ब्लू डॉट पहल से हिन्द-प्रशांत के लिए नई संभावनाओं के द्वार खुले
अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड जे॰ ट्रम्प की हाल ही में सम्पन्न भारत यात्रा के दौरान उनकी तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई चर्चाओं में “ब्लू डॉट” नेटवर्क की चर्चा मुख्य मुद्दों में शामिल थी |
राष्ट्रपति ट्रम्प तथा प्रधानमंत्री मोदी के बीच के परामर्शों के बाद जारी साझा वक्तव्य में कहा गया है कि “विकासशील तथा कम-आयवाले देशों में निर्मित संप्रभु ऋण को नियंत्रित करने के लिए उधारकर्ताओं तथा ऋणदाताओं दोनों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे ज़िम्मेदार, पारदर्शी तथा सुस्थिर वित्तीय अभ्यास को सुनिश्चित करें, जिसे अमरीका तथा भारत स्वीकार करते हैं | श्री ट्रम्प तथा भारतीय प्रधानमंत्री ने ब्लू डॉट नेटवर्क की संकल्पना में रुचि दिखाई | कथित नेटवर्क एक बहु-हिस्सेदारीवाली पहल है, जिसके अंतर्गत वैश्विक आधारभूत संरचना विकास के लिए उच्च-गुणवत्ता के मानकों को बढ़ावा देने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र तथा नागरिक समाज एक साथ मिलकर काम करेंगे |” भारत भी ब्लू डॉट नेटवर्क से जुड़ने की संभावना पर विचार कर रहा है |
ब्लू डॉट नेटवर्क का उद्देश्य स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करना है कि विकासशील देशों, विशेषकर हिन्द-प्रशांत क्षेत्र के देशों में विदेशी-वित्त पोषित आधारभूत संरचना के निर्माण में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के नियमों का पालन किया गया है या नहीं ? ध्यान देनेवाली बात यह है कि भारत तथा अमरीका दोनों ने हिन्द-प्रशांत में आधारभूत संरचना निवेश के अभ्यासों को लेकर चिंता जताई है | यह चिंता विशेषकर एशिया को लेकर जताई गई है, जिस कारण प्रायः प्रापक देशों के हिस्से में विशाल ऋण का बोझ बढ़ जाता है | श्रीलंका, मालदीव तथा मलेशिया जैसे देशों ने पिछली बेल्ट तथा सड़क पहल (बी॰आर॰आई॰) के हिस्से के रूप में चीन से लिए गए ऋण के भुगतान में कठिनाइयों का सामना किया है | बी॰आर॰आई॰ की शुरुआत 2013 में वन बेल्ट, वन रोड (ओबोर) पहल के रूप में की गई थी |
जापान, ऑस्ट्रेलिया तथा अमरीका के नेतृत्व में बैंकॉक में हिन्द-प्रशांत व्यवसाय मंच पर नवंबर 2019 में ब्लू डॉट नेटवर्क की शुरुआत हुई, जिसका उद्देश्य ऋण-जाल, पारदर्शिता की कमी तथा छोटे और कम-विकसित देशों में आधारभूत संरचना विकास पर किए गए निवेशों में निरंतरता से संबन्धित चुनौतियों को संबोधित करना है | ब्लू डॉट नेटवर्क की एक मुख्य विशेषता यह है कि यह निष्पक्ष तथा सार्वजनिक रूप से ऋण प्रदान करनेवाली एजेंसियों का निश्चित मानकों पर निर्धारण करता है, जिससे कि संभावित प्राप्तकर्ता एक सूचित निर्णय लेने योग्य हो सके |
इसे मुख्य रूप से चीन की बेल्ट तथा सड़क पहल के प्रति अमरीका की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है | कथित पहल को ऑसऐड (ऑस्ट्रेलिया), जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) तथा अमरीका के अंतर्राष्ट्रीय विकास वित्त निगम वित्त मुहैया कराएंगे | इस पहल का उद्देश्य हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में मूलभूत परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए निजी क्षेत्र को संगठित करना है | यह पहल ब्लू डॉट नेटवर्क पहल में अग्रणी भूमिका निभा सकती है | ऐसी भी ख़बर है कि यह व्यापारसंघ 50 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक की धनराशि जुटा चुका है | इसके अलावा, यह अमरीकी कोंग्रेसनल समर्थन भी प्राप्त कर चुका है | रेटिंग प्रणाली हिन्द-प्रशांत क्षेत्र के कम विकसित देशों में निवेश के लिए अमरीकी निजी निवेशकों को सुविधा पहुंचाएगी | इस प्रकार, इससे निजी अमरीकी निवेशकों तथा उनके प्राप्तकर्ता देशों के लिए एक सुखद स्थिति उत्पन्न होगी |
ब्लू डॉट नेटवर्क पहल अभी भी अपने आरंभिक चरण में है और आने वाले महीनों में यह किस तरह का आकार लेती है, इसे देखना शेष है | एक “सुरक्षित” मूलभूत संरचना परियोजना की एक व्यापक तथा वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य परिभाषा के साथ इसका आना इस संदर्भ में एक बड़ी चुनौती होगी | बहरहाल, यह स्पष्ट है कि मूलभूत संरचना विकास के लिए विदेशी निवेश को आमंत्रित करने में संभावित जोखिम तथा अवसरों को समझने में प्रमाणन प्रणाली प्रापक देशों के लिए सहायक होगी, क्योंकि यह संभावित परियोजनाओं की पारदर्शिता तथा वित्तीय निरंतरता के दोहरे मुद्दों पर एक पैनी निगरानी रखेगी |
आमतौर पर विकासशील दुनिया और विशेष रूप से एशिया विशाल मूलभूत संरचना की कमियों से जूझ रहे हैं | एशियाई विकास बैंक के अनुसार, इन कमियों की भरपाई के लिए प्रति वर्ष 1॰7 ट्रिलियन अमरीकी डॉलर के निवेश की आवश्यकता है, जिससे कि एशियाई देश अपने मूलभूत संरचना संपर्क उद्देश्यों का अनुभव कर सकें और अपनी जनसंख्या के सर्वोत्कृष्ट विकास को भी सुनिश्चित कर सकें |
ब्लू डॉट नेटवर्क भारत के लिए एक सकारात्मक विकास है | भारत अपनी घरेलू मूलभूत संरचना विकास परियोजनाओं के लिए निवेश के सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडेल के साथ प्रयोग करता रहा है | इस संदर्भ में, ब्लू डॉट नेटवर्क से समर्थित निजी तथा राज्य-संचालित निवेश के एक ज़िम्मेदार तथा संतुलित मिश्रण वर्तमान मूलभूत संरचना की कमियों को पूरा करने के लिए एक बढ़िया अवसर होगा |
आलेख – डॉ॰ राहुल मिश्रा, दक्षिणपूर्व तथा पूर्व एशिया मामलों के रणनीतिक विश्लेषक
अनुवादक/वाचक – मनोज कुमार चौधरी
अनुवादक/वाचक – मनोज कुमार चौधरी
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