कोविड19 से लड़ने के लिए भारत का संकल्प
1.3 अरब भारतीयों ने कोरोना विषाणु से लड़ने का अपना संकल्प दोहराया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर देश ने रविवार को जनता कर्फ़्यू का पालन किया। राजनेताओं, खिलाड़ियों, फ़िल्म कलाकारों और अन्य जानी-मानी हस्तियों सहित लोगों ने अपने घरों की छतों, छज्जों और खुली खिड़कियों पर आकर तालियाँ, थालियाँ और घंटियाँ बजाकर आगे बढ़कर विषाणु से लड़ने वाले चिकित्सकों, नर्सों, चिकित्सा सहायकों, पुलिस, सफ़ाईकर्मियों और ज़रूरी सामान तथा सेवाएँ उपलब्ध करवाने वाले लोगों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार को राष्ट्र को संबोधित किया था और लोगों से रविवार, 22 मार्च को सुबह सात से रात नौ बजे तक स्वेच्छा से अपने घरों में ही रहने का आह्वान किया था। पूरे देश ने इस महान कार्य में सहयोग किया। ज़रूरी सेवाएँ चालू रहीं। जन स्वास्थ्य को देखते हुए बहुत से राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने 31 मार्च तक पूरी तरह लॉकडाउन या बंद की घोषणा की है। कोरोना विषाणु को तीसरे चरण यानी कि सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोकने के लिए ये बहुत ज़रूरी है। उन्होंने लोगों से घरों में रहने और केवल बहुत ज़रूरी होने पर ही घर से निकलने का अनुरोध किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सजग रहने की ज़रूरत पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को घबराने की नहीं बल्कि तैयार रहने की ज़रूरत है। उन्होंने सफ़ाई रखने और सामाजिक दूरी बनाकर रखने के लिए भी कहा। श्री मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इस महामारी से लड़ने के लिए ठोस प्रयासों की बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई भी देश कोविड 19 से अछूता नहीं रहेगा। भारतीय उद्योगों, कारोबार और छोटे उद्यमियों के मुद्दों को सुलझाने के लिए वित्त मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय आर्थिक कार्यबल भी गठित किया गया है।
रेल तथा सड़क सेवाओं को लॉकडाउन के दौरान रोक दिया गया है। ये केवल अतिआवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मियों के लिए ही उपलब्ध होंगी। किराने की दुकानें, चिकित्सा से जुड़ा सामान बेचने वाली दुकानें, बैंक, अस्पताल, पैट्रोल पंप और पुलिस तथा दमकल विभाग जैसी अन्य आपात सेवाएँ सामान्य रूप से सुचारु रहेंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने एक ट्वीट के माध्यम से जनता से इस बंद के दौरान प्रशासन के साथ सहयोग करने की मांग की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये हमारी अपनी और अपने प्रियजनों की सुरक्षा सुनिश्चित के लिए बहुत ज़रूरी है।
हालिया जानकारी मिलने तक भारत में चार सौ से अधिक लोगों में कोविड 19 संक्रमण होने की पुष्टि हो चुकी है। 25 लोगों को ठीक होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और 8 लोगों की मृत्यु हो गई है। कोविड 19 संक्रमण वाले मरीज़ों का उपचार करने के लिए अस्पतालों ने अलग वार्ड तैयार किए हैं। भारत पहुँचने वाले दस लाख से अधिक यात्रियों की जाँच की जा चुकी है ताकि इस विषाणु को फैलने से रोका जा सके।
भारत ने 15 अप्रैल तक कार्य और कूटनीतिक वीज़ा प्रदान किए जाने पर रोक लगा दी है। 29 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन रद्द कर दिया गया है। देश में इस रोग को फैलने से रोकने के लिए ये उपाय किए गए हैं।
भारत को अर्थव्यवस्था के बहुत से क्षेत्रों पर पड़ रहे इसके बुरे प्रभाव का सामना करने के लिए कई तरह के उपाय करने होंगे। इसमें सर्वोच्च बैंक, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के संयोजन द्वारा नीति दरों में तुरंत कटौती भी शामिल है। साथ ही लघु और मझौले उद्योगों के लिए सरकार द्वारा ऋण आश्वासन और असंगठित कामगारों के लिए आजीविका की सुरक्षा भी शामिल है क्योंकि विभिन्न क्षेत्रों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा।
भारत ने बहुत से बचावकारी उपाय अपनाए हैं जिन में एक दूसरे से दूरी बनाए रखना और बहुत सी छोटी-बड़ी इकाइयों का अस्थाई रूप से बंद होना भी शामिल है। फ़िक्की जैसे सर्वोच्च उद्योग परिसंघों ने इस समस्या से उद्योग और व्यापार को उबारने के लिए वित्तीय, मौद्रिक और वित्त बाज़ार के हस्तक्षेप की मांग की है और भारतीय उद्योग परिसंघ प्रमुख विक्रम किर्लोस्कर ने कहा कि कोविड-19 संकट ख़त्म हो जाने के बाद इंडिया इंक को अपना संचालन और कारोबार सामान्य करने में तीन से 6 महीने लग सकते हैं।
