एक बार फिर पाकिस्तान का स्व लक्ष्य

पाकिस्तान में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है| देश कोविड-19 की दोहरी मुसीबत और विकट आर्थिक परिदृश्य का सामना कर रहा है| वैश्विक आतंकवाद पर इसका अपना रवैया इस मुसीबत में बढ़ोतरी कर रहा है, जिसका यह कभी "फ़्रंटलाइन फ़ाइटर" था|

जैसे ही अमरीका के स्टेट डिपार्टमेंट ने अपनी हालिया रिपोर्ट में ख़ुलासा किया कि क्षेत्रीय आतंकी समूहों के लिए पाकिस्तान एक "सुरक्षित आश्रय" है तथा इस्लामाबाद ने आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए कुछ भी नहीं किया है, तो पाकिस्तानी नेतृत्व ने इन आरोपों से बचाव करने की कोशिश की, लेकिन इसके बजाय विवाद और बढ़ गया|

बृहस्पतिवार को पाकिस्तान की राष्ट्रीय असेम्बली में चल रहे बजट सत्र में एक बहस के दौरान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान ने 9 / 11 के हमलों के मास्टरमाइंड और अल-क़ायदा प्रमुख, ओसामा बिन लादेन को एक "शहीद" कहा| श्री ख़ान ने आगे कहा कि अमरीका के आतंक पर जंग में हिस्सा लेकर इस्लामाबाद को "शर्मिंदगी" झेलनी पड़ी|

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कहा कि इस्लामाबाद को सूचित किये बग़ैर अमरीकी बलों ने पाकिस्तान में घुसकर बिन-लादेन को मारा| इसके बाद हर किसी ने देश को बुरा-भला कहना शुरू किया| मई 2011 में पाकिस्तान के ऐबटाबाद में अमरीकी नेवी सील ने ओसामा बिन लादेन को मारा|

श्री इमरान ख़ान ने कहा कि "मुझे नहीं लगता है कि किसी देश ने आतंक पर जंग को समर्थन दिया हो और इसके लिए उसे शर्मिंदा नहीं होना पड़ा हो| अफ़ग़ानिस्तान में अमरीका की असफलता के लिए पकिस्तान को खुले तौर पर दोषी ठहराया गया है|" पाक्सितान के प्रधानमंत्री ने कहा कि "विश्वभर के पाकिस्तानियों के लिए यह शर्मिंदगी का एक क्षण था, जब अमरीकियों ने ऐबटाबाद में आकर ओसामा बिन लादेन को मारा और उसे शहीद किया| इसके बाद पूरी दुनिया ने हमें अपशब्द कहना शुरू किया| हमारे सहयोगी हमारे देश में आये और हमें सूचित किये बग़ैर किसी को मारा| अमरीका के आतंक पर जंग के कारण 70,000 पाकिस्तानी मारे गए हैं|

सिर्फ़ एक दिन पहले, अमरीकी स्टेट डिपार्टमेंट ने एक रिपोर्ट में कहा था कि क्षेत्रीय आतंकी समूहों को पाकिस्तान एक सुरक्षित शरण स्थली मुहैया करवा रहा है तथा लश्कर-ए-तैय्यबा और जैश-ए-मोहम्मद समेत आतंकी समूहों को अपने क्षेत्र से अपनी गतिविधियों को चलाने की अनुमति दे रहा है| बुधवार को जारी एक नई रिपोर्ट में अमरीका के स्टेट डिपार्टमेंट ने यह बात कही| जम्मू तथा कश्मीर में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के लिए इस्लामाबाद के बेशर्मी भरे समर्थन की पृष्ठभूमि में आतंकवादियों से लड़ने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री, इमरान ख़ान के ट्रैक रिकॉर्ड पर अमरीका का यह अभियोग है| पाकिस्तान का विदेश कार्यालय इन्हें "निर्दोष" कह रहा है|

अमरीकी स्टेट डिपार्टमेंट के मूल्यांकन में पाकिस्तान को ऐसे देशों की श्रेणी में रखा गया है, जो आतंकियों को सुरक्षित शरण स्थली मुहैया करवाता है| यह बात इस्लामाबाद को नागवार गुज़रा है| इस्लामाबाद को अक्टूबर महीने में आतंक-रोधी वित्तीय निगरानी संस्थान, वित्तीय कार्रवाई कार्यबल की समीक्षा का सामना करना पड़ा था| इस्लामाबाद को चार महीने का समय दिया गया, लेकिन, कोरोना वायरस महामारी के कारण एफ़.ए.टी.एफ़. को पाकिस्तान की निर्धारित समीक्षा को स्थगित कर देना पड़ा है| पाकिस्तान ने अमरीकी स्टेट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट को ख़ारिज़ कर दिया है| लेकिन, ऐसा लगता है कि पकिस्तान के प्रधानमंत्री नुक़सान पहले ही कर चुके हैं|

स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा है कि फ़रवरी 2019 में पुलवामा आत्मघाती बम हमले के बाद भारत केंद्रित आतंकी समूहों को नियंत्रित करने और आतंक वित्त-पोषण से निपटने के लिए पाकिस्तान ने मामूली क़दम उठाये हैं| पुलवामा हमले के बाद, जब कश्मीर में बमबारी की ज़िम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली, तब इमरान ख़ान चिन्हित कर लिए गए| लेकिन यह मामला बहुत दूर तक नहीं गया|

रिपोर्ट में कहा गया है कि "इस्लामाबाद द्वारा भारत तथा अफ़ग़ानिस्तान केंद्रित आतंकियों के विरुद्ध एक निर्णायक कार्रवाई किया जाना शेष है| ये आतंकी इनकी परिचालन क्षमता को कमज़ोर बनाएंगे|"

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बिना किसी प्रकार की देर और भेदभाव के सभी आतंकी संगठनों को ध्वस्त करने की 2015 की कार्ययोजना के अंतर्गत पाकिस्तान के वादे को पूरा किया जाना अभी बाक़ी है| पिछले वर्ष, दिसंबर महीने में पाकिस्तानी अधिकारियों ने लश्कर-ए-तैय्यबा के संस्थापक, हाफ़िज़ सईद और उसके 12 सहयोगियों पर अभियोग चलाया था, लेकिन जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक, मसूद अज़हर और 2008 के मुंबई हमलों के एल.ई.टी. के मास्टरमाइंड, साजिद मीर जैसे अन्य आतंकी नेताओं पर मुक़दमा चलाने के लिए देश के अधिकारियों का प्रयोग करने की कोशिश नहीं हुई|

रिपोर्ट कहती है कि "सरकार के इंकार के बावजूद, बहुत से लोगों का मानना है कि इनमें से दोनों राज्य के संरक्षण में पाकिस्तान में रह रहे हैं| "

ये घटनाएं दिखाती हैं कि पाकिस्तान कभी भी वैश्विक आतंकवाद से लड़ने को लेकर गंभीर नहीं रहा है, जबकि, बयानबाज़ी यह खुलकर करता है| यह महत्वपूर्ण समय है, जब पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने इसकी जघन्य गतिविधियों के लिए फटकार लगाई है|

आलेख - कौशिक रॉय, आकाशवाणी के समाचार विश्लेषक

अनुवाद - मनोज कुमार चौधरी

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