भारत के म्यांमार साथ मज़बूत होते सम्बंध
म्यांमार गणराज्य के राष्ट्रपति, यू विन म्यिंट भारत की यात्रा पर आये। भारत की "एक्ट ईस्ट" और पड़ोसी पहले यानि नेबरहुड फ़र्स्ट' नीतियों में म्यांमार का महत्वपूर्ण भूमिका है। यह सीएलएमवी यानि कंबोडिया, लाओ पीडीआर, म्यांमार और वियतनाम देशों में अपनी पहुंच बढाने के लिए भारत की कुंजी है क्योंकि हमारा प्राथमिक उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ व्यापक आर्थिक और रणनीतिक संबंध विकसित करना है।
राजकीय स्वागत के बाद, राष्ट्रपति यू विन म्यिंट ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के साथ बातचीत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। दोनों नेताओं ने आपसी महत्व के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
उच्च स्तरीय यात्रा के दौरान द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए दस समझौता ज्ञापनों और अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। राखाइन में सामाजिक्-आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए भारत वचनबद्ध है। राखाइन राज्य विकास कार्यक्रम के तहत, दोनों देश मराउक ओओ कस्बे के अस्पताल में भस्मक के निर्माण, गावा कस्बे में बीज गोदाम और पानी की आपूर्ति प्रणाली, पांच कस्बो में सौर ऊर्जा द्वारा बिजली वितरण, बुटाहेडुंग कस्बे में क्यल्यांग- ओहलफ्यु सड़क और कयांग तुंग क्याओ पांग के निर्माण में सहयोग करेंगे। 2019 में, भारत ने उत्तरी राखाइन में विस्थापितों के लिए पूर्व-निर्मित मकान और राहत सामग्री मुहैया कराई थी। इसके अलावा, मेकांग-गंगा सहयोग तंत्र के तहत उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजनाओं और त्वरित प्रभाव परियोजनाओं के ढांचे के अनुसार विकास सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक समझौता किया गया है।
म्यांमार भारत के क्षेत्रीय संपर्क क्षेत्र के मूल भाग में स्थित है। सिटवे बंदरगाह और कलादान बहुउद्देशीय मोडल पारगमन परिवहन परियोजना भारत की प्राथमिकता है। सिटवे बंदरगाह और Paletwa Inland Water Transport Terminal के लिए एक बंदरगाह संचालक की नियुक्ति फरवरी 2020 में की गयी है। पलेतवा-ज़ोरिंपुई (Paletwa-Zorinpui) सड़क के समय से पहले पूरा होने के काम पर, सिटवे को उत्तर-पूर्व भारत से जोड़ने वाले कलादानो राजमार्ग के पूरा होने के अंतिम चरण की बात सबके सामने आयी है। इसके अलावा, 2021 तक त्रिपक्षीय राजमार्ग के कालवा-यारगी खंड पर काम पूरा होने की संभावना है। भारत त्रिपक्षीय राजमार्ग पर 69 पुलों का नवीनीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। तमू में चरण- I में आधुनिक एकीकृत नाका चौकी के निर्माण और मोटर वाहन समझौते पर चर्चा के जल्द पूरा कर निष्कर्ष पर पहुंचना मुद्दा बना हुआ है। अप्रैल 2020 तक इंफाल (उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्य मणिपुर में) और मंडालय के बीच एक समन्वित बस सेवा शुरू किये जाने के लिए निजी संचालको के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
भारत व्यावहारिक रूप से क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में लगा हुआ है; म्यांमार सूचना और प्रौद्योगिकी संस्थान (MIIT) और कृषि अनुसंधान और शिक्षा के लिए उन्नत केंद्र (ACARE) जैसी प्रमुख परियोजनाएँ इसमें शामिल हैं। भारतीय अनुदान की सहायता से पाकोक्कू और मिंग्यान में स्थापित, म्यांमार-भारत औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र में युवाओं को कौशल प्रदान किया जाता है। मोनीवा और थाटन में अतिरिक्त केंद्र बनाए जा रहे हैं। चिन राज्य और नागा स्व-प्रशासित क्षेत्र में म्यांमार-भारत सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम बुनियादी ढांचे और सामाजिक-आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने की भूमिका निभाता है।
