संसद में बीता सप्ताह



इस सप्ताह कोरोना विषाणु के ख़तरे समेत बहुत से अन्य मुद्दे संसद के दोनों सदनों में छाए रहे। विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन ने लोक सभा को बताया कि संयुक्त अरब अमारात में रहने वाले 8 भारतीय पृथकवास में हैं यानी अलग-थलग रह रहे हैं जबकि कुवैत से ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है।

ईरान में 6 हज़ार से ज़्यादा भारतीय हैं जिनमें मुख्य रूप से केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख तथा जम्मू और कश्मीर तथा महाराष्ट्र से लगभग 11 सौ तीर्थयात्री, जम्मू और कश्मीर तथा अन्य क्षेत्रों के लगभग तीन सौ छात्र, केरला, तमिलनाडू और गुजरात तथा अन्य क्षेत्रों के लगभग एक हज़ार मछुआरे तथा ईरान में धार्मिक शिक्षा या आजीविका के लिए लंबे समय से रह रहे अन्य भारतीय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ईरान में फँसे भारतीयों को सुरक्षित वापिस लाने की कोशिशों पर ध्यान दे रही है। जाँच तथा नमूने एकत्र करने के लिए 6 भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों का एक दल ईरान भेजा गया है।

उन्होंने बताया कि जाँच के लिए ईरान में मौजूद तीर्थयात्रियों, छात्रों और अन्य भारतीयों के एक हज़ार सात सौ छ: नमूने लिए जा चुके हैं और 16 मार्च को 389 भारतीयों को चार समूहों में भारतीय वायु सेना और ईरानी एयरलाईन द्वारा भारत लाया गया है जिनमें 205 तीर्थयात्री और अन्य छात्र शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जाँच हो जाने के बाद भारतीय नागरिकों को ईरान से जल्द से जल्द भारत लाने की कोशिशें जारी हैं। स्थिति का नियमित रूप से जायज़ा लिया जा रहा है।

अन्य सवाल के जवाब में श्री मुरलीधरन ने बताया कि केन्द्र सरकार ने 26 फ़रवरी 2020 को मास्क, दस्ताने और अन्य आपात चिकित्सा उपकरण वाली 15 टन की चिकित्सा सहायता चीन को उपलब्ध करवाई है। ये मदद मित्रता और एकजुटता के प्रतीक के रूप में भारतीय नागरिकों की ओर से चीनी नागरिकों के लिए भेजी गई है क्योंकि दोनों देश इस साल अपने कूटनीतिक रिश्तों की सत्तरवीं वर्षगाँठ भी मना रहे हैं। सरकार ने भारत में कोविड-19 से बचाव की तैयारियों के लिए किए जा रहे उपायों और पूरी स्थिति की समीक्षा करने के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री, डॉ. हर्षवर्धन की अध्यक्षता में मंत्रियों का एक उच्च स्तरीय समूह गठित किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी इस समूह का हिस्सा हैं। मंत्रालय ने कई परामर्श भी जारी किए हैं।

श्री मुरलीधरन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिंपिंग को 8 फ़रवरी 2020 को चीन में फैले कोरोना विषाणु के संदर्भ में एक पत्र लिखकर भारतीय लोगों और सरकार की ओर से चीन की जनता के प्रति एकजुटता व्यक्त की थी और लिखा था कि भारत सरकार मदद करने के लिए तैयार है।

विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया कि भारत ने सक्रियता से अंतरराष्ट्रीय समुदाय को जम्मू और कश्मीर के बारे में स्थिति स्पष्ट की है और साथ ही नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के लक्ष्यों और उद्देश्यों के बारे में भी बताया है। राज्य सभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री वी. मुरलीधरन द्वारा ये लिखित सूचना उपलब्ध करवाई गई। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि डायमंड प्रिंसेस क्रूज़ शिप में 132 कर्मीदल सदस्यों सहित कुल 138 भारतीय नागरिक मौजूद थे। इन में से 27 फ़रवरी 2020 को एक विशेष उड़ान द्वारा 119 भारतीयों को वापिस लाया गया। भारत लौटने पर हरियाणा के मानेसर स्थित भारतीय सैन्य संस्थान में इन्हें अलग-थलग रखा गया।

विदेश राज्य मंत्री ने बताया कि नई दिल्ली ने 766 व्यक्तियों को बचाने के लिए 31 जनवरी, पहली फ़रवरी और 26 फ़रवरी को तीन विशेष उड़ानों का प्रबंध किया था। इनमें वुहान से छात्र तथा चीन के हुबेई प्रांत से छात्र शामिल थे क्योंकि कोरोना विषायु फैलने की वजह से ये स्थान पूरी तरह बंद किए जा रहे थे। श्री मुरलीधरन ने कहा कि सरकार लौटने के इच्छुक अपने पड़ौसी देशों के नागरिकों को भी वापिस लाना चाहती है। अभी तक 723 भारतीयों और 43 विदेशियों को सुरक्षित निकाला गया है। इन में बांग्लादेश के 23, मालदीव के 9, म्यांमा के दो नागरिक, दक्षिण अफ्रीका का एक, मेडागास्कर का एक और एक अमरीकी नागरिक शामिल है जो कि भारतीय नागरिक का साथी है। इसके अतिरिक्त 6 ऐसे चीनी नागरिकों को भी बचाया गया है जो या तो भारतीय नागरिकों के जीवनसाथी हैं या फिर उनकी संतान हैं। श्री मुरलीधरन ने बताया कि 18 फ़रवरी 2020 को एक यात्रा परामर्श भी जारी किया जा चुका है।

आलेख- वी मोहन राव, पत्रकार

अनुवाद- नीलम मलकानिया

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