भारतीय व्यापारिक भागीदारी विदेश नीति साथ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार (NDA) ने अपनी विदेश नीति में B2B (व्यवसाय से व्यवसाय) की साझेदारी पर ध्यान केंद्रित किया है। यह उल्लेखनीय है कि भारत द्वारा अपने साझेदार देशों को कम ब्याज दरों पर उधार क्षमता यानि लाइन ऑफ क्रेडिट उपलब्ध करने के काम में काफी प्रगति देखी जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में उनमें पैमाने, जटिलता और कवरेज का विस्तार हुआ जो सैकड़ों की संख्या में हैं। विदेशों में परियोजनाओं को पूरा करने से लेकर सेवाओं के विस्तार और उत्पादों की आपूर्ति करने तक उनका उद्देश्य है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने व्यापार शिखर सम्मेलन में भारत के राजनयिक व्यापार पसंद दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
उधार क्षमता यानि लाइन ऑफ क्रेडिट के बीच साझी बात यह है कि किसी भी उधार क्षमता यानि लाइन ऑफ क्रेडिट में 65% से 75% भारत की सहमति होती है। प्रत्येक देश, अपने तरीके से, हमारी भारतीय कंपनियों के लिए विदेशो के बाजार में पहुंच बनाने का काम करता है। चूंकि लाइन ऑफ क्रेडिट की संप्रभु गारंटी है, इसलिए यह भारतीय कंपनियों को उन बाजारों में काम करने में सहायता करता है जहां वें आमतौर पर जोखिम होने के कारण कारोबार नहीं करते हैं।
अब तक, भारत 539 परियोजनाओं में शामिल 64 देशों को 300 उधार क्षमता यानि लाइन्स ऑफ क्रेडिट की पेशकश कर चुका है। इन पहलों का हाल के वर्षों में गुणात्मक रूप से विस्तार किया गया है, विशेषकर लाइन्स ऑफ क्रेडिट के मात्रा और परियोजनाओं की रूपरेखा के संदर्भ में। प्रधानमंत्री के प्रयासों की कड़ी के फलस्वरूप सरकार के दृष्टिकोण और मजबूत निरीक्षण की वजह से योजना और निष्पादन भी अधिक एकीकृत- अधिक कुशल हो गए हैं। नतीजतन, पिछले कुछ वर्षों में, एक महीने में 2 से अधिक बड़ी परियोजनाएं पूरी हो रही हैं। जब उच्च-प्रभावी विकास परियोजनाओं की बात आती है, जो हमारे पड़ोसी देशों में जमीनी स्तर पर प्रभाव डालती है, तो भारत एक सप्ताह में 4 परियोजनाओं को पूरा कर रहा है। यह मतलब निकालने के लिए की जाने वालें कामों की उपलब्धि नहीं है। उधार क्षमता यानि लाइन ऑफ क्रेडिट और परियोजनाएं बड़े पैमाने पर अफ्रीका में शुरू की गयी है जिसे देखते हुए सरकार ने उस महाद्वीप के साथ भारत की विकास साझेदारी पर ध्यान दिया है। इसके अंतर्गत 205 लाइन ऑफ क्रेडिट वाली 321 परियोजनाएं आती हैं। एशिया में 181 परियोजनाएँ, 32 लैटिन अमेरिका और कैरिबियन में तथा मध्य एशिया और ओशिनिया दोनों में तीन-तीन हैं। कैरेबियाई से लेकर प्रशांत द्वीप समूह तक, अनुदान सहायता के रूप में दी गयी धन राशी लाइन ऑफ क्रेडिट सीमा से भी ज्यादा है। डॉ. जयशंकर ने कहा--कि आज, ये विकास साझेदारीयां भारत के कूटनीतिक कदमों को और अधिक वैश्विक बनाने में मददगार साबित हो रही हैं।
भूटान के साथ हमारे संबंधों में विकास की भागीदारी सबसे अधिक महत्वपूर्ण है, बिजली क्षेत्र में इस भागीदारी का लंबा और सफल इतिहास रहा है। हमारे पड़ोसी देशों में लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत बांग्लादेश में प्रमुख रेल पुल, श्रीलंका में रेलवे ट्रैक का पुनर्निर्माण, नेपाल में सड़क परियोजनाएं और बिजली के तारों की लाइनें तथा मॉरीशस में मेट्रो एक्सप्रेस अन्य प्रतिष्ठित परियोजनाओं में शामिल हैं।
विदेश मंत्री ने देखा, अफ्रीका में, सूडान, रवांडा, ज़िम्बाब्वे और मलावी में बिजली क्षेत्र को कवर करने वाली, मोजाम्बिक, तंजानिया और गिनी में पानी, कोटे डी आइवर, गिनी और ज़ाम्बिया में स्वास्थ्य,इथियोपिया और घाना में चीनी संयंत्र, जिबूती में सीमेंट और कांगो गणराज्य और गाम्बिया और बुरुंडी में सरकारी भवनों वाली प्रमुख परियोजनाएँ लाइन ऑफ क्रेडिट के तहत आती हैं। वास्तव में, कई अफ्रीकी देशों में, कुछ विनिर्माण संयंत्र भारतीय कंपनियों ने स्थापित किए हैं जो वास्तव में अपनी तरह के पहले और अग्रणी है। इस तरह से, वे हमारी आर्थिक क्षमताओं और राष्ट्रीय ब्रांडिंग के साक्ष्य हैं। इस प्रकार वे भारतीय कंपनियों के लिए एक आधार बन जाते हैं, जो मोटे तौर पर उन विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में तेजी से व्यवसाय बढाने में लगी हुई हैं। यह महत्वपूर्ण है कि परिणामस्वरूप, पिछले 5 वर्षों में, हमने अफ्रीकी देशों में खरीदारों के लिए क्षमता को एक अरब अमरीकी डॉलर तक बढा दिया है।
नई दिल्ली ने क्रेडिट लाइनों के अलावा, भारत उन देशों में शुरू अपनी परियोजनाओं के लिए उन देशों को अनुदान के तौर पर सहायता राशि भी देता है। अगर मॉरीशस और सेशेल्स भी शामिल हो तो आश्चर्य नहीं कि इन 272 अनुदान परियोजनाएं हमारे निकट पड़ोस में ही चलाई जा रही है।
डॉ. जयशंकर ने कहा, अफगान संसद और सलमा बांध, श्रीलंका में तमिलों के लिए आवास परियोजनाएं, म्यांमार में कलादान परिवहन परियोजना, मॉरीशस में सुप्रीम कोर्ट और नेपाल के साथ बिराटन ट्रिब्यूट नाका चौकी इन प्रतिष्ठित अनुदान परियोजनाओं में शामिल हैं। दुनिया के लिए कई फलक, ब्रांड इंडिया के पास हैं और बिजनेस इंडिया इसके सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है।
आलेख:- कौशिक रॉय, आकाशवाणी: समाचार विश्लेषक
अनुवाद एवं स्वर- वीरेन्द्र कौशिक
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