भारत की पड़ोसी पहले यानि नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सैन्य प्रशिक्षण, निगरानी और समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत समय की मांग है। म्यांमार में विद्रोहियों को निशाना बना कर भारतीय और म्यांमार सेनाओं के संयुक्त अभियान ने इस सम्बंध के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। सूचनाओं के विस्तार और खुफिया सूचनाओं के माध्यम से आतंकवादी समूहों और हिंसक अतिवाद का मुकाबला करने की बात को भी रेखांकित किया गया। रक्षा सहयोग के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन और समुद्री सुरक्षा सहयोग क्षेत्र में समझौता ज्ञापन और श्वेत शिपिंग डेटा के आदान-प्रदान से द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग मजबूत हुआ है।
एशिया की गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के कारण म्यांमार में भारत के लिए कई अवसर है। द्विपक्षीय व्यापार क्षमता के अनुरूप नही है हालांकि आर्थिक सम्बंधो में लगभग 1.75 अरब अमेरिकी डॉलर की सम्भावना हैं। कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने, बाजार में पहुंच, वित्तीय लेनदेन में सहायता करने, आपसी व्यापार को सरल बनाने और द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यापारिक समझौतों को बल देने की आवश्यकता है। भारत के ऊर्जा सम्बंधों में म्यांमार एक महत्वपूर्ण भागीदार है। ऊर्जा क्षेत्र में बेहतर एकीकरण की आवश्यकता है। भारतीय तेल और गैस सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) ने म्यांमार में निवेश किया है और उत्पादन के एक हिस्से को भारत को निर्यात करने के अवसर तलाश रहे हैं।
द्विपक्षीय सम्बंध साझा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक सम्बंधों में निहित हैं। राष्ट्रपति यू विन म्यिंट ने बोधगया और आगरा का भी दौरा किया। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में व्यापक भू-रणनीतिक विकास की पृष्ठभूमि में सहयोग के लिए भारत द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लगातार निवेश करता रहेगा।
आलेख:- डॉ. तितली बसु, पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के रणनीतिक विश्लेषक
अनुवाद एवं स्वर- वीरेन्द्र कौशिक
राजकीय स्वागत के बाद, राष्ट्रपति यू विन म्यिंट ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के साथ बातचीत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के राष्ट्रपति के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। दोनों नेताओं ने आपसी महत्व के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
उच्च स्तरीय यात्रा के दौरान द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए दस समझौता ज्ञापनों और अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। राखाइन में सामाजिक्-आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए भारत वचनबद्ध है। राखाइन राज्य विकास कार्यक्रम के तहत, दोनों देश मराउक ओओ कस्बे के अस्पताल में भस्मक के निर्माण, गावा कस्बे में बीज गोदाम और पानी की आपूर्ति प्रणाली, पांच कस्बो में सौर ऊर्जा द्वारा बिजली वितरण, बुटाहेडुंग कस्बे में क्यल्यांग- ओहलफ्यु सड़क और कयांग तुंग क्याओ पांग के निर्माण में सहयोग करेंगे। 2019 में, भारत ने उत्तरी राखाइन में विस्थापितों के लिए पूर्व-निर्मित मकान और राहत सामग्री मुहैया कराई थी। इसके अलावा, मेकांग-गंगा सहयोग तंत्र के तहत उच्च प्रभाव वाली सामुदायिक विकास परियोजनाओं और त्वरित प्रभाव परियोजनाओं के ढांचे के अनुसार विकास सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक समझौता किया गया है।
