प्रधानमंत्री ने कहा की अर्थव्यवस्था में "अच्छे संकेत" दिख रहे हैं

कोविड-19 महामारी से निपटने सम्बन्धी आगे की योजनाएं तथा अनलॉक-1 के बाद उभरती स्थिति पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री ने वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से राज्यों के मुख्य मंत्रियों तथा संघ शासित प्रदेशों के लेफ़्टिनेंट गवर्नरों के साथ बातचीत की| मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री की इस प्रकार की यह छठवीं चर्चा थी| पूर्व की चर्चाएं 20 मार्च, 2 अप्रैल, 11 अप्रैल, 27 अप्रैल और 11 मई को हुई थीं|



प्रधानमंत्री ने माना कि इस महामारी से निपटने के लिए उचित समय पर लिया गया निर्णय देश में इसके प्रसार को रोकने में प्रभावशाली रहा है| उन्होंने कहा कि हम जब पीछे मुड़कर देखते हैं तो पाते हैं कि हमने विश्व के लिए सहकारी संघवाद का एक उदाहरण प्रस्तुत किया है|



प्रधानमंत्री ने कहा कि हमने प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को बचाने की कोशिश की है| उन्होंने रेखांकित किया कि यातायात के सारे साधन अब खुले हैं, लाखों प्रवासी श्रमिक अब अपने-अपने गाँव पहुँच चुके हैं, हज़ारों भारतीय नागरिक विदेश से स्वदेश लौट चुके हैं और यहाँ तक कि भारत का एक विशाल जनसँख्या वाला देश होने के बावजूद कोरोनावायरस को यहाँ शेष विश्व की तरह जीवन के लिए ख़तरा नहीं माना गया है| प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्वभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ भारतवासियों द्वारा दिखाए गए अनुशासन की प्रशंसा कर रहे हैं| उन्होंने आगे कहा कि देश में अब संक्रमण मुक्त होने की दर 50 प्रतिशत से अधिक है| उन्होंने यह भी कहा कि भारत उन राष्ट्रों में शामिल है, जहाँ कोरोनावायरस के कारण कम मृत्यु हुई है| प्रधानमंत्री ने इस बात का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसकी एक बड़ी वजह यह दिखती है कि अगर हम अनुशासित रहते हैं और सभी नियमों का पालन करते हैं तो कोरोनावायरस से हमें कम क्षति होगी|उन्होंने मास्क या फ़ेस कवर के व्यवहार के महत्त्व पर बल देते हुए कहा कि इसके बिना हमें घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए| उन्होंने "दो गज़ की दूरी" के मन्त्र का पालन करने, साबुन से बार-बार हाथ धोने और सैनिटाइज़र व्यवहार में लाने की बात पर भी बल दिया| उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि अनुशासन में किसी भी प्रकार की लापरवाही इस विषाणु के विरुद्ध हमारी लड़ाई को कमज़ोर बनाएगी|



प्रधानमंत्री ने कहा कि गत कुछ हफ़्तों के प्रयासों से अर्थव्यवस्था में हमें अच्छे संकेत दिख रहे हैं, जिसमें पूर्व में कम हुए बिजली उपभोग में वृद्धि, इस वर्ष मई महीने में उर्वरक की बिक्री में हुई महत्वपूर्ण बढ़ोतरी, गत वर्ष की तुलना में ख़रीफ़ फ़सल की बुवाई में हुई महत्वपूर्ण बढ़ोतरी, दो पहिया वाहनों के उत्पादन में वृद्धि, खुदरा व्यवसाय में डिजिटल भुगतान लॉकडाउन के पहले के स्तर तक पहुंचना, मई महीने में टोल संग्रह में हुई वृद्धि और निर्यात में बढ़ोतरी आदि शामिल हैं| ये संकेत हमें नेतृत्व करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं| 



श्री मोदी ने कहा कि भागीदारी करनेवाले राज्यों में कृषि, बाग़वानी, मछली पालन तथा एम.एस.एम.ई. का बड़ा महत्व है| इन सबके लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत प्रावधान किये गए हैं| उन्होंने कहा कि अगर बैंकर्स समितियां एम.एस.एम.ई. के लिए ऋण का त्वरित वितरण सुनिश्चित करती हैं, तो ये उद्योग शीघ्र काम शुरू करने के योग्य हो सकेंगे और साथ में रोज़गार के अवसर भी बढ़ेंगे| छोटे कारख़ानों को मार्ग-दर्शन और सहायता की आवश्यकता होगी| 



व्यापार तथा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने वैल्यू चेन्स पर एक साथ काम करने के महत्त्व का उल्लेख किया| राज्यों के विशिष्ट आर्थिक गतिविधि बिंदुओं को 24 घंटे काम करने की आवश्यकता है तथा आर्थिक गतिविधियों को और बढ़ावा देने के लिए लोडिंग और अनलोडिंग की रफ़्तार को बढ़ाया जाना चाहिए| 



पारस्परिक विचार-विमर्श इस दो दिवसीय सम्मलेन का पहला भाग था तथा इसमें पंजाब, असम, केरल, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, गोवा, मणिपुर, नागालैंड, लद्दाख, पुद्दुचेरी, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिज़ोरम, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, दादरा नागर हवेली तथा दमन दिउ, सिक्किम तथा लक्षद्वीप समेत राज्यों तथा संघ शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की|



मुख्य मंत्रियों तथा लेफ्टिनेंट गवर्नरों ने इस प्रकार के चुनौतीपूर्ण समय के दौरान प्रधानमंत्री के नेतृत्व के लिए उन्हें धन्यवाद दिया| इस विषाणु के असर को नियंत्रित करने के लिए प्रयासों में वृद्धि करने तथा अपने राज्यों मैं मौजूद स्वास्थ्य मूलभूत संरचना को लेकर उन्होंने जानकारी दी| प्रतिनिधियों ने उनके द्वारा चलाये जा रहे जागरूकता अभियान, घर लौटनेवाले श्रमिकों को दी जानेवाली सहायता, लोगों द्वारा आरोग्य सेतु एप का प्रयोग करने तथा राज्यों में आर्थिक-गतिविधियों की शुरुआत करने की बात का भी उल्लेख किया



कोविड-19 महामारी के प्रति भारत की प्रतिक्रिया की समीक्षा करने के लिए पूर्व में 13 जून को प्रधानमंत्री ने वरिष्ठ मंत्रियों तथा अधिकारियों के साथ एक विस्तृत बैठक की थी| इस बैठक में महामारी के सन्दर्भ में तैयारी तथा राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति की समीक्षा की गई थी| इस बैठक में यह निष्कर्ष निकाला गया कि कुल संक्रमित मामलों का दो-तिहाई भाग 5 राज्यों में हैं और संक्रमण की अधिकतम संख्या बड़े शहरों में है|



प्रधानमंत्री ने अस्पताल में मौजूद बिस्तरों तथा आइसोलेशन बिस्तरों की ज़िलेवार आवश्यकताओं तथा शहर पर सशक्त समूह की सिफ़ारिशों का संज्ञान लिया था, जिनकी ज़रुरत होगी तथा इसे लेकर उन्होंने राज्यों तथा संघ शासित प्रदेशों के साथ परामर्श करके आपातकालीन योजना के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों को निर्देश दिए थे| मानसून सीज़न की शुरुआत को ध्यान में रखते हुए, उन्होंने उपयुक्त तैयारी सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय को सुझाव भी दिया था|









आलेख - कौशिक रॉय, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक 

अनुवाद - मनोज कुमार चौधरी

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