द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देते भारत और बांग्लादेश

भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रंग्ला की ढाका यात्रा से बांग्लादेश के साथ भारत के निकट संबंधों का पता चलता है। प्रधानमंत्री शेख़ हसीना वाली बांग्लादेश की वर्तमान अवामी लीग सरकार के नेतृत्व में द्विपक्षीय संबंधों को विशेष बढ़ावा मिला है।

श्री श्रंग्ला की ढाका यात्रा का महत्व इसलिए भी है क्योंकि वे जनवरी 2019 तक बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के रूप में नियुक्त रहे हैं और उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाई है। हालिया समय में ढाका ने भारत में उन घरेलू गतिविधियों को लेकर कुछ आरक्षण भी दर्शाया था जिनके बारे में लगता था कि देश के भीतर उनका असर हो सकता है। लेकिन फिर भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ढाका को आश्वासन दिया कि भारतीय गतिविधियों का बांग्लादेश और ढाका पर असर नहीं पड़ेगा और अधिकारी स्तर पर इस बारे में वार्ता की गई है।

विदेश सचिव की यात्रा का मुख्य कारण इसी माह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ढाका यात्रा की तैयारियाँ हैं। प्रधानमंत्री बंगबंधु शेख़ मुजिबुर रहमान की जन्म शताब्दी के अवसर पर होने वाले आयोजन में शामिल होने के लिए जाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शेख़ मुजिबुर रहमान हमारे भी राष्ट्रीय नायक हैं। आने वाले सप्ताहों में दोनों देश अन्य बहुत से मुद्दों पर भी विचार करेंगे।

पिछले कुछ वर्षों से ढाका और दिल्ली के संबंध लगातार गहराते जा रहे हैं। दोनों देशों ने परस्पर चिंताओं को ध्यान में रखते हुए बहुत से क़दम उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता द्वारा थल सीमा समझौते और समुद्री समझौते से पिछली विभिन्न शिक़ायतों को दूर करने में भारतीय रवैए में मदद मिली। सीमाओं के सीमांकन की निगरानी बेहतर हुई है और सीमा पर भड़काऊ गतिविधियाँ कम हुई हैं जैसी कि 2001 में पिरदिवाह के दौरान हुई थी। लेकिन अभी भी सीमा पर कभी-कभी होने वाली गोलीबारी की घटनाओं से अवैध गतिविधियों का पता चलता है जिनकी वजह से सीमा पर निगरानी के समय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

भारत ने 2011 में 61 वस्तुओं को शुल्क मुक्त किया है इसलिए दविपक्षीय व्यापार में बढ़ावा हुआ है। इन में अधिकतर वस्त्रोद्योग मदें शामिल हैं। निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो डाटा के अनुसार बांग्लादेश का भारत को निर्यात 42.91 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1.25 अरब डॉलर पर पहुँचा जो कि पिछले वित्त वर्ष में 873.27 मिलियन डॉलर था। इससे पता चलता है कि ढाका का निर्यात समय के साथ कैसे बढ़ा है।

बांग्लादेश प्रतिवर्ष सात प्रतिशत से अधिक की गति से बढ़ रहा है इसलिए द्विपक्षीय व्यापार में अभी और अधिक बढ़ावा होगा। ग़ैर-शुल्क बाधाएं हालांकि अभी भी एक मुख्य बाधा बनी हुई हैं। निर्माणाधीन सम्पर्क और अवसंरचनात्मक परियोजनाओं, बांग्लादेश भूटान भारत और नेपाल मोटर वाहन एक्ट तथा बिमस्टेक एमवीए की मदद से द्विपक्षीय व्यापार नई ऊँचाइयाँ छूने वाला है। ऊर्जा व्यापार और जल-मार्गों का बेहतर संचालन भी व्यापार और वाणिज्य बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।

उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस माह ढाका यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी पहले से अच्छा होगा। हालांकि भारत ने रक्षा क्षेत्र के लिए 500 मिलियन डॉलर की ऋण व्यवस्था प्रदान की है लेकिन फिर भी दोनों देश इसे लागू करने के लिए विचार-विमर्श कर रहे हैं।

शायद अब समय आ गया है कि ऋण व्यवस्था को और आगे बढ़ाया जाए। दोनों देशों ने 2019 में तटीय निगरानी व्यवस्था स्थापित करने के लिए भी एक सहमति समझौता किया था। यात्रा के दौरान इस पर अतिरिक्त विचार-विमर्श हो सकता है। दोनों देश आतंकरोध अभ्यास के लिए पहले से ही सम्प्रति शृंख्ला चला रहे हैं और साझी सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए साथ मिलकर गश्त भी करते हैं।

7.5 अरब डॉलर का ऋण तुरंत प्रदान किए जाने की ज़रूरत है। रिपोर्ट के अनुसार हमारे द्वारा प्रदान की गए 4 ऋण व्यवस्थाओं में से 8 वर्षों में केवल 51 प्रतिशत का ही इस्तेमाल किया गया है। तीन रेल परियोजनाओं में 510.12 मिलियन डॉलर शामिल है जो कि विभिन्न ऋण व्यवस्थाओं के अंतर्गत निर्धारित किए गए थे। इन में से दिसंबर 2019 तक सिर्फ़ 87.70 मिलियन डॉलर का ही इस्तेमाल किया गया। ढाका ने राशि अदायगी की परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में देर की है। इसलिए कुछ परियोजनाओं की लागत बढ़ गई है।

नई रेलों और बसों के चलने से पिछले कुछ सालों में जन से जन का सम्पर्क भी बेहतर हुआ है। भारत सरकार की पड़ौस पहले नीति के अंतर्गत अलग से चिकित्सा वीज़ा प्रदान करने और वीज़ा नियमों में ढील देना भी एक और अहम गतिविधि है। इस परिदृश्य में उच्च स्तर पर दोनों देशों के बीच सक्रियता को बढ़ावा देने के मद्देनज़क भारत के विदेश सचिव की यात्रा बहुत अहम है।

विषय- डॉ. स्मृति एस पटनायक, दक्षिण एशियाई सामरिक मामलों की विश्लेषक

अनुवाद- नीलम मलकानिया

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