म्यांमार भारत के क्षेत्रीय संपर्क क्षेत्र के मूल भाग में स्थित है। सिटवे बंदरगाह और कलादान बहुउद्देशीय मोडल पारगमन परिवहन परियोजना भारत की प्राथमिकता है। सिटवे बंदरगाह और Paletwa Inland Water Transport Terminal के लिए एक बंदरगाह संचालक की नियुक्ति फरवरी 2020 में की गयी है। पलेतवा-ज़ोरिंपुई (Paletwa-Zorinpui) सड़क के समय से पहले पूरा होने के काम पर, सिटवे को उत्तर-पूर्व भारत से जोड़ने वाले कलादानो राजमार्ग के पूरा होने के अंतिम चरण की बात सबके सामने आयी है। इसके अलावा, 2021 तक त्रिपक्षीय राजमार्ग के कालवा-यारगी खंड पर काम पूरा होने की संभावना है। भारत त्रिपक्षीय राजमार्ग पर 69 पुलों का नवीनीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। तमू में चरण- I में आधुनिक एकीकृत नाका चौकी के निर्माण और मोटर वाहन समझौते पर चर्चा के जल्द पूरा कर निष्कर्ष पर पहुंचना मुद्दा बना हुआ है। अप्रैल 2020 तक इंफाल (उत्तर-पूर्वी भारतीय राज्य मणिपुर में) और मंडालय के बीच एक समन्वित बस सेवा शुरू किये जाने के लिए निजी संचालको के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
भारत व्यावहारिक रूप से क्षमता निर्माण कार्यक्रमों में लगा हुआ है; म्यांमार सूचना और प्रौद्योगिकी संस्थान (MIIT) और कृषि अनुसंधान और शिक्षा के लिए उन्नत केंद्र (ACARE) जैसी प्रमुख परियोजनाएँ इसमें शामिल हैं। भारतीय अनुदान की सहायता से पाकोक्कू और मिंग्यान में स्थापित, म्यांमार-भारत औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र में युवाओं को कौशल प्रदान किया जाता है। मोनीवा और थाटन में अतिरिक्त केंद्र बनाए जा रहे हैं। चिन राज्य और नागा स्व-प्रशासित क्षेत्र में म्यांमार-भारत सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम बुनियादी ढांचे और सामाजिक-आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने की भूमिका निभाता है।
भारत की पड़ोसी पहले यानि नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए सैन्य प्रशिक्षण, निगरानी और समुद्री सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत समय की मांग है। म्यांमार में विद्रोहियों को निशाना बना कर भारतीय और म्यांमार सेनाओं के संयुक्त अभियान ने इस सम्बंध के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। सूचनाओं के विस्तार और खुफिया सूचनाओं के माध्यम से आतंकवादी समूहों और हिंसक अतिवाद का मुकाबला करने की बात को भी रेखांकित किया गया। रक्षा सहयोग के क्षेत्र में समझौता ज्ञापन और समुद्री सुरक्षा सहयोग क्षेत्र में समझौता ज्ञापन और श्वेत शिपिंग डेटा के आदान-प्रदान से द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग मजबूत हुआ है।
एशिया की गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के कारण म्यांमार में भारत के लिए कई अवसर है। द्विपक्षीय व्यापार क्षमता के अनुरूप नही है हालांकि आर्थिक सम्बंधो में लगभग 1.75 अरब अमेरिकी डॉलर की सम्भावना हैं। कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने, बाजार में पहुंच, वित्तीय लेनदेन में सहायता करने, आपसी व्यापार को सरल बनाने और द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यापारिक समझौतों को बल देने की आवश्यकता है। भारत के ऊर्जा सम्बंधों में म्यांमार एक महत्वपूर्ण भागीदार है। ऊर्जा क्षेत्र में बेहतर एकीकरण की आवश्यकता है। भारतीय तेल और गैस सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) ने म्यांमार में निवेश किया है और उत्पादन के एक हिस्से को भारत को निर्यात करने के अवसर तलाश रहे हैं।
द्विपक्षीय सम्बंध साझा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक सम्बंधों में निहित हैं। राष्ट्रपति यू विन म्यिंट ने बोधगया और आगरा का भी दौरा किया। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में व्यापक भू-रणनीतिक विकास की पृष्ठभूमि में सहयोग के लिए भारत द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए लगातार निवेश करता रहेगा।
आलेख:- डॉ. तितली बसु, पूर्व और दक्षिण-पूर्व एशिया के रणनीतिक विश्लेषक
अनुवाद एवं स्वर- वीरेन्द्र कौशिक
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