सुधारात्मक बहुपक्षीयता प्रगति का एकमात्र रास्ता-संयुक्त राष्ट्र आर्थिक व सामाजिक परिषद में प्रधानमंत्री का संबोधन
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र की आर्थिक व सामाजिक परिषद की उच्च स्तरीय बैठक को ऑनलाइन संबोधित किया । बैठक में उन्होंने सुधरी हुई बहुपक्षीयता की बात करके इसे उल्लेखनीय बना दिया ।
उन्होंने याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र का जन्म दूसरे महायुद्ध की विभीषिका से हुआ और ऐसे में सदस्य देशों को चाहिए कि कोविड--19 की महामारी से पैदा संकट के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र में सुधार किए जाएं और इसे अधिक बहुपक्षीय बनाया जाए ।
श्री मोदी ने इस संदर्भ में सतत विकास के लक्षणों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया । संपूर्ण विश्व जनसंख्या के छठे भाग का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत की सफलता सतत विकास लक्ष्यों की वैश्विक उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान करेगी । सतत विकास लक्ष्यों के मूल में निहित भावना ये है कि “कोई भी पीछे ना छूटे” । इसे पूरा करने के लिए मिल कर, सभी के कल्याण को ध्यान में रखते हुए प्रयास करने होंगे ।
भारतीय प्रधानमंत्री ने ये भी बताया कि भारत ने किस तरह अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपनी स्थानीय व राज्य सरकारों, नागरिक समाज, समुदायों और जनता को शामिल करते हुए जमीन से जुड़े रहकर प्रयास किया । इन प्रयासों में शामिल था 6 लाख गॉवों में स्वच्छता अभियान, 50 करोड लोगों को आयुष्मान भारत योजना में जोड़ना, जो विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य कार्यक्रम भी है, और 2022 तक सभी के लिए आवास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चार करोड़ मकानों का निर्माण ।
प्रधानमंत्री के भाषण में वे तीनों महत्वपूर्ण बातें उभर कर आई जो हाल के वर्षों में सतत विकास की भारत की पहल से संबंधित है यानि लैंगिक समानता विकास के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल और जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध उठाए गए कदम ।
प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के उपायों के चलते महिला सशक्तिकरण संभव हुआ है । करीब 7 करोड महिलाएं गॉवों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका कमा रही हैं जबकि 10 लाख से अधिक महिलाएं साझा विकास में भागीदारी के लिए स्थानीय सरकारी निकायों में चुनी गई हैं ।
सभी की वित्तीय सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए 40 करोड नए खाते खोले गए हैं जिनमें से 22 करोड खाते महिलाओं के हैं और इनका पहचान नंबर (आधार) और मोबाइल कनेक्शन भी फोन से जोड़ दिया गया है । इस के सहारे 70 करोड से अधिक लोगों के खातों में कुल मिलाकर 150 अरब डॉलर की धनराशि सीधे डाली जा सकी है जबकि 81 करोड़ 30 लाख नागरिकों को विश्व के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम का लाभ मिला है ।
देश में गॉवों तक बिजली पहुंची है और आठ करोड़ घरों को स्वच्छ इंधन मिला है । जिसके कारण कार्बन उत्सर्जन में 38 मिलियन टन सालाना की कमी आई है । भारत का लक्ष्य है कि 450 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पन्न की जाए, 2030 तक 26 मिलियन हैक्टेयर बेकार पड़ी भूमि का प्रयोग हो और सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग कम किया जाए । इससे प्रकृति के साथ सांमजस्य पूर्ण ढंग से रहने की प्राचीन परंपरा पुनः जागृत होगी ।
प्रधानमंत्री ने बहुपक्षीयता के माध्यम से शांति व खुशहाली पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी बल दिया । सतत विकास के लक्ष्य पूरा करने के लिए भारत अन्य विकासशील देशों का भी सहयोग करेगा । अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा गठबंधन की स्थापना, अंतरराष्ट्रीय आपदा राहत गठबंधन की स्थापना में भारत की भूमिका और कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए सार्क सहित 150 देशों को भारत की सहायता जैसी बातों से इस लक्ष्य की प्राप्ति में भारत का विशेष योगदान रहा है ।
प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में निर्वाचित सदस्य के तौर पर संयुक्त राष्ट्र की कार्यसूची का पूर्णत: समर्थन करने का भी वायदा भारत की ओर से किया ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मौजूद चुनौतियों का सामना तभी किया जा सकता है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को और असरदार बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएं और इसे अधिक बहुपक्षीय बनाया जाए ।
इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र की 75 वीं वर्षगांठ से 2022 तक के बीच, जब तक भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में है और जी-20 का अध्यक्ष भी, की अवधि में मानव केंद्रित वैश्वीकरण का एक नया अवसर उपलब्ध है । बुनियादी बदलाव की अगुआई करते हुए एक आत्म-निर्भर व विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत भारत मानवता की आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है ।
