मौजूद है। भारत ने पहले से ही संभव वायरस वाहकों और उनके प्राथमिक संपर्कों का पता लगाने के लिए एकीकृत रोग निगरानी पोर्टल (आईडीएसपी) की स्थापना की है और वह सार्क क्षेत्र के अन्य देशों के साथ एक सॉफ्टवेयर साझा करने के लिए तैयार है ताकि उन्हें कोविड -19 प्रभावित लोगों का निगरानी रिकॉर्ड रखने में मदद मिल सके और उन्हें रोगमुक्त किया जा सके साथ ही एक आम अनुसंधान मंच स्थापित करने का भी प्रस्ताव रखा। भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित इस निष्पक्ष वीडियो सम्मेलन और सार्क नेताओं द्वारा उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया दर्शाती है कि संयुक्त रूप से इस स्वास्थ्य संकट से निपटने में ऐसी क्षेत्रीय प्रतिक्रिया एक महत्वपूर्ण कारक सिद्ध होगी।

आलेख - डॉ. स्मृति एस. पटनायक
अनुवादक एवं वाचक - हर्ष वर्धन

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