आलेख- कौशिक रॉय, समाचार विश्लेषक, ऑल इंडिया रेडियो
अनुवाद- नीलम मलकानिया
प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार को राष्ट्र को संबोधित किया था और लोगों से रविवार, 22 मार्च को सुबह सात से रात नौ बजे तक स्वेच्छा से अपने घरों में ही रहने का आह्वान किया था। पूरे देश ने इस महान कार्य में सहयोग किया। ज़रूरी सेवाएँ चालू रहीं। जन स्वास्थ्य को देखते हुए बहुत से राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों ने 31 मार्च तक पूरी तरह लॉकडाउन या बंद की घोषणा की है। कोरोना विषाणु को तीसरे चरण यानी कि सामुदायिक स्तर पर फैलने से रोकने के लिए ये बहुत ज़रूरी है। उन्होंने लोगों से घरों में रहने और केवल बहुत ज़रूरी होने पर ही घर से निकलने का अनुरोध किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सजग रहने की ज़रूरत पर बल दिया है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को घबराने की नहीं बल्कि तैयार रहने की ज़रूरत है। उन्होंने सफ़ाई रखने और सामाजिक दूरी बनाकर रखने के लिए भी कहा। श्री मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में इस महामारी से लड़ने के लिए ठोस प्रयासों की बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई भी देश कोविड 19 से अछूता नहीं रहेगा। भारतीय उद्योगों, कारोबार और छोटे उद्यमियों के मुद्दों को सुलझाने के लिए वित्त मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय आर्थिक कार्यबल भी गठित किया गया है।
रेल तथा सड़क सेवाओं को लॉकडाउन के दौरान रोक दिया गया है। ये केवल अतिआवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मियों के लिए ही उपलब्ध होंगी। किराने की दुकानें, चिकित्सा से जुड़ा सामान बेचने वाली दुकानें, बैंक, अस्पताल, पैट्रोल पंप और पुलिस तथा दमकल विभाग जैसी अन्य आपात सेवाएँ सामान्य रूप से सुचारु रहेंगी। प्रधानमंत्री मोदी ने एक ट्वीट के माध्यम से जनता से इस बंद के दौरान प्रशासन के साथ सहयोग करने की मांग की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये हमारी अपनी और अपने प्रियजनों की सुरक्षा सुनिश्चित के लिए बहुत ज़रूरी है।
हालिया जानकारी मिलने तक भारत में चार सौ से अधिक लोगों में कोविड 19 संक्रमण होने की पुष्टि हो चुकी है। 25 लोगों को ठीक होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है और 8 लोगों की मृत्यु हो गई है। कोविड 19 संक्रमण वाले मरीज़ों का उपचार करने के लिए अस्पतालों ने अलग वार्ड तैयार किए हैं। भारत पहुँचने वाले दस लाख से अधिक यात्रियों की जाँच की जा चुकी है ताकि इस विषाणु को फैलने से रोका जा सके।
भारत ने 15 अप्रैल तक कार्य और कूटनीतिक वीज़ा प्रदान किए जाने पर रोक लगा दी है। 29 मार्च तक अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन रद्द कर दिया गया है। देश में इस रोग को फैलने से रोकने के लिए ये उपाय किए गए हैं।
भारत को अर्थव्यवस्था के बहुत से क्षेत्रों पर पड़ रहे इसके बुरे प्रभाव का सामना करने के लिए कई तरह के उपाय करने होंगे। इसमें सर्वोच्च बैंक, रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के संयोजन द्वारा नीति दरों में तुरंत कटौती भी शामिल है। साथ ही लघु और मझौले उद्योगों के लिए सरकार द्वारा ऋण आश्वासन और असंगठित कामगारों के लिए आजीविका की सुरक्षा भी शामिल है क्योंकि विभिन्न क्षेत्रों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा।
भारत ने बहुत से बचावकारी उपाय अपनाए हैं जिन में एक दूसरे से दूरी बनाए रखना और बहुत सी छोटी-बड़ी इकाइयों का अस्थाई रूप से बंद होना भी शामिल है। फ़िक्की जैसे सर्वोच्च उद्योग परिसंघों ने इस समस्या से उद्योग और व्यापार को उबारने के लिए वित्तीय, मौद्रिक और वित्त बाज़ार के हस्तक्षेप की मांग की है और भारतीय उद्योग परिसंघ प्रमुख विक्रम किर्लोस्कर ने कहा कि कोविड-19 संकट ख़त्म हो जाने के बाद इंडिया इंक को अपना संचालन और कारोबार सामान्य करने में तीन से 6 महीने लग सकते हैं।
आलेख- कौशिक रॉय, समाचार विश्लेषक, ऑल इंडिया रेडियो
अनुवाद- नीलम मलकानिया
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