आलेख - अशोक कुमार मुकर्जी
अनुवाद - मुनीश शर्मा
उन्होंने याद दिलाया कि संयुक्त राष्ट्र का जन्म दूसरे महायुद्ध की विभीषिका से हुआ और ऐसे में सदस्य देशों को चाहिए कि कोविड--19 की महामारी से पैदा संकट के मद्देनजर संयुक्त राष्ट्र में सुधार किए जाएं और इसे अधिक बहुपक्षीय बनाया जाए ।
श्री मोदी ने इस संदर्भ में सतत विकास के लक्षणों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया । संपूर्ण विश्व जनसंख्या के छठे भाग का प्रतिनिधित्व करने वाले भारत की सफलता सतत विकास लक्ष्यों की वैश्विक उपलब्धि में महत्वपूर्ण योगदान करेगी । सतत विकास लक्ष्यों के मूल में निहित भावना ये है कि “कोई भी पीछे ना छूटे” । इसे पूरा करने के लिए मिल कर, सभी के कल्याण को ध्यान में रखते हुए प्रयास करने होंगे ।
भारतीय प्रधानमंत्री ने ये भी बताया कि भारत ने किस तरह अपने विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अपनी स्थानीय व राज्य सरकारों, नागरिक समाज, समुदायों और जनता को शामिल करते हुए जमीन से जुड़े रहकर प्रयास किया । इन प्रयासों में शामिल था 6 लाख गॉवों में स्वच्छता अभियान, 50 करोड लोगों को आयुष्मान भारत योजना में जोड़ना, जो विश्व का सबसे बड़ा स्वास्थ्य कार्यक्रम भी है, और 2022 तक सभी के लिए आवास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चार करोड़ मकानों का निर्माण ।
प्रधानमंत्री के भाषण में वे तीनों महत्वपूर्ण बातें उभर कर आई जो हाल के वर्षों में सतत विकास की भारत की पहल से संबंधित है यानि लैंगिक समानता विकास के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल और जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध उठाए गए कदम ।
प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने के उपायों के चलते महिला सशक्तिकरण संभव हुआ है । करीब 7 करोड महिलाएं गॉवों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका कमा रही हैं जबकि 10 लाख से अधिक महिलाएं साझा विकास में भागीदारी के लिए स्थानीय सरकारी निकायों में चुनी गई हैं ।
सभी की वित्तीय सहभागिता को सुनिश्चित करने के लिए 40 करोड नए खाते खोले गए हैं जिनमें से 22 करोड खाते महिलाओं के हैं और इनका पहचान नंबर (आधार) और मोबाइल कनेक्शन भी फोन से जोड़ दिया गया है । इस के सहारे 70 करोड से अधिक लोगों के खातों में कुल मिलाकर 150 अरब डॉलर की धनराशि सीधे डाली जा सकी है जबकि 81 करोड़ 30 लाख नागरिकों को विश्व के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम का लाभ मिला है ।
देश में गॉवों तक बिजली पहुंची है और आठ करोड़ घरों को स्वच्छ इंधन मिला है । जिसके कारण कार्बन उत्सर्जन में 38 मिलियन टन सालाना की कमी आई है । भारत का लक्ष्य है कि 450 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पन्न की जाए, 2030 तक 26 मिलियन हैक्टेयर बेकार पड़ी भूमि का प्रयोग हो और सिंगल यूज प्लास्टिक का प्रयोग कम किया जाए । इससे प्रकृति के साथ सांमजस्य पूर्ण ढंग से रहने की प्राचीन परंपरा पुनः जागृत होगी ।
प्रधानमंत्री ने बहुपक्षीयता के माध्यम से शांति व खुशहाली पाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी बल दिया । सतत विकास के लक्ष्य पूरा करने के लिए भारत अन्य विकासशील देशों का भी सहयोग करेगा । अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा गठबंधन की स्थापना, अंतरराष्ट्रीय आपदा राहत गठबंधन की स्थापना में भारत की भूमिका और कोविड-19 का मुकाबला करने के लिए सार्क सहित 150 देशों को भारत की सहायता जैसी बातों से इस लक्ष्य की प्राप्ति में भारत का विशेष योगदान रहा है ।
प्रधानमंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में निर्वाचित सदस्य के तौर पर संयुक्त राष्ट्र की कार्यसूची का पूर्णत: समर्थन करने का भी वायदा भारत की ओर से किया ।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मौजूद चुनौतियों का सामना तभी किया जा सकता है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को और असरदार बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए जाएं और इसे अधिक बहुपक्षीय बनाया जाए ।
इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र की 75 वीं वर्षगांठ से 2022 तक के बीच, जब तक भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में है और जी-20 का अध्यक्ष भी, की अवधि में मानव केंद्रित वैश्वीकरण का एक नया अवसर उपलब्ध है । बुनियादी बदलाव की अगुआई करते हुए एक आत्म-निर्भर व विश्व अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत भारत मानवता की आकांक्षाओं को पूरा कर सकता है ।
आलेख - अशोक कुमार मुकर्जी
अनुवाद - मुनीश शर्मा
Comments
Post a Comment