भारत ने नेपाल के नए नक़्शे को ख़ारिज़ किया

नेपाल की संसद के निचले सदन, प्रतिनिधि सभा ने 13 जून, 2020 को देश के राजनीतिक तथा क्षेत्रीय नक़्शे को परिवर्तित करने के लिए एक संविधान संशोधन विधेयक को अनुमोदित किया | नेपाल के नए नक़्शे में उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ ज़िले के भारतीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों को नेपाल के क्षेत्र के रूप में दिखाया गया है|

एक प्रस्ताव को अंगीकार करते हुए, पूर्व में सदन ने विधेयक पर चर्चा तीव्र गति से की| मंत्रिमंडल ने नेपाल के नए नक़्शे को 18 मई, 2020 को अनुमोदित किया था, जिसमें कालापानी, लिम्पियाधुरा तथा लिपुलेख को नेपाली क्षेत्र के रूप में दिखया गया है| ये क्षेत्र उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत सदा से ही भारत के अभिन्न अंग रहे हैं| भारत के रणनीतिक महत्व के लगभग 350 वर्ग किलोमीटर का भूखंड इस क्षेत्र में शामिल है| इस क्षेत्र को कैलाश-मानसरोवर तीर्थस्थल के महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में जाना जाता है| यह प्रत्येक भारतीय का पसंदीदा स्थान है| हालांकि, इसके अलावा यह भारत तथा तिब्बत के बीच का व्यापार मार्ग भी है| यह भारत, नेपाल तथा चीन के स्वायत्त तिब्बत क्षेत्र के तिराहे के आस-पास में है|

भारत ने नेपाल के इस क़दम को लंबित सीमा मुद्दों पर बातचीत करने योग्य दोनों देशों के बीच की समझ का अतिक्रमण कहा है| नई दिल्ली ने बल दिया है कि दावों की कृत्रिम वृद्धि ऐतिहासिक तथ्यों या साक्ष्य पर आधारित नहीं है तथा यह तर्कसंगत भी नहीं है| पूर्व में भी गत महीने की 20 तारीख़ को नेपाल ने जब एक संशोधित नक़्शे को जारी किया था, तब भारत ने इस प्रकार के अनुचित कार्टोग्राफ़िक दावेदारी पर संयम बरतने का आह्वान किया था| भारत ने आशा जताई कि लंबित सीमा मुद्दों को सुलझाने के लिए नेपाल के नेता राजनयिक संवाद के लिए एक सकारात्मक वातावरण उत्पन्न करेंगे|

8 मई 2020 को कैलाश-मानसरोवर जाने के लिए उत्तराखंड में धारचुला शहर से लिपुलेख दर्रे तक 80 किलोमीटर लम्बी सड़क का उद्घाटन रक्षा मंत्री, राजनाथ सिंह द्वारा किये जाने के बाद, नेपाल ने अनावश्यक रूप से कालापानी के विवाद को बढ़ाया, जबकि, यह पूरी तरह से भारत का आतंरिक क्षेत्र है| नेपाल की आपत्ति के बाद, नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि सड़क का निर्माण तीर्थयात्रियों और व्यापारियों की सुविधा के लिए परंपरागत मानसरोवर मार्ग पर किया गया है तथा यह पूरी तरह से भारतीय क्षेत्र के भीतर स्थित है|


इससे पहले भी नवम्बर 2019 में जम्मू तथा कश्मीर राज्य को दो संघ शासित प्रदेश में बांटने के बाद भारत के नए क्षेत्रीय मानचित्र पर नेपाल ने तीव्र प्रतिक्रिया दिखाई थी| भारत के संप्रभु क्षेत्र के रूप में कालापानी, लिम्पियाधुरा तथा लिपुलेख को शामिल करने पर नेपाल ने आपत्ति जताई, जबकि पहले के मानचित्र में भी ये शामिल हैं| इसका स्पष्टीकरण ऐसे दिया जा सकता है कि ये क्षेत्र सदा से ही भारत का हिस्सा रहे हैं और इसीलिए इन्हें सदा से ही भारत के क्षेत्रीय नक़्शे में दिखाए जा रहे हैं| इस प्रकार, किसी प्रकार की नेपाल की नई दावेदारी या अकारण प्रतिक्रिया के कारण उकसावे के लिए कोई जगह ही नहीं है|



बहरहाल, नेपाल ने कड़ी प्रतिक्रिया दिखाते हुए सीमा विवाद को सुलझाने के लिए विदेश सचिव स्तर की वार्ता की मांग की है| दोनों देश कोविड-19 महामारी की गंभीर चपेट में हैं| चूँकि, नेपाल की संसद के समक्ष इस विधेयक को लाने और नेपाल में विवादित क्षेत्र को शामिल करने के लिए संशोधित नक़्शे को जारी करने में के.पी. शर्मा ओली की सरकार ने जल्दबाज़ी दिखाई| ऐसे में राजनयिक माध्यमों से तारीख़ें तय की जाएँगी| लेकिन, श्री ओली और नेपाल के अन्य नेताओं का अभी भी मानना है कि बातचीत के माध्यम से मामले को सुलझाया जा सकता है| संविधान संशोधन विधेयक को अंगीकार किये जाने के चार दिन पहले 10 जून, 2020 को नेपाल के पक्ष में विवादित क्षेत्रों से सम्बंधित प्रमाण तथा ऐतिहासिक तथ्यों का संग्रह करने के लिए नेपाल की सरकार ने विशेषज्ञों की एक टीम का गठन किया है| शायद नेपाली नेतृत्व के मस्तिष्क में अभी भी संदेह है, जबकि, नेपाल मंत्रिमंडल ने इस विधेयक को अनुमोदित कर दिया है और संसद के निचले सदन में पंजीकृत भी कर दिया गया है, जिसने बाद में इसे अंगीकार कर लिया| 



भारत तथा नेपाल परम्परागत रूप से भौगोलिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक तथा धार्मिक संपर्क रखते हैं| दोनों देशों के लोगों से लोगों के बीच बहुत ही सशक्त सम्बन्ध है| इनके बीच एक सीमा विवाद समाधान तंत्र है तथा सीमा सम्बन्धी इनकी 98 प्रतिशत समस्याएं पहले ही सुलझ चुकी हैं| आशा की जानी चाहिए कि जल्द से जल्द, राजनयिक तथा राजनीतिक माध्यमों से दोनों पडोसी वर्तमान गतिरोध को सुलझाएंगे|









आलेख - रतन साल्दी, राजनीतिक टिप्पणीकार 

अनुवाद - मनोज कुमार चौधरी

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